Class 5 Hindi Chapter 3: चाँद का कुरता
- 3 topics
- 45 MCQs
- 15 short answers
- 6 long answers
- 36 flashcards
- 15 games
- ~88 min read
- Hindi
कविता 'चाँद का कुरता': चाँद की ज़िद और माँ का जवाब
चाँद माँ से ऊन का मोटा झिंगोला माँगता है, क्योंकि उसे रात भर ठंड लगती है। माँ बताती है कि उसका नाप रोज़ बदलता है, इसलिए कुरता कैसे सिले।
What you will be able to do
- मैं कविता 'चाँद का कुरता' की बातचीत अपने शब्दों में सुना सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि माँ चाँद का कुरता क्यों नहीं सिलवा पा रही।
- मैं समझा सकता/सकती हूँ कि चाँद का दिखने वाला रूप रोज़ क्यों बदलता है।
Key points
कविता 'चाँद का कुरता' रामधारी सिंह 'दिनकर' ने लिखी है।
कविता में चाँद और उसकी माँ आपस में बात करते हैं।
चाँद ठंड से बचने के लिए ऊन का मोटा झिंगोला माँगता है।
माँ कहती है कि चाँद का नाप रोज़ बदलता रहता है।
चाँद खुद नहीं चमकता, उस पर सूरज की रोशनी पड़ती है।
Full explanation
एक ज़िद्दी बच्चा
सोचो, एक रात चाँद ने ज़िद पकड़ ली। वह अपनी माँ के पास गया। उसने कहा कि उसे एक गरम कपड़ा चाहिए। वह कोई आम बच्चा नहीं था। वह तो आसमान का चाँद था! पर उसकी ज़िद बिलकुल हमारी जैसी थी। यही मज़ेदार बात इस कविता में छिपी है।
कविता और कवि
इस कविता का नाम है चाँद का कुरता। इसे रामधारी सिंह दिनकर ने लिखा है। कविता में सिर्फ़ दो पात्र हैं। एक है चाँद और दूसरी है उसकी माँ। पहले चाँद अपनी बात कहता है। फिर माँ उसे प्यार से जवाब देती है। कविता को लय में पढ़ो, तो और मज़ा आएगा।
चाँद की माँग
चाँद माँ से एक मोटा गरम कुरता माँगता है। कविता में उसे झिंगोला कहा गया है। झिंगोला यानी ढीला-ढाला लंबा कुरता। वह चाहता है कि यह कुरता ऊन का ही हो। ऊन का कपड़ा ठंड से बचाता है।
ठंड की शिकायत
चाँद बताता है कि रात भर सन-सन हवा चलती है। जाड़े का मौसम है और उसे बहुत ठंड लगती है। वह ठिठुरते-ठिठुरते अपना सफ़र पूरा करता है। उसे रोज़ आसमान में चलना पड़ता है। न वह रुक सकता है, न आराम कर सकता है।
भाड़े का कुरता भी चलेगा
चाँद की बात यहाँ बहुत प्यारी हो जाती है। वह कहता है कि नया कुरता न बने तो कोई बात नहीं। किराए पर लाया हुआ कुरता भी चल जाएगा। इससे पता चलता है कि वह कितना परेशान है। उसे बस ठंड से बचना है, चाहे जैसे भी हो।
माँ का प्यार भरा जवाब
अब माँ की बारी है। वह पहले अपने बच्चे को दुलार से बुलाती है। वह उसकी लंबी उम्र की दुआ करती है। फिर वह कहती है कि ठंड वाली बात तो ठीक है। यानी माँ उसकी तकलीफ़ को मानती है। पर उसके सामने एक बड़ी मुश्किल है।
माँ की असली मुश्किल
माँ कहती है कि वह तो डरती है। उसने चाँद को कभी एक ही नाप में नहीं देखा। दर्ज़ी को कपड़ा सिलने के लिए नाप चाहिए। पर चाँद का नाप रोज़ बदल जाता है। अब भला किस दिन का नाप लिया जाए?
कभी छोटा, कभी बड़ा
माँ चाँद के बदलते आकार का सुंदर चित्र खींचती है। कभी वह सिर्फ़ एक अंगुल जितना चौड़ा रह जाता है। कभी वह पूरे एक फुट जितना मोटा दिखता है। किसी दिन वह बड़ा हो जाता है। किसी दिन वह छोटा हो जाता है। उसका घटना-बढ़ना रोज़ चलता रहता है।
जिस दिन वह दिखता ही नहीं
माँ एक और बात कहती है। किसी दिन तो चाँद किसी को दिखाई ही नहीं देता। उस दिन वह आँखों से पूरी तरह गायब हो जाता है। अब सोचो, जो दिखता ही न हो, उसका नाप कैसे लिया जाए? यहीं आकर माँ की मुश्किल सबसे बड़ी हो जाती है।
माँ का आख़िरी सवाल
कविता एक सवाल पर ख़त्म होती है। माँ पूछती है कि नाप किस दिन लिया जाए। वह यह भी पूछती है कि ऐसा कुरता कैसे सिले, जो हर दिन ठीक बैठे। माँ मना नहीं करती। वह बस एक सच्ची मुश्किल सामने रख देती है। जवाब हमें खुद सोचना है।
विज्ञान की बात: चाँद की कलाएँ
अब असली कारण समझो। चाँद खुद नहीं चमकता। उस पर सूरज की रोशनी पड़ती है और वह चमकता दिखता है। चाँद धरती का चक्कर लगाता रहता है। इसलिए हमें उसका चमकीला हिस्सा रोज़ अलग दिखता है। इन्हीं बदलते रूपों को चाँद की कलाएँ कहते हैं।
अमावस्या और पूर्णिमा
जिस रात चाँद बिलकुल नहीं दिखता, उसे अमावस्या कहते हैं। जिस रात वह पूरा गोल दिखता है, उसे पूर्णिमा कहते हैं। दोनों के बीच लगभग पंद्रह दिन का अंतर होता है। इसी हिसाब से हमारे कई त्योहारों की तारीख़ तय होती है। कविता की कल्पना के पीछे यही सच छिपा है।
Concepts and terms
झिंगोला ढीले-ढाले लंबे कुरते को कहते हैं। कविता में चाँद ऊन का मोटा झिंगोला माँगता है, ताकि ठंड से बच सके।
चाँद के रोज़ बदलते दिखने वाले रूपों को कलाएँ कहते हैं। कभी वह पतली रेखा जैसा दिखता है और कभी पूरा गोल।
जब कवि किसी चीज़ को इंसान की तरह बोलता या सोचता दिखाए, उसे मानवीकरण कहते हैं। यहाँ चाँद एक बच्चा बन जाता है।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
कविता पढ़कर आरव ने कहा कि माँ बहाना बना रही थी। मीरा ने कहा कि माँ सच कह रही थी। दोनों ने एक महीने तक चाँद को देखा। हर शाम उन्होंने चाँद का आकार कागज़ पर बनाया। पहले दिन एक पतली रेखा बनी। सातवें दिन आधा चाँद दिखाई दिया। पंद्रहवें दिन पूरा गोल चाँद निकला। इसके बाद वह घटने लगा। तीस चित्रों की कतार देखकर आरव चुप हो गया। जो शरीर हर दिन अपना नाप बदलता हो, उसका कपड़ा कैसे सिले।
Analysis:
माँ का उत्तर बहाना नहीं था। तीस चित्रों की कतार वही बात दिखा देती है जो कविता कहती है।
Activity:
एक महीने तक हर शाम चाँद का आकार बनाओ। तीस चित्रों को क्रम से लगाकर देखो कि वह कैसे बढ़ता और घटता है।
घर पर करके देखो
Title:
चाँद की पंद्रह दिन की डायरी
Safety:
रात को छत पर अकेले मत जाओ। किसी बड़े को साथ लेकर जाओ।
What You Notice:
घेरे एक पतली रेखा से शुरू होकर धीरे-धीरे पूरे गोल तक पहुँचते हैं। इसी को चाँद की कलाएँ कहते हैं।
Did you know
चाँद को धरती का एक चक्कर पूरा करने में लगभग सत्ताईस दिन लगते हैं।
चाँद पर हवा नहीं है। वहाँ न आवाज़ सुनाई देगी, न पतंग उड़ेगी।
Memory tricks
कविता की पूरी बात — रोज़ नया नाप, इसलिए कोई कुरता नहीं। — चाँद का आकार रोज़ बदलता दिखता है। इसी वजह से माँ उसका कुरता नहीं सिलवा पाती।
चाँद क्यों चमकता है — चाँद दर्पण, सूरज दीपक। — दीपक सूरज है, जो सचमुच जलता है। चाँद दर्पण जैसा है, जो उसी रोशनी को हम तक पहुँचाता है।
Practice MCQs with answers (15)
- A लीलावती भागवत
- B रामधारी सिंह 'दिनकर'
- C अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
- D निरंकार देव 'सेवक'
Show answer
Why:
यह कविता रामधारी सिंह दिनकर ने लिखी है।
- A दर्ज़ी के पास
- B तारों के पास
- C सूरज के पास
- D अपनी माँ के पास
Show answer
Why:
पूरी बातचीत चाँद और उसकी माँ के बीच होती है।
- A रेशम
- B चमड़े
- C कागज़
- D ऊन
Show answer
Why:
ऊन का कपड़ा ठंड से बचाता है, इसलिए वह ऊन का झिंगोला माँगता है।
- A उसे बहुत भूख लगती है
- B तेज़ हवा चलती है और उसे ठंड लगती है
- C उसे नींद आ जाती है
- D उसे रास्ता भूल जाता है और वह भटक जाता है
Show answer
Why:
सन-सन चलती हवा और जाड़े के मौसम से उसे ठंड लगती है।
- A एक पुराना ऊनी कंबल और एक रजाई
- B एक टोपी
- C दो जोड़ी जूते
- D किराए पर लिया हुआ कुरता
Show answer
Why:
वह कहता है कि भाड़े का कुरता भी चल जाएगा। इससे उसकी परेशानी दिखती है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही कविता का मज़ा है। जो नाप रोज़ बदले, उसका कपड़ा कैसे सिले?
- A एक हाथ भर चौड़ा
- B एक गज भर चौड़ा
- C एक अंगुल भर चौड़ा
- D एक कदम भर चौड़ा
Show answer
Why:
माँ कहती है कि वह कभी एक अंगुल भर चौड़ा होता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: चाँद का नाप रोज़ बदलता है, और इसी से कुरता नहीं सिल पाता।
- A चाँद के रोने के साथ
- B कुरता मिल जाने के साथ
- C माँ के एक सवाल के साथ
- D दर्ज़ी के आने के साथ
Show answer
Why:
माँ पूछती है कि नाप किस दिन लिया जाए।
- A क्योंकि उस पर सूरज की रोशनी पड़ती रहती है
- B क्योंकि उसके अंदर हर समय आग जलती रहती है
- C क्योंकि उस पर बिजली के बहुत दीप लगे हैं
- D क्योंकि वह तारों से रोशनी माँगकर लेता है
Show answer
Why:
चाँद का अपना उजाला नहीं है। हम उसका वही हिस्सा देखते हैं जिस पर सूरज की रोशनी पड़ रही होती है।
- A अमावस्या
- B पूर्णिमा
- C संक्रांति
- D सूर्य ग्रहण
Show answer
Why:
जिस रात चाँद नहीं दिखता, उसे अमावस्या कहते हैं।
- A पंद्रह दिन
- B तीन दिन
- C सात दिन
- D तीस दिन
Show answer
Why:
चाँद को गायब होने से पूरा गोल होने में लगभग पंद्रह दिन लगते हैं।
- A भाड़ा — कपड़े का नाप लेने वाली डोरी
- B जाड़ा — गरमी का मौसम
- C झिंगोला — ढीला-ढाला लंबा कुरता
- D कला — चाँद का कपड़ा
Show answer
Why:
झिंगोला ढीले-ढाले लंबे कुरते को कहते हैं।
- A उसे कपड़े की कोई ज़रूरत ही कभी नहीं पड़ेगी
- B हर बार कपड़े का नाप फिर से लेना पड़ेगा
- C दर्ज़ी कभी कुरता नहीं सिलेगा
- D उसे सिर्फ़ ऊन के कपड़े चाहिए
Show answer
Why:
नाप बदलता रहे, तो हर बार नया नाप लेना पड़ता है।
- A तुकबंदी
- B मानवीकरण
- C दोहा
- D मुहावरा
Show answer
Why:
किसी चीज़ को इंसान जैसा दिखाना मानवीकरण कहलाता है।
Important short questions (5)
वह ऊन का मोटा झिंगोला माँग रहा है। रात भर हवा चलती है और उसे ठंड लगती है।
उसे लगा कि नया कुरता बनने में देर लगेगी। ठंड से बचने की जल्दी थी।
चाँद का नाप रोज़ बदल जाता है। दर्ज़ी किस दिन का नाप लेकर कुरता सिले?
माँ कहती है कि किसी दिन वह किसी की आँखों को दिखाई ही नहीं देता।
वह धरती का चक्कर लगाता है। इसलिए उसका चमकीला हिस्सा हमें रोज़ अलग दिखता है।
Long answer questions (2)
एक दिन चाँद ने ज़िद पकड़ ली। उसने माँ से कहा कि उसे ऊन का मोटा झिंगोला सिलवा दो। रात भर तेज़ हवा चलती है और उसे बहुत ठंड लगती है। उसने यह भी कहा कि नया न बने तो किराए का कुरता भी चलेगा। माँ ने प्यार से कहा कि ठंड वाली बात सही है। पर उसका नाप तो रोज़ बदलता रहता है। वह पूछती है कि नाप किस दिन लिया जाए।
कविता में चाँद एक बच्चे की तरह बोलता है और ठंड की शिकायत करता है। यह कवि की सुंदर कल्पना है। विज्ञान बताता है कि चाँद खुद नहीं चमकता। उस पर सूरज की रोशनी पड़ती है। वह धरती का चक्कर लगाता है, इसलिए उसका चमकीला हिस्सा रोज़ बदला दिखता है। यानी चाँद सचमुच घटता-बढ़ता नहीं है। वह हमें अलग-अलग रूपों में दिखाई देता है।
Flashcards (12)
Play this topic
- कविता क्रम से लगाओ
- जोड़ी ढूँढो
- किसने कहा?
- सच या भ्रम?
- झटपट सवाल
भाषा की बात: 'भर', दोहरे शब्द और शब्द-भेद
यह टॉपिक सिखाता है कि 'भर' कब पूरा और कब थोड़ा बताता है। साथ में दोहरे शब्दों का काम तथा संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया की पहचान भी आती है।
What you will be able to do
- मैं 'भर' के दोनों अर्थ पहचानकर उसका प्रयोग कर सकता/सकती हूँ।
- मैं दोहरे शब्द छाँटकर बता सकता/सकती हूँ कि वे क्या भाव लाते हैं।
- मैं किसी वाक्य में संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया छाँट सकता/सकती हूँ।
Key points
'भर' कभी पूरा बताता है, जैसे रात भर और दिन भर।
'भर' कभी सिर्फ़ इतना ही बताता है, जैसे अंगुल भर और मुट्ठी भर।
एक ही शब्द दो बार बोलने पर वह दोहरा या पुनरुक्त शब्द कहलाता है।
दोहरे शब्द बात पर ज़ोर देते हैं और कभी आवाज़ भी सुनाते हैं।
संज्ञा नाम, सर्वनाम नाम की जगह, विशेषण ख़ासियत और क्रिया काम बताती है।
Full explanation
एक छोटा शब्द, बड़ा काम
रिया ने अपनी कॉपी में दो वाक्य लिखे। पहला था, मैंने दिन भर पढ़ाई की। दूसरा था, मेरे पास एक पेज भर जगह है। उसने पूछा कि दोनों में एक ही शब्द क्यों आया। शिक्षक मुस्कुराए। उन्होंने कहा कि यही तो कमाल है। एक ही छोटा शब्द दो अलग काम कर रहा है।
भर का पहला अर्थ: पूरा
कई बार भर का मतलब होता है पूरा। रात भर यानी पूरी रात। दिन भर यानी पूरा दिन। गिलास भर पानी यानी पूरा गिलास पानी। कविता में भी चाँद कहता है कि रात भर हवा चलती है। यानी पूरी रात हवा चलती रहती है।
भर का दूसरा अर्थ: सिर्फ़ इतना
कभी भर का मतलब होता है सिर्फ़ इतना ही। एक अंगुल भर यानी सिर्फ़ एक अंगुल जितना। ज़रा भर यानी बहुत थोड़ा-सा। कविता में माँ कहती है कि चाँद कभी एक अंगुल भर चौड़ा रह जाता है। यहाँ भर उसका छोटापन बता रहा है।
भर से अपने वाक्य बनाओ
अब तुम भी कोशिश करो। मैंने कटोरी भर दही खाया। हम दोपहर भर खेलते रहे। उसने मुट्ठी भर चने दिए। साल भर हमने यही किताब पढ़ी। हर वाक्य में सोचो कि भर पूरा बता रहा है या थोड़ा। यही समझ तुम्हें सही जगह उसका प्रयोग सिखाएगी।
दोहरे शब्द क्या हैं
कभी हम एक ही शब्द लगातार दो बार बोलते हैं। ऐसे शब्दों को दोहरे शब्द कहते हैं। व्याकरण में इन्हें पुनरुक्त शब्द भी कहा जाता है। जल्दी चलो और जल्दी-जल्दी चलो, दोनों में फ़र्क़ है। दूसरे वाक्य में जल्दी की बात पर ज़्यादा ज़ोर है।
कविता के दोहरे शब्द
अब कविता पर नज़र डालो। वहाँ हवा के लिए सन-सन आया है। इससे तेज़ हवा की आवाज़ सुनाई देने लगती है। चाँद के काँपने के लिए ठिठुर-ठिठुरकर आया है। उसके आकार के लिए घटता-बढ़ता आया है। इन शब्दों से दृश्य आँखों के सामने खड़ा हो जाता है।
दोहरे शब्द बोलते क्यों हैं
इनके तीन काम हैं। पहला, बात पर ज़ोर देना, जैसे धीरे-धीरे चलो। दूसरा, बार-बार होने का भाव लाना, जैसे रुक-रुककर बोलना। तीसरा, आवाज़ सुनाना, जैसे खटर-पटर या टप-टप। अपने आस-पास से ऐसे पाँच शब्द ढूँढ़कर लिखो।
संज्ञा: नाम वाले शब्द
अब चार तरह के शब्द सीखो। पहला है संज्ञा। किसी व्यक्ति, जगह, चीज़ या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं। कविता में चाँद, माँ, ऊन, हवा और रात संज्ञा हैं। ढूँढ़ने के लिए पूछो कि यहाँ किसकी बात हो रही है।
सर्वनाम: नाम की जगह आने वाले शब्द
दूसरा है सर्वनाम। जो शब्द संज्ञा की जगह पर आए, उसे सर्वनाम कहते हैं। मैं, तू, वह, यह, हम और तुम सर्वनाम हैं। कविता में चाँद कहता है कि मैं ठिठुरता हूँ। यहाँ मैं शब्द चाँद की जगह आया है।
विशेषण: ख़ासियत बताने वाले शब्द
तीसरा है विशेषण। जो शब्द संज्ञा की ख़ासियत बताए, वह विशेषण है। मोटा झिंगोला में मोटा विशेषण है। एक फुट में एक विशेषण है। ढूँढ़ने के लिए पूछो कि यह चीज़ कैसी है या कितनी है।
क्रिया: काम बताने वाले शब्द
चौथा है क्रिया। जो शब्द काम या होना बताए, उसे क्रिया कहते हैं। बोला, चलती, करता और सिलवा दो, ये सब क्रिया हैं। ढूँढ़ने के लिए पूछो कि यहाँ हो क्या रहा है। क्रिया अकसर वाक्य के अंत में मिलती है।
एक वाक्य में चारों
अब एक वाक्य लो। वह छोटा चाँद रोज़ आसमान में चमकता है। यहाँ वह सर्वनाम है। छोटा विशेषण है। चाँद और आसमान संज्ञा हैं। चमकता है क्रिया है। इसी तरह किसी भी वाक्य को चार हिस्सों में बाँटकर देखो।
Concepts and terms
कहीं 'भर' का अर्थ पूरा होता है, जैसे रात भर। कहीं उसका अर्थ सिर्फ़ इतना ही होता है, जैसे मुट्ठी भर। अर्थ वाक्य से तय होता है।
जब एक ही शब्द लगातार दो बार आए, तो वह दोहरा शब्द कहलाता है। इससे बात पर ज़ोर आता है, जैसे धीरे-धीरे और टप-टप।
जो शब्द किसी संज्ञा की जगह पर आए, उसे सर्वनाम कहते हैं। मैं, तू, वह, यह, हम और तुम इसी तरह के शब्द हैं।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
कक्षा में भर शब्द पर बहस हुई। रातभर का अर्थ है पूरी रात। ज़रा भर का अर्थ है बहुत थोड़ा। एक ही शब्द दो उलटे काम कर रहा था। बच्चों ने दोनों तरह के वाक्य अलग-अलग लिखे। दिनभर, उम्रभर और मुँहभर एक ओर रखे गए। रत्ती भर, तनिक भर और ज़रा भर दूसरी ओर आए। फिर उन्होंने दोहरे शब्द जोड़े, जैसे धीरे-धीरे और साफ़-साफ़। अंत में दोनों सूचियों की गिनती हुई। पहली सूची में नौ शब्द थे और दूसरी में सात।
Analysis:
भर कभी पूरा बताता है और कभी बहुत थोड़ा। अर्थ शब्द से नहीं, उसके साथी शब्द से तय होता है।
Activity:
भर वाले छह शब्द इकट्ठे करो। उन्हें दो सूचियों में बाँटो, पूरा बताने वाले और थोड़ा बताने वाले।
भर का दो-तरफ़ा खेल
Title:
एक शब्द, दो अर्थ
Safety:
चावल फर्श पर गिरे तो उठा लो, नहीं तो पैर फिसल सकता है।
What You Notice:
मुट्ठी भर में भर ने बहुत थोड़ा बताया और कटोरी भर में पूरा। यानी अर्थ शब्द से नहीं, उसके साथ वाले शब्द से तय होता है।
Did you know
हिंदी में सैकड़ों दोहरे शब्द हैं। इनमें से कई तो सीधे आवाज़ से ही बने हैं।
दोहरे शब्दों के बीच लगने वाली छोटी लकीर को योजक चिह्न कहते हैं।
Memory tricks
चार शब्द-भेद — नाम, नाम की जगह, ख़ासियत, काम। — यही क्रम है संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया का। हर वाक्य पर यही चार सवाल लगाकर देखो।
'भर' का अर्थ — रात भर पूरा, अंगुल भर थोड़ा। — बड़ी चीज़ के साथ भर पूरा बताता है। छोटी चीज़ के साथ वह बहुत कम बताता है।
Practice MCQs with answers (15)
- A आधा दिन
- B सिर्फ़ सुबह
- C सिर्फ़ शाम
- D पूरा दिन
Show answer
Why:
यहाँ भर का अर्थ पूरा है, यानी पूरे दिन बारिश हुई।
- A बहुत सारे चने
- B बहुत थोड़े चने
- C बिलकुल नहीं
- D आधे चने
Show answer
Why:
मुट्ठी में जितने आ जाएँ, बस उतने ही। यहाँ भर कम बताता है।
- A वह बहुत मोटा दिखाई देता है
- B वह बिलकुल नहीं दिखता
- C वह लाल हो जाता है
- D वह बहुत पतला दिखाई देता है
Show answer
Why:
अंगुल भर यानी सिर्फ़ इतना ही, इसलिए वह बहुत पतला दिखता है।
- A विलोम शब्द
- B दोहरे या पुनरुक्त शब्द
- C तुकांत शब्द
- D संयुक्त अक्षर वाले शब्द
Show answer
Why:
जल्दी-जल्दी और धीरे-धीरे ऐसे ही शब्द हैं।
- A सन-सन
- B टप-टप
- C खटर-पटर
- D टन-टन
Show answer
Why:
कविता में हवा के लिए सन-सन शब्द आया है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही दोहरे शब्दों का काम है। एक बार कहने से बात कही जाती है; दो बार कहने से गाढ़ी हो जाती है।
- A घटता-बढ़ता
- B छोटा-बड़ा
- C खटर-पटर
- D आना-जाना
Show answer
Why:
खटर-पटर बर्तनों की आवाज़ सुनाता है।
- A माँ
- B दुलार से
- C पुकारा
- D ने
Show answer
Why:
माँ एक नाम है, इसलिए वही संज्ञा है।
- A सफ़र
- B पूरा
- C करता
- D मैं
Show answer
Why:
मैं शब्द बोलने वाले के नाम की जगह आया है, इसलिए वह सर्वनाम है।
- A ऊन
- B मोटा
- C झिंगोला
- D का
Show answer
Why:
मोटा बताता है कि झिंगोला कैसा है, इसलिए वही विशेषण है।
- A चाँद
- B आसमान
- C चलता है
- D में
Show answer
Why:
चलता है बताता है कि क्या हो रहा है, इसलिए वही क्रिया है।
- A यह कैसा है
- B यह किसका नाम है
- C यहाँ हो क्या रहा है
- D यह कितना है
Show answer
Why:
काम या होना बताने वाला शब्द ही क्रिया होता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: ख़ासियत विशेषण बताता है; क्रिया काम बताती है।
- A रात भर बारिश हुई
- B रात ज़रा भर बारिश हुई
- C रात मुट्ठी भर बारिश हुई
- D रात अंगुल भर बारिश हुई
Show answer
Why:
रात भर का अर्थ पूरी रात होता है।
- A सिर्फ़ दो मिलते हैं: संज्ञा और उसके बाद क्रिया
- B चारों मिलते हैं: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया
- C सिर्फ़ दो मिलते हैं: विशेषण और उसके बाद क्रिया
- D सिर्फ़ तीन मिलते हैं: सर्वनाम, संज्ञा और क्रिया
Show answer
Why:
वह सर्वनाम है, छोटा विशेषण, चाँद संज्ञा और चमकता है क्रिया। एक ही वाक्य में चारों।
Important short questions (5)
रात भर में भर का अर्थ पूरा है। अंगुल भर में उसका अर्थ सिर्फ़ इतना ही है।
हम दोपहर भर आँगन में खेलते रहे। उसने मुझे मुट्ठी भर मूँगफली दी।
बात पर ज़ोर देने के लिए। जैसे, धीरे-धीरे चलो कहने से धीमी चाल का भाव बढ़ जाता है।
सन-सन यानी तेज़ हवा की आवाज़। ठिठुर-ठिठुरकर यानी ठंड से बार-बार काँपना।
तुम सर्वनाम है। गीत संज्ञा है। मीठा विशेषण है। गाते हो क्रिया है।
Long answer questions (2)
भर का पहला अर्थ है पूरा। जैसे, रात भर हवा चलती रही। जैसे, मैंने गिलास भर दूध पिया। भर का दूसरा अर्थ है सिर्फ़ इतना ही। जैसे, चाँद कभी अंगुल भर चौड़ा रह जाता है। जैसे, उसने मुझे मुट्ठी भर चने दिए। अर्थ पहचानने के लिए पूरा वाक्य पढ़ो। तब साफ़ हो जाता है कि भर ज़्यादा बता रहा है या कम।
सुबह-सुबह बारिश शुरू हो गई। छत पर बूँदें टप-टप गिरने लगीं। हम धीरे-धीरे आँगन में आए। नाली में पानी सन-सन बहता जा रहा था। माँ ने रसोई से खटर-पटर करते हुए आवाज़ दी। हम भागकर अंदर चले गए। इस अनुच्छेद में सुबह-सुबह, टप-टप, धीरे-धीरे, सन-सन और खटर-पटर दोहरे शब्द हैं।
Flashcards (12)
Play this topic
- शब्द किस टोकरी का?
- दोहरे शब्द और उनका भाव
- भर के दो अर्थ
- सच या भ्रम?
- झटपट सवाल
साथी कविता 'जागो प्यारे' और लिखने का काम
इस कविता में एक माँ सुबह का सुंदर दृश्य दिखाकर अपने बच्चे को जगाती है। साथ में दोनों कविताओं की तुलना तथा संवाद और विज्ञापन लिखना भी सीखने को मिलता है।
What you will be able to do
- मैं 'जागो प्यारे' के सुबह वाले दृश्य क्रम से सुना सकता/सकती हूँ।
- मैं दोनों कविताओं की समानता और अंतर बता सकता/सकती हूँ।
- मैं एक छोटा संवाद और एक विज्ञापन लिख सकता/सकती हूँ।
Key points
कविता 'जागो प्यारे' अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' ने लिखी है।
इसमें माँ अपने बच्चे को सुबह का सुंदर दृश्य दिखाकर जगाती है।
तालाब में कमल खिले हैं, उन पर भौंरे हैं और पेड़ों पर चिड़ियाँ चहक रही हैं।
भोर की लाली के बाद सूरज उगता है और पानी सुनहरा चमकने लगता है।
संवाद में नाम पहले आता है, और विज्ञापन में शीर्षक, ज़रूरत, शर्त तथा संपर्क होते हैं।
Full explanation
सुबह-सुबह एक आवाज़
अभी-अभी हमने चाँद और माँ की रात वाली बातचीत पढ़ी। अब दृश्य बदलता है। रात बीत चुकी है और सुबह हो गई है। एक माँ अपने सोते हुए बच्चे के पास आती है। उसके हाथ में पानी है। वह बच्चे को प्यार से जगाना चाहती है। यही दूसरी कविता का दृश्य है।
कविता और कवि
इस कविता का नाम है जागो प्यारे। इसे अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध ने लिखा है। कविता में सिर्फ़ माँ बोलती है। वह अपने बच्चे को सुबह का पूरा दृश्य दिखाती है। उसकी हर पंक्ति में एक नया चित्र खुलता है। इसे धीमी और मीठी आवाज़ में पढ़कर देखो।
माँ का पहला बुलावा
माँ सबसे पहले बच्चे को आँखें खोलने को कहती है। वह उसे दुलार से पुकारती है। वह बताती है कि वह पानी ले आई है। अब बच्चा उठकर मुँह धो ले। यह हर घर का जाना-पहचाना दृश्य है। शायद तुम्हारे घर में भी ऐसे ही सुबह होती होगी।
तालाब में कमल खिले
फिर माँ बाहर का हाल सुनाती है। रात बीतते ही तालाब में कमल के फूल खिल गए हैं। कमल एक सुंदर फूल है, जो पानी में उगता है। उसकी पंखुड़ियाँ सुबह खुलती हैं। उन फूलों के ऊपर भौंरे झूल रहे हैं। भौंरे फूलों से रस लेने आते हैं।
पेड़ों पर चिड़ियाँ
अब आवाज़ों की बारी है। पेड़ों पर बैठी चिड़ियाँ चहक उठी हैं। सुबह उनका गाना सबसे पहले सुनाई देता है। उसी समय ठंडी और सुहानी हवा बहने लगती है। यह हवा दिन भर की सबसे ताज़ी हवा होती है। इसीलिए बड़े कहते हैं कि सुबह की हवा सेहत देती है।
आसमान में लाली
माँ ऊपर आसमान की ओर इशारा करती है। वहाँ एक हल्की लाल छटा फैल गई है। सूरज निकलने से ठीक पहले आसमान ऐसा ही दिखता है। इस लाली से पूरी धरती सुंदर लगने लगती है। पेड़, खेत और घर, सब पर हल्की सुनहरी रोशनी पड़ती है।
सूरज उगा और पानी चमका
फिर भोर हो जाती है और सूरज उग आता है। उसकी किरणें पानी पर पड़ती हैं। तालाब का पानी सुनहरा चमकने लगता है। ऐसा लगता है मानो पानी में सोना घुल गया हो। कविता का यह चित्र सबसे सुंदर है। इसे आँखें बंद करके सोचकर देखो।
माँ की आख़िरी बात
अंत में माँ अपनी बात कहती है। वह कहती है कि ऐसा सुंदर समय खोना नहीं चाहिए। इसलिए अब और मत सोओ। ध्यान दो, माँ डाँटती नहीं है। वह सुंदर दृश्य दिखाकर बच्चे को उठने का मन बनाती है। यही इस कविता की सबसे प्यारी बात है।
दोनों कविताओं की जोड़ी
अब दोनों कविताओं को साथ रखो। चाँद का कुरता रात की कविता है और जागो प्यारे सुबह की। दोनों में एक माँ और एक बच्चा है। पहली में बच्चा बोलता है और माँ जवाब देती है। दूसरी में सिर्फ़ माँ बोलती है। दोनों में माँ का प्यार साफ़ झलकता है।
सुबह जल्दी उठने का फ़ायदा
कविता एक अच्छी आदत भी सिखाती है। सुबह जल्दी उठने से ताज़ी हवा मिलती है। तब मन शांत रहता है और पढ़ाई जल्दी याद होती है। दिन भी लंबा लगने लगता है। इसके लिए रात को समय पर सोना ज़रूरी है।
चाँद से संवाद लिखो
अब लिखने का काम। मान लो चाँद दर्ज़ी के पास जाता है। उनकी बातचीत को संवाद कहते हैं। संवाद लिखते समय हर बोलने वाले का नाम पहले लिखो। फिर उसके आगे उसकी बात लिखो। छोटे-छोटे वाक्य रखो, जैसे हम सचमुच बोलते हैं।
एक विज्ञापन बनाओ
चाँद की माँ को एक कुशल दर्ज़ी चाहिए। इसके लिए वह विज्ञापन दे सकती है। अच्छे विज्ञापन में चार बातें होती हैं। पहली, एक चौंकाने वाला शीर्षक। दूसरी, ज़रूरत क्या है। तीसरी, ख़ास शर्तें। चौथी, संपर्क करने का तरीका। अब अपनी कॉपी में ऐसा ही एक विज्ञापन बनाओ।
Concepts and terms
भोर का मतलब है सुबह का पहला उजाला। सूरज निकलने से ठीक पहले आसमान पर हल्की लाली फैल जाती है, और उसी समय को भोर कहते हैं।
दो या दो से ज़्यादा पात्रों की लिखी हुई बातचीत को संवाद कहते हैं। इसमें पहले बोलने वाले का नाम और उसके आगे उसकी बात लिखी जाती है।
किसी ज़रूरत या चीज़ की जानकारी सबको देने के लिए छपवाया गया छोटा संदेश। इसमें शीर्षक, ज़रूरत, ख़ास शर्तें और संपर्क का तरीका होता है।
सावधान!
सच या भ्रम?
असली दुनिया में
Scenario:
नैना अपनी नानी के गाँव पहुँची थी। पहले दिन वह देर तक सोती रही। अगली सुबह नानी उसे साढ़े पाँच बजे उठा ले गईं। दोनों गाँव के तालाब तक टहलने गईं। पानी पर हल्की भाप उठ रही थी। किनारे के कमल अभी-अभी खुले थे और उन पर दो भौंरे मँडरा रहे थे। पीपल पर बैठी चिड़ियाँ लगातार चहक रही थीं। नानी ने आसमान की लाली दिखाई और कहा कि सूरज अब निकलने ही वाला है। थोड़ी देर में पानी सुनहरा चमकने लगा। लौटते समय नैना बोली कि यह तो हमारी किताब वाली कविता जैसा ही है।
Analysis:
कविता का दृश्य कोई कल्पना नहीं है। कमल का खुलना, भौंरों का आना, चिड़ियों का चहकना और आसमान की लाली, ये सब रोज़ सुबह सचमुच होते हैं।
Activity:
किसी छुट्टी वाले दिन घर के बड़ों के साथ सुबह जल्दी बाहर निकलो। जो पाँच चीज़ें दिखें, उन्हें अपनी कॉपी में लिखो।
सुबह का अपना चित्र
Title:
जागने के पाँच दृश्य
Safety:
पेंसिल की नोक आँख की तरफ़ करके मत घुमाओ।
What You Notice:
सबके चित्र एक जैसे नहीं निकलते, फिर भी कुछ चीज़ें सबके कागज़ पर मिलती हैं। कविता भी ऐसे ही बनती है — देखी हुई साधारण चीज़ें क्रम से रख देने पर।
Did you know
कमल हमारे देश का राष्ट्रीय फूल है। वह कीचड़ में उगकर भी साफ़ और सुंदर रहता है।
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' खड़ी बोली के बहुत बड़े कवि माने जाते हैं।
Memory tricks
सुबह के पाँच दृश्य — कमल, भौंरा, चिड़िया, लाली, सूरज। — कविता में यही पाँच चित्र इसी क्रम में आते हैं। इन्हें याद रखो, पूरी कविता याद रह जाएगी।
विज्ञापन के हिस्से — शीर्षक, ज़रूरत, शर्त, संपर्क। — हर अच्छे विज्ञापन में यही चार हिस्से होते हैं। लिखने से पहले चारों की एक सूची बना लो।
Practice MCQs with answers (15)
- A सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी
- B अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
- C लीलावती भागवत
- D निरंकार देव 'सेवक'
Show answer
Why:
यह कविता हरिऔध जी ने लिखी है।
- A दोपहर में, जब धूप सबसे तेज़ होती है
- B शाम को
- C आधी रात में
- D सुबह, सूरज निकलने के आस-पास
Show answer
Why:
कविता में भोर का दृश्य है, जब सूरज उग रहा है।
- A ताकि वह पौधों को दे
- B ताकि वह उठकर मुँह धो ले
- C ताकि वह नहा ले
- D ताकि वह बर्तन धो ले
Show answer
Why:
माँ कहती है कि वह पानी लाई है और बच्चा मुँह धो ले।
- A गुलाब
- B गेंदा
- C कमल
- D चमेली
Show answer
Why:
कविता में कमल के फूलों के खिलने की बात है।
- A तोते
- B गिलहरी
- C भौंरे
- D चमगादड़
Show answer
Why:
भौंरे फूलों से रस लेने आते हैं और उन्हीं पर झूलते दिखते हैं।
- A पास के बाज़ार का तेज़ शोर
- B गाड़ियों का हॉर्न
- C बारिश की आवाज़
- D पेड़ों पर चिड़ियों का चहकना
Show answer
Why:
कविता में चिड़ियों के चहकने का ज़िक्र है।
- A हल्की लाल छटा
- B गहरा काला रंग
- C हरी रोशनी
- D सफ़ेद बर्फ़
Show answer
Why:
भोर में आसमान पर एक सुंदर लाली फैल जाती है।
- A वह हरा-भरा दिखाई देने लगता है
- B वह जम जाता है
- C वह सुनहरा चमकने लगता है
- D वह सूख जाता है
Show answer
Why:
सूरज की किरणें पानी पर पड़ती हैं और वह सोने जैसा चमकता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही कविता का भाव है। कमल, भौंरे और चिड़ियों की बात सुनकर उठने का मन अपने आप हो जाता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: ‘चाँद का कुरता’ दिनकर की है और ‘जागो प्यारे’ हरिऔध की।
- A पहली में दो लोग बोलते हैं, दूसरी में एक ही
- B पहली कविता में कोई पात्र ही नहीं आता है
- C दूसरी कविता में कोई माँ ही नहीं आती है
- D दोनों कविताओं में बोलने वाला कोई नहीं है
Show answer
Why:
पहली में चाँद और माँ, दोनों बोलते हैं। दूसरी में केवल माँ बोलती है और बच्चा सुनता है।
- A बोलने वाले का नाम
- B तारीख़
- C उस कविता का पूरा नाम
- D पाठ का नंबर
Show answer
Why:
पहले नाम, फिर उसके आगे उसकी बात लिखी जाती है।
- A एक कहानी लिखना
- B एक विज्ञापन देना
- C एक चित्र बनाना
- D एक गीत गाना
Show answer
Why:
किसी को ढूँढ़ने के लिए विज्ञापन दिया जाता है।
- A भौंरा — पानी में उगने वाला फूल
- B भोर — सुबह का पहला उजाला
- C कमल — फूलों का रस पीने वाला कीट
- D लाली — रात का अँधेरा
Show answer
Why:
भोर का अर्थ सुबह का पहला उजाला होता है।
- A सुबह देर तक टीवी देखना
- B रात को खूब पढ़ना
- C दोपहर में ज़्यादा सोना
- D रात को समय पर सो जाना
Show answer
Why:
समय पर सोओगे, तभी सुबह आसानी से उठ पाओगे।
Important short questions (5)
वह उसे आँखें खोलने को कहती है। फिर उठकर पानी से मुँह धोने को कहती है।
तालाब में कमल खिले हैं। पेड़ों पर चिड़ियाँ चहक रही हैं। आसमान में लाली छा गई है।
सूरज की किरणें पानी पर पड़ती हैं। इससे पानी सोने जैसा चमकने लगता है।
उसने डाँटा नहीं। उसने बाहर की सुंदरता दिखाई, जिससे बच्चे का खुद उठने का मन हो गया।
पहली रात की कविता है और दूसरी सुबह की। पहली में दो पात्र बोलते हैं, दूसरी में सिर्फ़ माँ।
Long answer questions (2)
माँ पहले कहती है कि वह पानी ले आई है और बच्चा मुँह धो ले। फिर वह बताती है कि तालाब में कमल खिल गए हैं और उन पर भौंरे झूल रहे हैं। पेड़ों पर चिड़ियाँ चहक रही हैं और ठंडी हवा बह रही है। आसमान पर एक हल्की लाली छा गई है। सूरज उग आया है और पानी सुनहरा चमक रहा है। अंत में वह कहती है कि इतना सुंदर समय खोना नहीं चाहिए।
चाँद: दर्ज़ी जी, मुझे ऊन का एक मोटा कुरता चाहिए। दर्ज़ी: ज़रूर, पहले अपना नाप तो दीजिए। चाँद: यही तो मुश्किल है, मेरा नाप रोज़ बदल जाता है। दर्ज़ी: तब तो कपड़ा हर हफ़्ते छोटा पड़ जाएगा। चाँद: कोई ऐसा कपड़ा नहीं है जो खिंच जाए? दर्ज़ी: है तो सही, पर उसमें ऊन जैसी गरमी नहीं मिलेगी।
Flashcards (12)
Play this topic
- सुबह का दृश्य क्रम से
- कौन-सी कविता का दृश्य?
- शब्द और अर्थ
- सच या भ्रम?
- झटपट सवाल
Class 5 Hindi Chapter 3 — frequently asked questions
वह ऊन का मोटा झिंगोला माँग रहा है। रात भर हवा चलती है और उसे ठंड लगती है।
उसे लगा कि नया कुरता बनने में देर लगेगी। ठंड से बचने की जल्दी थी।
चाँद का नाप रोज़ बदल जाता है। दर्ज़ी किस दिन का नाप लेकर कुरता सिले?
रात भर में भर का अर्थ पूरा है। अंगुल भर में उसका अर्थ सिर्फ़ इतना ही है।
हम दोपहर भर आँगन में खेलते रहे। उसने मुझे मुट्ठी भर मूँगफली दी।
बात पर ज़ोर देने के लिए। जैसे, धीरे-धीरे चलो कहने से धीमी चाल का भाव बढ़ जाता है।
वह उसे आँखें खोलने को कहती है। फिर उठकर पानी से मुँह धोने को कहती है।
तालाब में कमल खिले हैं। पेड़ों पर चिड़ियाँ चहक रही हैं। आसमान में लाली छा गई है।
सूरज की किरणें पानी पर पड़ती हैं। इससे पानी सोने जैसा चमकने लगता है।
All Class 5 Hindi chapters
All Hindi chapters · Every Class 5 subject · The whole NCERT library
Study this chapter properly, free
Everything above is on this page to read. In the Veda app the same chapter becomes spaced-repetition flashcards, timed tests that mark themselves, Veda Bites you can swipe, and games — with your progress tracked topic by topic.
Get Veda free