Class 5 Hindi Chapter 6: चतुर चित्रकार
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कविता 'चतुर चित्रकार': कहानी और चतुराई
जंगल में चित्र बनाते चित्रकार के सामने शेर आ जाता है। चित्रकार डरकर भागता नहीं। वह अपनी चतुराई से शेर को उलटा बिठाता है और नाव लेकर निकल जाता है।
What you will be able to do
- मैं कविता 'चतुर चित्रकार' की कहानी अपने शब्दों में सुना सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि चित्रकार ने अपने बचाव के लिए कौन-कौन से कदम उठाए।
- मैं समझा सकता/सकती हूँ कि डर के समय शांत दिमाग क्यों काम आता है।
Key points
यह कविता रामनरेश त्रिपाठी ने लिखी है।
सुनसान जगह में चित्र बनाते चित्रकार के सामने अचानक शेर आ जाता है।
चित्रकार चित्र बनाने का बहाना करके शेर को पीठ फेरकर बिठा देता है।
चित्रकार झील किनारे रखी नाव लेकर दूर निकल जाता है।
कविता बताती है कि संकट में ताकत से ज़्यादा काम शांत दिमाग आता है।
Full explanation
सुनसान जंगल में एक चित्रकार
एक चित्रकार जंगल की सुनसान जगह पर बैठा था। सामने नदी बह रही थी। पीछे पहाड़ खड़े थे। चारों ओर पेड़ और पत्ते हिल रहे थे। वह इसी सुंदर दृश्य को अपने कागज पर उतार रहा था। तभी झाड़ियों में कुछ खड़का। सोचो, अगर तुम उस जगह होते तो क्या करते?
अचानक शेर आ गया
जो आया, वह जंगल का शेर था। कवि उसे मज़ाक में यमराज का मित्र कहते हैं। मतलब यह कि उसे देखते ही मौत याद आ जाती है। चित्रकार के होश उड़ गए। रंग, कूची और कागज सब भूल गए। अब न चित्र बनाने का मन बचा, न कोई जोश।
डर के बाद दिमाग जागा
कुछ पल बाद चित्रकार ने शेर को ध्यान से देखा। शेर चुपचाप बैठा था। वह झपटा नहीं था। यह देखकर चित्रकार को थोड़ी हिम्मत आई। भागना बेकार था, क्योंकि शेर बहुत तेज़ दौड़ता है। लड़ना भी बेकार था। एक ही रास्ता बचा था — अपना दिमाग।
एक चतुर बहाना
चित्रकार ने मीठे स्वर में कहा कि वह शेर का सुंदर चित्र बना देगा। शेर खुश हो गया। अपनी तारीफ़ किसे अच्छी नहीं लगती! वह उकड़ू-मुकड़ू होकर बैठ गया। फिर टकटकी लगाकर चित्रकार को देखने लगा। बहाना काम कर गया था।
मुँह उधर कीजिए
कुछ देर बाद चित्रकार बोला कि सामने का हिस्सा तैयार है। अब पीठ की बारी है। उसने शेर को जंगल का सरदार कहकर पुकारा। यह सुनकर शेर और खुश हुआ। उसने बिना शक किए पीठ फिरा ली। अब उसकी आँखें चित्रकार से दूर थीं।
चुपके से खिसकना
यही पल चित्रकार चाहता था। वह किसी चोर की तरह चुपचाप खिसक गया। उसने न शोर किया, न दौड़ लगाई। दौड़ता तो पैरों की आहट शेर सुन लेता। यहाँ धीरे चलना तेज़ दौड़ने से ज़्यादा काम आया।
शेर की लंबी प्रतीक्षा
उधर शेर आँख मूँदकर बैठा रहा। वह सोच रहा था कि उसका चित्र कितना सुंदर बनेगा। बहुत देर बीत गई। फिर उसके मन में सवाल उठा कि आज इतनी देर क्यों लग रही है। पीछे देखा तो वहाँ कोई नहीं था।
झील किनारे मिली नाव
इधर चित्रकार झील के किनारे जा पहुँचा। वहाँ एक नाव बँधी थी। पास में ही एक बाँस रखा था। नाव हाथ में आते ही उसने चैन की साँस ली। फिर जल्दी-जल्दी नाव खेकर वह पानी में दूर निकल गया।
ठगा हुआ शेर
शेर हक्का-बक्का रह गया। उसे लगा कि उसके साथ धोखा हुआ है। वह झुँझलाहट से भर उठा। किनारे आकर उसने चित्रकार को रोकना चाहा। गुस्से में उसने ताना मारा और उसे कायर तथा डरपोक कह दिया।
चित्रकार का आखिरी जवाब
चित्रकार ने हँसते हुए उत्तर दिया। उसने कहा कि अब कागज और कूची शेर अपने पास ही रख ले। फिर उसने सलाह दी कि शेर जंगल में बैठकर चित्रकला सीख ले। इस जवाब के आगे शेर के पास चुप रहने के सिवा कुछ न बचा।
डरपोक या समझदार?
शेर ने चित्रकार को डरपोक कहा। पर सोचो, क्या वह सच में डरपोक था? डरपोक तो वह है जो डर के मारे सोचना ही छोड़ दे। चित्रकार डरा ज़रूर, पर उसने सोचना बंद नहीं किया। इसीलिए कवि ने कविता का नाम 'चतुर चित्रकार' रखा।
Concepts and terms
चतुराई का अर्थ है समझदारी से काम लेना। मुश्किल के समय शांत रहकर सही उपाय सोचना चतुराई है। चित्रकार ने यही किया।
कुछ कविताएँ पूरी कहानी सुनाती हैं। उनमें पात्र होते हैं, घटनाएँ होती हैं और एक अंत भी होता है।
कहानी में काम करने वाले लोग या जीव पात्र कहलाते हैं। इस कविता में दो पात्र हैं: चित्रकार और शेर।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
कक्षा में प्रश्न उठा कि चित्रकार बहादुर था या चतुर। अमन ने कहा कि वह बहादुर था, क्योंकि वह भागा नहीं। रिया ने कहा कि बहादुरी और चतुराई अलग बातें हैं। चित्रकार ने शेर से लड़ाई नहीं की। उसने शेर को बातों में उलझाया और समय निकाल लिया। उसी समय में वह नाव तक पहुँच गया। अध्यापिका ने कहा कि दोनों बच्चे आधे-आधे सही हैं। शांत दिमाग़ ही चतुर तरकीब सोच पाता है। कक्षा ने यह भी जाना कि जंगल में बड़े जानवर के सामने दौड़ना सबसे ख़तरनाक होता है।
Analysis:
न भागना और लड़ना, दोनों अलग हैं। चित्रकार ने तीसरा रास्ता चुना, और वही रास्ता जंगल में सुरक्षित भी है।
Activity:
ऐसी कोई घटना लिखो जब तुमने डर के समय शांत रहकर कोई हल सोचा हो। उसे पाँच वाक्यों में लिखो।
घर पर करके देखो
Title:
मुखौटे बनाकर नाटक खेलो
Safety:
कैंची अकेले मत चलाओ। काटने का काम किसी बड़े से करवाओ।
What You Notice:
बोलने का ढंग बदलते ही पात्र बदल जाता है। शेर की आवाज़ भारी लगती है और चित्रकार की बोली मीठी।
Did you know
रामनरेश त्रिपाठी बच्चों के लिए कविताएँ भी लिखते थे और पहेलियाँ भी।
शेर दिन में बीस घंटे तक आराम करता है। वह हर समय शिकार के पीछे नहीं भागता।
Memory tricks
संकट में क्या करें — पहले साँस, फिर सोच, तब चाल। — डर लगे तो पहले शांत हो जाओ, फिर सोचो, तब कोई उपाय करो।
कविता का क्रम — शेर आया, चित्र बना, पीठ फिरी, नाव चली। — चार टुकड़ों में पूरी कहानी आसानी से याद रह जाती है।
Practice MCQs with answers (15)
- A निरंकार देव 'सेवक'
- B सुभद्रा कुमारी चौहान
- C रामनरेश त्रिपाठी
- D सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
Show answer
Why:
कविता के नीचे कवि का नाम रामनरेश त्रिपाठी दिया गया है।
- A पेड़ की छाया में सो रहा था
- B दृश्य का चित्र बना रहा था
- C जंगल का रास्ता पूछ रहा था
- D नाव की मरम्मत कर रहा था
Show answer
Why:
वह नदी, पहाड़ और पेड़ों वाला दृश्य कागज पर उतार रहा था।
- A क्योंकि उसके पैर में चोट लगी हुई थी
- B क्योंकि शेर दौड़ में उससे कहीं तेज़ था
- C क्योंकि वह शेर से दोस्ती करना चाहता था
- D क्योंकि उसे जंगल का रास्ता याद नहीं था
Show answer
Why:
शेर बहुत तेज़ दौड़ता है, इसलिए भागना खतरे को बढ़ाता।
- A नदी का राजा
- B पहाड़ का मालिक
- C जंगल का सरदार
- D जंगल का पहरेदार
Show answer
Why:
इस तारीफ़ से शेर खुश हुआ और उसने पीठ फिरा ली।
- A उसके होश उड़ गए
- B उसे बहुत गुस्सा आ गया
- C वह ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगा
- D वह तुरंत नदी में कूद गया
Show answer
Why:
डर के मारे उसकी सारी समझ कुछ पल के लिए गुम हो गई।
- A जब शेर पानी पीने चला गया
- B जब शेर पीठ फेरकर बैठ गया
- C जब शेर गहरी नींद में सो गया
- D जब जंगल में तेज़ बारिश होने लगी
Show answer
Why:
पीठ फिरते ही शेर की नज़र चित्रकार से हट गई थी।
- A चित्रकार ने शेर को रस्सी से बाँध दिया था
- B शेर ने चित्रकार का बनाया चित्र देख लिया था
- C चित्रकार दौड़ लगाकर जंगल से बाहर निकला
- D शेर ने खुद पीठ फेरकर बैठना मंज़ूर किया
Show answer
Why:
शेर ने खुशी-खुशी खुद पीठ फिरा ली थी।
- A दौड़ने की आहट से शेर सावधान हो जाता
- B दौड़ने में उसका सारा सामान गिर जाता
- C दौड़ने से झील का रास्ता लंबा हो जाता
- D दौड़ने पर उसे नाव दिखाई नहीं देती
Show answer
Why:
आहट सुनते ही शेर पलटकर उसे पकड़ लेता।
- A (क) रस्सी और जाल, (ख) चतुर और समझदार
- B (क) नाव और जाल, (ख) आलसी और भुलक्कड़
- C (क) नाव और बाँस, (ख) कायर और डरपोक
- D (क) बाँस और रस्सी, (ख) कायर और चालाक
Show answer
Why:
झील पर नाव और बाँस थे, और शेर ने कायर तथा डरपोक कहा।
- A एक नाव और एक बाँस
- B एक घोड़ा और एक रस्सी
- C एक झोपड़ी और एक दीया
- D एक पुल और एक छाता
Show answer
Why:
नाव से वह पानी में दूर निकल गया।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही कविता का अंत मज़ेदार बनाता है। वह दूर निकल चुका था, तब बोला।
- A ज़ोर से चिल्लाकर उसकी ओर दौड़ना
- B पत्थर उठाकर उस पर फेंकना
- C आँखें बंद करके वहीं बैठ जाना
- D शांत खड़े रहकर धीरे से हटना
Show answer
Why:
कविता की सीख यही है: घबराओ मत, शांत रहकर उपाय करो।
- A इसमें केवल जंगल की सुंदरता का वर्णन है
- B इसमें शुरू से अंत तक एक कहानी चलती है
- C इसमें चित्र बनाने के नियम सिखाए गए हैं
- D इसमें शेर ही शुरू से अंत तक बोलता रहता है
Show answer
Why:
कविता में पात्र, घटना और अंत, तीनों मिलते हैं।
- A खोलकर
- B मलकर
- C झपकाकर
- D मूँदकर
Show answer
Why:
वह आँख बंद करके अपने चित्र का इंतज़ार कर रहा था।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: वह दौड़ा नहीं; उसने बात बनाकर निकलने का मौका बनाया।
Important short questions (5)
यह उसका बहाना था। इसी बहाने वह शेर को अपनी ओर से हटाना चाहता था।
चित्रकार ने उसे जंगल का सरदार कहा था। तारीफ़ सुनकर शेर खुश था।
उसने वहाँ बँधी नाव पकड़ी। फिर चैन की साँस लेकर नाव दूर तक खे दी।
शेर खुद को ठगा हुआ पा रहा था। गुस्से में उसने ताना मार दिया।
संकट में घबराना नहीं चाहिए। शांत मन से सोचा गया उपाय बहुत बड़ा काम करता है।
Long answer questions (2)
पहले चित्रकार ने खुद को शांत किया। फिर उसने शेर से कहा कि वह उसका सुंदर चित्र बनाएगा। शेर खुश होकर बैठ गया। कुछ देर बाद चित्रकार बोला कि अब पीठ की बारी है। उसने शेर को जंगल का सरदार कहकर मुँह दूसरी ओर करवा दिया। मौका मिलते ही वह चुपचाप खिसका। झील पर बँधी नाव लेकर वह दूर निकल गया।
मेरी राय में चित्रकार समझदार था। डर लगना कोई गलत बात नहीं है। डरपोक तो वह होता है जो डर के मारे सोचना ही छोड़ दे। चित्रकार डरा, फिर भी उसने उपाय सोचा। उसने न शोर मचाया, न लड़ाई की। उसने अपनी सूझ-बूझ से जान बचा ली। इसलिए उसे चतुर कहना ही ठीक है।
Flashcards (12)
Play this topic
- जोड़ी ढूँढो
- कहानी सही क्रम में लगाओ
- किसकी बात?
- सच या भ्रम?
- झटपट सवाल
भाषा की बात: मुहावरे, क्रिया शब्द और सर्वनाम
कविता में छिपे मुहावरों का अर्थ सीखो। आने और जाने की अलग-अलग क्रियाएँ पहचानो। नाम की जगह आने वाले सर्वनाम लगाना भी सीखो।
What you will be able to do
- मैं मुहावरे का अर्थ बताकर उसका वाक्य में प्रयोग कर सकता/सकती हूँ।
- मैं आने और जाने की क्रियाओं को अलग-अलग छाँट सकता/सकती हूँ।
- मैं वाक्य में नाम की जगह सही सर्वनाम रख सकता/सकती हूँ।
Key points
मुहावरे का अर्थ उसके शब्दों के सीधे अर्थ से अलग होता है।
होश उड़ जाना यानी घबरा जाना, और धोखा खाना यानी चाल में आ जाना।
मुहावरे के शब्द तय रहते हैं, केवल क्रिया का रूप बदलता है।
आने और जाने की कई क्रियाएँ हैं और हर एक का भाव अलग है।
नाम की जगह पर आने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते हैं।
Full explanation
नानी की अनोखी बात
रीना स्कूल से लौटी तो नानी ने पूछा कि पेपर कैसा गया। रीना बोली कि आखिरी सवाल देखकर उसके होश उड़ गए। नानी हँस पड़ीं। नन्हा कबीर पास बैठा था। उसने चौंककर पूछा कि होश उड़कर कहाँ गए। नानी ने कहा कि यह मुहावरा है। आओ, हम भी यही समझते हैं।
मुहावरा किसे कहते हैं
कुछ शब्द मिलकर एक खास अर्थ दे देते हैं। वह अर्थ शब्दों के सीधे अर्थ से अलग होता है। ऐसे शब्द-समूह को मुहावरा कहते हैं। मुहावरा अकेला नहीं बोला जाता। वह हमेशा किसी वाक्य के भीतर आता है। मुहावरे से बात छोटी भी होती है और मज़ेदार भी।
होश उड़ जाना
इसका सीधा अर्थ लगाओ तो अजीब चित्र बनता है। असली अर्थ है डर या हैरानी से घबरा जाना। जैसे, अँधेरे कमरे में अचानक बिल्ली कूदी और मीरा के होश उड़ गए। इसी मुहावरे से हमारी कविता में चित्रकार के डर का चित्र खिंचता है।
जी भर के साँस लेना
इसका अर्थ है खतरा टलने पर चैन मिलना। जैसे, खोया हुआ बस्ता मिल गया और कबीर ने जी भर के साँस ली। ध्यान दो, यह मुहावरा राहत के समय बोला जाता है। बीमारी या थकान के समय नहीं।
धोखा खाना
इसका अर्थ है ठगा जाना या चाल में आ जाना। जैसे, नकली मिठाई देखकर मामा धोखा खा गए। हमारी कविता में शेर भी यही करता है। वह तारीफ़ सुनकर चित्रकार की चाल में आ जाता है।
मुहावरे को बदलो मत
मुहावरे के शब्द तय होते हैं। उन्हें अपने मन से बदलना ठीक नहीं। 'होश उड़ गए' सही है। 'होश गायब हो गए' मुहावरा नहीं रह जाता। बस क्रिया का रूप बदलता है, जैसे उड़ गए, उड़ जाएँगे, उड़ जाते हैं।
आने के कई शब्द
आने के लिए हिंदी में कई क्रियाएँ हैं। आना, पहुँचना, प्रवेश करना, लौटना, आ धमकना। हर शब्द का भाव थोड़ा अलग है। 'पहुँचना' में मंज़िल तक आ जाने का भाव है। 'आ धमकना' में बिना बताए अचानक आने का भाव है।
जाने के कई शब्द
जाने के लिए भी कई क्रियाएँ मिलती हैं। जाना, निकल पड़ना, रवाना होना, खिसकना, उड़ना। 'निकल पड़ना' में उत्साह से चल देने का भाव है। 'खिसकना' में चुपचाप हट जाने का भाव है। कविता में चित्रकार खिसकता है, दौड़ता नहीं।
सही शब्द चुनने का मज़ा
एक ही बात कई शब्दों से कही जा सकती है। पर हर शब्द अलग तस्वीर बनाता है। 'मेहमान आ गए' सीधी बात है। 'मेहमान आ धमके' सुनते ही हैरानी का भाव आ जाता है। लिखते समय ठहरकर सही शब्द चुनो।
सर्वनाम क्या है
नाम को बार-बार दोहराना अच्छा नहीं लगता। इसलिए नाम की जगह कुछ शब्द रख देते हैं। इन्हें सर्वनाम कहते हैं। मैं, तुम, हम, वह, वे, यह, ये, उसे, उसका — सब सर्वनाम हैं।
सर्वनाम से वाक्य सुंदर बनता है
देखो: रीना ने रीना का बस्ता उठाया और रीना चल दी। यह वाक्य भद्दा लगता है। अब देखो: रीना ने अपना बस्ता उठाया और वह चल दी। दूसरा वाक्य कानों को अच्छा लगता है। पर ध्यान रखो कि 'वह' किसके लिए आया है, यह साफ़ रहे।
Concepts and terms
कुछ शब्द मिलकर एक खास अर्थ देते हैं। यह अर्थ उनके सीधे अर्थ से अलग होता है। मुहावरा हमेशा वाक्य के भीतर आता है।
एक ही काम के लिए कई क्रियाएँ होती हैं। हर क्रिया अपने साथ अलग भाव लाती है, जैसे जाना और खिसकना।
नाम की जगह पर आने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते हैं। इनसे एक ही नाम बार-बार दोहराना नहीं पड़ता।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
कक्षा ने आने और जाने की क्रियाओं की सूची बनाई। चढ़ना, उतरना, लौटना, पहुँचना और निकलना उसमें रखे गए। फिर बच्चों ने अपने घर से विद्यालय तक का रास्ता लिखा। मीना ने लिखा कि वह घर से निकलती है और पुल पार करती है। फिर वह सड़क चढ़ती है और विद्यालय पहुँचती है। हर मोड़ के लिए एक अलग क्रिया चाहिए थी। बच्चों ने गिना कि मीना के रास्ते में पाँच क्रियाएँ आईं। केवल जाना शब्द से पूरा रास्ता नहीं बताया जा सकता था।
Analysis:
जाना केवल दिशा बताता है। चढ़ना, उतरना और पार करना रास्ते का आकार बताते हैं।
Activity:
अपने घर से विद्यालय तक का रास्ता लिखो। हर मोड़ पर आने-जाने की अलग क्रिया लगाओ।
मुहावरा-अभिनय
Title:
बोलो मत, करके दिखाओ
Safety:
अभिनय करते समय कूदो-भागो नहीं, बैठे-बैठे या खड़े-खड़े ही दिखाओ।
What You Notice:
आख़िरी क़दम में हर बार सिर्फ़ क्रिया बदलती है, मुहावरे के बाकी शब्द वैसे ही रह जाते हैं। यही मुहावरे की पहचान है।
Did you know
हिंदी में पाँच हज़ार से भी ज़्यादा मुहावरे गिने जा चुके हैं।
बहुत-से मुहावरे शरीर के अंगों से बने हैं, जैसे आँख, हाथ, कान और नाक।
Memory tricks
सर्वनाम — नाम की जगह जो आए, वही सर्वनाम कहलाए। — किसी नाम को हटाकर जो शब्द रखा जाए, वही सर्वनाम है।
मुहावरा — शब्द सीधे, अर्थ तिरछा। — मुहावरे में शब्द आसान होते हैं, पर उनका अर्थ अलग निकलता है।
Practice MCQs with answers (15)
- A वह हमेशा वाक्य के आखिर में आता है
- B उसमें हमेशा किसी जानवर का नाम आता है
- C उसे हमेशा अकेले एक ही शब्द की तरह बोला जाता है
- D उसका अर्थ शब्दों के सीधे अर्थ से अलग होता है
Show answer
Why:
मुहावरे का अर्थ उसके शब्दों से सीधे नहीं निकलता।
- A पैर
- B हाथ
- C कान
- D होश
Show answer
Why:
डर या हैरानी के समय 'होश उड़ जाना' बोला जाता है।
- A जी भर के साँस लेना
- B होश पूरी तरह उड़ जाना
- C किसी से धोखा खाना
- D दोनों आँख मूँद लेना
Show answer
Why:
खतरा टलने पर चैन मिलने को 'जी भर के साँस लेना' कहते हैं।
- A (क) चैन पाना, (ख) तेज़ दौड़ना
- B (क) घबरा जाना, (ख) भीतर आना
- C (क) चाल में आ जाना, (ख) चुपचाप हट जाना
- D (क) मज़ाक उड़ाना, (ख) चुपचाप वापस लौट आना
Show answer
Why:
धोखा खाना यानी ठगा जाना, और खिसकना यानी बिना आवाज़ हट जाना।
- A मुहावरे को हर बार नए शब्दों से कहा जा सकता है
- B मुहावरा केवल कविता में ही आता है
- C मुहावरे के शब्द अपने मन से बदले नहीं जाते
- D मुहावरे का अर्थ उसके शब्दों से सीधा निकल आता है
Show answer
Why:
मुहावरे के शब्द तय रहते हैं, केवल क्रिया का रूप बदलता है।
- A वे बहुत देर से आए
- B वे बिना बताए अचानक आ गए
- C वे बुलाने पर ही आए
- D वे थोड़ी देर बाद लौट गए
Show answer
Why:
'आ धमकना' में अचानक आ जाने की हैरानी छिपी है।
- A रवाना होना
- B प्रवेश करना
- C पहुँचना
- D आ धमकना
Show answer
Why:
रवाना होना यानी किसी जगह के लिए चल देना।
- A पहुँच
- B निकल
- C प्रवेश
- D उपस्थित
Show answer
Why:
'निकल पड़ना' में उत्साह से चल देने का भाव है।
- A जी भर के साँस लेना
- B मन लगाकर पढ़ना
- C धोखा खाना
- D हाथ बँटाना
Show answer
Why:
शेर तारीफ़ के जाल में फँसकर ठगा गया था।
- A किसी काम को बताने वाले शब्द को
- B नाम की जगह पर आने वाले शब्द को
- C किसी चीज़ की विशेषता बताने वाले शब्द को
- D दो वाक्यों को जोड़ने वाले शब्द को
Show answer
Why:
मैं, तुम, हम, वह, वे — ये सब सर्वनाम हैं।
- A चित्रकार ने चित्रकार से सामान उठाया
- B चित्रकार ने अपना सामान उठाया
- C चित्रकार का सामान चित्रकार ने उठाया
- D चित्रकार ने उसका ही सामान उठाया
Show answer
Why:
दोहराए गए नाम की जगह सर्वनाम रखने से वाक्य साफ़ हो जाता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: जंगल किसी जगह का नाम है, यानी संज्ञा।
- A यह साफ़ रहना चाहिए कि सर्वनाम किसके लिए आया है
- B सर्वनाम लगाने से वाक्य हमेशा ही कमज़ोर हो जाता है
- C एक वाक्य में एक ही सर्वनाम आ सकता है
- D सर्वनाम केवल कहानियों में काम आता है
Show answer
Why:
दो नाम हों तो सर्वनाम से भ्रम हो सकता है, इसलिए ध्यान रखना ज़रूरी है।
- A उसका
- B हम
- C तुम
- D वह
Show answer
Why:
शेर की जगह पर 'वह' सर्वनाम ठीक बैठता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही शब्द चुनने का ढंग है। हर शब्द अपने साथ एक भाव भी लेकर आता है।
Important short questions (5)
जिस शब्द-समूह का अर्थ उसके सीधे अर्थ से अलग हो, उसे मुहावरा कहते हैं। जैसे होश उड़ जाना।
इसका अर्थ है खतरा टलने पर चैन मिलना। बाढ़ का पानी उतरते ही गाँव वालों ने जी भर के साँस ली।
खिसकने में चुपचाप हट जाने का भाव है। दौड़ने में तेज़ी और आहट, दोनों होती हैं।
एक ही नाम बार-बार दोहराना नहीं पड़ता। इससे वाक्य छोटा और सुनने में अच्छा लगता है।
शब्द बदलते ही वह मुहावरा नहीं रहता। उसका खास अर्थ भी खत्म हो जाता है।
Long answer questions (2)
होश उड़ जाना का अर्थ है घबरा जाना। छत पर बंदर देखकर नन्हे कबीर के होश उड़ गए। जी भर के साँस लेना का अर्थ है चैन मिलना। खोई हुई बकरी लौट आई और नानी ने जी भर के साँस ली। धोखा खाना का अर्थ है चाल में आ जाना। सस्ती चीज़ के लालच में मामा बाज़ार में धोखा खा गए।
हर क्रिया अपने साथ एक अलग भाव लाती है। मेहमान आए, यह सीधी बात है। मेहमान आ धमके, इसमें अचानक आने की हैरानी है। इसी तरह वह गया और वह खिसक गया, दोनों अलग तस्वीर बनाते हैं। सही क्रिया चुनने से पढ़ने वाले के मन में ठीक वही दृश्य बनता है। इसीलिए हमें कई क्रियाएँ चाहिए।
Flashcards (12)
Play this topic
- अर्थ से जोड़ो
- आना या जाना?
- सर्वनाम लगाने के कदम
- सच या भ्रम?
- झटपट सवाल
'दो मेंढकों की यात्रा': देखने का ढंग
जापान की एक लोककथा। दो मेंढक एक-दूसरे का शहर देखने निकलते हैं। पहाड़ की चोटी पर वे उलटी दिशा में खड़े हो जाते हैं और अपना ही शहर देखकर लौट आते हैं।
What you will be able to do
- मैं 'दो मेंढकों की यात्रा' कहानी क्रम से सुना सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि दोनों मेंढकों से कौन-सी भूल हुई।
- मैं समझा सकता/सकती हूँ कि देखने से पहले दिशा जाँचना क्यों ज़रूरी है।
Key points
यह जापान की एक लोककथा है।
ओसाका का मेंढक खड्ड में और क्योटो का मेंढक नदी में रहता था।
दोनों एक-दूसरे के शहर जाने निकले और रास्ते में मिल गए।
चोटी पर खड़े होते समय उनकी पीठ मनचाहे शहरों की ओर हो गई।
हर मेंढक को अपना ही शहर दिखा, इसलिए दोनों निराश होकर लौट गए।
Full explanation
दो मेंढक, दो शहर
जापान में बहुत साल पहले दो मेंढक रहते थे। एक मेंढक ओसाका शहर के पास एक खड्ड में रहता था। दूसरा क्योटो शहर के पास की एक नदी में रहता था। दोनों ने अपनी जगह के सिवा कुछ देखा ही नहीं था। सोचो, अगर तुम कभी अपने गाँव से बाहर न गए होते तो मन में क्या-क्या सवाल उठते?
एक ही दिन, एक-सा विचार
एक दिन दोनों के मन में एक जैसा विचार आया। उन्हें लगा कि एक ही जगह रहते बहुत समय बीत गया। अब बाहर की दुनिया भी देखनी चाहिए। मज़े की बात यह हुई कि क्योटो वाले ने ओसाका जाने का मन बनाया। ओसाका वाले ने क्योटो जाने का।
रास्ते में भेंट
दोनों शहरों को जोड़ने वाला रास्ता एक ही था। अगले दिन दोनों मेंढक उसी रास्ते पर चल पड़े। बीच रास्ते में दोनों आमने-सामने आ गए। पहले दोनों ने हाथ मिलाया। फिर वे आपस में बातें करने लगे। पूछने पर पता चला कि दोनों एक-दूसरे के शहर जा रहे हैं।
चट्टान की छाया में सुस्ताना
चलते-चलते दोनों थक चुके थे। उन्होंने थोड़ा आराम करने की सोची। पास ही एक बड़ी चट्टान थी। दोनों उसकी छाया में जाकर बैठ गए। ठंडी छाया में बैठकर वे आगे की बात करने लगे।
एक बड़ी इच्छा
तभी ओसाका वाले मेंढक ने एक इच्छा बताई। उसने कहा कि काश उनका कद थोड़ा बड़ा होता। तब वे किसी ऊँची जगह से दोनों शहर देख लेते। इससे यह भी पता चल जाता कि आगे जाना ठीक है या नहीं। थकान में यह बात दोनों को बहुत अच्छी लगी।
एक अच्छी तरकीब
क्योटो वाले मेंढक ने तुरंत एक उपाय सुझाया। उसने कहा कि वे पास के पहाड़ पर चढ़ जाएँ। ऊपर पहुँचकर दोनों पिछले पैरों पर खड़े हो जाएँ। फिर एक-दूसरे का सहारा लेकर खुद को सीधा रखें। तरकीब सुनते ही दोनों उत्साह से भर गए।
पहाड़ की चोटी पर
ओसाका वाला मेंढक तो दौड़कर चढ़ने लगा। उसका साथी भी पीछे-पीछे उछलता गया। थोड़ी ही देर में दोनों चोटी पर पहुँच गए। सफ़र की थकान तो थी, पर मन में खुशी भी थी। अब वे अपने मनपसंद शहर देखने वाले थे।
एक छोटी-सी भूल
दोनों ने अगले पैर एक-दूसरे के कंधों पर रख दिए। फिर वे पिछले पैरों पर सीधे खड़े हो गए। गिरने से बचने के लिए उन्होंने एक-दूसरे को कसकर पकड़ लिया। पर एक बात पर उनका ध्यान ही नहीं गया। उनकी पीठ उन्हीं शहरों की ओर थी, जिन्हें वे देखना चाहते थे।
दोनों को क्या दिखा
उलटे खड़े होने का नतीजा भी उलटा निकला। ओसाका से आया मेंढक ओसाका को ही देख रहा था। क्योटो वाले की नज़र क्योटो पर ही पड़ रही थी। दोनों को लगा कि सामने वाला शहर उनके अपने शहर जैसा ही है।
निराश होकर लौटना
ओसाका वाला मेंढक बोला कि आगे जाना बेकार है। उसके साथी को भी यही लगा। दोनों ने सोचा कि उन्होंने समय बरबाद कर दिया। फिर वे मुड़े और अपने-अपने घर लौट गए। असल में दोनों ने वह देखा ही नहीं, जो देखने चले थे।
कहानी की सीख
यह जापान की एक लोककथा है। यह हमें दो बातें सिखाती है। पहली, देखने से पहले दिशा जाँच लो। दूसरी, सुनी-सुनाई बात पर राय मत बनाओ। ऊँचाई पर चढ़ जाना ही काफ़ी नहीं होता। सही ओर मुँह करना भी उतना ही ज़रूरी है।
Concepts and terms
वह कहानी जो पीढ़ी दर पीढ़ी मुँहज़बानी चलती आई हो। उसका कोई एक लेखक नहीं होता। हर देश में ऐसी कथाएँ मिलती हैं।
किसी जगह की तरफ़ को दिशा कहते हैं। मुख्य दिशाएँ चार हैं: पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण। सही दिशा में देखने से ही सही दृश्य मिलता है।
देखी हुई बात से कोई राय बनाना नतीजा निकालना है। अधूरा देखकर निकाला गया नतीजा अकसर गलत होता है।
सावधान!
सच या भ्रम?
असली दुनिया में
Scenario:
रायगढ़ के एक स्कूल के बच्चे पहाड़ी की चोटी पर पिकनिक मनाने गए। शिक्षिका ने बताया कि ऊपर से दो गाँव दिखते हैं। एक गाँव नदी के पास है और दूसरा जंगल के पास। ऊपर पहुँचकर अनु ने चारों ओर नज़र दौड़ाई। फिर वह बोली कि दोनों गाँव एक जैसे लगते हैं। शिक्षिका मुस्कुराईं और बैग से एक छोटा दिशा-यंत्र निकाला। उन्होंने बताया कि अनु दोनों बार एक ही ओर देख रही थी। अब अनु ने पहले उत्तर की ओर देखा, फिर दक्षिण की ओर। इस बार दोनों गाँव बिलकुल अलग दिखे। एक में खपरैल की छतें थीं। दूसरे में खेतों के बीच एक तालाब चमक रहा था।
Analysis:
देखने से पहले दिशा जाँचना ज़रूरी है। गलत दिशा में देखकर बनाई गई राय गलत ही निकलती है। दो मेंढकों के साथ भी ठीक यही हुआ था।
Activity:
घर की छत या आँगन में खड़े होकर सूरज के उगने की ओर मुँह करो। वही पूर्व दिशा है। अब चारों दिशाओं में एक-एक चीज़ देखकर अपनी कॉपी में लिखो।
पीठ किस ओर
Title:
मेंढकों की भूल दोहराओ
Safety:
पीछे हटते समय पैर टकरा सकते हैं, धीरे चलो।
What You Notice:
पहली बार दोनों को उलटी जगह दिखती है, दूसरी बार वही जगह। कहानी में मेंढकों से यही भूल हुई थी — देखा उन्होंने सही, पर खड़े होने का ढंग उलटा था।
Did you know
मेंढक की आँखें सिर के ऊपर होती हैं, इसलिए उसे बहुत दूर तक चारों ओर दिखता है।
जापान में ओसाका और क्योटो, दोनों शहर आज भी एक-दूसरे के काफ़ी पास हैं।
Memory tricks
कहानी की सीख — चढ़ो जितना ऊँचा, देखो सही दिशा। — ऊँचाई तभी काम आती है जब मुँह सही ओर हो।
कौन कहाँ रहता था — ओसाका का खड्ड, क्योटो की नदी। — दोनों मेंढकों के घर इसी से याद रह जाते हैं।
Practice MCQs with answers (15)
- A पानी खत्म हो जाने के कारण
- B बाहर की दुनिया देखने के लिए
- C किसी दोस्त से मिलने के लिए
- D अपने लिए नया घर बनाने के लिए
Show answer
Why:
दोनों को लगा कि एक ही जगह रहते बहुत समय बीत गया।
- A दोनों ने पहले से भेंट तय कर रखी थी
- B एक ने दूसरे को पुकारकर बुलाया था
- C दोनों शहरों का रास्ता एक ही था
- D दोनों एक ही नाव में सवार हो गए थे
Show answer
Why:
एक ही रास्ते पर उलटी दिशा से चलने पर भेंट हो ही जाती है।
- A एक बड़ी चट्टान
- B एक ऊँचे पेड़
- C एक पुरानी नाव
- D एक टूटे पुल
Show answer
Why:
चट्टान की ठंडी छाया में उन्होंने आराम किया।
- A ताकि वह तेज़ दौड़ सके
- B ताकि ऊँचाई से दोनों शहर दिख जाएँ
- C ताकि वह पानी में दूर तक तैर सके
- D ताकि उसे कोई पकड़ न सके
Show answer
Why:
उसे लगा कि तब आगे जाने का फ़ैसला आसान हो जाएगा।
- A एक-दूसरे को कंधे पर बिठाकर आगे की ओर चलना
- B पानी में तैरकर शहर तक पहुँचना
- C पहाड़ पर चढ़कर पिछले पैरों पर खड़े होना
- D किसी पक्षी की पीठ पर सवारी करना
Show answer
Why:
दोनों को एक-दूसरे का सहारा लेकर सीधा खड़ा होना था।
- A (क) क्योटो, (ख) ओसाका
- B (क) ओसाका, (ख) ओसाका
- C (क) ओसाका, (ख) क्योटो
- D (क) क्योटो, (ख) क्योटो
Show answer
Why:
उलटे खड़े होने से हर मेंढक को अपना ही शहर दिखा।
- A उन्होंने पीठ मनचाहे शहरों की ओर कर ली
- B वे आँख बंद करके खड़े हो गए
- C वे चोटी तक पहुँच ही नहीं पाए
- D उन्होंने वहीं एक-दूसरे का साथ छोड़ दिया
Show answer
Why:
मुँह उलटी दिशा में होने से सब गड़बड़ हो गया।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही उनकी भूल है। मेंढक की आँखें सिर के पीछे की ओर होती हैं।
- A आगे बढ़कर दूसरा शहर देख आए
- B निराश होकर घर लौट गए
- C पहाड़ पर ही अपना घर बना लिया
- D एक-दूसरे से लड़ाई कर बैठे
Show answer
Why:
उन्हें लगा कि आगे जाने से कोई फ़ायदा नहीं।
- A और भी ऊँची जगह पर चढ़ जाना
- B दूरबीन के बिना बिलकुल भी कुछ न देखना
- C आँख मूँदकर अपने गाँव की कल्पना करना
- D गाँव जिस दिशा में है, उधर मुँह करना
Show answer
Why:
कहानी की सीख यही है कि पहले दिशा जाँचो।
- A यह किसी एक कवि की लिखी कविता है
- B यह हाल में घटी एक सच्ची घटना है
- C यह एक नाटक है जिसमें बहुत सारे पात्र आते हैं
- D यह पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाने वाली लोककथा है
Show answer
Why:
लोककथा का कोई एक लेखक नहीं होता।
- A देखने से पहले दिशा जाँच लो
- B ऊँची जगह पर कभी मत चढ़ो
- C यात्रा पर अकेले ही जाना चाहिए
- D दोस्त की बात कभी नहीं माननी चाहिए
Show answer
Why:
सही दिशा के बिना ऊँचाई का कोई फ़ायदा नहीं।
- A पेड़ की डाल
- B एक-दूसरे
- C चट्टान के किनारे
- D एक लंबी रस्सी
Show answer
Why:
वे पिछले पैरों पर खड़े थे, इसलिए सहारा ज़रूरी था।
- A दोनों मेंढक एक ही शहर के रहने वाले थे
- B दोनों मेंढक रास्ते से ही लौट गए थे
- C दोनों मेंढक कभी आपस में मिले ही नहीं
- D दोनों मेंढक चोटी तक पहुँचने में सफल रहे
Show answer
Why:
चोटी तक पहुँचना सफल रहा, पर देखना गलत हो गया।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: मेंढकों की कहानी में कोई शेर नहीं आता।
Important short questions (5)
दोनों को लगा कि एक ही जगह रहते बहुत समय बीत गया। अब बाहर की दुनिया भी देखनी चाहिए।
हर एक उसी शहर जा रहा था, जहाँ से दूसरा आया था। यह सुनकर दोनों खुश हो गए।
उन्होंने पिछले पैरों पर खड़े होकर अगले पैर एक-दूसरे के कंधों पर रखने की सोची।
खड़े होते समय उनकी पीठ मनचाहे शहरों की ओर थी। इसलिए नज़र उलटी दिशा में पड़ी।
मैंने सीखा कि देखने से पहले दिशा जाँचनी चाहिए। बिना जाँचे बनाई गई राय गलत निकलती है।
Long answer questions (2)
दोनों मेंढक चोटी तक तो पहुँच गए। वहाँ वे पिछले पैरों पर सीधे खड़े हो गए। गिरने से बचने के लिए उन्होंने एक-दूसरे को पकड़ लिया। इसी में एक बात छूट गई। उनकी पीठ उन शहरों की ओर थी, जिन्हें वे देखना चाहते थे। इसलिए हर मेंढक को अपना ही शहर दिखा। दोनों ने सोचा कि दोनों शहर एक जैसे हैं और लौट गए।
मैं उन्हें पहले दिशा जाँचने को कहता। चोटी पर पहुँचकर मैं बताता कि किस ओर कौन-सा शहर है। फिर दोनों को उसी ओर मुँह करके खड़े होने को कहता। मैं यह भी कहता कि थोड़ी और मेहनत करके आगे चल पड़ो। खुद पहुँचकर देखी हुई बात ही सबसे पक्की होती है।
Flashcards (12)
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- जोड़ी ढूँढो
- यात्रा को क्रम में लगाओ
- कौन-सी बात किसकी?
- सच या भ्रम?
- झटपट सवाल
Class 5 Hindi Chapter 6 — frequently asked questions
यह उसका बहाना था। इसी बहाने वह शेर को अपनी ओर से हटाना चाहता था।
चित्रकार ने उसे जंगल का सरदार कहा था। तारीफ़ सुनकर शेर खुश था।
उसने वहाँ बँधी नाव पकड़ी। फिर चैन की साँस लेकर नाव दूर तक खे दी।
जिस शब्द-समूह का अर्थ उसके सीधे अर्थ से अलग हो, उसे मुहावरा कहते हैं। जैसे होश उड़ जाना।
इसका अर्थ है खतरा टलने पर चैन मिलना। बाढ़ का पानी उतरते ही गाँव वालों ने जी भर के साँस ली।
खिसकने में चुपचाप हट जाने का भाव है। दौड़ने में तेज़ी और आहट, दोनों होती हैं।
दोनों को लगा कि एक ही जगह रहते बहुत समय बीत गया। अब बाहर की दुनिया भी देखनी चाहिए।
हर एक उसी शहर जा रहा था, जहाँ से दूसरा आया था। यह सुनकर दोनों खुश हो गए।
उन्होंने पिछले पैरों पर खड़े होकर अगले पैर एक-दूसरे के कंधों पर रखने की सोची।
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