Class 6 Hindi Chapter 11: चेतक की वीरता
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कविता: चेतक की वीरता
एक घोड़े की फुर्ती, साहस और अपने स्वामी से बनी समझ, जिसे कवि युद्ध के बीच खड़े होकर देखता है।
What you will be able to do
- मैं चेतक की तेज़ी और फुर्ती का वर्णन कर सकता हूँ
- मैं बता सकता हूँ कि कोड़े का न गिरना क्या बताता है
- मैं स्वामी और घोड़े की समझ को समझा सकता हूँ
- मैं बता सकता हूँ कि शत्रु-सेना पर उसका क्या असर पड़ा
Key points
चेतक महाराणा प्रताप का घोड़ा था और यह कविता युद्ध-भूमि के बीच की है।
कवि कहता है कि उसके आगे हवा को भी मुकाबला करना पड़ गया।
राणा का कोड़ा कभी चेतक के शरीर पर नहीं गिरा, क्योंकि उसे मारने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी।
लगाम ज़रा-सी हिलते ही वह सवार को लेकर उड़ जाता था।
राणा की आँख की पुतली घूमने से पहले ही वह उस ओर मुड़ जाता था।
कवि उसे भालों, ढालों और तलवारों के बीच निडर दौड़ता हुआ दिखाता है।
वह कभी बढ़ती नदी जैसा लहराया और कभी भयानक बादल जैसा शत्रु-सेना पर गरज पड़ा।
शत्रु-सेना घोड़े का यह रंग देखकर दंग रह गई।
Full explanation
पहले जान लीजिए
चेतक महाराणा प्रताप का घोड़ा था। यह कविता हल्दीघाटी नाम की बड़ी काव्यकृति का एक अंश है। उसे श्यामनारायण पाण्डेय ने लिखा था और वह सन उन्नीस सौ उनतालीस में छपी।
दृश्य कहाँ का है
युद्ध के ठीक बीच का। कवि किसी शांत मैदान में खड़ा नहीं है, वह लड़ाई के भीतर से लिख रहा है। इसीलिए हर पंक्ति में कुछ-न-कुछ घटता हुआ दिखता है।
पहली बात, तेज़ी
कवि कहता है कि ऐसे घोड़े से हवा का पाला पड़ गया। पाला पड़ना यानी मुकाबला हो जाना। इसका अर्थ समझिए। हवा तेज़ मानी जाती है। कवि उसी हवा को चेतक के सामने एक प्रतियोगी बनाकर खड़ा कर देता है।
दूसरी बात, कोड़ा
कविता कहती है कि राणा का कोड़ा कभी चेतक के शरीर पर नहीं गिरा। ध्यान दीजिए कि यह बात किसी घटना की नहीं, बल्कि एक घटना के न होने की है।
यह क्यों बड़ी बात है
कोड़ा तब चलता है जब घोड़े को तेज़ करना हो। चेतक को कभी तेज़ करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी। वह स्वयं ही उतनी तेज़ी से दौड़ता था जितनी उस समय चाहिए होती थी।
तीसरी बात, लगाम
लगाम ज़रा-सी हिली नहीं कि वह सवार को लेकर उड़ जाता था। बाग का अर्थ लगाम ही है। यहाँ सवार महाराणा प्रताप ही हैं।
चौथी बात, और सबसे बड़ी
राणा की आँख की पुतली घूमी नहीं, और उससे पहले ही चेतक मुड़ चुका होता था। सोचिए कि आँख घूमने में कितना समय लगता है।
यह किस बात का प्रमाण है
कि वह आदेश की प्रतीक्षा नहीं करता था। वह अपने स्वामी का भाव पहले ही समझ जाता था। यह कविता की सबसे बड़ी बात है, और वही स्वामी तथा घोड़े के बीच की समझ दिखाती है।
हथियारों के बीच
कवि उसे भालों के बीच उड़ता हुआ दिखाता है, ढालों के बीच निडर, और तलवारों के बीच सरपट दौड़ता हुआ। तीनों युद्ध के हथियार हैं, और तीनों जगह वह बिना रुके निकल जाता है।
एक अनोखी पंक्ति
कवि कहता है कि वह यहीं था, अब यहाँ नहीं। वह वहीं था, पर वहाँ भी नहीं। पहली बार पढ़ने पर यह पहेली जैसी लगती है। यह तेज़ी का चित्र है। वह इतना फुर्तीला था कि जहाँ देखो वहाँ नहीं मिलता था।
और कोई जगह बची नहीं
कवि जोड़ता है कि ऐसी कोई जगह न थी जहाँ वह न पहुँचा हो, और ऐसा कोई शत्रु-मस्तक न बचा जिस पर वह न चढ़ा हो। पूरी युद्ध-भूमि उसके नाप में आ गई थी। कहीं ऐसा कोना नहीं बचा जहाँ वह न गया हो।
अब दो उपमाएँ
पहली यह कि वह बढ़ती हुई नदी जैसा लहराता चला गया, और फिर ठहर गया। नदी बढ़ती है तो रोकी नहीं जा सकती।
दूसरी उपमा
वह भयानक वज्र वाले बादल जैसा शत्रु की सेना पर गरज पड़ा। बादल की तरह वह ऊपर से टूटता है। इसीलिए यह उपमा इस दृश्य पर ठीक बैठती है।
फिर क्या हुआ
शत्रुओं के हाथ से भाला गिर गया और तरकश भी गिर पड़ा। घोड़े की टापों से उनके अंग खुद गए। हथियार तब छूटते हैं जब हाथ काँपने लगें।
अंतिम पंक्ति
वैरी-समाज दंग रह गया। यानी शत्रु की पूरी सेना घोड़े का यह रंग देखकर हक्की-बक्की रह गई। दंग का अर्थ हक्का-बक्का या चकित रह जाना है।
ध्यान दीजिए
अंत में कवि राणा की नहीं, घोड़े की बात करता है। पूरी कविता का नायक चेतक ही है। राणा आते तो हैं, पर हर बार किसी और बात के सहारे। कविता में हर पंक्ति किसी गति या किसी रंग का चित्र खींचती है। पढ़ते समय यह पूछिए कि यहाँ कवि क्या दिखा रहा है। चित्र पकड़ में आ जाए तो अर्थ अपने आप खुल जाता है।
Concepts and terms
किसी से मुकाबला हो जाना। कवि कहता है कि हवा का पाला ऐसे घोड़े से पड़ गया।
घोड़े की लगाम। उसके ज़रा-सा हिलने भर से चेतक चल पड़ता था।
शत्रु का माथा। कवि दिखाता है कि वह शत्रुओं के सिरों के ऊपर से दौड़ता निकल जाता था।
तरकश, यानी तीर रखने का खोल। उसका गिरना यह बताता है कि शत्रु के हाथ से हथियार छूट गए।
सावधान!
Common Misconceptions
किसकी तारीफ़ हो रही है
Scenario:
कक्षा से पूछा गया कि इस कविता में सबसे अधिक तारीफ़ किसकी हुई है। ज़्यादातर बच्चों ने महाराणा प्रताप का नाम लिखा। उनका कहना था कि वे बड़े योद्धा थे और कविता उन्हीं की लड़ाई की है। मीरा ने चेतक का नाम लिखा। उसने गिनकर दिखाया कि राणा कविता में केवल दो बार आते हैं, एक बार अपने कोड़े के साथ और एक बार अपनी आँख की पुतली के साथ। दोनों बार बात यह निकलती है कि घोड़ा कितना समझदार था। शिक्षिका ने कक्षा से कहा कि अंतिम पंक्ति पढ़िए और बताइए कि शत्रु-सेना किसे देखकर दंग रह गई।
Analysis:
एक ही कविता, और तारीफ़ किसकी हो रही है इस पर दो अलग उत्तर।
Activity:
कविता में से हर वह शब्द छाँटिए जो चेतक के लिए आया है, और गिनिए कि वे कितने हैं।
घर पर करके देखो
Title:
बिना कहे तारीफ़
What You Notice:
तारीफ़ के शब्द हटा देने पर लिखना कठिन लगता है, और पढ़ने में असर बढ़ जाता है। कवि भी यही करता है। वह कहीं नहीं लिखता कि चेतक बहुत तेज़ था। वह दिखाता है कि हवा को उससे मुकाबला करना पड़ा और लगाम हिलते ही वह उड़ गया। तेज़ी का निष्कर्ष पढ़ने वाला स्वयं निकालता है, और इसीलिए वह उसके मन में टिक जाता है।
Did you know
यह कविता श्यामनारायण पाण्डेय की काव्यकृति हल्दीघाटी का एक अंश है, जो सन उन्नीस सौ उनतालीस में छपी।
स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम वर्षों में इसी कृति ने सेनानियों में सांस्कृतिक एकता और उत्साह भर दिया था।
Memory tricks
चेतक की समझ — पुतली से पहले — राणा की आँख घूमे उससे पहले वह मुड़ जाता था। यही उसकी सबसे बड़ी खूबी है।
कोड़े का अर्थ — जो न गिरा, वही बड़ी बात — कविता बताती है कि कोड़ा कभी चला ही नहीं। उसे तेज़ करने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी।
Practice MCQs with answers (20)
- A श्यामनारायण पाण्डेय का
- B महाराणा प्रताप का
- C किसी शत्रु सरदार का
- D एक साधारण सैनिक का
Show answer
Why:
कविता युद्ध-भूमि के बीच की है।
- A रामचरितमानस
- B पद्मावत
- C साकेत
- D हल्दीघाटी
Show answer
Why:
वह सन उन्नीस सौ उनतालीस में छपी।
- A मुकाबला हो जाना
- B ठंड लग जाना
- C थक जाना
- D रास्ता भटक जाना
Show answer
Why:
हवा का पाला चेतक से पड़ गया।
- A कि चेतक की गति साधारण घोड़ों जैसी नहीं थी
- B कि उस दिन मैदान में बहुत तेज़ आँधी चल रही थी
- C कि चेतक को तेज़ हवा से बहुत डर लगता था
- D कि वह युद्ध किसी खुले मैदान में हुआ था
Show answer
Why:
हवा से मुकाबला सचमुच नहीं हो सकता। कवि बढ़ाकर कहकर उसकी गति का अनुभव पाठक तक पहुँचाता है।
- A केवल युद्ध के आरंभ में
- B एक बार भी नहीं
- C हर बार मुड़ते समय
- D तब, जब वह थक जाता था
Show answer
Why:
यह कविता की अपनी पंक्ति है।
- A कि राणा के पास कोड़ा था ही नहीं
- B कि राणा उसे कोड़ा मारना हर बार भूल जाते थे
- C कि युद्ध बहुत छोटा रहा
- D कि चेतक को तेज़ करने की ज़रूरत न पड़ी
Show answer
Why:
कोड़ा तेज़ करने के लिए ही चलता है।
- A किसी बगीचे के लिए
- B घोड़े की काठी के लिए
- C घोड़े की लगाम के लिए
- D युद्ध के मैदान के लिए
Show answer
Why:
उसके हिलते ही वह उड़ जाता था।
- A कवि
- B कोई और शत्रु सरदार
- C चेतक स्वयं
- D महाराणा प्रताप
Show answer
Why:
घोड़े पर वही सवार थे।
- A कि राणा की आँख घूमने से पहले चेतक मुड़ जाता था
- B कि राणा की आँखें युद्ध में बंद रहती थीं
- C कि चेतक राणा की ओर कभी देखता ही नहीं था, मुड़ता रहा
- D कि राणा चेतक को देखकर मुड़ते थे
Show answer
Why:
यही कविता की सबसे बड़ी बात है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही कविता का मुख्य भाव है। जो मन की बात समझ ले, उसे हाँकना नहीं पड़ता।
- A नदियों, पहाड़ों और जंगलों के बीच
- B गाँवों, खेतों और रास्तों के बीच
- C भालों, ढालों और तलवारों के बीच
- D बादलों, हवाओं और बिजली के बीच
Show answer
Why:
तीनों युद्ध के हथियार हैं।
- A चेतक के छिप जाने का
- B युद्ध के रुक जाने का
- C शत्रुओं के भाग जाने का
- D चेतक की अद्भुत फुर्ती का
Show answer
Why:
जहाँ देखो, वहाँ वह नहीं मिलता था।
- A किसी उड़ती पतंग से
- B बढ़ती हुई नदी से
- C जलते हुए दीपक से
- D गिरते हुए पत्ते से
Show answer
Why:
और फिर वह ठहर भी गया।
- A दौड़ते हाथियों के पूरे दल के समान
- B नदी के किनारे के समान
- C भयानक वज्र वाले बादल के समान
- D उगते सूरज के समान
Show answer
Why:
बादल ऊपर से टूटता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: कोड़ा एक बार भी नहीं चला, और यही चेतक की स्वामिभक्ति का प्रमाण है।
- A ढाल
- B तरकश
- C भाला
- D तलवार
Show answer
Why:
उसमें तीर रखे जाते हैं।
- A कि शत्रुओं के हाथ से हथियार छूट गए
- B कि युद्ध समाप्त हो गया
- C कि उनके हथियार बहुत पुराने पड़ चुके थे
- D कि हवा बहुत तेज़ चल रही थी
Show answer
Why:
यह उनकी घबराहट का चित्र है।
- A वह विजयी हो गया
- B वह लौटकर चला गया
- C वह दंग रह गया
- D वह हँस पड़ा
Show answer
Why:
दंग यानी हक्का-बक्का।
- A वे इस कविता में कहीं आते ही नहीं हैं, कहीं नहीं
- B वे केवल अंतिम पंक्ति में आते हैं
- C कविता में कोई नायक नहीं है
- D वे आते हैं, पर सारा वर्णन घोड़े का है
Show answer
Why:
अंत भी घोड़े के रंग पर होता है।
- A उसे अंग्रेज़ों ने छपने नहीं दिया
- B उससे सेनानियों में एकता और उत्साह भरा
- C वह युद्ध के बाद लिखी गई
- D उसे केवल विद्यालयों में ही पढ़ाया गया था
Show answer
Why:
संग्राम के अंतिम वर्षों में।
Important short questions (6)
चेतक महाराणा प्रताप का घोड़ा था। यह कविता श्यामनारायण पाण्डेय की काव्यकृति हल्दीघाटी का एक अंश है।
चेतक की असाधारण तेज़ी। हवा स्वयं तेज़ मानी जाती है, और कवि उसी को चेतक के सामने एक प्रतियोगी बना देता है।
क्योंकि कोड़ा तब चलाया जाता है जब घोड़े को तेज़ करना हो। चेतक को कभी तेज़ करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी।
कि वह आदेश की प्रतीक्षा नहीं करता था। राणा की आँख घूमने से पहले ही वह मुड़ जाता था, यानी वह उनका भाव समझ लेता था।
वह बढ़ती नदी जैसा लहराता गया, और वज्र वाले बादल जैसा शत्रु-सेना पर गरज पड़ा। बादल वाली उपमा ठीक है क्योंकि बादल ऊपर से टूटता है।
उनके हाथ से भाला और तरकश गिर पड़े और टापों से उनके अंग खुद गए। पूरी सेना घोड़े का यह रंग देखकर दंग रह गई।
Long answer questions (3)
पहला तरीका हवा वाला है। कवि कहता है कि ऐसे घोड़े से हवा का पाला पड़ गया, यानी हवा को भी उससे मुकाबला करना पड़ा। दूसरा तरीका लगाम वाला है, क्योंकि लगाम ज़रा-सी हिलते ही वह सवार को लेकर उड़ जाता था। तीसरा तरीका सबसे अनोखा है। कवि कहता है कि वह यहीं था पर अब यहाँ नहीं, और वहीं था पर वहाँ भी नहीं। जहाँ देखो वहाँ वह नहीं मिलता था। चौथा तरीका यह है कि ऐसी कोई जगह न बची जहाँ वह न पहुँचा हो।
दोनों मिलकर स्वामी और घोड़े के बीच की समझ दिखाती हैं। पहली पंक्ति कहती है कि राणा का कोड़ा कभी चेतक के शरीर पर नहीं गिरा। कोड़ा तब चलता है जब घोड़े को तेज़ करना हो, इसलिए इसका अर्थ है कि उसे कभी तेज़ करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी। दूसरी पंक्ति कहती है कि राणा की आँख की पुतली घूमने से पहले ही वह मुड़ जाता था। यानी वह आदेश की प्रतीक्षा नहीं करता था, बल्कि अपने स्वामी का भाव पहले ही समझ लेता था।
नायक चेतक ही है। राणा प्रताप कविता में आते हैं, पर हर बार किसी और बात के लिए आते हैं। कहीं उनका कोड़ा आता है और कहीं उनकी आँख की पुतली, और दोनों बार असली बात घोड़े की ही निकलती है। सारा वर्णन चेतक की तेज़ी, फुर्ती और निडरता का है। अंतिम पंक्ति भी यही कहती है कि शत्रु-सेना घोड़े का रंग देखकर दंग रह गई। पूरी कविता में चेतक एक बार भी नहीं बोलता, फिर भी वही इसके केंद्र में है।
Flashcards (15)
Play this topic
- शब्द और अर्थ
- यह तेज़ी की बात है या समझ की?
- कविता का क्रम
- सच या भ्रम?
- झटपट दौर
शब्दों की बात: समानार्थी और शब्द के भीतर शब्द
एक ही चीज़ के कई नाम, उनमें छिपा हुआ एक बेमेल नाम पहचानने का खेल, और किसी लंबे शब्द को तोड़कर उसके भीतर बैठे छोटे शब्द ढूँढ़ना।
What you will be able to do
- मैं समानार्थी शब्द पहचान सकता हूँ
- मैं किसी पंक्ति में से बेमेल शब्द छाँट सकता हूँ
- मैं बता सकता हूँ कि बेमेल शब्द भी क्यों पहचाना हुआ लगता है
- मैं किसी शब्द के भीतर छिपे छोटे शब्द निकाल सकता हूँ
Key points
समान अर्थ वाले शब्दों को समानार्थी शब्द कहते हैं, जैसे हय, अश्व और घोड़ा।
कविता की भाषा में एक ही चीज़ के कई नाम चलते हैं, इसलिए ये शब्द यहाँ काम आते हैं।
अभ्यास में हर पंक्ति के चार शब्दों में से एक बेमेल होता है, और उसी पर घेरा बनाना है।
हवा वाली पंक्ति में अनल बेमेल है, क्योंकि उसका अर्थ आग है।
रण वाली पंक्ति में तुरंग बेमेल है, क्योंकि उसका अर्थ घोड़ा है।
आसमान वाली पंक्ति में नभचर बेमेल है, क्योंकि वह आकाश में उड़ने वाले को कहते हैं।
करवाल वाली पंक्ति में ढाल बेमेल है, क्योंकि वह बचाव का साधन है, वार का नहीं।
किसी लंबे शब्द को तोड़ने पर उसके भीतर कई छोटे शब्द निकल आते हैं, जैसे आसमान में आस और समान।
Full explanation
एक चीज़, कई नाम
हय, अश्व और घोड़ा। तीनों एक ही प्राणी के नाम हैं। समान अर्थ वाले ऐसे शब्दों को समानार्थी शब्द कहते हैं। इसी कविता में हय शब्द आया भी है।
कविता में इनकी ज़रूरत
कवि एक ही चीज़ को बार-बार अलग नाम से कहता है। इसी से पंक्ति की लय और तुक बनती है। दो लाभ होते हैं। एक शब्द बार-बार नहीं दोहराना पड़ता, और तुक मिलाने के लिए चुनने को कई शब्द रहते हैं।
अब अभ्यास देखिए
पुस्तक पाँच पंक्तियाँ देती है। हर पंक्ति में चार शब्द हैं और उनमें से एक बेमेल है। उसी बेमेल शब्द पर घेरा बनाना है। बाकी तीन आपस में समानार्थी होंगे।
पहली पंक्ति
हवा, अनल, पवन, बयार। पवन और बयार दोनों हवा के नाम हैं, पर अनल का अर्थ आग है। आग और हवा दो अलग तत्व हैं, इसलिए यह पंक्ति सबसे आसान है। यहाँ बेमेल शब्द दूर का है, इसलिए वह तुरंत पकड़ में आ जाता है।
दूसरी पंक्ति
रण, तुरंग, युद्ध, समर। युद्ध और समर दोनों रण के नाम हैं, और तुरंग का अर्थ घोड़ा है। दोनों शब्द लड़ाई के मैदान से जुड़े हैं, पर एक जगह का नाम है और दूसरा प्राणी का।
यह सबसे कठिन है
तुरंग भी युद्ध के मैदान का ही शब्द है, इसलिए वह तुरंत खटकता नहीं। इसी कविता में घोड़ा ही नायक है। पढ़ने वाला उसे लड़ाई का शब्द मानकर आगे बढ़ जाता है। वहीं गलती हो जाती है, क्योंकि जुड़ा होना और समानार्थी होना दो अलग बातें हैं।
तीसरी पंक्ति
आसमान, आकाश, गगन, नभचर। आकाश और गगन दोनों आसमान हैं, और नभचर उसमें उड़ने वाले को कहते हैं। यह पंक्ति भी कम छल नहीं करती। नभचर के भीतर नभ शब्द साफ़ दिखाई देता है।
अंतर पकड़िए
नभ का अर्थ आकाश ही है। पर नभचर आकाश नहीं, आकाश में चलने वाला है, यानी पक्षी। केवल एक हिस्सा जुड़ने से पूरा अर्थ बदल जाता है। चर का अर्थ चलने वाला होता है।
चौथी पंक्ति
नद, नाद, सरिता, तटिनी। सरिता और तटिनी दोनों नदी हैं, और नाद का अर्थ ध्वनि है। नद और नाद देखने में लगभग एक जैसे लगते हैं, और यही इस पंक्ति का छल है।
पाँचवीं पंक्ति
करवाल, तलवार, असि, ढाल। तलवार और असि दोनों करवाल हैं, और ढाल बचाव का साधन है। एक से वार होता है और दूसरी से बचाव, इसलिए दोनों एक वर्ग में नहीं आते।
एक नियम निकलता है
बेमेल शब्द अकसर उसी विषय का होता है। इसीलिए वह पास का लगता है और धोखा दे जाता है। यह अभ्यास जान-बूझकर ऐसे ही बनाया गया है।
पहचानने का ढंग
पहले तीन का साझा अर्थ पकड़िए। जो शब्द उसमें न बैठे, वही चौथा है। कठिनाई को कसौटी मत बनाइए, क्योंकि तटिनी कठिन होकर भी ठीक बैठती है।
अब दूसरा खेल
कविता में एक पंक्ति आसमान की है। उस एक शब्द के भीतर कितने शब्द छिपे हैं? पुस्तक स्वयं इसका उत्तर देती है।
गिनकर देखिए
आस, समान, मान, सम, आन और नस। एक छोटे-से शब्द में इतने सारे। ये सब उसी शब्द के अक्षरों से बने हैं। गिनती छह तक पहुँच जाती है।
नियम क्या है
अक्षर उसी क्रम में लीजिए जिसमें वे शब्द में आए हैं। बीच से टुकड़े उठाइए और देखिए कि कोई शब्द बनता है या नहीं। क्रम बदलकर बना शब्द नहीं गिना जाएगा, इसलिए मास इसमें नहीं आएगा।
अब आपकी बारी
पुस्तक कहती है कि कविता में से पाँच शब्द चुनिए और उनके भीतर के शब्द खोजिए। हर शब्द से इतने ही निकलें, यह ज़रूरी नहीं है। शब्द के भीतर का शब्द खोजते समय ज़ोर से बोलकर देखिए। सुनने में जो टुकड़ा अलग लगे, वही अलग शब्द होता है। लिखकर देखने से पहले सुनकर देखना आसान पड़ता है।
Concepts and terms
समान अर्थ वाले शब्द। हय, अश्व और घोड़ा तीनों एक ही प्राणी के नाम हैं।
वह शब्द जो बाकी तीन के साथ अर्थ में नहीं बैठता। उसे ही पहचानकर घेरना है।
बेमेल शब्द अकसर उसी विषय का होता है। तुरंग युद्ध से जुड़ा है, पर उसका अर्थ घोड़ा है, युद्ध नहीं।
किसी शब्द के अक्षरों में से बने छोटे शब्द। आसमान में आस, समान, मान, सम, आन और नस मिलते हैं।
सावधान!
Common Misconceptions
पाँच में से तीन
Scenario:
शिक्षिका ने पाँचों पंक्तियाँ बोर्ड पर लिखीं और कहा कि हर पंक्ति में से बेमेल शब्द पर घेरा बनाइए। सोहन ने बहुत तेज़ काम किया। उसने हर पंक्ति में वह शब्द घेरा जो उसे सबसे कठिन लगा, यानी बयार, समर, नभचर, तटिनी और असि। उसे लगा कि जो शब्द उसने पहले कभी नहीं सुना, वही बाहर का होगा। तीन उत्तर गलत निकले। रिया ने धीरे काम किया। वह हर पंक्ति के पहले तीन शब्दों का अर्थ देखती और फिर पूछती कि चौथा उसमें बैठता है या नहीं। उसके पाँचों उत्तर ठीक निकले।
Analysis:
एक ने कठिनाई से छाँटा और दूसरी ने अर्थ से। दोनों के उत्तरों में केवल यही फ़र्क था।
Activity:
सोहन के चारों गलत उत्तरों के आगे उन शब्दों का अर्थ लिखिए और दिखाइए कि वे क्यों ठीक बैठते हैं।
घर पर करके देखो
Title:
अपने नाम के भीतर
What You Notice:
लंबे नाम से हमेशा अधिक शब्द नहीं निकलते। जिन शब्दों में स्वर अधिक होते हैं, उनसे अधिक टुकड़े बनते हैं, और जिनमें कठिन संयुक्त अक्षर होते हैं वे बीच से टूटते ही नहीं। आसमान से छह शब्द निकल आते हैं क्योंकि उसके अक्षर सीधे और अलग-अलग हैं। यही कारण है कि यह खेल हर शब्द पर एक जैसा नहीं चलता।
Did you know
नद और नदी अलग होते हैं। नद बड़ी धारा को कहते हैं, और सरिता तथा तटिनी दोनों नदी के नाम हैं।
असि तलवार का ही एक नाम है, और कविता में आया करवाल भी उसी का दूसरा नाम है।
Memory tricks
बेमेल ढूँढ़ना — तीन एक जैसे, चौथा अलग — पहले तीन का साझा अर्थ पकड़िए। जो उसमें न बैठे, वही बेमेल है।
भीतर के शब्द — क्रम मत तोड़िए — अक्षर उसी क्रम में लीजिए जिसमें वे शब्द में हैं, और बीच से टुकड़े उठाइए।
Practice MCQs with answers (20)
- A विलोम शब्द
- B तुकांत शब्द
- C समानार्थी शब्द
- D युग्म शब्द
Show answer
Why:
जैसे हय, अश्व और घोड़ा।
- A एक ही प्राणी के नाम
- B तीन अलग प्राणियों के नाम
- C तीन हथियारों के नाम
- D तीन नदियों के नाम
Show answer
Why:
इसीलिए वे समानार्थी हैं।
- A कविता लंबी करने के लिए
- B कठिन शब्द दिखाकर प्रभाव जमाने के लिए
- C अर्थ छिपाने के लिए
- D पंक्ति की लय और तुक बनाने के लिए
Show answer
Why:
एक ही चीज़, कई नाम।
- A बयार
- B अनल
- C पवन
- D हवा
Show answer
Why:
उसका अर्थ आग है।
- A तुरंग
- B समर
- C युद्ध
- D रण
Show answer
Why:
उसका अर्थ घोड़ा है।
- A उसमें सबसे लंबे शब्द हैं
- B उसके सभी शब्द नए हैं
- C बेमेल शब्द भी युद्ध से ही जुड़ा है
- D उसमें कोई समानार्थी है ही नहीं
Show answer
Why:
इसी कविता में घोड़ा नायक भी है।
- A गगन
- B आकाश
- C आसमान
- D नभचर
Show answer
Why:
वह आकाश में उड़ने वाले को कहते हैं।
- A आकाश में चलने वाला
- B आकाश स्वयं
- C आकाश का रंग
- D आकाश की ऊँचाई
Show answer
Why:
चर का अर्थ चलने वाला है।
- A तटिनी
- B नाद
- C सरिता
- D नद
Show answer
Why:
उसका अर्थ ध्वनि है।
- A असि
- B तलवार
- C ढाल
- D करवाल
Show answer
Why:
वह बचाव का साधन है।
- A क्योंकि वह वार का नहीं, बचाव का साधन है
- B क्योंकि वह युद्ध में काम ही नहीं आती है
- C क्योंकि वह इस कविता में कहीं आई ही नहीं
- D क्योंकि वह लोहे की नहीं बनाई जाती है
Show answer
Why:
असि और करवाल, दोनों तलवार के नाम हैं और वार करते हैं। ढाल उसी वार को रोकती है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: ‘अनल’ का अर्थ आग है, और इसी से वह हवा वाली पंक्ति में बेमेल पड़ जाता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही कठिनाई की जड़ है। तुरंग युद्ध से जुड़ा है, पर युद्ध का नाम नहीं है।
- A समान
- B मान
- C नस
- D मास
Show answer
Why:
उसके लिए अक्षरों का क्रम बदलना पड़ेगा।
- A अक्षर किसी भी क्रम में ले लीजिए
- B केवल पहला अक्षर छोड़ दीजिए
- C केवल दो अक्षर वाले शब्द बनाइए
- D अक्षर उसी क्रम में लीजिए
Show answer
Why:
बीच से टुकड़े उठाए जा सकते हैं।
- A ढाल
- B तलवार
- C भाला
- D तरकश
Show answer
Why:
करवाल भी उसी का नाम है।
- A पर्वत के
- B नदी के
- C वन के
- D समुद्र के
Show answer
Why:
इसीलिए नाद उनके साथ नहीं बैठता।
- A कठिन शब्द हमेशा अंत में आता है
- B कठिन दिखना और बेमेल होना एक बात नहीं
- C कठिन शब्द कभी बेमेल नहीं होता
- D उस पंक्ति में कठिन शब्द कभी होता ही नहीं
Show answer
Why:
तटिनी कठिन है, पर बेमेल नहीं।
- A जल
- B पवन
- C आग
- D धरती
Show answer
Why:
इसीलिए वह हवा के साथ नहीं बैठता।
- A कविता याद कर लेने को
- B कविता के ढंग पर अपनी पाँच नई पंक्तियाँ लिखकर लाने को
- C शब्दकोश पूरा पढ़ने को
- D कविता से पाँच शब्द लेकर उनके भीतर के शब्द खोजने को
Show answer
Why:
आसमान की तरह ही।
Important short questions (6)
समान अर्थ वाले शब्दों को समानार्थी कहते हैं। जैसे हय, अश्व और घोड़ा, जो तीनों एक ही प्राणी के नाम हैं।
अनल, तुरंग, नभचर, नाद और ढाल।
अनल का अर्थ आग है, इसलिए वह हवा के नामों के साथ नहीं बैठता। नाद का अर्थ ध्वनि है, इसलिए वह नदी के नामों के साथ नहीं बैठता।
नभ का अर्थ आकाश है। नभचर का अर्थ आकाश में चलने वाला होता है, यानी पक्षी, इसलिए वह आकाश के नामों में बेमेल है।
पहले तीन शब्दों का साझा अर्थ पकड़िए, और जो उसमें न बैठे वही बेमेल है। वह धोखा इसलिए देता है क्योंकि वह भी उसी विषय का होता है।
आस, समान, मान, सम, आन और नस। नियम यह है कि अक्षर उसी क्रम में लिए जाएँ जिसमें वे शब्द में आए हैं।
Long answer questions (3)
समान अर्थ वाले शब्दों को समानार्थी शब्द कहते हैं। हय, अश्व और घोड़ा तीनों एक ही प्राणी के नाम हैं, और इसी कविता में हय शब्द आया भी है। कवि को इनकी ज़रूरत इसलिए पड़ती है कि वह एक ही चीज़ को बार-बार अलग नाम से कह सके। इससे दो लाभ होते हैं। पहला यह कि एक ही शब्द बार-बार नहीं दोहराना पड़ता, और दूसरा यह कि तुक मिलाने के लिए उसके पास चुनने को कई शब्द रहते हैं। यही कारण है कि कविता की भाषा में ऐसे शब्द बहुत मिलते हैं।
पहली पंक्ति में अनल बेमेल है, क्योंकि उसका अर्थ आग है जबकि पवन और बयार हवा के नाम हैं। दूसरी में तुरंग बेमेल है, क्योंकि उसका अर्थ घोड़ा है जबकि युद्ध और समर रण के नाम हैं। तीसरी में नभचर बेमेल है, क्योंकि वह आकाश नहीं बल्कि उसमें उड़ने वाला है। चौथी में नाद बेमेल है, क्योंकि उसका अर्थ ध्वनि है जबकि सरिता और तटिनी नदी हैं। पाँचवीं में ढाल बेमेल है, क्योंकि वह बचाव का साधन है और बाकी तीनों तलवार के नाम हैं।
इसके लिए अक्षरों को उसी क्रम में लेना पड़ता है जिसमें वे शब्द में आए हैं। फिर बीच से टुकड़े उठाकर देखना होता है कि कोई शब्द बनता है या नहीं। आसमान को लीजिए। उसके भीतर आस मिलता है, समान मिलता है, मान मिलता है, और सम, आन तथा नस भी निकल आते हैं। ध्यान रखने की बात यह है कि अक्षरों का क्रम बदला नहीं जा सकता। इसीलिए मास जैसा शब्द इसमें नहीं गिना जाएगा, क्योंकि उसके लिए अक्षर आगे-पीछे करने पड़ेंगे।
Flashcards (15)
Play this topic
- यह किसका नाम है?
- बेमेल शब्द और उसका अर्थ
- सच या भ्रम?
- बेमेल ढूँढ़ने का क्रम
- झटपट दौर
कविता की रचना: तुक और प्रभावशाली प्रयोग
पंक्तियों के अंत में मिलते-जुलते शब्द, उनसे बनने वाली लय, और वे प्रयोग जिनसे एक साधारण बात असाधारण सुनाई देने लगती है।
What you will be able to do
- मैं तुकांत और अतुकांत का अंतर बता सकता हूँ
- मैं कविता में से तुकांत शब्दों की सूची बना सकता हूँ
- मैं बता सकता हूँ कि तुक से कविता को क्या मिलता है
- मैं बढ़ा-चढ़ाकर कहे गए प्रयोगों को पहचान सकता हूँ
Key points
पंक्तियों के अंत में आने वाले मिलते-जुलते शब्दों को तुकांत कहते हैं।
निराला और पाला, तथा कोड़ा और घोड़ा, इसी कविता के तुकांत जोड़े हैं।
कभी-कभी कविता अतुकांत भी होती है, यानी उसमें तुक नहीं मिलाई जाती।
एक ही तुक कई पंक्तियों तक चल सकती है, जैसे भालों, ढालों और करवालों।
तुक से लय बनती है और पंक्ति कान में टिक जाती है।
कवि कुछ बातें बढ़ा-चढ़ाकर कहता है, जैसे हवा का चेतक से मुकाबला।
ऐसे प्रयोग झूठ नहीं होते, वे एक बात को ज़ोर देकर कहने का ढंग हैं।
पाठ यह भी कहता है कि कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए।
Full explanation
पंक्ति का अंत सुनिए
निराला और पाला। कोड़ा और घोड़ा। ये शब्द बोलने-लिखने में मिलते-जुलते हैं। इस तरह की शैली को तुकांत कहते हैं। तुक पंक्ति के अंतिम शब्द में बनती है।
सब कविताओं में नहीं
कभी-कभी कविता अतुकांत भी होती है, यानी उसमें तुक मिलाई ही नहीं जाती। ऐसी कविताएँ कम अच्छी नहीं होतीं। तुक एक ढंग है, कोई शर्त नहीं। बिना तुक की कविताएँ भी उतनी ही सुंदर हो सकती हैं।
इस कविता में कहाँ-कहाँ
पहला जोड़ा निराला और पाला है। दूसरा कोड़ा और घोड़ा। ये दोनों सीधे जोड़े हैं, जिनमें दो-दो पंक्तियाँ आपस में मिलती हैं। पहले दो हिस्सों में यही ढंग चलता है।
एक लंबी तुक
फिर तीन पंक्तियाँ आती हैं जो भालों, ढालों और करवालों पर खत्म होती हैं। यहाँ तुक दो पंक्तियों तक नहीं रुकती। वह लगातार चलती चली जाती है।
एक और जगह
लहर गया, ठहर गया और घहर गया। तीनों में केवल पहला अक्षर बदलता है। बाकी सब वही रहता है, इसलिए तीनों पंक्तियाँ एक ही चाल पर चलती हैं।
और अंत में
निषंग, अंग, दंग और रंग। चार पंक्तियाँ एक ही तुक पर। कविता का पूरा अंतिम हिस्सा इसी पर टिका है। इतनी पंक्तियाँ एक साथ मिलने से समापन भारी और ज़ोरदार बन जाता है।
तुक से मिलता क्या है
लय बनती है। पंक्ति कान में टिक जाती है और याद रखना आसान हो जाता है। इसीलिए बच्चों को तुक वाली पंक्तियाँ जल्दी याद हो जाती हैं। सुनते ही अगली पंक्ति का अंत मन में बनने लगता है।
इसीलिए वीर रस में
जिन कविताओं में जोश भरना हो, उनमें तुक अकसर तेज़ और दोहराई हुई रखी जाती है। यह कविता वीर रस की है, यानी उसमें साहस का भाव मुख्य है।
अब दूसरी बात
पुस्तक एक और चीज़ की ओर ध्यान ले जाती है। लगाम ज़रा हिली और घोड़ा उड़ चला। यह पंक्ति देखने में साधारण लगती है। पर उसे ध्यान से पढ़िए।
यह सचमुच नहीं है
हवा से लगाम हिलने भर से कोई घोड़ा नहीं चल पड़ता। कवि बात को बढ़ाकर कह रहा है। सचमुच ऐसा कभी नहीं होता।
यह झूठ नहीं है
यह ज़ोर देने का ढंग है। कवि यह कहना चाहता है कि चेतक ज़रा-से संकेत पर चल पड़ता था। बात बढ़ाकर कहने से वही अर्थ अधिक ज़ोर के साथ पहुँचता है।
ऐसे और प्रयोग
हवा का उससे मुकाबला होना। आसमान पर उसका दौड़ना। एक ही समय में उसका यहाँ भी न होना और वहाँ भी न होना। तीनों में से कोई भी अक्षरशः संभव नहीं है।
पहचानने का ढंग
पूछिए कि क्या यह सचमुच हो सकता है। उत्तर न हो, तो वह ज़ोर देने का प्रयोग है। यही एक सवाल हर बार काम कर जाता है। उससे तथ्य और प्रयोग अलग-अलग हो जाते हैं। दोनों को अलग रखना ही इस अभ्यास का उद्देश्य है।
शीर्षक की बात
पुस्तक पूछती है कि आप इसे क्या शीर्षक देंगे। दिया हुआ शीर्षक चेतक की वीरता है। यानी वही शीर्षक अंतिम नहीं है, और आप अपना भी सुझा सकते हैं।
एक ज़रूरी चर्चा
पुस्तक अंत में यह भी कहती है कि कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए। यह चर्चा पाठ से आगे वाले हिस्से में रखी गई है। बच्चों को आपस में इस पर बात करनी है।
दोनों बातें साथ चलती हैं
कविता एक घोड़े के साहस और स्वामिभक्ति की प्रशंसा करती है। युद्ध की प्रशंसा वह कहीं नहीं करती। प्रशंसा के शब्द हर बार घोड़े के लिए आते हैं, लड़ाई के लिए नहीं। इस तरह के प्रश्न में कोई एक उत्तर तय नहीं होता। अपनी बात कारण के साथ रखिए और दूसरे की बात ध्यान से सुनिए। कविता से उदाहरण उठाकर कही गई बात सबसे मज़बूत मानी जाती है।
Concepts and terms
पंक्तियों के अंत में मिलते-जुलते शब्द आना। कोड़ा और घोड़ा इसी कविता का जोड़ा है।
वह कविता जिसमें तुक नहीं मिलाई जाती। ऐसी कविताएँ भी होती हैं और वे कम अच्छी नहीं होतीं।
जब एक ही तुक दो से अधिक पंक्तियों तक चले। भालों, ढालों और करवालों तीन पंक्तियों तक चलती है।
किसी बात को ज़ोर देने के लिए उससे बड़ा करके कहना। हवा का घोड़े से मुकाबला ऐसा ही प्रयोग है।
सावधान!
Common Misconceptions
तुक की सूची बनाते हुए
Scenario:
शिक्षिका ने कहा कि कविता में आए तुकांत शब्दों की सूची बनाइए। आदित्य ने पूरी कविता पढ़ी और हर वह शब्द लिख लिया जो उसे किसी दूसरे शब्द से मिलता-जुलता लगा। उसकी सूची में चेतक और चौकड़ी भी आ गए, क्योंकि दोनों च से शुरू होते हैं। कविता और भी लंबी होती तो उसकी सूची और बढ़ जाती। सुहानी ने दूसरा रास्ता चुना। उसने पहले हर पंक्ति का केवल आखिरी शब्द एक कॉलम में उतारा, और उसके बाद उन्हीं में से जोड़े बनाए। उसकी सूची छोटी थी और पूरी सही निकली।
Analysis:
एक ने पूरी कविता में से शब्द उठाए और दूसरी ने केवल पंक्तियों के सिरे देखे।
Activity:
कविता की हर पंक्ति का अंतिम शब्द एक कॉलम में उतारिए और उनके जोड़े बनाइए।
घर पर करके देखो
Title:
दो पंक्तियाँ अपनी
Safety:
किसी जानवर के पास बिना बड़ों के मत जाइए।
What You Notice:
तुक वाली पंक्तियाँ लगभग हमेशा पहले याद होती हैं, और यही कारण है कि जोश भरने वाली कविताओं में तुक तेज़ रखी जाती है। पर लिखते समय एक बात पकड़ में आती है। तुक मिलाने के चक्कर में कभी-कभी ऐसा शब्द रखना पड़ जाता है जो अर्थ में ठीक नहीं बैठता। अच्छा कवि वही है जिसकी तुक भी मिले और अर्थ भी न बिगड़े।
Did you know
पाठ के कवि श्यामनारायण पाण्डेय वीर रस की कविताओं के लिए जाने जाते हैं, यानी ऐसी कविताएँ जिनमें साहस का भाव मुख्य हो।
पुस्तक पूछती है कि आप इस अंश को क्या शीर्षक देना चाहेंगे, यानी दिया हुआ शीर्षक ही अंतिम नहीं है।
Memory tricks
तुक पहचानना — अंत सुनिए, आरंभ नहीं — तुक पंक्ति के आखिरी शब्द में होती है, इसलिए उसी को ध्यान से सुनिए।
बढ़ा-चढ़ाकर कहा गया प्रयोग — क्या यह सचमुच हो सकता है? — उत्तर न हो तो वह ज़ोर देने का ढंग है, कोई तथ्य नहीं।
Practice MCQs with answers (20)
- A तुकांत
- B अतुकांत
- C समानार्थी
- D विलोम
Show answer
Why:
जैसे कोड़ा और घोड़ा।
- A तुकांत
- B गद्य
- C अतुकांत
- D दोहा
Show answer
Why:
ऐसी कविताएँ कम अच्छी नहीं होतीं।
- A कोड़ा और घोड़ा
- B भाला और ढाल
- C हवा और पवन
- D रण और युद्ध
Show answer
Why:
निराला और पाला भी ऐसा ही जोड़ा है।
- A उसमें कोई तुक है ही नहीं
- B वह केवल दो पंक्तियों की है
- C वह कविता के आरंभ में आती है
- D वह तीन पंक्तियों तक चलती है
Show answer
Why:
तुक दो पंक्तियों पर नहीं रुकती।
- A पहला अक्षर
- B पूरा शब्द
- C अंतिम अक्षर
- D कोई भी नहीं
Show answer
Why:
बाकी सब वही रहता है।
- A निराला, पाला, ताला, माला
- B निषंग, अंग, दंग, रंग
- C कोड़ा, घोड़ा
- D भालों, ढालों
Show answer
Why:
चार पंक्तियाँ एक ही तुक पर।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II उल्टा है: वीर रस में तुक तेज़ और दोहराई हुई रखी जाती है, जिससे गति बनी रहे।
- A बहुत धीमी और ठहरी हुई
- B एक ही पंक्ति तक सीमित
- C बिल्कुल नहीं रखी जाती
- D तेज़ और दोहराई हुई
Show answer
Why:
क्योंकि उनमें जोश भरना होता है।
- A बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात
- B एक सीधा-सादा और साफ़ तथ्य
- C एक प्रश्न
- D एक आदेश
Show answer
Why:
सचमुच ऐसा नहीं होता।
- A हाँ, क्योंकि वह सच नहीं है
- B नहीं, वह ज़ोर देने का ढंग है
- C हाँ, क्योंकि वह कविता में है
- D नहीं, क्योंकि वह सचमुच होता है
Show answer
Why:
कवि एक बात पर ज़ोर दे रहा है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही उस प्रयोग का अर्थ है। घोड़ा उड़ता नहीं, पर इतना शीघ्र चलता है कि उड़ना ही लगे।
- A चेतक राणा प्रताप का घोड़ा था
- B कविता हल्दीघाटी का अंश है
- C हवा का उससे मुकाबला हो गया
- D शत्रुओं का भाला गिर गया
Show answer
Why:
हवा किसी से मुकाबला नहीं करती।
- A शब्दकोश में अर्थ देखना
- B पंक्ति की लंबाई गिनना
- C पूछना कि क्या यह सचमुच हो सकता है
- D पंक्ति के अंतिम शब्द पर ध्यान देना
Show answer
Why:
उत्तर न हो तो वह ज़ोर देने का प्रयोग है।
- A दिया हुआ शीर्षक याद करने को
- B शीर्षक हटा देने को
- C शीर्षक का अर्थ लिखने को
- D अपनी ओर से शीर्षक सुझाने को
Show answer
Why:
और यह भी कि क्यों।
- A कि युद्ध में वीरता दिखानी चाहिए
- B कि युद्ध कहीं भी नहीं होना चाहिए
- C कि युद्ध केवल सीमा पर हो
- D कि युद्ध की कविताएँ अच्छी होती हैं
Show answer
Why:
यह चर्चा पाठ के आगे रखी गई है।
- A युद्ध में चलने वाले उन सब हथियारों की
- B एक घोड़े के साहस और स्वामिभक्ति की
- C सामने खड़ी हुई शत्रु-सेना की शक्ति की
- D युद्ध नाम की उस पूरी घटना की
Show answer
Why:
कविता का नाम ही ‘चेतक की वीरता’ है। राणा और युद्ध पृष्ठभूमि में हैं, आगे चेतक है।
- A तुक से कविता खराब हो जाती है
- B अतुकांत कविताएँ भी अच्छी होती हैं
- C तुक केवल बड़ों की कविताओं में होती है
- D तुक मिलाना बहुत कठिन होता है
Show answer
Why:
पुस्तक स्वयं अतुकांत का नाम लेती है।
- A आरंभ के हिस्से में
- B कोड़े वाले उस हिस्से में ही
- C यहाँ-वहाँ वाले हिस्से में
- D अंत के हिस्से में
Show answer
Why:
वही पहेली जैसा सुनाई देता है।
- A जिसमें प्रेम का भाव मुख्य हो
- B जिसमें हँसी का भाव मुख्य हो
- C जिसमें करुणा का भाव मुख्य हो
- D जिसमें साहस का भाव मुख्य हो
Show answer
Why:
कवि इसी के लिए जाने जाते हैं।
- A सबसे लंबे शब्द पर
- B पहले शब्द पर
- C बीच के शब्द पर
- D अंतिम शब्द पर
Show answer
Why:
तुक वहीं बनती है।
Important short questions (6)
तुकांत में पंक्तियों के अंत में मिलते-जुलते शब्द आते हैं, जैसे कोड़ा और घोड़ा। अतुकांत कविता में तुक मिलाई ही नहीं जाती।
निराला और पाला, कोड़ा और घोड़ा, भालों और ढालों, तथा अंग और दंग।
तीनों में केवल पहला अक्षर बदलता है और बाकी सब वही रहता है। इसी से तीनों पंक्तियाँ एक ही लय पर चलती हैं।
लय बनती है और पंक्ति कान में टिक जाती है, जिससे याद रखना आसान हो जाता है। जोश भरने वाली कविताओं में तुक अकसर तेज़ रखी जाती है।
यह बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात है, क्योंकि सचमुच ऐसा नहीं होता। यह झूठ नहीं बल्कि ज़ोर देने का ढंग है, जिससे कवि बताता है कि चेतक ज़रा-से संकेत पर चल पड़ता था।
कविता एक घोड़े के साहस और स्वामिभक्ति की प्रशंसा करती है। पुस्तक आगे यह चर्चा रखती है कि कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए।
Long answer questions (3)
कविता तुकांत शैली में है, यानी पंक्तियों के अंत में मिलते-जुलते शब्द आते हैं। आरंभ में सीधे जोड़े मिलते हैं, जैसे निराला और पाला, तथा कोड़ा और घोड़ा। बीच में तुक लंबी हो जाती है और तीन पंक्तियाँ भालों, ढालों तथा करवालों पर खत्म होती हैं। एक जगह लहर गया, ठहर गया और घहर गया आते हैं, जिनमें केवल पहला अक्षर बदलता है। अंत में चार पंक्तियाँ निषंग, अंग, दंग और रंग पर टिकती हैं। इसी से पूरी कविता में एक तेज़ लय बनी रहती है।
इसलिए कि एक बात पर ज़ोर पड़ सके। पुस्तक जिस पंक्ति की ओर ध्यान ले जाती है उसमें लगाम ज़रा-सी हिलते ही घोड़ा उड़ चलता है। सचमुच ऐसा नहीं होता, पर इससे यह बात पहुँच जाती है कि चेतक ज़रा-से संकेत पर चल पड़ता था। ऐसे और भी प्रयोग हैं। हवा का उससे मुकाबला हो जाना, और आसमान पर उसका दौड़ना। इन्हें झूठ नहीं कहा जाएगा। पहचानने का ढंग यह है कि पूछिए, क्या यह सचमुच हो सकता है।
नहीं। कविता की सारी प्रशंसा एक घोड़े के लिए है। उसकी तेज़ी, उसकी फुर्ती, उसकी निडरता और अपने स्वामी के साथ बनी उसकी समझ, कविता इन्हीं का वर्णन करती है। अंतिम पंक्ति भी यही कहती है कि शत्रु-सेना घोड़े का रंग देखकर दंग रह गई। युद्ध को अच्छा कहने वाली कोई पंक्ति इसमें नहीं है। पुस्तक स्वयं पाठ के आगे यह चर्चा रखती है कि कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए, और दोनों बातें साथ चल सकती हैं।
Flashcards (15)
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- तुक का जोड़ा मिलाइए
- यह सचमुच हो सकता है या नहीं?
- सच या भ्रम?
- तुक ढूँढ़ने का क्रम
- झटपट दौर
Class 6 Hindi Chapter 11 — frequently asked questions
चेतक महाराणा प्रताप का घोड़ा था। यह कविता श्यामनारायण पाण्डेय की काव्यकृति हल्दीघाटी का एक अंश है।
चेतक की असाधारण तेज़ी। हवा स्वयं तेज़ मानी जाती है, और कवि उसी को चेतक के सामने एक प्रतियोगी बना देता है।
क्योंकि कोड़ा तब चलाया जाता है जब घोड़े को तेज़ करना हो। चेतक को कभी तेज़ करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी।
समान अर्थ वाले शब्दों को समानार्थी कहते हैं। जैसे हय, अश्व और घोड़ा, जो तीनों एक ही प्राणी के नाम हैं।
अनल, तुरंग, नभचर, नाद और ढाल।
अनल का अर्थ आग है, इसलिए वह हवा के नामों के साथ नहीं बैठता। नाद का अर्थ ध्वनि है, इसलिए वह नदी के नामों के साथ नहीं बैठता।
तुकांत में पंक्तियों के अंत में मिलते-जुलते शब्द आते हैं, जैसे कोड़ा और घोड़ा। अतुकांत कविता में तुक मिलाई ही नहीं जाती।
निराला और पाला, कोड़ा और घोड़ा, भालों और ढालों, तथा अंग और दंग।
तीनों में केवल पहला अक्षर बदलता है और बाकी सब वही रहता है। इसी से तीनों पंक्तियाँ एक ही लय पर चलती हैं।
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