Class 6 Hindi Chapter 9: मैया मैं नहिं माखन खायो
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- Hindi
पद का अर्थ और बालक के तर्क
एक बच्चा माखन चुराने से इनकार करता है और अपने बचाव में एक के बाद एक तर्क रखता है — और अंत में माँ हँस पड़ती है।
What you will be able to do
- पद की हर पंक्ति का भाव अपने शब्दों में बताना
- बालक के तर्कों को क्रम से गिनाना
- यह समझाना कि उसकी सबसे बड़ी शिकायत क्या है
- पद के अंत का अर्थ बताना
Key points
पद की पहली पंक्ति में ही बालक साफ़ इनकार कर देता है कि उसने माखन खाया।
उसका पहला तर्क समय का है — भोर होते ही उसे गायों के साथ मधुबन भेज दिया गया था।
वह चार पहर बंसीवट के आसपास घूमता रहा और साँझ ढले ही घर लौटा।
दूसरा तर्क उसके शरीर का है — वह छोटा बालक है और उसकी बाँहें भी छोटी हैं।
छीका ऊँचाई पर लटकता है, इसलिए वह कहता है कि उस तक उसका पहुँचना संभव ही नहीं था।
तीसरा तर्क साथियों पर है — ग्वाल-बाल उससे बैर रखते हैं और उन्होंने ही मुँह पर माखन पोत दिया।
वह माँ से कहता है कि वे मन की सीधी हैं, इसलिए दूसरों की बात सच मान बैठीं।
अंत में वह रूठकर लाठी-कंबल लौटाना चाहता है, और यशोदा हँसकर उसे गले लगा लेती हैं।
Full explanation
पद कहाँ से शुरू होता है
पद बीच से शुरू होता है। माँ ने शिकायत सुन ली है और बालक से पूछ लिया है। हमें वह पूछना नहीं दिखता, केवल बालक का उत्तर मिलता है। इसी से पद पढ़ते ही लगता है कि हम किसी दृश्य के बीच आ पहुँचे हैं। बालक जानता है कि उस पर आरोप लग चुका है, इसलिए वह सीधे बचाव पर उतर आता है। पहली ही पंक्ति में वह साफ़ इनकार कर देता है — “मैया मैं नहिं माखन खायो।”
पहला तर्क — मैं घर पर था ही नहीं
“भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥”
उसका भाव
भोर होते ही मुझे गायों के साथ मधुबन की ओर रवाना कर दिया गया। बंसीवट के आसपास मैं बारह घंटे घूमता रहा और अँधेरा होने पर लौटा। यानी जिस समय माखन गया, उस समय मैं घर पर था ही नहीं। यह तर्क सबसे पहले आता है, क्योंकि इससे पूरा आरोप एक बार में ही हट जाता है।
दूसरा तर्क — मेरा हाथ पहुँचता ही नहीं
“मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।”
उसका भाव
मैं ठहरा छोटा-सा बच्चा, और हाथ भी नाटे। छीका छत से लटकाया जाता है, इसलिए उतनी ऊँचाई तक मेरा पहुँचना कैसे हो सकता था। यह तर्क सबसे मज़बूत है, क्योंकि इसमें कोई गवाह नहीं चाहिए — बात केवल ऊँचाई की है। ऊँचाई कोई भी नाप सकता है, और उसमें किसी की गवाही जोड़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
तीसरा तर्क — यह साथियों की चाल है
“ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥”
उसका भाव
ये साथी मुझसे जलते हैं। इन्होंने ज़बरदस्ती मेरे मुँह पर माखन पोत दिया, ताकि देखने वाले को लगे कि चोरी मैंने ही की है। यहाँ बालक यह भी समझा देता है कि मुँह पर माखन होने से चोरी सिद्ध नहीं होती। यानी जो सबूत माँ के सामने रखा गया था, उसी को वह पलट देता है। मुँह पर माखन होना यह तो बताता है कि माखन लगा, पर यह नहीं कि लगाया किसने।
चौथा तर्क — तुम बहुत सीधी हो
“तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।”
उसका भाव
माँ, तुम्हारा मन बहुत सीधा है, इसीलिए इनकी बात सच मान बैठीं। ध्यान देने लायक बात यह है कि वह माँ पर दोष नहीं डालता, उनके भोलेपन को कारण बताता है। इससे उसकी शिकायत भी बनी रहती है और माँ भी बुरी नहीं ठहरतीं।
सबसे बड़ी शिकायत
“जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं, जानि परायो जायो॥”
यहाँ बात बदल जाती है
लगता है तुम्हारे मन में कोई दूरी आ गई है, तभी मुझे अपना नहीं समझा। यहीं से झगड़ा माखन का नहीं रह जाता। अब बात भरोसे की हो गई है, और यही पद की सबसे भारी पंक्ति है। एक बच्चे के लिए माखन का आरोप सहा जा सकता है, पर अपना न समझा जाना नहीं।
रूठना
“ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो।”
उसका भाव
यह लो अपनी लाठी और कंबल, मुझे बहुत नचाया जा चुका। यानी वह गाय चराने का काम ही छोड़ देना चाहता है। इतनी बात कह देने के बाद उसके पास कुछ और कहने को बचता भी नहीं। बच्चे का रूठना इससे अधिक बड़ा नहीं हो सकता। वह वही चीज़ें लौटा रहा है जो उसे रोज़ का काम करने के लिए दी गई थीं।
अंत
“सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥”
एक हँसी से सब खत्म
यह सुनकर यशोदा हँस पड़ीं और उसे गले से लगा लिया। वे न तो उसे झूठा ठहरातीं, न कोई दंड देती हैं। उनकी हँसी बता देती है कि बालक की चतुराई उन्हें समझ आ गई। और गले लगाना उसकी सबसे बड़ी शिकायत का उत्तर दे देता है — कि उसे पराया कभी माना ही नहीं गया।
Concepts and terms
रस्सियों का बुना हुआ गोल जाल, जिसे छत या किसी ऊँची जगह से लटकाया जाता है। उसमें दूध-दही रखे जाते हैं, ताकि कुत्ते-बिल्ली उन तक न पहुँच सकें। पूरे पद का सबसे मज़बूत तर्क इसी की ऊँचाई पर टिका है।
यमुना के किनारे बसा एक वन, जो मथुरा से दूर नहीं है। बालक कहता है कि भोर होते ही उसे गायों के साथ वहीं भेज दिया गया था, यानी वह घर पर था ही नहीं।
एक वट वृक्ष। माना जाता है कि गाय चराते समय श्रीकृष्ण इसी पर चढ़कर वंशी बजाते और उसी ध्वनि से बिखरी गायों को एक जगह बुला लेते थे।
गाय पालने वालों के बच्चे, जो श्रीकृष्ण के संगी-साथी थे। पद में बालक उन्हीं पर आरोप लगाता है कि उन्होंने ज़बरदस्ती उसके मुँह पर माखन लगा दिया।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
कक्षा ने बालक के सारे तर्क क्रम से लिखे। पहले उसने कहा कि उसने माखन खाया ही नहीं। फिर कहा कि वह इतना छोटा है कि मटकी तक पहुँच ही नहीं सकता। फिर कहा कि ग्वाल-बालों ने ज़बरदस्ती उसके मुँह में डाल दिया। बच्चों ने देखा कि तर्क एक-दूसरे को काट रहे हैं। यदि उसने खाया ही नहीं, तो ज़बरदस्ती वाली बात कहाँ से आई। सना ने कहा कि इसीलिए माँ हँस पड़ती है। अध्यापिका ने कहा कि बहुत सारे बहाने मिलकर सच बता देते हैं। एक भी बहाना अकेला होता तो शायद चल जाता।
Analysis:
हर तर्क अपने आप में ठीक लगता है। एक साथ रखते ही वे आपस में टकरा जाते हैं, और वही टकराव माँ का उत्तर बन जाता है।
Activity:
कोई छोटा-सा बहाना चुनो। उसके तीन कारण लिखो और जाँचो कि वे आपस में टकराते हैं या नहीं।
घर पर करके देखो
Title:
अपनी सफ़ाई के तर्क
Safety:
यह काम केवल लिखने का है; किसी पर नया आरोप मत लगाओ।
What You Notice:
अच्छे तर्क प्रायः वही होते हैं जिनमें किसी गवाह की ज़रूरत न पड़े। पद में भी छीके वाला तर्क इसीलिए सबसे मज़बूत है।
Did you know
छीका सैकड़ों वर्षों से भारत के घरों में काम आता रहा है, और आज भी कहीं-कहीं दिख जाता है।
बालक अपनी सफ़ाई में केवल इनकार नहीं करता; वह समय, शरीर और गवाह — तीनों का सहारा लेता है।
पूरे झगड़े का अंत किसी दंड से नहीं, एक हँसी से होता है।
Memory tricks
चार तर्क, एक शिकायत — समय-बाँहें-साथी-भोलापन — चार तर्क इसी क्रम में, और अंत में पराया समझे जाने की शिकायत।
पद का ढाँचा — इनकार-सफ़ाई-रूठना-गले लगना — शुरू में इनकार, बीच में तर्क, फिर रूठना, और अंत में माँ का गले लगाना।
Practice MCQs with answers (20)
- A माँ की शिकायत से
- B बालक के इनकार से
- C ग्वालों की बात से
- D कवि के परिचय से
Show answer
Why:
माँ का पूछना पद में दिखता ही नहीं।
- A बाज़ार
- B नदी के घाट
- C पड़ोस के घर
- D मधुबन
Show answer
Why:
वह गायों के साथ गया था।
- A यमुना
- B गंगा
- C सरयू
- D नर्मदा
Show answer
Why:
वह मथुरा के पास पड़ता है।
- A एक पहर
- B दो पहर
- C चार पहर
- D आठ पहर
Show answer
Why:
यानी पूरे बारह घंटे।
- A गाँव के बाहर खड़ा एक पुराना पीपल
- B बरगद के एक विशेष वृक्ष बंसीवट
- C आम
- D नीम
Show answer
Why:
उसी पर चढ़कर वे वंशी बजाते थे।
- A फल तोड़ते थे
- B वंशी बजाकर गायों को बुलाते थे
- C सो जाते थे
- D चढ़कर दूर-दूर तक देखते रहते थे
Show answer
Why:
उसी ध्वनि से बिखरी गायें इकट्ठी हो जातीं।
- A दोपहर में
- B आधी रात को
- C भोर में
- D साँझ ढले
Show answer
Why:
इसीलिए वह कहता है कि दिन भर घर पर था ही नहीं।
- A छत या किसी ऊँची जगह से
- B दरवाज़े के पास
- C ज़मीन पर
- D किसी पेड़ की जड़ के पास
Show answer
Why:
ताकि कुत्ते-बिल्ली वहाँ तक न पहुँच सकें।
- A उसकी ऊँचाई पर
- B उसके रंग पर
- C उसके आकार पर
- D उसकी रस्सी पर
Show answer
Why:
छोटी बाँहों से वहाँ तक पहुँचा नहीं जा सकता।
- A कि वह बहुत बलवान है
- B कि वह सबसे तेज़ दौड़ लेता है और थकता नहीं
- C कि वह छोटा है और उसकी बाँहें छोटी हैं
- D कि वह बहुत भूखा है
Show answer
Why:
यही उसका सबसे मज़बूत तर्क है।
- A उसने अपने ही हाथों से सारा माखन खा लिया था
- B ज़बरदस्ती उसके मुँह पर माखन लगाया गया
- C उसका मुँह गंदा था
- D उसने मुँह धो लिया
Show answer
Why:
यह आरोप वह ग्वाल-बालों पर लगाता है।
- A वे उससे डरते हैं
- B वे उसके साथ नहीं खेलते
- C वे बहुत छोटे हैं
- D वे उससे बैर रखते हैं
Show answer
Why:
इसीलिए उन्होंने यह चाल चली।
- A कि वे मन की बहुत सीधी हैं
- B कि वे बहुत कठोर हैं
- C कि वे बहुत थकी हैं
- D कि वे हर समय बहुत व्यस्त हैं
Show answer
Why:
इसीलिए वे दूसरों की बात मान गईं।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: वह माँ को ‘भोरी’ कहकर सीधी बताता है और दोष दूसरों पर रखता है।
- A कि उसे बहुत दूर भेजा गया
- B कि उसे खाना नहीं मिला
- C कि माँ ने उसे अपना नहीं समझा
- D कि उसे खेलने नहीं दिया गया
Show answer
Why:
यही पद की सबसे भारी पंक्ति है।
- A गायों का
- B माखन का
- C भरोसे का
- D समय का
Show answer
Why:
चोरी की बहस पीछे छूट जाती है।
- A अपनी वंशी
- B लाठी और कंबल
- C अपना माखन
- D अपनी गायें
Show answer
Why:
ये उसे गाय चराने के लिए दी गई थीं।
- A कि वह अपने साथियों के साथ खेलने जाना चाहता है
- B कि वह अपना घर छोड़कर कहीं चला जाना चाहता है
- C कि वह अब थककर चुपचाप सो जाना चाहता है
- D कि वह गाय चराने का काम ही छोड़ देना चाहता है
Show answer
Why:
लाठी और कंबल ग्वाले के काम के साधन हैं। उन्हें लौटाना उस काम से इनकार है, घर से नहीं।
- A डाँटा
- B चौंक गई
- C चली गई
- D मुसकाई
Show answer
Why:
यही शब्द पद का अंत सुखद बना देता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही पद का अंत खोल देता है। बालक की शिकायत भरोसे की थी, और माँ ने उसी का उत्तर दिया।
Important short questions (6)
वह समय की बात करता है। भोर होते ही उसे गायों के साथ मधुबन भेज दिया गया था। वह चार पहर बाहर रहा और साँझ ढले ही लौटा, इसलिए घर पर था ही नहीं।
इसमें किसी गवाह की ज़रूरत नहीं पड़ती। छीका ऊँचाई पर लटकता है और बालक छोटा है, जिसकी बाँहें भी छोटी हैं। बात केवल ऊँचाई की है, जिसे कोई भी देखकर समझ सकता है।
वह कहता है कि ग्वाल-बाल उससे बैर रखते हैं। उन्हीं ने ज़बरदस्ती उसके मुँह पर माखन पोत दिया, ताकि देखने वाले को लगे कि चोरी उसी ने की है।
वह कहता है कि उनका मन बहुत सीधा है। इसीलिए वे दूसरों की बात सच मान बैठीं। ध्यान देने लायक बात यह है कि वह माँ पर दोष नहीं डालता। वह केवल उनके भोलेपन को कारण बताता है।
वह पंक्ति, जिसमें वह कहता है कि माँ ने उसे अपना नहीं समझा। यहीं से झगड़ा माखन का नहीं रह जाता, बल्कि भरोसे का बन जाता है, और यही बच्चे को सबसे अधिक चुभता है।
बालक रूठकर लाठी और कंबल लौटाना चाहता है और कहता है कि उसे बहुत नचाया जा चुका। यह सुनकर यशोदा हँस पड़ती हैं और उसे गले से लगा लेती हैं।
Long answer questions (3)
पहला तर्क समय का है। वह कहता है कि भोर होते ही उसे गायों के साथ मधुबन भेज दिया गया, वह चार पहर बाहर रहा और साँझ ढले ही लौटा। दूसरा तर्क उसके अपने शरीर का है। वह छोटा बालक है और उसकी बाँहें भी छोटी हैं, जबकि छीका ऊँचाई पर लटकता है, इसलिए वहाँ तक उसका पहुँचना ही संभव नहीं था। तीसरा तर्क उसके साथियों पर है। वह कहता है कि ग्वाल-बाल उससे बैर रखते हैं और उन्होंने ज़बरदस्ती उसके मुँह पर माखन पोत दिया। चौथा तर्क माँ के भोलेपन का है, कि उनका मन सीधा है इसलिए वे दूसरों की बात मान गईं।
पद की शुरुआत एक साधारण शिकायत से होती है कि बालक ने माखन चुरा लिया। वह इनकार करता है और तीन तर्क देता है। पहला यह कि वह घर पर था ही नहीं। दूसरा यह कि उसका हाथ छीके तक पहुँच ही नहीं सकता। तीसरा यह कि माखन उसके साथियों ने लगाया। यहाँ तक बात चोरी की ही है। फिर वह कहता है कि माँ ने उसे अपना नहीं समझा। इसी पंक्ति पर बात बदल जाती है। अब सवाल यह नहीं रह जाता कि माखन किसने खाया। सवाल यह हो जाता है कि माँ उसे अपना मानती हैं या नहीं। इसीलिए अंत में उत्तर भी शब्दों से नहीं, गले लगाने से मिलता है।
अंत में बालक रूठ जाता है और कहता है कि यह लो अपनी लाठी और कंबल, मुझे बहुत नचाया जा चुका। इसका अर्थ यह है कि वह गाय चराने का अपना रोज़ का काम ही छोड़ देना चाहता है, और एक बच्चे के लिए इससे बड़ा रूठना नहीं हो सकता। इसके तुरंत बाद यशोदा हँस पड़ती हैं और उसे गले से लगा लेती हैं। इस एक क्रिया में तीन बातें आ जाती हैं। पहली यह कि उन्होंने उसे झूठा नहीं ठहराया। दूसरी यह कि उन्होंने कोई दंड नहीं दिया। तीसरी और सबसे बड़ी यह कि गले लगाकर उन्होंने उसकी सबसे बड़ी शिकायत का उत्तर दे दिया, कि उसे पराया कभी माना ही नहीं गया।
Flashcards (15)
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- तर्कों का क्रम जमाओ
- शब्द और अर्थ
- बालक का तर्क या उसकी शिकायत?
- सच या भ्रम
- झटपट उत्तर
ब्रज के शब्द, वर्ण-परिवर्तन और तुक
पद के पुराने शब्दों के आज के रूप, दो वर्णों की अदला-बदली, और वह तुक जिससे पूरा पद गाया जा सकता है।
What you will be able to do
- पद में आए ब्रजभाषा के शब्दों के अर्थ बताना
- उन शब्दों के आज के रूप लिखना
- वर्ण-परिवर्तन पहचानना और उदाहरण देना
- तुक की पहचान करना और पद की रचना की विशेषताएँ बताना
Key points
यह पद ब्रजभाषा में है, इसलिए इसके कई शब्दों का आज का रूप अलग दिखता है।
पाछे का आज का रूप पीछे है, छोटो का छोटा, कछु का कुछ, और नहिं का नहीं।
बिधि का आज का रूप विधि है, भोरी का भोली, लै का ले, और परे का पड़े।
जब किसी शब्द में एक वर्ण की जगह दूसरा आ जाए और अर्थ वही रहे, उसे वर्ण-परिवर्तन कहते हैं।
भोरी और भोली में र तथा ल आपस में बदले हैं, और परे तथा पड़े में ड़ तथा र।
पद के कठिन शब्दों में उपजि यानी उत्पन्न होना, जिय यानी मन, बहियन यानी बाँहें, और बिहँसि यानी मुसकाना आते हैं।
पंक्तियों के अंतिम शब्दों की अंतिम ध्वनि एक जैसी होने को तुक कहते हैं।
इस पद की हर पंक्ति तुक में बँधी है, और कवि ने अपना नाम अंतिम पंक्ति में रखा है।
Full explanation
भाषा पुरानी है
यह पद ब्रजभाषा में रचा गया है। इसीलिए पढ़ते समय कुछ शब्द अनजाने लगते हैं। पर ध्यान से देखने पर पता चलता है कि अधिकतर शब्द आज के शब्दों से बहुत दूर नहीं हैं, बस एक-दो वर्ण इधर-उधर हैं। इसीलिए पद पहली बार में कठिन लगता है और दूसरी बार में खुलने लगता है।
आज के रूप — पहला जोड़ा
‘पाछे’ को आज हम ‘पीछे’ लिखते हैं और ‘छोटो’ को ‘छोटा’। दोनों में अर्थ बिलकुल वही है, केवल स्वर बदल गया है।
दूसरा जोड़ा
‘कछु’ का आज का रूप ‘कुछ’ है और ‘नहिं’ का ‘नहीं’। पद की पहली ही पंक्ति में ‘नहिं’ आता है, इसलिए यह जोड़ा सबसे पहले सामने पड़ता है।
तीसरा जोड़ा
‘बिधि’ को आज ‘विधि’ लिखा जाता है और ‘लै’ को ‘ले’। ‘केहि बिधि’ का अर्थ हुआ किस प्रकार, यानी बालक पूछ रहा है कि वह छीके तक पहुँचता किस तरह।
वर्ण-परिवर्तन क्या है
कुछ शब्दों में एक वर्ण की जगह दूसरा वर्ण आ जाता है, पर अर्थ वही बना रहता है। इसी को वर्ण-परिवर्तन कहते हैं, और यह किसी भी भाषा में समय के साथ होता रहता है। आज की बोलचाल में भी ऐसे बदलाव सुनने को मिल जाते हैं।
पहला उदाहरण
पद में ‘भोरी’ आया है, जिसका अर्थ है भोली। यहाँ ‘र’ और ‘ल’ आपस में बदल गए हैं। यही इस पाठ का सबसे साफ़ उदाहरण है। दोनों शब्दों का अर्थ एक ही रहता है, केवल एक वर्ण की जगह दूसरा आ गया है।
दूसरा उदाहरण
‘परे’ का आज का रूप ‘पड़े’ है। यहाँ ‘ड़’ और ‘र’ आपस में बदले हैं। इस तरह पद में दो अलग-अलग जोड़े के वर्ण बदलते दिखते हैं। एक ही पद में दो तरह का बदलाव मिल जाना उसे और दिलचस्प बना देता है।
एक चेतावनी
ध्यान रखने की बात यह है कि ‘भोर’ और ‘भोरी’ एक चीज़ नहीं हैं। ‘भोर’ का अर्थ सुबह है और ‘भोरी’ का भोली। दोनों इसी पद में आते हैं, इसलिए जल्दबाज़ी में इन्हें मिला देना आसान है। पढ़ते समय यह देख लेना चाहिए कि शब्द किस पंक्ति में और किसके लिए आया है।
कठिन शब्द — पहला समूह
अब कुछ ऐसे शब्द जिनका आज का रूप बिलकुल अलग है। ‘उपजि’ का अर्थ है उत्पन्न होना, ‘जिय’ का मन, ‘बहियन’ का बाँहें, और ‘जायो’ का जन्मा।
दूसरा समूह
‘पठायो’ का अर्थ है भेज दिया, ‘पतियायो’ का विश्वास किया, ‘भटक्यो’ का इधर-उधर घूमा, और ‘लपटायो’ का मल देना या पोत देना।
तीसरा समूह
‘बिहँसि’ का अर्थ है मुसकाई, ‘जानि’ का जानकर या समझकर, और ‘बिधि’ का प्रकार या रीति। इन्हें जान लेने पर पूरा पद खुल जाता है। यही कारण है कि पुरानी कविता पढ़ते समय सबसे पहले शब्दार्थ देख लेना चाहिए।
तुक क्या होता है
अब रचना की बात। पद की पहली दो पंक्तियों के अंतिम शब्द देखिए — पठायो और आयो। दोनों की अंतिम ध्वनि एक जैसी है। इसी विशेषता को तुक कहते हैं।
पूरे पद में तुक
यह केवल दो पंक्तियों की बात नहीं है। खायो, पठायो, आयो, पायो, लपटायो, पतियायो, जायो, नचायो और लगायो — पद का हर अंतिम शब्द एक ही ध्वनि पर खत्म होता है।
तुक से क्या मिलता है
कवि तुक का सहारा यूँ ही नहीं लेते, इससे रचना का असर बढ़ जाता है। उससे पद गाया जा सकता है और सुनने वाले को जल्दी याद भी हो जाता है। अगली पंक्ति की ध्वनि पहले से मन में बैठी होती है, इसलिए वह अपने आप लौट आती है। यही कारण है कि ये पद सैकड़ों साल बाद भी गाए जाते हैं।
कवि का नाम भीतर ही
पद की एक और विशेषता यह है कि कवि ने अपना नाम अंतिम पंक्ति में ही रख दिया है — ‘सूरदास तब बिहँसि जसोदा’। उस समय की कविता में यह आम बात थी, और इसी से रचयिता का पता चल जाता है। तब रचनाएँ लिखकर कम और गाकर अधिक फैलती थीं, इसलिए नाम भीतर ही रख देना उपयोगी था।
Concepts and terms
ब्रज क्षेत्र की भाषा, जिसमें उस समय बहुत कविता रची गई। सूरदास की सारी रचनाएँ इसी में मिलती हैं, इसलिए पद पढ़ते समय कुछ शब्द अनजाने लगते हैं, पर अर्थ पकड़ में आ जाता है।
पंक्तियों के अंतिम शब्दों की अंतिम ध्वनि का एक जैसा होना। इसी के कारण पद गाया जा सकता है और जल्दी याद भी हो जाता है, इसलिए कवि इसका प्रयोग जान-बूझकर करते हैं।
किसी शब्द में एक वर्ण की जगह दूसरे वर्ण का आ जाना, जबकि अर्थ वही बना रहे। भोरी और भोली में यही हुआ है, जहाँ र और ल आपस में बदल गए हैं।
पद की अंतिम पंक्ति में कवि का अपना नाम रख देने की परंपरा। इसी कारण ‘सूरदास’ शब्द अंतिम पंक्ति में आता है, और उससे रचयिता का पता चल जाता है।
सावधान!
सच या भ्रम?
असल जीवन: दादी की बोली
Scenario:
कक्षा छह के बच्चों को एक काम मिला कि वे घर के सबसे बुज़ुर्ग सदस्य से दस मिनट बातचीत करें और उनकी बोली के शब्द लिखें। मीरा ने अपनी दादी से बात की। दादी ने कहा कि वे बचपन में ‘कछु’ बोलती थीं, ‘दूध’ को ‘दूद’ और ‘पड़ा’ को ‘परा’ कहती थीं। मीरा को पहले लगा कि दादी गलत बोलती हैं। शिक्षिका ने कक्षा में सबकी सूचियाँ बोर्ड पर लिखवाईं। तब दिखा कि अलग-अलग घरों की सूचियों में एक ही तरह के बदलाव बार-बार लौट रहे हैं।
Analysis:
बोर्ड पर लिखते ही एक बात साफ़ हो गई। बदलाव कहीं भी मनमाने नहीं थे। कई शब्दों में ‘ड़’ की जगह ‘र’ आ गया था, और कुछ में ‘ल’ की जगह ‘र’। शिक्षिका ने तब पाठ का पद खोला, जहाँ ‘परे’ का आज का रूप ‘पड़े’ है और ‘भोरी’ का ‘भोली’। बच्चों को समझ आया कि उनकी दादी-नानी की बोली गलत नहीं है, बल्कि उसमें वही बदलाव दिख रहे हैं जो सैकड़ों साल पुरानी कविता में भी मिलते हैं। अंत में सबने मिलकर एक सूची बनाई, जिसमें हर शब्द के दो रूप साथ-साथ लिखे गए।
Activity:
अपने घर के किसी बुज़ुर्ग से पाँच ऐसे शब्द पूछिए जो वे आपसे अलग बोलते हैं। हर शब्द के दो रूप साथ-साथ लिखिए और उनके नीचे लिखिए कि कौन-सा वर्ण बदला है।
घर पर करके देखो
Title:
तुक मिलाओ
Safety:
यह काम केवल लिखने का है।
What You Notice:
एक ही ध्वनि पर खत्म होने वाले शब्द ढूँढ़ना आसान है, पर उनसे अर्थ वाली पंक्ति बनाना कठिन। कवि यही कठिन काम करता है।
Did you know
पद की सभी नौ पंक्तियाँ एक ही ध्वनि पर खत्म होती हैं, इसलिए उसे गाना बहुत आसान है।
कवि का नाम अंतिम पंक्ति में रख देना उस समय की कविता की एक आम पहचान थी।
‘भोरी’ का अर्थ भोली है, पर ‘भोर’ का अर्थ सुबह — दोनों शब्द देखने में मिलते-जुलते हैं और इसी पद में साथ-साथ आते हैं।
Memory tricks
दो वर्ण-परिवर्तन — भोरी से भोली, परे से पड़े — पहले में र और ल बदले, दूसरे में ड़ और र।
तुक की पहचान — सब कुछ -आयो पर — खायो, पठायो, आयो, पायो, लगायो — सबकी अंतिम ध्वनि एक।
Practice MCQs with answers (20)
- A अवधी में
- B मैथिली में
- C ब्रजभाषा में
- D संस्कृत में
Show answer
Why:
सूरदास की सारी रचनाएँ इसी में मिलती हैं।
- A पीछे
- B पाछा
- C पास
- D पाँच
Show answer
Why:
अर्थ दोनों में वही रहता है।
- A छोटी
- B छूटा
- C छोटे
- D छोटा
Show answer
Why:
यह बालक ने अपने लिए कहा है।
- A नहा
- B नहीं
- C नई
- D नहर
Show answer
Why:
यह पद की पहली ही पंक्ति में आता है।
- A बिंदी
- B बीज
- C बिजली
- D विधि
Show answer
Why:
‘केहि बिधि’ यानी किस प्रकार।
- A लाई
- B लय
- C ले
- D लो
Show answer
Why:
यह अंतिम पंक्ति में आता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: ‘भोर’ सुबह है और ‘भोरी’ भोली; एक वर्ण बदलने से अर्थ बदल जाता है।
- A सुबह
- B भोली
- C भारी
- D भूली
Show answer
Why:
यह माँ के लिए कहा गया है।
- A ब और भ
- B र और ल
- C ई और ी
- D भ और म
Show answer
Why:
यही पाठ का सबसे साफ़ उदाहरण है।
- A परा
- B पार
- C पर
- D पड़े
Show answer
Why:
यहाँ ड़ और र बदले हैं।
- A दोनों के अर्थ अलग हैं
- B दोनों का अर्थ एक है
- C दोनों एक ही शब्द हैं
- D दोनों पद में नहीं आते
Show answer
Why:
भोर यानी सुबह, भोरी यानी भोली।
- A उत्पन्न होना
- B उठ जाना
- C उड़ जाना
- D उतर जाना
Show answer
Why:
‘भेद उपजि है’ में यही भाव है।
- A शरीर
- B घर
- C मन
- D समय
Show answer
Why:
‘जिय तेरे’ यानी तुम्हारे मन में।
- A पैर
- B बाँहें
- C आँखें
- D कंधे
Show answer
Why:
इसी से छोटी बाँहों वाला तर्क बनता है।
- A पछताकर चुप रह गया
- B पुकारा
- C पहचाना
- D विश्वास किया
Show answer
Why:
माँ ने दूसरों की बात सच मान ली।
- A मल देना या पोत देना
- B उठा लेना
- C कहीं छिपाकर रख देना या दबा देना
- D फेंक देना
Show answer
Why:
ग्वालों ने मुँह पर यही किया।
- A किसी पंक्ति में शब्दों का उलटा-पुलटा हुआ क्रम
- B पंक्तियों के अंतिम शब्दों की आवाज़ का मिलना
- C किसी एक पंक्ति की कुल लंबाई का माप
- D रचना के अंत में आया कवि का अपना नाम
Show answer
Why:
खायो, जायो, लपटायो, पतियायो - अंत की आवाज़ एक है। यही मिलान तुक कहलाता है।
- A केवल पहली दो में
- B केवल अंतिम दो में
- C आधी पंक्तियों में
- D हर पंक्ति में
Show answer
Why:
सबका अंतिम शब्द एक ही ध्वनि पर खत्म होता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही तुक का काम है। सूरदास के पद गाए जाने के लिए ही रचे गए थे।
- A शीर्षक में
- B पहली पंक्ति में
- C अंतिम पंक्ति में
- D किसी पंक्ति में नहीं
Show answer
Why:
उस समय की कविता में यह आम बात थी।
Important short questions (6)
‘पाछे’ का आज का रूप ‘पीछे’ है और ‘छोटो’ का ‘छोटा’। ‘कछु’ का रूप ‘कुछ’ है और ‘नहिं’ का ‘नहीं’। इन सबका अर्थ वही रहता है, केवल लिखने-बोलने का ढंग बदल गया है।
जब किसी शब्द में एक वर्ण की जगह दूसरा वर्ण आ जाए और अर्थ वही बना रहे, उसे वर्ण-परिवर्तन कहते हैं। पद में ‘भोरी’ आया है, जिसका अर्थ भोली है। यहाँ ‘र’ तथा ‘ल’ आपस में बदले हैं।
पहला जोड़ा र और ल का है, जो ‘भोरी’ तथा ‘भोली’ में दिखता है। दूसरा जोड़ा ड़ और र का है, जो ‘परे’ तथा ‘पड़े’ में दिखता है।
‘भोर’ का अर्थ सुबह है और ‘भोरी’ का अर्थ भोली। दोनों शब्द इसी पद में आते हैं और देखने में मिलते-जुलते हैं, इसलिए इन्हें मिला देना आसान है।
जब पंक्तियों के अंतिम शब्दों की अंतिम ध्वनि एक जैसी हो, उसे तुक कहते हैं। इस पद में पठायो, आयो, पायो और लगायो जैसे शब्द हर पंक्ति के अंत में आते हैं। इन सबकी ध्वनि आपस में मिलती है।
उन्होंने अपना नाम अंतिम पंक्ति में रखा है। उस समय की कविता में यह आम परंपरा थी, और इसी से यह पता चल जाता है कि रचना किसकी है।
Long answer questions (3)
‘उपजि’ का अर्थ है उत्पन्न होना और ‘जिय’ का अर्थ मन। ‘बहियन’ का अर्थ बाँहें है और ‘जायो’ का जन्मा। ‘पठायो’ का अर्थ भेज दिया है और ‘पतियायो’ का विश्वास किया। ‘भटक्यो’ का अर्थ इधर-उधर घूमा है और ‘लपटायो’ का मल देना या पोत देना। ‘बिहँसि’ का अर्थ मुसकाई है और ‘बिधि’ का प्रकार या रीति। ये सब शब्द ब्रजभाषा के हैं, और इन्हें जान लेने पर पूरा पद अपने आप खुल जाता है।
पहली विशेषता यह है कि पद ब्रजभाषा में रचा गया है। इसलिए उसके कई शब्दों का आज का रूप अलग दिखता है, जैसे पाछे का पीछे और कछु का कुछ। दूसरी विशेषता वर्ण-परिवर्तन है। ‘भोरी’ का आज का रूप ‘भोली’ है, जहाँ र और ल बदले हैं। ‘परे’ का रूप ‘पड़े’ है, जहाँ ड़ और र बदले हैं। तीसरी विशेषता यह है कि भाषा कठिन होते हुए भी भाव सरल है, क्योंकि बात एक बच्चे की सफ़ाई की है। चौथी विशेषता कुछ ऐसे शब्द हैं जिनका रूप आज बिलकुल अलग है, जैसे बहियन, पतियायो और बिहँसि।
सबसे बड़ी विशेषता तुक है। पद की हर पंक्ति का अंतिम शब्द एक ही ध्वनि पर खत्म होता है — खायो, पठायो, आयो, पायो, लपटायो, पतियायो, जायो, नचायो और लगायो। इसी कारण पद गाया जा सकता है और सुनने वाले को जल्दी याद हो जाता है। यही कारण है कि ये पद सैकड़ों साल बाद भी गाए जाते हैं। दूसरी विशेषता यह है कि कवि ने अपना नाम अंतिम पंक्ति में ही रख दिया है। उस समय की कविता में यह एक आम पहचान थी। तीसरी विशेषता इसका नाटकीय ढाँचा है, क्योंकि पूरा पद एक ही बालक की बात है और अंत में दृश्य पलट जाता है।
Flashcards (15)
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- पुराना रूप और आज का रूप
- वर्ण-परिवर्तन या सामान्य शब्द?
- सच या भ्रम
- तुक तक पहुँचने का क्रम
- झटपट उत्तर
पहर का हिसाब, सूरदास और सबकी अपनी विशेषता
पुराने समय में घंटे कैसे गिने जाते थे, दूध से घी तक का रास्ता, कवि का परिचय, और यह बात कि हर किसी में कुछ न कुछ खास होता है।
What you will be able to do
- पहर के हिसाब से समय निकालना
- समय बताने वाले शब्दों की पहचान करना
- महाकवि सूरदास का परिचय देना
- यह समझाना कि हर व्यक्ति में कोई न कोई विशेष क्षमता होती है
Key points
एक पहर तीन घंटे का होता है, और एक दिन में कुल आठ पहर होते हैं।
बालक चार पहर बाहर रहा, यानी पूरे बारह घंटे।
यदि वे साँझ छह बजे लौटे, तो घर से सुबह छह बजे निकले होंगे।
‘दोपहर’ शब्द ‘दो पहर’ से बना है, यानी दूसरे पहर के खत्म होने और तीसरे के शुरू होने का समय।
इसी हिसाब से दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग छह बजे होता है।
समय बताने वाले और शब्द भी हैं — कल, ऋतु, वर्ष, पखवाड़ा, दशक, वेला और अवधि।
दूध से दही, दही से मक्खन, और मक्खन से घी बनता है।
महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे, और उनकी विशेष क्षमता उनकी कल्पना शक्ति तथा कविता रचने की कुशलता थी।
Full explanation
घड़ी के बिना समय
पद में कहीं घंटे नहीं गिनाए जाते। फिर भी पूरा दिन साफ़ दिख जाता है, क्योंकि उसमें तीन शब्द आते हैं — भोर, चार पहर और साँझ। यही पुराने समय की गिनती का ढंग था। घड़ी न होने पर भी लोग जानते थे कि दिन कितना बीत चुका है।
पहर क्या है
पहर समय मापने की एक इकाई है। एक पहर तीन घंटे का होता है, और एक दिन में कुल आठ पहर होते हैं। तीन को आठ से गुणा कीजिए तो चौबीस घंटे बन जाते हैं, यानी पूरा दिन।
चार पहर कितने हुए
बालक कहता है कि वह चार पहर बाहर रहा। हर पहर तीन घंटे का है, इसलिए चार पहर हुए बारह घंटे। यानी उसने आधा दिन घर से बाहर बिताया। यही उसका सबसे पहला तर्क भी बनता है।
निकलने का समय
मान लीजिए वह साँझ छह बजे लौटा। बारह घंटे पीछे गिनिए तो सुबह के छह बजते हैं। इसका अर्थ यह कि वह भोर होते ही निकल गया था, ठीक वैसे ही जैसे पद कहता है।
‘दोपहर’ में छिपा पहर
हम रोज़ ‘दोपहर’ बोलते हैं। यह शब्द ‘दो पहर’ से बना है। यह वह समय है जब दूसरा पहर खत्म होता है और तीसरा शुरू होता है।
वह कितने बजे होता है
दोपहर तब मानी जाती है जब सूरज ठीक सिर के ऊपर चढ़ आता है, यानी लगभग बारह बजे। अब पीछे गिनिए — दो पहर यानी छह घंटे। इसका अर्थ यह कि दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग छह बजे होता है।
समय के और शब्द
समय बताने के लिए हमारे पास और भी शब्द हैं। कल, ऋतु, वर्ष, पखवाड़ा, दशक, वेला और अवधि — ये सब किसी न किसी लंबाई का समय बताते हैं। पखवाड़ा पंद्रह दिन का होता है और दशक दस वर्ष का। इनमें से कुछ शब्द आज भी रोज़ बोले जाते हैं और कुछ केवल किताबों में मिलते हैं।
माखन कहाँ से आता है
पद पूरा माखन के इर्द-गिर्द घूमता है, इसलिए यह जान लेना ठीक रहेगा कि वह बनता कैसे है। पहले दूध जमकर दही बनता है। फिर दही मथने पर मक्खन ऊपर आ जाता है, और उसी मक्खन को गरम करके घी तैयार होता है।
क्रम याद रखिए
यह क्रम बदलता नहीं — दूध, दही, मक्खन, घी। इसी कारण छीके में दूध और दही रखे जाते थे, और उन्हीं तक पहुँचने का आरोप बालक पर लगा। यानी पद की पूरी घटना इसी घरेलू व्यवस्था पर टिकी है।
कवि कौन थे
अब रचयिता की बात। महाकवि सूरदास का जन्म पंद्रहवीं शताब्दी में हुआ माना जाता है और मृत्यु सोलहवीं शताब्दी में।
उनका जीवन
उन्होंने अपना अधिकांश जीवन मथुरा और गोवर्धन सहित ब्रज के क्षेत्रों में बिताया, और वहीं श्रीकृष्ण के गुणगान में भजन गाते रहे। उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में मिलती हैं।
उनकी कविता
उनके पदों में सबसे अधिक जगह श्रीकृष्ण के बचपन को मिली है। वे उन दृश्यों को इतने सजीव ढंग से रखते हैं कि पढ़ने वाला उन्हें अपने सामने देखने लगता है। यही कारण है कि सैकड़ों साल बाद भी ये पद घर-घर गाए जाते हैं, और इसी ऊँचाई के कारण उन्हें महाकवि कहा जाता है।
हम सब विशेष हैं
पाठ अंत में एक बड़ी बात कहता है। सूरदास दृष्टिबाधित थे, फिर भी वे मन से देख लेते थे। उसी देखे हुए को वे शब्दों में उतार देते थे, इसलिए उनके पद पूरे दृश्य की तरह खुलते हैं। यही उनकी विशेष क्षमता थी। जो आँखों से नहीं देखा जा सकता था, वह उन्होंने मन से देखकर लिख दिया।
सबके पास एक क्षमता
पाठ कहता है कि हर किसी के भीतर कोई न कोई ऐसी बात रहती है जो उसे बाकी सबसे अलग कर देती है। और एक क्षमता तो सबके पास है — सबकी सहायता करना और सबके भले के लिए सोचना। इसी के सहारे किसी साथी को पाठ समझाया जा सकता है, किसी को पढ़कर सुनाया जा सकता है, और किसी के साथ चलकर उसका साथ दिया जा सकता है।
Concepts and terms
समय मापने की एक पुरानी इकाई, जो तीन घंटे की होती है। एक दिन में आठ पहर होते हैं, इसलिए घड़ी न होने पर भी लोग दिन को आठ हिस्सों में बाँटकर काम तय कर लेते थे।
‘दो पहर’ से बना शब्द। यह वह समय है जब दूसरा पहर खत्म होता है और तीसरा शुरू होता है, यानी लगभग बारह बजे, जब सूर्य सिर पर आ जाता है।
वह व्यक्ति जिसे देखने में बाधा हो। सूरदास दृष्टिबाधित थे, फिर भी उन्होंने शब्दों से ऐसे चित्र खींचे कि पढ़ने वाले को पूरा दृश्य दिखाई देने लगता है।
वह बात जो किसी व्यक्ति को दूसरों से अलग बनाती है। पाठ कहता है कि यह हर किसी में होती है, और एक क्षमता तो सबके पास है — दूसरों की सहायता करना।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
कक्षा ने पहर का हिसाब लगाया। एक दिन-रात में आठ पहर होते हैं। बच्चों ने चौबीस को आठ से भाग दिया और तीन घंटे निकले। फिर उन्होंने दूध से घी तक का रास्ता लिखा। दूध जमकर दही बना, दही बिलोने पर मक्खन आया, और मक्खन तपाने पर घी बना। हर पड़ाव में समय लगता है। सना ने कहा कि माखन बीच का पड़ाव है। इसीलिए वह ताज़ा और मीठा होता है। अध्यापिका ने कहा कि हर चीज़ अपने पड़ाव पर सबसे अच्छी लगती है।
Analysis:
आठ पहर और चार पड़ाव, दोनों गिनती की बात हैं। बालक जिस माखन के पीछे है, वह बीच का पड़ाव है, न दूध और न घी।
Activity:
घर में दही जमने में लगने वाला समय पता करो। दूध से घी तक के चारों पड़ाव और उनका समय लिखो।
घर पर करके देखो
Title:
अपना दिन पहरों में
Safety:
यह काम केवल लिखने का है।
What You Notice:
दिन को पहरों में बाँटते ही वह गिनने लायक हो जाता है। पद का बालक भी अपना दिन इसी तरह गिनाकर अपनी बात सिद्ध करता है।
Did you know
घड़ी के बिना भी लोग दिन को आठ बराबर हिस्सों में बाँटकर अपना काम तय कर लेते थे।
‘दोपहर’ शब्द आज भी रोज़ बोला जाता है, और उसमें वही पुराना ‘पहर’ छिपा हुआ है।
पखवाड़ा पंद्रह दिन का होता है और दशक दस वर्ष का — दोनों समय बताने वाले शब्द हैं।
Memory tricks
पहर का हिसाब — एक पहर तीन, दिन में आठ — तीन घंटे का एक पहर, और आठ पहर का पूरा दिन।
दूध से घी तक — दूध-दही-मक्खन-घी — इसी क्रम में एक से दूसरा बनता है।
Practice MCQs with answers (20)
- A तीन घंटे
- B एक घंटा
- C छह घंटे
- D बारह घंटे
Show answer
Why:
यह समय मापने की एक पुरानी इकाई है।
- A चार
- B छह
- C आठ
- D बारह
Show answer
Why:
तीन को आठ से गुणा करने पर चौबीस घंटे बनते हैं।
- A छह घंटे
- B बारह घंटे
- C आठ घंटे
- D चौबीस घंटे
Show answer
Why:
यानी उसने आधा दिन बाहर बिताया।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही गिनती पूरी कर देता है। एक पहर तीन घंटे का है, इसलिए चार पहर बारह घंटे के।
- A दो घड़ी का समय
- B दो पहर का समय
- C दिन का अंत
- D दो दिन का समय
Show answer
Why:
तब दूसरा पहर खत्म और तीसरा शुरू होता है।
- A बारह बजे
- B दो बजे
- C चार बजे
- D दस बजे
Show answer
Why:
तब सूर्य सिर पर आ जाता है।
- A चार बजे
- B आठ बजे
- C छह बजे
- D दस बजे
Show answer
Why:
दोपहर से छह घंटे पीछे गिनने पर यही आता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: पखवाड़ा पंद्रह दिन का होता है, यानी महीने का आधा भाग।
- A सात दिन
- B पंद्रह दिन
- C तीस दिन
- D साठ दिन
Show answer
Why:
यानी लगभग आधा महीना।
- A पाँच वर्ष
- B बीस वर्ष
- C सौ वर्ष
- D दस वर्ष
Show answer
Why:
यह भी समय बताने वाला शब्द है।
- A दूध से
- B मक्खन से
- C घी से
- D पानी से
Show answer
Why:
उसके बाद दही से मक्खन निकलता है।
- A दूध से सीधे
- B दही से सीधे
- C मक्खन से
- D पानी से
Show answer
Why:
क्रम है दूध, दही, मक्खन, घी।
- A चौदहवीं
- B सोलहवीं
- C पंद्रहवीं
- D सत्रहवीं
Show answer
Why:
उनकी मृत्यु सोलहवीं शताब्दी में हुई।
- A काशी के पुराने घाटों के आसपास
- B ब्रज के क्षेत्रों में
- C अवध में
- D मिथिला में
Show answer
Why:
मथुरा और गोवर्धन इसी क्षेत्र में हैं।
- A व्यापार
- B खेती
- C बच्चों को शिक्षा देते रहना
- D श्रीकृष्ण के भजन गाना
Show answer
Why:
उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में मिलती हैं।
- A बड़े-बड़े युद्धों और वीरों का
- B श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का
- C ऋतुओं का
- D नगरों का
Show answer
Why:
इसीलिए वे आज भी प्रेम से गाई जाती हैं।
- A उनकी रचनाओं की उत्कृष्टता के ही कारण
- B उनकी बहुत लंबी आयु हो जाने के कारण
- C उनके किसी राजदरबार में रहने के कारण
- D उनके अनेक भाषाएँ जानने और बोलने के कारण
Show answer
Why:
महाकवि की उपाधि रचना से मिलती है, आयु या पद से नहीं। सूरदास के पद आज भी गाए जाते हैं।
- A चित्र बनाने की कला
- B सबसे तेज़ चलने और दौड़ने की अपनी क्षमता
- C गिनती की कुशलता
- D कल्पना शक्ति और कविता रचने की कुशलता
Show answer
Why:
वे दृष्टिबाधित थे, फिर भी शब्दों से दृश्य खींच दिए।
- A केवल कवियों में
- B केवल बड़ों में
- C केवल विद्वानों में
- D हर व्यक्ति में
Show answer
Why:
हर किसी में कुछ न कुछ अलग होता है।
- A ऊँचा गाना
- B बहुत सुंदर अक्षरों में लिखना
- C तेज़ दौड़ना
- D दूसरों की सहायता करना
Show answer
Why:
पाठ इसी बात पर समाप्त होता है।
Important short questions (6)
एक पहर तीन घंटे का होता है। बालक चार पहर बाहर रहा, इसलिए तीन को चार से गुणा करने पर बारह घंटे निकलते हैं, यानी उसने आधा दिन घर से बाहर बिताया।
यह ‘दो पहर’ से बना है। यह वह समय है जब दूसरा पहर खत्म होता है और तीसरा शुरू होता है, यानी लगभग बारह बजे, जब सूर्य सिर पर आ जाता है।
दोपहर लगभग बारह बजे होती है और उस समय तक दो पहर बीत चुके होते हैं। दो पहर यानी छह घंटे, इसलिए छह घंटे पीछे गिनने पर पहले पहर का प्रारंभ लगभग छह बजे निकलता है।
सबसे पहले दूध से दही जमाया जाता है। फिर उस दही से मक्खन निकाला जाता है। अंत में उसी मक्खन से घी बनाया जाता है, इसलिए क्रम रहता है दूध, दही, मक्खन और घी।
उनका जन्म पंद्रहवीं शताब्दी में और मृत्यु सोलहवीं शताब्दी में मानी जाती है। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन मथुरा तथा गोवर्धन सहित ब्रज के क्षेत्रों में बिताया और वहीं भजन गाते रहे। उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में मिलती हैं।
पाठ यह कहना चाहता है कि हर किसी के भीतर कोई खूबी छिपी रहती है। सूरदास देख नहीं सकते थे, फिर भी मन से दृश्य गढ़ लेना ही उनकी अपनी खूबी थी।
Long answer questions (3)
सबसे पहले यह जान लेना ज़रूरी है कि एक पहर तीन घंटे का होता है। पूरे दिन में आठ पहर होते हैं। पद कहता है कि बालक चार पहर बाहर रहा, इसलिए तीन को चार से गुणा करने पर बारह घंटे निकलते हैं। अब मान लीजिए वह साँझ छह बजे लौटा। बारह घंटे पीछे गिनने पर सुबह के छह बजते हैं। यानी वह भोर होते ही निकल गया था, ठीक वैसे ही जैसे पद की दूसरी पंक्ति कहती है। इसी हिसाब से यह भी निकलता है कि दिन का पहला पहर लगभग छह बजे शुरू होता है, क्योंकि दो पहर बीतने पर दोपहर के बारह बज जाते हैं।
उनका जन्म पंद्रहवीं शताब्दी में हुआ माना जाता है और मृत्यु सोलहवीं में। जीवन का बड़ा हिस्सा उन्होंने मथुरा और आसपास के ब्रज इलाकों में बिताया। वहीं वे श्रीकृष्ण के भजन गाते रहे, और उनकी सारी रचनाएँ ब्रजभाषा में मिलती हैं। उनके पदों में सबसे अधिक जगह श्रीकृष्ण के बचपन को मिली है। ये पद आज भी दो कारणों से गाए जाते हैं। पहला यह कि इनमें तुक है, इसलिए वे गाने लायक हैं। दूसरा यह कि इनका भाव इतना सरल है कि हर उम्र का व्यक्ति उससे जुड़ जाता है। इसी ऊँचाई के कारण उन्हें महाकवि कहा जाता है।
पाठ कहता है कि हर व्यक्ति के भीतर कोई न कोई ऐसी खूबी छिपी रहती है जो उसे दूसरों से अलग कर देती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण स्वयं सूरदास हैं। वे दृष्टिबाधित थे, यानी देखने में उन्हें बाधा थी। फिर भी उनकी कल्पना शक्ति ऐसी थी कि उन्होंने शब्दों से ऐसे दृश्य खींच दिए जो पढ़ने वाले को दिखाई देने लगते हैं। पाठ यहीं नहीं रुकता। वह यह भी कहता है कि एक क्षमता सबके पास होती है, और वह है दूसरों की सहायता करना। इसी के सहारे किसी साथी को पाठ समझाया जा सकता है, किसी को पढ़कर सुनाया जा सकता है, और किसी के साथ चलकर उसका साथ दिया जा सकता है।
Flashcards (15)
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- दूध से घी तक का क्रम
- शब्द और समय की लंबाई
- समय का शब्द या वस्तु का?
- सच या भ्रम
- झटपट उत्तर
Class 6 Hindi Chapter 9 — frequently asked questions
वह समय की बात करता है। भोर होते ही उसे गायों के साथ मधुबन भेज दिया गया था। वह चार पहर बाहर रहा और साँझ ढले ही लौटा, इसलिए घर पर था ही नहीं।
इसमें किसी गवाह की ज़रूरत नहीं पड़ती। छीका ऊँचाई पर लटकता है और बालक छोटा है, जिसकी बाँहें भी छोटी हैं। बात केवल ऊँचाई की है, जिसे कोई भी देखकर समझ सकता है।
वह कहता है कि ग्वाल-बाल उससे बैर रखते हैं। उन्हीं ने ज़बरदस्ती उसके मुँह पर माखन पोत दिया, ताकि देखने वाले को लगे कि चोरी उसी ने की है।
‘पाछे’ का आज का रूप ‘पीछे’ है और ‘छोटो’ का ‘छोटा’। ‘कछु’ का रूप ‘कुछ’ है और ‘नहिं’ का ‘नहीं’। इन सबका अर्थ वही रहता है, केवल लिखने-बोलने का ढंग बदल गया है।
जब किसी शब्द में एक वर्ण की जगह दूसरा वर्ण आ जाए और अर्थ वही बना रहे, उसे वर्ण-परिवर्तन कहते हैं। पद में ‘भोरी’ आया है, जिसका अर्थ भोली है। यहाँ ‘र’ तथा ‘ल’ आपस में बदले हैं।
पहला जोड़ा र और ल का है, जो ‘भोरी’ तथा ‘भोली’ में दिखता है। दूसरा जोड़ा ड़ और र का है, जो ‘परे’ तथा ‘पड़े’ में दिखता है।
एक पहर तीन घंटे का होता है। बालक चार पहर बाहर रहा, इसलिए तीन को चार से गुणा करने पर बारह घंटे निकलते हैं, यानी उसने आधा दिन घर से बाहर बिताया।
यह ‘दो पहर’ से बना है। यह वह समय है जब दूसरा पहर खत्म होता है और तीसरा शुरू होता है, यानी लगभग बारह बजे, जब सूर्य सिर पर आ जाता है।
दोपहर लगभग बारह बजे होती है और उस समय तक दो पहर बीत चुके होते हैं। दो पहर यानी छह घंटे, इसलिए छह घंटे पीछे गिनने पर पहले पहर का प्रारंभ लगभग छह बजे निकलता है।
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