Class 7 Hindi Chapter 6: गिरिधर कविराय की कुंडलिया
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बिना बिचारे का परिणाम
पहली कुंडलिया कहती है कि बिना सोचे किया काम बाद में पछतावा देता है। अपना काम बिगड़ता है, दुनिया हँसती है और मन का चैन चला जाता है। फिर अच्छा खान-पान और सम्मान भी मन को नहीं भाता।
What you will be able to do
- मैं पहली कुंडलिया का अर्थ अपने शब्दों में बता सकता/सकती हूँ।
- मैं बिना सोचे काम करने के चार नुक़सान गिना सकता/सकती हूँ।
- मैं खटकना और टरत न टारे जैसे शब्दों का अर्थ समझा सकता/सकती हूँ।
- मैं आज के जीवन से जल्दबाज़ी के दो उदाहरण दे सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि ठगी वाले संदेशों में यह सीख कैसे काम आती है।
Key points
जो बिना सोचे काम करता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है।
पहला नुक़सान यह है कि अपना ही काम बिगड़ जाता है।
दूसरा नुक़सान यह है कि दुनिया में हँसी होती है।
तीसरा नुक़सान यह है कि मन का चैन चला जाता है।
चैन जाने पर अच्छा खान-पान, सम्मान और राग-रंग भी मन को नहीं भाते।
कवि कहते हैं कि यह दुख हटाने पर भी नहीं हटता।
बिना सोचे किया काम मन में काँटे की तरह चुभता रहता है।
कुंडलिया जिस शब्द से शुरू होती है, उसी पर समाप्त भी होती है।
यही सीख आज के झाँसे वाले संदेशों पर भी सीधी लागू होती है।
Full explanation
कुंडलिया क्या है
कुंडलिया छह पंक्तियों का छंद है। इसमें पहले दोहे की दो पंक्तियाँ आती हैं और उसके बाद रोला की चार पंक्तियाँ। इसकी सबसे मज़ेदार पहचान यह है कि जिस शब्द से यह शुरू होती है, वही शब्द अंत में भी आता है। इसी से कुंडली की तरह एक गोल घेरा बन जाता है।
पहली पंक्ति की बात
कुंडलिया की शुरुआत इस बात से होती है कि जो बिना सोचे-समझे कोई काम कर देता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। यहाँ कवि किसी ख़ास व्यक्ति का नाम नहीं लेते। वे सबके लिए एक नियम रख देते हैं।
पहला नुक़सान, अपना काम
अगली बात यह है कि ऐसा व्यक्ति अपना ही काम बिगाड़ लेता है। ध्यान देने की बात यह है कि नुक़सान पहले दूसरों का नहीं होता। सबसे पहले अपना काम हाथ से निकलता है।
दूसरा नुक़सान, हँसी
इसके बाद दुनिया में हँसी होती है। लोग उस भूल की चर्चा करने लगते हैं। कवि इसे दूसरे नंबर पर रखते हैं, क्योंकि यह अपने बिगड़े काम के बाद आती है।
कड़ी से कड़ी जुड़ती है
कुंडलिया में एक सुंदर चाल है। जग में होत हँसाय, यह बात पहले दोहे के अंत में आती है और फिर अगली पंक्ति की शुरुआत बन जाती है। इसी तरह कड़ी से कड़ी जुड़ती चली जाती है और पूरी रचना एक साँस जैसी लगती है।
तीसरा नुक़सान, मन का चैन
सबसे भारी नुक़सान तीसरा है। कवि कहते हैं कि मन में चैन ही नहीं रहता। यह बाहर का नुक़सान नहीं है, भीतर का है। इसी कारण इसे कोई देख भी नहीं पाता।
सुख भी बेस्वाद हो जाता है
चैन जाने पर क्या होता है, यह कवि एक पंक्ति में बता देते हैं। अच्छा खान-पान, मिलने वाला सम्मान और राग-रंग, यानी गाना-बजाना, कुछ भी मन को नहीं भाता। जिसके भीतर बेचैनी है, उसके लिए मिठाई भी फीकी हो जाती है।
यह दुख हटता नहीं
अब कवि अपना नाम लेकर एक निष्कर्ष देते हैं। वे कहते हैं कि यह दुख हटाने पर भी नहीं हटता। इसी को वे टरत न टारे कहते हैं। कोई बहाना या भुलाना इसे मिटा नहीं पाता।
खटकना शब्द का कमाल
अंतिम पंक्ति में सबसे सटीक शब्द आता है, खटकना। जो काम बिना सोचे किया गया, वह मन में काँटे की तरह चुभता रहता है। काँटा छोटा होता है, पर चुभता बार-बार है। कवि एक ही शब्द से यही बात कह देते हैं।
घेरा पूरा होता है
कुंडलिया जिस बिना बिचारे से शुरू हुई थी, उसी पर समाप्त हो जाती है। यह केवल सजावट नहीं है। इससे पढ़ने वाले के मन में वही बात दो बार बैठ जाती है, एक बार चेतावनी के रूप में और एक बार निष्कर्ष के रूप में।
सीख का क्रम
पूरी कुंडलिया में नुक़सान एक क्रम में आते हैं। पहले पछतावा, फिर अपना बिगड़ा काम, फिर दुनिया की हँसी और अंत में मन की बेचैनी। कवि हल्की बात से शुरू करके भारी बात तक पहुँचते हैं, इसलिए सीख धीरे-धीरे गहरी होती जाती है।
दोहा और रोला
कुंडलिया दो छंदों को जोड़कर बनती है। पहला भाग दोहा है, जिसमें दो पंक्तियाँ होती हैं और पूरी बात उन्हीं में कह दी जाती है। दूसरा भाग रोला है, जिसमें चार पंक्तियाँ होती हैं। रोला उसी बात को खोलकर समझाता है और उसके नतीजे गिनाता है। इसी कारण कुंडलिया में पहले बीज जैसी बात आती है और फिर उसका पूरा पेड़ खड़ा होता है।
पंक्तियों की लय
इन कुंडलियों को बोलकर पढ़ने से एक बात और पकड़ में आती है। दोनों की पहली दो पंक्तियाँ बोलने में बराबर समय लेती हैं। इसी बराबरी से उनमें लय बन जाती है और वे गाने जैसी लगने लगती हैं। पंक्ति के अंतिम शब्दों की ध्वनि भी आपस में मिलती-जुलती है, जैसे पछिताय और हँसाय। जो बात लय में कही जाती है, वह जल्दी याद रह जाती है, और यही कारण है कि ये पंक्तियाँ लोगों की ज़ुबान पर चढ़ गईं।
आज के जीवन में
यह बात सैकड़ों साल पहले कही गई थी, फिर भी आज काम आती है। बिना हेलमेट बाइक चलाना, बिना पढ़े कोई काग़ज़ पर हस्ताक्षर कर देना, या बिना जाँचे कोई ख़बर आगे भेज देना, सब इसी के उदाहरण हैं।
झाँसे वाले संदेश
आज फ़ोन पर कई झाँसे वाले संदेश आते हैं। कोई कहता है कि लॉटरी लगी है, पहले कुछ पैसे भेजो। कोई कहता है कि खाता बंद हो रहा है, तुरंत जानकारी दो। ये संदेश जल्दबाज़ी पैदा करते हैं, क्योंकि जल्दी में आदमी सोचता नहीं।
बचने का सीधा तरीक़ा
बचने का रास्ता कुंडलिया ही बता देती है, पहले विचार करो। किसी अनजान को पैसे मत भेजो, किसी लिंक पर जल्दी में क्लिक मत करो और ओ.टी.पी. किसी को मत बताओ। कोई संदेह हो तो बैंक से या घर के बड़ों से पूछ लो।
यही बात क्यों चली
गिरिधर कविराय की पंक्तियाँ इसलिए चल पड़ीं कि वे सीधी भाषा में कही गई हैं। उनमें कोई कठिन उपदेश नहीं है। घर-गृहस्थी के साधारण व्यवहार की बातें वे ऐसे कह देते हैं कि सुनने वाला उन्हें कहावत की तरह याद रख लेता है।
Concepts and terms
छह पंक्तियों का एक छंद, जिसमें पहले दो पंक्तियों का दोहा और फिर चार पंक्तियों की रोला जुड़ती है। इसकी ख़ास पहचान यह है कि जिस शब्द से यह शुरू होती है, उसी शब्द पर समाप्त भी होती है।
ऐसी रचना जो जीवन जीने का कोई नियम बताती है। गिरिधर कविराय के ऐसे पद लोगों में इतने फैले कि आज वे कहावत की तरह बोले जाते हैं।
चित्त का अर्थ मन है और चैन का अर्थ शांति। कुंडलिया कहती है कि भूल का सबसे भारी असर बाहर नहीं, मन के भीतर दिखता है।
किसी बात का बार-बार मन में चुभना। कवि इसी शब्द से बताते हैं कि गलती का दुख एक बार में नहीं जाता, वह लौट-लौटकर याद आता है।
हटाने पर भी न हटना। यह बताता है कि अपनी ही जल्दबाज़ी से आया दुख किसी बहाने या भुलाने से दूर नहीं होता।
यहाँ ध्यान रखिए
आम भ्रम
एक छोटा प्रसंग
Scenario:
सातवीं कक्षा के अरमान के फ़ोन पर एक संदेश आया कि उसके पिताजी के खाते में पाँच सौ रुपये ग़लती से चले गए हैं, और वे तुरंत वापस भेज दिए जाएँ। संदेश में एक नंबर भी दिया था। अरमान घबरा गया और उसने सोचा कि पिताजी नाराज़ होंगे। उसने जल्दी में उस नंबर पर पैसे भेजने के लिए घर का क्यू.आर. कोड स्कैन कर लिया और ओ.टी.पी. भी बता दिया। आधे घंटे बाद खाते से दो हज़ार रुपये कट गए। शाम को पिताजी ने बताया कि कोई पैसा उनके खाते में आया ही नहीं था। अरमान को पूरी रात नींद नहीं आई और वह बार-बार सोचता रहा कि उसने पूछ क्यों नहीं लिया।
Analysis:
यह प्रसंग कुंडलिया की हर कड़ी को आज के रूप में दिखा देता है। अरमान ने बिना विचार किए काम किया, और नुक़सान ठीक उसी क्रम में आया। पहले उसका अपना काम बिगड़ा, क्योंकि पैसे चले गए। फिर घर में बात खुली, जो दुनिया की चर्चा जैसी है। अंत में उसे नींद नहीं आई, यानी मन का चैन चला गया। बार-बार यही सोचना कि पूछ क्यों नहीं लिया, वही खटकना है जिसकी बात कवि करते हैं। ध्यान देने की बात यह भी है कि संदेश में तुरंत शब्द था, और यही शब्द उसे सोचने से रोक गया।
Activity:
अपनी कॉपी में ऐसे चार संदेश लिखिए जो जल्दबाज़ी पैदा करते हैं। हर संदेश के सामने लिखिए कि उसमें कौन-सा शब्द जल्दी कराता है और आप उसके बदले क्या करेंगे।
रुककर सोचो, फिर करो
Title:
रुककर सोचो, फिर करो
Safety:
पर्ची पर किसी साथी का नाम न लिखिए, वरना किसी का मन दुखी हो सकता है।
What You Notice:
आप देखेंगे कि अधिकतर पर्चियों में नुक़सान एक ही क्रम से आता है, पहले अपना काम बिगड़ता है और अंत में मन बेचैन होता है। यही क्रम कुंडलिया में भी है, और इसी से उसकी बात आज भी सच लगती है।
Did you know
गिरिधर कविराय ने यह भी बताया कि लाठी जैसी साधारण चीज़ कितने काम आती है।
उनकी पंक्तियाँ कहावत बनकर आज भी बातचीत में सुनाई देती हैं।
कुंडलिया पढ़ते समय लगता है, मानो कवि हमसे सीधी बातचीत कर रहे हैं।
Memory tricks
चार नुक़सान — पछतावा, काम बिगड़ना, हँसी और चैन जाना।
कुंडलिया की पहचान — जिस शब्द से शुरू, उसी शब्द पर अंत।
Practice MCQs with answers (25)
- A चार
- B छह
- C आठ
- D दो
Show answer
Why:
पहले दोहे की दो पंक्तियाँ, फिर रोला की चार।
- A इसमें कवि का नाम नहीं आता
- B यह सदा प्रश्न से शुरू होती है
- C आरंभ का शब्द अंत में लौट आता है
- D इसमें कोई तुक नहीं मिलती
Show answer
Why:
इसी से कुंडली जैसा गोल घेरा बन जाता है।
- A गिरिधर कविराय
- B मैथिलीशरण गुप्त
- C स्वयं प्रकाश
- D हरिऔध
Show answer
Why:
वे अठारहवीं सदी में जन्मे थे और अपनी कुंडलियों के लिए याद किए जाते हैं।
- A फिर से काम करना पड़ता है
- B किसी से सहायता लेनी पड़ती है
- C काम छोड़ देना पड़ता है
- D आगे चलकर पछताना पड़ता है
Show answer
Why:
यही बात कुंडलिया की पहली ही पंक्ति में आ जाती है।
- A पड़ोसी का
- B अपना ही
- C मित्रों का
- D घरवालों का
Show answer
Why:
आपनो शब्द इसी बात को पक्का कर देता है।
- A सबसे पहले
- B सबसे अंत में
- C अपना काम बिगड़ने के बाद
- D मन का चैन चले जाने के बाद
Show answer
Why:
पहले अपना नुक़सान, फिर दुनिया की चर्चा।
- A चित्र
- B शरीर
- C घर
- D मन
Show answer
Why:
कुंडलिया कहती है कि भूल का सबसे भारी असर मन पर पड़ता है।
- A शांति
- B धन
- C भोजन
- D यात्रा
Show answer
Why:
चैन न रहने का अर्थ है मन की शांति चली जाना।
- A घर, गाँव और खेत
- B खान-पान, सम्मान और राग-रंग
- C पढ़ाई, खेल और नींद
- D वस्त्र, गहने और बहुत सारा धन
Show answer
Why:
जिसके भीतर बेचैनी है, उसके लिए मिठाई भी फीकी हो जाती है।
- A रंगों की अपनी पहचान
- B कपड़ों की रंगाई का काम
- C गाना-बजाना और आनंद
- D चित्र बनाना
Show answer
Why:
यह मनोरंजन के साधनों की ओर संकेत करता है।
- A धीरे-धीरे घटकर मिट जाना
- B अपने आप चला जाना
- C किसी के कहने पर मिट जाना
- D हटाने पर भी न हटना
Show answer
Why:
कवि इसी से बताते हैं कि यह दुख किसी बहाने से नहीं मिटता।
- A काँटे की, जो बार-बार चुभता है
- B घंटी की, जो एक बार बजती है
- C दीपक की, जो जलता रहता है
- D नदी की, जो बहती रहती है
Show answer
Why:
काँटा छोटा होता है, पर चुभन बार-बार लौटती है।
- A कोई जीत या विजय
- B मन या हृदय
- C जीवन भर का साथ
- D जीभ या ज़बान
Show answer
Why:
जिय माहिं का अर्थ है मन के भीतर।
- A कुंडलिया के बाहर, सबसे नीचे की ओर
- B सबसे पहली ही पंक्ति के भीतर ही
- C शीर्षक में
- D निष्कर्ष वाली पंक्ति के भीतर
Show answer
Why:
कह गिरिधर कविराय कहकर वे अपनी बात पर मुहर लगा देते हैं।
- A एक बार
- B तीन बार
- C दो बार
- D चार बार
Show answer
Why:
दोहे के अंत में और फिर अगली पंक्ति की शुरुआत में।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है। दोहराने से तुक टूटती नहीं, पूरी रचना एक साँस जैसी जुड़ी लगती है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। दूसरा कथन कुंडलिया में नहीं है; वहाँ दूसरा नुक़सान दुनिया में होने वाली हँसी है।
- A पछिताय
- B हरषाय
- C लजियाय
- D बिसराय
Show answer
Why:
यही पंक्ति आगे कहावत की तरह बोली जाने लगी।
- A कोई कहानी सुनाने वाला पद
- B जीवन का कोई नियम बताने वाला पद
- C किसी राजा की प्रशंसा वाला पद
- D केवल मनोरंजन वाला पद
Show answer
Why:
गिरिधर कविराय के ऐसे पद आगे कहावत बन गए।
- A वे सीधी और सरल भाषा में कही गई थीं, इसलिए याद रह गईं
- B उन्हें बड़े राजाओं के दरबारों में गाकर सुनाया जाता था
- C वे बहुत कठिन भाषा में थीं, इसलिए लोग उन्हें रटते रहे
- D वे इतनी लंबी थीं कि उनमें हर विषय की बात आ जाती थी
Show answer
Why:
कुंडलिया की बात घर की बोली जैसी है और आरंभ का शब्द अंत में लौट आता है। ऐसी पंक्ति सुनने वाले को अपने आप याद रह जाती है।
- A ग़लत, कवि चैन जाने को सबसे भारी बताते हैं
- B सही, हँसी सबसे बुरी बात है
- C सही, क्योंकि हँसी तो सबके सामने ही होती है
- D ग़लत, कवि दोनों को बराबर मानते हैं
Show answer
Why:
क्रम में हँसी पहले आती है और चैन जाना अंत में, यानी वही सबसे गहरा है।
- A कि घर के सब बड़ों का आदर करो
- B कि समय पर काम करो
- C कि पहले विचार करो, फिर करो
- D कि कम बोलो
Show answer
Why:
झूठी ख़बर फैलाने पर बाद में पछताना ही पड़ता है।
- A तुरंत पैसे भेज देने चाहिए
- B अपना खाता नंबर बता देना चाहिए
- C यह संदेश अपने मित्रों को भी भेज देना चाहिए
- D पैसे न भेजकर बड़ों या बैंक से पूछना चाहिए
Show answer
Why:
ऐसे संदेश जल्दबाज़ी पैदा करते हैं, और जल्दी में आदमी सोचता नहीं।
- A पढ़ाई की कमी का
- B घर की दूरी का
- C जल्दबाज़ी का
- D भाषा की कठिनाई का
Show answer
Why:
इसीलिए उनमें अभी, तुरंत जैसे शब्द बार-बार आते हैं।
- A पहले उस लिंक पर क्लिक करके देख ही लेना
- B रुककर जाँच करना और बड़ों से पूछ लेना
- C वह संदेश मिटा देना और उसे पूरी तरह भूल जाना
- D मित्रों से उसे खोलवाना
Show answer
Why:
संदेह होने पर बैंक से सीधे संपर्क करना सबसे सही रहता है।
Important short questions (7)
इसमें छह पंक्तियाँ होती हैं, पहले दोहा और फिर रोला। दूसरी विशेषता यह है कि जिस शब्द से यह शुरू होती है, उसी पर समाप्त होती है।
पहले पछतावा होता है, फिर अपना काम बिगड़ता है। इसके बाद दुनिया में हँसी होती है और अंत में मन का चैन चला जाता है।
क्योंकि जल्दबाज़ी का पहला असर अपने ऊपर ही पड़ता है। दुनिया की चर्चा उसके बाद आती है।
खान-पान, सम्मान और राग-रंग पर। बेचैन मन को ये तीनों भी अच्छे नहीं लगते।
क्योंकि यह काँटे की चुभन जैसा भाव देता है। काँटा छोटा होता है, पर बार-बार चुभता है, और वैसा ही असर भूल का भी होता है।
इससे वही बात दो बार मन में बैठ जाती है। एक बार चेतावनी बनकर और एक बार निष्कर्ष बनकर।
ऐसे संदेश जल्दबाज़ी पैदा करते हैं, क्योंकि जल्दी में आदमी सोचता नहीं। इसलिए पहले रुककर विचार करना ही बचाव है।
Long answer questions (3)
कवि कहते हैं कि जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे काम कर देता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। सबसे पहले उसका अपना काम बिगड़ जाता है। इसके बाद दुनिया में उसकी हँसी होने लगती है। हँसी होने पर उसके मन का चैन चला जाता है। तब अच्छा खान-पान, मिलने वाला सम्मान और राग-रंग, कुछ भी उसे अच्छा नहीं लगता। कवि अंत में कहते हैं कि यह दुख हटाने पर भी नहीं हटता। बिना सोचे किया गया काम मन में काँटे की तरह चुभता ही रहता है।
कवि सबसे पहले पछतावे की बात कहते हैं। इसके बाद अपना काम बिगड़ने की बात आती है। तीसरे नंबर पर दुनिया की हँसी है और अंत में मन का चैन जाना। इस क्रम का पहला लाभ यह है कि बात हल्की से भारी की ओर बढ़ती है। दूसरा लाभ यह है कि पढ़ने वाला हर कदम पर आगे की बात जानने के लिए रुकता है। तीसरा लाभ यह है कि सबसे गहरी बात अंत में आती है, इसलिए वही सबसे देर तक याद रहती है। यदि चैन जाने की बात पहले आ जाती, तो बाक़ी बातें छोटी लगने लगतीं।
यह सीख आज भी काम आती है, क्योंकि जल्दबाज़ी आज कम नहीं हुई है। पहला उदाहरण यह है कि कोई बिना हेलमेट बाइक चला दे, तो चालान भी कटता है और चोट का ख़तरा भी रहता है। दूसरा उदाहरण सोशल मीडिया का है। कोई झूठी ख़बर बिना जाँचे आगे भेज दे, तो बाद में उसे ही शर्मिंदा होना पड़ता है। तीसरा उदाहरण फ़ोन पर आने वाले झाँसे हैं, जिनमें तुरंत पैसे भेजने को कहा जाता है। इन सबमें बचाव का रास्ता एक ही है, पहले रुको, जाँच करो और बड़ों से पूछ लो। कुंडलिया यही कहती है।
Flashcards (17)
Play this topic
- नुक़सान क्रम में लगाइए
- शब्द और अर्थ
- किसका नुक़सान
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
बीती सो बीती
दूसरी कुंडलिया कहती है कि बीती बात को भुलाकर आगे की सुध लो। जो काम सहज में बन जाए, उसी में मन लगाओ। ऐसा करने से किसी बुरे व्यक्ति को हँसने का मौक़ा नहीं मिलता और मन में कोई अपराधबोध नहीं रहता।
What you will be able to do
- मैं दूसरी कुंडलिया का अर्थ अपने शब्दों में बता सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि कवि आगे की सुध लेने पर ज़ोर क्यों देते हैं।
- मैं दुर्जन और खता जैसे शब्दों का अर्थ समझा सकता/सकती हूँ।
- मैं भूत, वर्तमान और भविष्य बताने वाले शब्द छाँट सकता/सकती हूँ।
- मैं दोनों कुंडलियों की दो-दो विशेषताएँ गिना सकता/सकती हूँ।
Key points
कवि कहते हैं कि जो बीत गया, उसे भुला देना चाहिए।
उसी के साथ आगे आने वाले समय की सुध लेनी चाहिए।
जो काम सहज में बन जाए, मन उसी में लगाना चाहिए।
कवि सहज काम की बात दो बार दोहराते हैं, इसलिए वही उनका मुख्य सुझाव है।
ऐसा करने से किसी दुर्जन को हँसने का मौक़ा नहीं मिलता।
मन में कोई खता यानी दोष या अपराधबोध भी नहीं रहता।
कवि कहते हैं कि मन को इस बात का विश्वास कराना पड़ता है।
आगे का सुख इसी समझ से आता है कि बीती सो बीती।
यह कुंडलिया बीती शब्द से शुरू होकर उसी शब्द पर समाप्त होती है।
Full explanation
दूसरी कुंडलिया की शुरुआत
यह कुंडलिया एक सलाह से शुरू होती है। कवि कहते हैं कि जो बीत गया है, उसे भुला देना चाहिए। यह बात कठोर नहीं है। वे यह नहीं कहते कि बीती बात से कुछ सीखो मत। वे केवल यह कहते हैं कि उसी में उलझे मत रहो।
आगे की सुध
इसी पंक्ति में दूसरी सलाह भी है, आगे की सुधि लेइ। सुधि लेना यानी ध्यान रखना या ख़बर रखना। कवि बीती बात के बदले आगे का समय रख देते हैं। इससे बात केवल भूलने की नहीं रहती, कुछ करने की भी बन जाती है।
सहज काम की बात
तीसरी सलाह सबसे दिलचस्प है। कवि कहते हैं कि जो काम सहज में बन जाए, उसी में मन लगाओ। सहज का अर्थ है स्वाभाविक, यानी बिना खींचतान। इसका मतलब यह नहीं कि कठिन काम छोड़ दो। इसका मतलब यह है कि जो काम बन रहा है, उसे अधूरा मत छोड़ो।
दोहराव से ज़ोर
यही सलाह कवि अगली पंक्ति में फिर दोहराते हैं। जो बात बन आए, उसी में चित देने की बात दो बार आती है। जिस बात को कोई दो बार कहता है, वही उसका मुख्य सुझाव होता है। कुंडलिया की यह चाल पहली कुंडलिया में भी थी।
दुर्जन का मौक़ा
अब कवि नतीजे बताते हैं। पहला नतीजा यह है कि किसी दुर्जन को हँसने का मौक़ा नहीं मिलता। दुर्जन का अर्थ है बुरा व्यक्ति। ध्यान दीजिए, कवि यह नहीं कहते कि कोई हँसेगा ही नहीं। वे कहते हैं कि हँसने का कारण ही नहीं बचेगा।
मन में खता न रहे
दूसरा नतीजा भीतर का है। मन में कोई खता नहीं रहती। खता का अर्थ है दोष, भूल या अपराधबोध। यह बात पहली कुंडलिया से जुड़ जाती है, जहाँ चैन न रहने की बात थी। वहाँ भूल से बेचैनी आई थी, यहाँ सही काम से शांति आती है।
दोनों कुंडलियाँ साथ पढ़िए
दोनों कुंडलियाँ मिलकर एक पूरी बात कहती हैं। पहली बताती है कि बिना सोचे काम करने पर क्या होता है। दूसरी बताती है कि फिर करना क्या चाहिए। एक रोकती है और दूसरी रास्ता दिखाती है। इसीलिए पाठ में ये दोनों एक साथ दी गई हैं।
मन को विश्वास कराना
अंत में कवि अपना नाम लेकर एक बात जोड़ते हैं। वे कहते हैं कि मन को इसका विश्वास कराओ। यह बहुत सच्ची बात है। बीती बात भुलाने का उपदेश सुनना आसान है, पर मन उसे मानता नहीं। इसलिए कवि कहते हैं कि मन को समझाना पड़ेगा।
आगे का सुख
कवि यह भी बताते हैं कि इस समझ का फल क्या है। आगे का सुख इसी से मिलता है। यानी भविष्य की ख़ुशी वर्तमान की इस समझ पर टिकी है। कवि कोई जादू नहीं बताते, वे एक सीधा कारण और परिणाम रखते हैं।
घेरा फिर पूरा होता है
कुंडलिया का अंतिम वाक्यांश है, बीती सो बीती। यानी जो बीत गया, सो बीत गया। जिस शब्द से यह शुरू हुई थी, उसी पर समाप्त हो जाती है। यही कुंडलिया की पहचान है, और यह दोनों रचनाओं में एक जैसी है।
काल बताने वाले शब्द
इस कुंडलिया में बीती शब्द बीते समय की ओर इशारा करता है और आगे शब्द आने वाले समय की ओर। इसी तरह हमारी भाषा में तीनों काल बताने वाले शब्द हैं। पहले, पिछला और बीते हुए भूतकाल बताते हैं। अब, आज और आजकल वर्तमान बताते हैं। अगले दिन, आगामी और जल्दी ही भविष्य बताते हैं।
एक शब्द, दो काल
यहाँ एक रोचक बात है। कल और परसों, ये दोनों शब्द दोनों तरफ़ चलते हैं। कल स्कूल बंद था, यह बीता समय है। कल स्कूल बंद रहेगा, यह आने वाला समय है। शब्द वही रहता है, पर क्रिया बदलकर काल बता देती है। इसीलिए वाक्य में क्रिया को ध्यान से देखना चाहिए।
सलाह और आदेश का अंतर
कवि यहाँ आदेश नहीं देते। वे यहै करु कहकर एक सुझाव रखते हैं और उसका कारण भी बता देते हैं। आदेश में केवल करना होता है, सलाह में समझना भी होता है। इसी कारण यह कुंडलिया पढ़ते समय कोई भारी उपदेश नहीं लगती, बल्कि किसी बड़े की सीधी बात जैसी लगती है। सैकड़ों साल बाद भी यही ढंग इसे पढ़ने योग्य बनाए रखता है।
कुंडलिया की विशेषताएँ
दोनों कुंडलियों में कुछ बातें एक जैसी हैं। दोनों में कवि का नाम आता है। दोनों में पंक्ति के अंतिम शब्दों की ध्वनि मिलती-जुलती है। दोनों दो-दो पंक्तियों में अपनी बात कहती हैं और दोनों का आरंभ-अंत एक ही शब्द पर है।
कुछ अपनी-अपनी बातें
कुछ विशेषताएँ किसी एक में ही दिखती हैं। दूसरी कुंडलिया में बीती और आगे, यानी दो विपरीत भाव एक ही पंक्ति में आ जाते हैं। बीती ताहि बिसारि दे में तीन शब्द एक ही वर्ण से शुरू होते हैं, जिससे पंक्ति बोलने में सुंदर लगती है। इन्हीं छोटी-छोटी बातों से कविता की सुंदरता बनती है।
Concepts and terms
भुला देना। कवि बीती बात को बिसारने की सलाह देते हैं, ताकि मन उसी में उलझा न रहे और आगे का काम रुके नहीं।
किसी की ख़बर या ध्यान रखना। आगे की सुधि लेने का अर्थ है आने वाले समय के बारे में सोचना और उसकी तैयारी करना।
जो स्वाभाविक रूप से, बिना खींचतान बन जाए। कवि कहते हैं कि ऐसे ही काम में मन लगाना चाहिए, क्योंकि उसमें सफलता की संभावना अधिक रहती है।
दोष, भूल या अपराधबोध। चित्त में खता न पावै का अर्थ है कि ऐसा काम करो जिससे मन में कोई अपराधबोध न बचे।
मन का विश्वास। कवि मानते हैं कि यह बात अपने आप नहीं बैठती, मन को समझाकर इसका भरोसा कराना पड़ता है।
यहाँ ध्यान रखिए
आम भ्रम
एक छोटा प्रसंग
Scenario:
सातवीं कक्षा की रेशमा को अंतर-विद्यालय दौड़ में भाग लेना था। पिछले साल वह उसी दौड़ में अंतिम पायदान पर रही थी और कुछ बच्चे महीनों तक उसका मज़ाक उड़ाते रहे। इस बार नाम देने का दिन आया, तो वह चुपचाप बैठी रही। उसकी सहेली ने पूछा, तो उसने कहा कि पिछली बार की हँसी अब भी याद है। शिक्षिका ने उसे समझाया कि पिछली दौड़ का हिसाब अब कहीं नहीं लिखा है, और इस बार का अभ्यास उसके हाथ में है। रेशमा ने नाम दे दिया और रोज़ सुबह दौड़ने लगी। वह इस बार जीती नहीं, पर तीसरे स्थान पर आई, और किसी ने मज़ाक नहीं उड़ाया।
Analysis:
यह प्रसंग दूसरी कुंडलिया की तीनों सलाहों को एक साथ दिखा देता है। पहली सलाह बीती भुलाने की है, और रेशमा ने ठीक वही किया। दूसरी सलाह आगे की सुध लेने की है, जो उसके रोज़ के अभ्यास में दिखती है। तीसरी सलाह सहज काम में मन लगाने की है, और दौड़ना उसका अपना काम था, किसी की नक़ल नहीं। नतीजे भी कुंडलिया जैसे ही निकले। किसी को मज़ाक का कारण नहीं मिला, जो दुर्जन वाली बात है। और रेशमा के मन में कोई अपराधबोध नहीं बचा, जो खता वाली बात है। यहाँ सबसे ध्यान देने की बात यह है कि उसने जीत नहीं पाई, फिर भी दोनों नतीजे मिल गए।
Activity:
अपनी कॉपी में एक ऐसी बात लिखिए जो आपको बार-बार याद आती है। उसके सामने दो खाने बनाइए, एक में उससे मिली सीख और दूसरे में आगे के लिए अपनी एक तैयारी, और दोनों को मिलाकर एक वाक्य बनाइए।
तीन काल के वाक्य बनाइए
Title:
तीन काल के वाक्य बनाइए
Safety:
पेंसिल की नोक से काग़ज़ फाड़ने की कोशिश न कीजिए, कैंची की ज़रूरत हो तो शिक्षक से कहिए।
What You Notice:
आप देखेंगे कि कुछ शब्द केवल एक ही खाने में बैठते हैं और कल तथा परसों दो खानों में चले जाते हैं। यह भी दिखेगा कि काल आपके चुने शब्द से नहीं, वाक्य की क्रिया से तय होता है।
Did you know
कल और परसों, ये दोनों शब्द बीते समय और आने वाले समय, दोनों के लिए चलते हैं।
अधिक धन हाथ में आ जाए तो उसका क्या किया जाए, इस पर भी उन्होंने लिखा है।
इस कुंडलिया की पहली और अंतिम पंक्ति, दोनों में बीती शब्द आता है।
Memory tricks
तीन सलाहें — बीती भुलाओ, आगे की सुध लो, सहज में मन लगाओ।
दो कुंडलियाँ, दो पहलू — पहली रोकती है, दूसरी रास्ता दिखाती है।
Practice MCQs with answers (25)
- A बीती बात को भुला देना
- B बीती बात को लिख लेना
- C बीती बात को दोहराना
- D बीती बात पर रोना
Show answer
Why:
कवि चाहते हैं कि मन उसी में उलझा न रहे।
- A फैलाना
- B सँभालना
- C भुला देना
- D दोहराना
Show answer
Why:
यही शब्द कुंडलिया की पहली पंक्ति में आता है।
- A सीख देना
- B शोक मनाना और दुखी होना
- C सुधार कर देना और बदलना
- D ध्यान या ख़बर रखना
Show answer
Why:
आगे की सुधि लेने का अर्थ है आने वाले समय की तैयारी करना।
- A आने वाला समय
- B वर्तमान का सुख
- C कोई पुरानी याद
- D किसी की सलाह
Show answer
Why:
इससे बात केवल भूलने की नहीं रहती, कुछ करने की भी बन जाती है।
- A जो बहुत कठिन हो और अधिक समय ले
- B जो स्वाभाविक रूप से बन जाए
- C जो किसी और का हो
- D जो बहुत ही महँगा पड़ जाता हो
Show answer
Why:
सहज में बना काम बिना खींचतान आगे बढ़ता है।
- A कि बनता हुआ काम अधूरा छोड़कर इधर-उधर न भटको
- B कि कठिन काम तो कभी हाथ में ही नहीं लेना चाहिए
- C कि कोई भी काम किए बिना ही चुपचाप बैठे रहना चाहिए
- D कि अपना काम छोड़कर पहले दूसरों का काम कर देना चाहिए
Show answer
Why:
कवि आलस नहीं सिखा रहे। सहज का अर्थ है जो स्वाभाविक रूप से बन रहा है, और उसी में मन लगाने से काम पूरा होता है।
- A कवि के नाम को
- B दुर्जन की हँसी वाली बात को
- C आगे के सुख को
- D सहज काम में मन लगाने को
Show answer
Why:
जो बात दो बार कही जाए, वही मुख्य सुझाव होती है।
- A बुरा व्यक्ति
- B दूर का रिश्तेदार
- C कोई अतिथि
- D दो व्यक्ति, साथ के
Show answer
Why:
सज्जन का उलटा शब्द दुर्जन है।
- A कि वह कभी हँस ही नहीं पाएगा
- B कि उसे हँसने का कारण न बचे
- C कि उसे उसका दंड ज़रूर मिलेगा
- D कि उससे सदा दूर ही रहना चाहिए
Show answer
Why:
कवि हँसी रोकने की नहीं, कारण मिटाने की बात करते हैं।
- A खाता-बही
- B खेती का काम
- C दोष या अपराधबोध
- D किसी की कमाई
Show answer
Why:
चित्त में खता न पावै का अर्थ है मन में अपराधबोध न रहना।
- A पहली कुंडलिया में मन के बारे में कुछ भी आता ही नहीं
- B दोनों में एक ही बात है
- C दूसरी कुंडलिया में मन की कोई भी बात कहीं नहीं आती है
- D पहली में भूल से बेचैनी, दूसरी में सही काम से शांति
Show answer
Why:
इसीलिए दोनों कुंडलियाँ एक साथ पढ़ने पर पूरी बनती हैं।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
तीनों कथन सही हैं। दोनों कुंडलियाँ उलटी बात नहीं कहतीं, एक ही सीख के दो छोर पकड़ती हैं।
- A मन का डर
- B मन का विश्वास
- C मन की थकान
- D मन की चुप्पी
Show answer
Why:
कवि कहते हैं कि यह बात मन को समझाकर बैठानी पड़ती है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है। मन परतीती इसलिए आया है कि समझ बिना विश्वास काम नहीं करती।
- A किसी बड़े-बूढ़े के आशीर्वाद पर
- B अधिक से अधिक धन जमा करने पर
- C भाग्य की मेहरबानी और साथ पर
- D बीती सो बीती की समझ पर
Show answer
Why:
कवि जादू नहीं, एक सीधा कारण और परिणाम रखते हैं।
- A बीती
- B सहज
- C चित्त
- D आगे
Show answer
Why:
अंतिम वाक्यांश बीती सो बीती है।
- A पीछे
- B आगे
- C भीतर
- D बाहर
Show answer
Why:
आगे शब्द आने वाले समय की ओर इशारा करता है।
- A आगामी
- B आजकल
- C पिछला
- D जल्दी ही
Show answer
Why:
पहले और बीते हुए भी भूतकाल बताने वाले शब्द हैं।
- A आगामी
- B अभी-अभी
- C पहले
- D अब
Show answer
Why:
अगले दिन और जल्दी ही भी भविष्य बताते हैं।
- A अब और आज
- B पहले और पिछला
- C कल और परसों
- D आगामी और जल्दी ही
Show answer
Why:
कल स्कूल बंद था और कल स्कूल बंद रहेगा, दोनों वाक्य बनते हैं।
- A संज्ञा से
- B क्रिया से
- C विशेषण से
- D सर्वनाम से
Show answer
Why:
था बीता समय बताता है और रहेगा आने वाला समय।
- A ग़लत, नाम केवल पहली में है
- B सही, दोनों में कह गिरिधर कविराय आता है
- C ग़लत, नाम किसी में नहीं है
- D सही, पर कवि का नाम केवल अंत में ही छपा है
Show answer
Why:
यह दोनों रचनाओं की समान विशेषता है।
- A सहज और कठिन
- B चित्त और शरीर
- C बीती और आगे
- D सुख और दुख
Show answer
Why:
दो उलटे भाव एक ही पंक्ति में आ जाते हैं।
- A इसमें कवि का नाम आता है
- B इसमें कहीं कोई तुक ही नहीं मिल पाती
- C तीन शब्द एक ही वर्ण से शुरू होते हैं
- D इसमें बीच में ही कोई प्रश्न पूछ लिया गया है
Show answer
Why:
एक ही वर्ण के दोहराव से पंक्ति बोलने में सुंदर लगती है।
- A कि वह अब पढ़ना छोड़ दे
- B कि वह किसी से बात न करे
- C कि वह वही पुराना पर्चा उठाकर दोबारा पढ़े
- D कि वह बीती बात छोड़कर आगे की तैयारी करे
Show answer
Why:
कवि बीती बात भुलाकर आने वाले समय की सुध लेने को कहते हैं।
Important short questions (7)
पहली, बीती बात को भुला दो। दूसरी, आगे आने वाले समय की सुध लो। तीसरी, जो काम सहज में बन जाए, उसी में मन लगाओ।
पहला यह कि किसी दुर्जन को हँसने का कारण नहीं मिलता। दूसरा यह कि मन में कोई खता या अपराधबोध नहीं रहता।
क्योंकि कवि काम से नहीं, खींचतान से रोकते हैं। उनका आशय यह है कि जो काम बन रहा है, उसे अधूरा न छोड़ो।
पहली बताती है कि बिना सोचे काम करने पर क्या होता है। दूसरी बताती है कि फिर करना क्या चाहिए। एक रोकती है और दूसरी रास्ता दिखाती है।
क्योंकि केवल सुन लेने से मन नहीं मानता। बीती बात भुलाना सुनने में आसान है, पर निभाने में कठिन।
कल स्कूल बंद था, यह बीता समय है। कल स्कूल बंद रहेगा, यह आने वाला समय है। शब्द वही रहता है, क्रिया काल बदल देती है।
दोनों में कवि अपना नाम स्वयं रखते हैं। दोनों का आरंभ और अंत एक ही शब्द पर होता है।
Long answer questions (3)
कवि कहते हैं कि जो बीत गया, उसे भुला दो और आगे आने वाले समय की सुध लो। इसके बाद वे एक और सलाह देते हैं। जो काम सहज में बन जाए, उसी में मन लगाओ। यही बात वे अगली पंक्ति में फिर दोहराते हैं। आगे वे दो नतीजे बताते हैं। पहला यह कि ऐसा करने से किसी दुर्जन को हँसने का कारण नहीं बचता। दूसरा यह कि मन में कोई खता या अपराधबोध नहीं रहता। अंत में वे अपना नाम लेकर कहते हैं कि मन को इस बात का विश्वास कराओ। आगे का सुख इसी समझ से मिलता है कि जो बीत गया, सो बीत गया।
शुरुआत काम की बात से होती है। कवि कहते हैं कि बीती भुलाकर आगे की सुध लो और सहज काम में मन लगाओ। यह सब करने की बात है, यानी बाहर का व्यवहार। इसके बाद पहला नतीजा भी बाहर का है, कि किसी दुर्जन को हँसने का कारण न बचे। यहाँ दूसरे लोग शामिल हैं। फिर कवि भीतर की ओर मुड़ते हैं और कहते हैं कि मन में कोई खता न रहे। यह बात किसी को दिखाई नहीं देती। अंत में तो पूरी बात मन की ही हो जाती है, क्योंकि वे मन को विश्वास कराने की सलाह देते हैं। इस तरह कुंडलिया करने से शुरू होकर मानने तक पहुँच जाती है।
हमारी भाषा में कुछ शब्द बताते हैं कि काम कब हुआ। पहले, पिछला और बीते हुए जैसे शब्द भूतकाल बताते हैं। अब, आज और आजकल जैसे शब्द वर्तमान काल बताते हैं। अगले दिन, आगामी और जल्दी ही जैसे शब्द भविष्य काल बताते हैं। सबसे रोचक बात कल और परसों के साथ है, क्योंकि ये दोनों तरफ़ चलते हैं। कल मैं बाज़ार गया था, यह बीता समय है। कल मैं बाज़ार जाऊँगा, यह आने वाला समय है। ऐसे वाक्यों में काल शब्द से नहीं, क्रिया से पहचाना जाता है। इसी कुंडलिया में भी बीती शब्द पीछे का समय बताता है और आगे शब्द आने वाला समय।
Flashcards (17)
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- कुंडलिया क्रम में लगाइए
- शब्द और अर्थ
- कौन-सा काल
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
Class 7 Hindi Chapter 6 — frequently asked questions
इसमें छह पंक्तियाँ होती हैं, पहले दोहा और फिर रोला। दूसरी विशेषता यह है कि जिस शब्द से यह शुरू होती है, उसी पर समाप्त होती है।
पहले पछतावा होता है, फिर अपना काम बिगड़ता है। इसके बाद दुनिया में हँसी होती है और अंत में मन का चैन चला जाता है।
क्योंकि जल्दबाज़ी का पहला असर अपने ऊपर ही पड़ता है। दुनिया की चर्चा उसके बाद आती है।
पहली, बीती बात को भुला दो। दूसरी, आगे आने वाले समय की सुध लो। तीसरी, जो काम सहज में बन जाए, उसी में मन लगाओ।
पहला यह कि किसी दुर्जन को हँसने का कारण नहीं मिलता। दूसरा यह कि मन में कोई खता या अपराधबोध नहीं रहता।
क्योंकि कवि काम से नहीं, खींचतान से रोकते हैं। उनका आशय यह है कि जो काम बन रहा है, उसे अधूरा न छोड़ो।
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