Class 8 Hindi Chapter 1: स्वदेश
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पत्थर हृदय और पाँच कसौटियाँ
कविता एक ही पंक्ति को बार-बार लौटाती है और उसके सहारे पाँच कसौटियाँ रखती है — जोश, साथ, साहस, उद्धार और भाव। पाँचों व्यक्ति को अपने से बाहर की ओर मोड़ती हैं।
What you will be able to do
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि कविता में कौन-सी पंक्ति बार-बार लौटती है और क्यों।
- मैं समझा सकता/सकती हूँ कि कवि हृदय की तुलना पत्थर से क्यों करते हैं।
- मैं कविता की पाँचों कसौटियों को अपने शब्दों में गिना सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि निषेध की भाषा कविता को कैसा स्वर देती है।
- मैं यह पहचान सकता/सकती हूँ कि आह्वान गीत किसे कहते हैं।
Key points
जो पंक्ति कविता में आरंभ, मध्य और अंत — तीनों जगह लौटती है, वही इसकी टेक है। वह पत्थर वाले हृदय की पंक्ति है।
कवि देश-प्रेम से रहित हृदय को बुरा नहीं, खाली कहते हैं। पत्थर में न धड़कन है, न संवेदना।
पहली कसौटी जोश की है, और वह अपने भीतर के नहीं, दूसरों में जगाए गए उत्साह को गिनती है।
दूसरी कसौटी संसार-संग चलने की है — समाज के सुख-दुख में भागीदार होना।
तीसरी कसौटी साहस की है। साहस छूटते ही पार, यानी लक्ष्य, दूर रह जाता है।
चौथी कसौटी औरों के उद्धार की है; कवि अपनी भलाई को समाज की भलाई से बाँध देते हैं।
पाँचवीं कसौटी भीतर के भाव की है — रस-धार यानी हृदय में बहती हुई कोमलता।
निषेध की भाषा के कारण कविता बताती है कि किसके बिना कुछ नहीं होता, और वही उसे चेतावनी का स्वर देती है।
Full explanation
एक वाक्य, जो आठ बार लौटता है
इस कविता को पढ़ते ही एक पंक्ति कान में बैठ जाती है — वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। यही पंक्ति आरंभ में है, बीच में है और अंत में भी। कवि इसे बार-बार लौटाते हैं, और हर बार उसके पहले एक नई बात रख देते हैं। इससे कविता एक ही दावे को अलग-अलग दिशाओं से कसती चलती है।
दावा क्या है
दावा सीधा है। जिस हृदय में अपने देश का प्रेम नहीं, वह हृदय है ही नहीं। कवि उसे पत्थर कहते हैं। पत्थर में धड़कन नहीं होती, संवेदना नहीं होती, वह किसी के दुख पर पसीजता नहीं। कवि यह नहीं कहते कि ऐसा व्यक्ति बुरा है। वे इससे आगे की बात कहते हैं — वह व्यक्ति भीतर से खाली है।
पत्थर क्यों, और कुछ क्यों नहीं
पत्थर चुनना अपने आप में एक निर्णय है। कवि लोहा कह सकते थे, बर्फ़ कह सकते थे। पत्थर इसलिए सटीक बैठता है कि वह देखने में हृदय जितना ही ठोस लगता है, पर उसमें न गरमी है न गति। ऊपर से दोनों एक-से, भीतर से बिलकुल उलटे। यही तुलना की ताक़त है।
पहली कसौटी — जोश
पहली कसौटी उत्साह की है। जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं। ध्यान दीजिए, कवि यह नहीं पूछते कि तुममें जोश है या नहीं। वे पूछते हैं कि तुमने दूसरों में जोश जगाया या नहीं। अपने भीतर का उत्साह अपनी जगह है; उसे औरों तक पहुँचाना अलग बात है, और कविता उसी दूसरी बात को गिनती है।
दूसरी कसौटी — संसार के संग
दूसरी कसौटी साथ चलने की है। जो चल न सका संसार-संग, उसका होता संसार नहीं। संसार-संग चलने का अर्थ है समाज के साथ क़दम मिलाना, उसके सुख-दुख में शामिल होना। जो अलग-थलग रहता है, वह संसार से कुछ पाता भी नहीं। कवि इसे अधिकार और भागीदारी के रिश्ते की तरह रखते हैं।
तीसरी कसौटी — साहस
तीसरी कसौटी साहस की है। जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं। यहाँ पार शब्द महत्वपूर्ण है। पार यानी लक्ष्य का दूसरा किनारा। साहस छोड़ देने का अर्थ है बीच धारा में हाथ-पाँव रोक देना, और तब किनारा कितना भी पास क्यों न हो, मिलता नहीं।
चौथी कसौटी — औरों का उद्धार
चौथी कसौटी सबसे कठोर है। जिससे न जाति-उद्धार हुआ, होगा उसका उद्धार नहीं। कवि अपनी भलाई को दूसरों की भलाई से बाँध देते हैं। अकेले अपने लिए किया गया काम यहाँ गिना ही नहीं जाता। जो अपने समाज के काम न आया, उसका अपना जीवन भी अधूरा रह गया।
पाँचवीं कसौटी — भाव
पाँचवीं कसौटी भीतर की है। जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं। रस-धार यानी भीतर बहती हुई कोमलता। पिछली चार कसौटियाँ काम और व्यवहार की थीं; यह अनुभव की है। कवि कहना चाहते हैं कि काम तो बाद की बात है, पहले भीतर कुछ पिघलना चाहिए।
पाँचों एक ही दिशा में
पाँचों कसौटियों को एक साथ रखिए तो एक बात साफ़ दिखती है। हर कसौटी अपने से बाहर की ओर इशारा करती है — दूसरों में जोश, संसार का साथ, पार तक पहुँचना, समाज का उद्धार, भीतर का भाव जो किसी और के लिए हो। देश-प्रेम यहाँ भीतर बंद रहने वाली भावना नहीं है।
निषेध की भाषा
कवि की भाषा पर ध्यान दीजिए। लगभग हर पंक्ति नहीं पर समाप्त होती है — सार नहीं, संसार नहीं, पार नहीं, उद्धार नहीं, प्यार नहीं। कवि यह नहीं बताते कि क्या करना है; वे बताते हैं कि किसके बिना कुछ नहीं होता। यह निषेध की भाषा है और वह चेतावनी की तरह सुनाई देती है।
आह्वान गीत
ऐसी रचना को आह्वान गीत कहते हैं। आह्वान यानी पुकार। यह कविता पाठक से कुछ माँगती है, केवल कोई दृश्य नहीं दिखाती। इसीलिए इसकी पंक्तियाँ छोटी हैं, लय तेज़ है, और एक ही पंक्ति बार-बार लौटती है — जैसे कोई मंच से भीड़ को पुकार रहा हो।
पुकार किससे है
कविता किसी राजा या सेनापति से नहीं बोलती। वह सीधे पढ़ने वाले से बोलती है। इसीलिए इसमें कोई नाम नहीं आता, कोई घटना नहीं आती, कोई तिथि नहीं आती। जो भी पढ़े, पंक्ति उसी पर लागू हो जाती है। यही इस कविता को हर समय के लिए खुला रखता है।
एक अनुमान, जो कविता से ही निकलता है
कविता कहीं नहीं कहती कि देश-प्रेम का अर्थ केवल युद्ध है। कसौटियाँ जोश, साथ, साहस, उद्धार और भाव की हैं — पाँचों रोज़ के जीवन की बातें हैं। इससे अनुमान होता है कि कवि की दृष्टि में देश-प्रेम हर दिन के छोटे कामों में उतरता है।
कविता जो प्रश्न छोड़ जाती है
अंत में वही पंक्ति फिर लौटती है, पर अब वह पहले जैसी नहीं लगती। पहली बार वह एक दावा थी; पाँच कसौटियों के बाद वह एक प्रश्न बन जाती है, जो पाठक से पूछा गया है। कविता उत्तर नहीं देती। उत्तर पढ़ने वाले के पास छोड़ देती है।
Concepts and terms
जो पंक्ति कविता में बार-बार लौटकर आती है, उसे टेक कहते हैं। यहाँ टेक है — वह हृदय नहीं है पत्थर है। आगे उसी में स्वदेश के प्यार की बात आती है। हर बार उसके पहले एक नई बात रखी जाती है, इसलिए वही पंक्ति हर बार कुछ और कहती हुई लगती है।
आह्वान का अर्थ है पुकार। जो रचना पढ़ने वाले से कुछ करने को कहे, उसे आह्वान गीत कहते हैं। ऐसी रचना में पंक्तियाँ छोटी, लय तेज़ और स्वर ऊँचा रखा जाता है, ताकि वह भीड़ तक पहुँच सके।
जब कवि यह न बताकर कि क्या करना है, यह बताएँ कि किसके बिना कुछ नहीं होता, तो उसे निषेध की भाषा कहते हैं। इस कविता की लगभग हर पंक्ति नहीं पर रुकती है, और इसी से उसमें चेतावनी का स्वर आता है।
कसौटी वह पत्थर है जिस पर सोना घिसकर परखा जाता था। यहाँ कसौटी का अर्थ है परख। कविता पाँच परखें रखती है, और हर परख के बाद वही टेक लौटाकर पूछती है कि तुम इस पर खरे उतरे या नहीं।
रस का अर्थ यहाँ स्वाद नहीं, भीतर का भाव है। रस-धार यानी हृदय में बहती हुई कोमलता। जिसमें यह धारा नहीं बहती, वह काम तो कर सकता है, पर किसी के लिए पसीज नहीं सकता।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
सातवीं कक्षा की सुमन अपने मुहल्ले में देखती है कि बरसात के बाद गली में पानी भर जाता है और छोटे बच्चे वहीं से स्कूल जाते हैं। वह अकेले कुछ नहीं कर पाती, इसलिए अपनी कक्षा के आठ साथियों से बात करती है। सब मिलकर नगर पालिका के कार्यालय जाते हैं और नाली की सफ़ाई के लिए आवेदन देते हैं। कुछ साथियों का कहना है कि यह काम उनका नहीं, सरकार का है। सुमन कहती है कि जिस गली में वे रहते हैं, उसकी चिंता भी उन्हीं की है। दो सप्ताह बाद नाली साफ़ होती है और पानी भरना रुक जाता है। अब मुहल्ले के और लोग भी सुमन के समूह से जुड़ना चाहते हैं।
Analysis:
सुमन का काम कविता की दूसरी, तीसरी और चौथी कसौटी पर एक साथ खरा उतरता है। वह अकेले नहीं चली, साथ लेकर चली; उसने बात रखने का साहस किया; और जो किया वह अपने लिए नहीं, पूरी गली के लिए किया। कविता की भाषा में कहें तो उसने जोश भी जगाया, क्योंकि अब और लोग जुड़ना चाहते हैं।
Activity:
अपने मुहल्ले या विद्यालय की ऐसी एक समस्या चुनिए जिसे पाँच साथी मिलकर सुलझा सकते हैं। उस पर एक पन्ने की योजना लिखिए और बताइए कि उसमें कविता की कौन-सी कसौटी काम आएगी।
करके देखो
Title:
टेक अपनी बनाइए
Safety:
कैंची या किसी नुकीली वस्तु की आवश्यकता नहीं है।
What You Notice:
वही पंक्ति हर बार अलग सुनाई देती है, क्योंकि उसके पहले रखी गई बात बदल जाती है। टेक का पूरा काम यही है।
Did you know
इस कविता की टेक पूरी रचना में एक बार नहीं, कई बार लौटती है — और अंतिम बार लौटने पर वह सबसे भारी पड़ती है।
कविता में कोई व्यक्ति-नाम, कोई तिथि और कोई युद्ध-दृश्य नहीं आता, फिर भी इसे देश-प्रेम की कविता कहा जाता है।
कसौटी असल में एक काला पत्थर होता था, जिस पर सोना घिसकर उसकी शुद्धता परखी जाती थी। इसी से परख के अर्थ में यह शब्द चल पड़ा।
Memory tricks
पाँच कसौटियाँ याद रखने का सूत्र — जोश → साथ → साहस → उद्धार → भाव। पहली चार बाहर के काम की, पाँचवीं भीतर के भाव की।
टेक पहचानने का सूत्र — जो पंक्ति तीसरी बार भी वैसी ही लौटे, वही टेक है।
Practice MCQs with answers (25)
- A वह हृदय नहीं है पत्थर है
- B जिसने साहस को छोड़ दिया
- C जो चल न सका संसार-संग
- D है काल-दीप जलता हरदम
Show answer
Why:
यही पंक्ति पूरी कविता को थामे रहती है और हर बार नए संदर्भ में लौटती है।
- A लोहा
- B पत्थर
- C बर्फ़
- D धूल
Show answer
Why:
कवि उसे पत्थर कहते हैं, क्योंकि पत्थर में न धड़कन है न संवेदना।
- A वह नदी के किनारे बहुत सरलता से और सस्ते में मिल जाता है
- B वह सबसे भारी वस्तु है जो कवि को दिखी
- C वह हृदय जितना ही ठोस दिखता है, पर भीतर से उलटा है
- D वह हर घर की दीवार में लगाया जाता है
Show answer
Why:
ऊपर से दोनों एक-से लगते हैं और भीतर से बिलकुल अलग हैं। जो चीज़ पास से मिलती-जुलती हो, उसी की तुलना सबसे अधिक चुभती है।
- A अपने भीतर का उत्साह
- B पढ़ाई में की गई मेहनत
- C युद्ध में दिखाया गया बल
- D दूसरों में जगाया गया उत्साह
Show answer
Why:
कवि यह नहीं पूछते कि तुममें जोश है या नहीं, बल्कि यह कि तुमने औरों में जोश जगाया या नहीं।
- A समाज के सुख-दुख में शामिल होने से
- B अकेले यात्रा करते रहने से
- C दूर देशों में बस जाने से
- D संसार की वस्तुएँ इकट्ठी करने से
Show answer
Why:
संसार-संग चलना यानी समाज के साथ क़दम मिलाना और उसके सुख-दुख में भागीदार होना।
- A नदी के उस पार बसे गाँव की ओर
- B लक्ष्य के दूसरे किनारे की ओर
- C समुद्र पार के देशों की ओर
- D पर्वत के पीछे की घाटी की ओर
Show answer
Why:
पार यानी वह किनारा जहाँ पहुँचना लक्ष्य है। साहस छूटते ही बीच धारा में गति रुक जाती है।
- A अपनी मेहनत से
- B अपने धन से
- C दूसरों की भलाई से
- D अपनी पढ़ाई से
Show answer
Why:
कवि कहते हैं कि जो अपने समाज के काम न आया, उसका अपना जीवन भी अधूरा रह गया।
- A नदी की धारा की ओर
- B मीठे स्वाद की ओर
- C वर्षा की ठंडी बूँदों की ओर ही
- D भीतर बहती कोमलता की ओर
Show answer
Why:
रस-धार यानी हृदय के भीतर बहता हुआ भाव, जो व्यक्ति को पिघलने देता है।
- A नहीं
- B हाँ
- C सदा
- D कभी
Show answer
Why:
सार नहीं, संसार नहीं, पार नहीं, उद्धार नहीं, प्यार नहीं — निषेध की यही भाषा कविता को चेतावनी का स्वर देती है।
- A केवल कोई दृश्य चित्र की तरह दिखाती है
- B पढ़ने वाले से कुछ माँगती और उसे पुकारती है
- C किसी राजा की प्रशंसा में लिखी जाती है
- D किसी घटना का क्रम से वर्णन करती है
Show answer
Why:
आह्वान यानी पुकार। ऐसी कविता पाठक से कुछ करने को कहती है, इसीलिए उसकी लय तेज़ और पंक्तियाँ छोटी होती हैं।
- A कविता अधूरी लगने लगती है
- B कविता केवल सैनिकों के लिए रह जाती है
- C पंक्ति हर पढ़ने वाले पर लागू हो जाती है
- D कविता का अर्थ समझना असंभव हो जाता है
Show answer
Why:
नाम और तिथि न होने से कविता किसी एक समय में बँधती नहीं; जो भी पढ़े, पंक्ति उसी से बात करने लगती है।
- A व्यक्ति को अपने भीतर लौटने को कहती हैं
- B केवल बड़ों पर लागू होती हैं
- C केवल युद्ध के समय काम आती हैं
- D व्यक्ति को अपने से बाहर की ओर मोड़ती हैं
Show answer
Why:
दूसरों में जोश, संसार का साथ, पार तक पहुँचना, समाज का उद्धार और भाव — पाँचों अपने से बाहर की ओर इशारा करती हैं।
- A जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
- B जिसमें धन का लोभ नहीं है
- C जिसमें यात्रा की इच्छा नहीं है
- D जिसमें संगीत की रुचि नहीं है
Show answer
Why:
पूरी कविता का दावा यही है — देश-प्रेम के बिना हृदय हृदय नहीं रहता।
- A पार
- B सार
- C प्यार
- D उद्धार
Show answer
Why:
पंक्ति है — उस जीवन में कुछ सार नहीं। सार यानी तत्व, जो बचता है।
- A प्यार
- B विचार
- C संसार
- D आधार
Show answer
Why:
जो समाज के साथ नहीं चलता, उसका अपना संसार भी नहीं बनता।
- A सही, क्योंकि कविता हथियारों का नाम लेती है
- B ग़लत, क्योंकि कविता हथियारों का नाम ही नहीं लेती
- C सही, क्योंकि कविता युद्ध के समय लिखी गई
- D ग़लत, क्योंकि कविता की कसौटियाँ रोज़ के जीवन की हैं
Show answer
Why:
कविता हथियारों का नाम तो लेती है, पर उसकी पाँचों कसौटियाँ जोश, साथ, साहस, उद्धार और भाव की हैं — सब रोज़ के जीवन की बातें।
- A वे बताते हैं कि किसके बिना कुछ नहीं होता
- B वे बताते हैं कि क्या-क्या करना चाहिए
- C वे केवल प्रकृति का वर्णन करते हैं
- D वे अपनी ही कथा सुनाते हैं
Show answer
Why:
निषेध की भाषा के कारण कविता यह बताती है कि किन चीज़ों के अभाव में जीवन व्यर्थ हो जाता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों कथन सही हैं और कारण अभिकथन को समझाता है। पाँच कसौटियों से गुज़रने के बाद वही पंक्ति दावे से बदलकर प्रश्न जैसी लगने लगती है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
कारण ग़लत है। बर्फ़ का पिघलना तुलना को कमज़ोर कर देता, क्योंकि कवि ऐसी वस्तु चाहते हैं जो कभी न पसीजे — वही पत्थर है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और II सही हैं। III ग़लत है — पाँचवीं कसौटी भाव और रस-धार की है, धन की नहीं।
- A वह ठीक कहता है, क्योंकि कविता तोप और तलवार का नाम लेती है
- B कविता की कसौटियाँ जोश, साथ और भाव की हैं, जो हर दिन की बातें हैं
- C कविता इस प्रश्न पर कुछ नहीं कहती, इसलिए उत्तर नहीं दिया जा सकता
- D वह ठीक कहता है, क्योंकि कविता स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई
Show answer
Why:
कविता की पाँचों कसौटियाँ रोज़ के जीवन से जुड़ी हैं, इसलिए देश-प्रेम सीमा तक सीमित नहीं रहता।
- A पहली — जोश जगाने की
- B पाँचवीं — भाव की
- C तीसरी — साहस की
- D दूसरी — संसार-संग चलने की
Show answer
Why:
संसार-संग चलने की कसौटी साथ चलने की है, और अकेले रह जाना ठीक उसी के विपरीत है।
- A नदी का किनारा
- B लक्ष्य की प्राप्ति
- C यात्रा का आरंभ
- D सेना का शिविर
Show answer
Why:
साहस छोड़ने वाला पार नहीं पहुँचता, यानी लक्ष्य तक नहीं पहुँचता।
- A सही, वे एक सेनापति का नाम लेते हैं
- B सही, वे एक राजा का नाम लेते हैं
- C ग़लत, कविता में कोई नाम आता ही नहीं
- D ग़लत, कविता में केवल नदियों के नाम आते हैं
Show answer
Why:
कविता में कोई व्यक्ति-नाम नहीं आता, और यही उसे हर पाठक के लिए खुला रखता है।
- A कवि के पास समय कम था
- B पुस्तक में स्थान कम था
- C लंबी पंक्तियाँ ब्रजभाषा की कविता में कभी लिखी नहीं जातीं
- D यह आह्वान गीत है, जो पुकार की तरह सुनाई देना चाहिए
Show answer
Why:
पुकार तेज़ और छोटी होती है। आह्वान गीत की लय उसी के अनुकूल रखी जाती है।
Important short questions (7)
टेक है — वह हृदय नहीं है पत्थर है। आगे उसी में स्वदेश के प्यार की बात आती है। यह आरंभ, मध्य और अंत — तीनों जगह लौटती है।
क्योंकि पत्थर ऊपर से हृदय जितना ही ठोस दिखता है, पर उसमें न धड़कन है, न संवेदना। वह किसी के दुख पर पसीजता नहीं।
वह दूसरों में जगाए गए जोश को गिनती है। अपने भीतर का उत्साह यहाँ पर्याप्त नहीं माना जाता।
समाज के साथ क़दम मिलाकर चलना और उसके सुख-दुख में शामिल होना। जो ऐसा नहीं करता, उसे संसार से कुछ मिलता भी नहीं।
चेतावनी का। कवि यह नहीं बताते कि क्या करना है, बल्कि यह कि किसके बिना जीवन में कुछ नहीं बचता।
क्योंकि तब तक पाँच कसौटियाँ पढ़ी जा चुकी होती हैं। जो आरंभ में दावा था, वह अंत में पाठक से पूछा गया प्रश्न बन जाता है।
पंक्ति किसी एक व्यक्ति या समय में बँधती नहीं। जो भी पढ़े, वह उसी पर लागू हो जाती है, इसलिए कविता हर समय के लिए खुली रहती है।
Long answer questions (3)
पहली कसौटी जोश की है — जो दूसरों में जीवित उत्साह न जगा सका, उसके जीवन में सार नहीं। दूसरी संसार-संग चलने की है — जो समाज के साथ नहीं चला, उसका अपना संसार नहीं बनता। तीसरी साहस की है — साहस छोड़ देने वाला पार, यानी लक्ष्य तक, नहीं पहुँचता। चौथी औरों के उद्धार की है — जिससे समाज का भला न हुआ, उसका अपना भला भी अधूरा रह गया। पाँचवीं भीतर के भाव की है — जिसमें रस-धार नहीं बहती, वह पसीजता ही नहीं। साझी बात यह है कि पाँचों कसौटियाँ व्यक्ति को अपने से बाहर की ओर मोड़ती हैं। कोई भी कसौटी केवल अपने लिए किए गए काम को नहीं गिनती।
यह चुनाव बहुत सोच-समझकर किया गया लगता है। कवि चाहते तो लोहा कह सकते थे या बर्फ़। पर पत्थर की दो विशेषताएँ तुलना को सटीक बनाती हैं। पहली यह कि वह देखने में हृदय जितना ही ठोस और भारी लगता है, इसलिए ऊपर से दोनों एक-से जान पड़ते हैं। दूसरी यह कि उसमें न गरमी है, न गति, न पिघलने का गुण। बर्फ़ पिघल जाती है और लोहा गरम होकर ढल जाता है, पर पत्थर वैसा ही बना रहता है। कवि को ऐसी ही वस्तु चाहिए थी जो कभी न पसीजे। जो चीज़ पास से मिलती-जुलती हो, उसी से की गई तुलना सबसे अधिक चुभती है, और यही इस पंक्ति की ताक़त है।
आह्वान का अर्थ है पुकार, और जो रचना पढ़ने वाले से कुछ करने को कहे उसे आह्वान गीत कहते हैं। यह कविता कोई दृश्य नहीं दिखाती और न किसी घटना का वर्णन करती है। वह सीधे पाठक से बात करती है और उसके सामने एक के बाद एक कसौटी रखती जाती है। इसकी पंक्तियाँ छोटी हैं और लय तेज़ है, जैसे कोई मंच से भीड़ को पुकार रहा हो। एक ही पंक्ति बार-बार लौटती है, जिससे वह नारे की तरह याद रह जाती है। कविता में कोई नाम, तिथि या स्थान नहीं आता, इसलिए पुकार किसी एक व्यक्ति तक सीमित न रहकर हर पढ़ने वाले तक पहुँच जाती है।
Flashcards (17)
Play this topic
- कसौटियाँ क्रम में लगाइए
- शब्द और अर्थ
- सही या भ्रम
- भीतर की या बाहर की
- झटपट उत्तर
देश का दिया, कवि और शिल्प
कविता का दूसरा भाग गिनाता है कि देश ने क्या दिया — मिट्टी, अन्न-जल, अपने लोग और ज्ञान। साथ में कवि सनेही का परिचय और तुक, योजक चिह्न तथा शब्द-क्रम का शिल्प।
What you will be able to do
- मैं गिना सकता/सकती हूँ कि कविता के अनुसार देश ने क्या-क्या दिया है।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि हम हैं जिसके राजा-रानी में हम कौन हैं।
- मैं काल-दीप और परवाने के संकेत को अपने शब्दों में समझा सकता/सकती हूँ।
- मैं कवि गयाप्रसाद शुक्ल सनेही का संक्षिप्त परिचय दे सकता/सकती हूँ।
- मैं तुक, योजक चिह्न और शब्द-क्रम के प्रभाव को पहचान सकता/सकती हूँ।
Key points
दूसरे भाग में कविता की दिशा बदल जाती है — अब वह बताती है कि देश ने क्या दिया, यह नहीं पूछती कि तुमने क्या किया।
देश ने दिया — वह मिट्टी जिसमें शरीर बढ़ा और वह अन्न-जल जिसने उसे चलाया।
माता-पिता और बंधु भी इसी भूमि पर मिले, इसलिए देश से अलग होकर अपनापन बचता नहीं।
हम हैं जिसके राजा-रानी — यहाँ हम का अर्थ है देश के सारे नागरिक, और शासन उन्हीं के हाथ में है।
लासानी यानी बेमिसाल। खजाने केवल धन के नहीं; अगली पंक्ति बताती है कि संपदा ज्ञान की है।
जिसे इतना सब मिला और जो फिर भी नहीं पसीजा, उसे कवि भू का भार, यानी धरती पर पड़ा बोझ कहते हैं।
कवि गयाप्रसाद शुक्ल सनेही का जन्म उन्नाव में हुआ; सरकारी नौकरी के कारण उन्हें त्रिशूल उपनाम भी रखना पड़ा।
तुक, योजक चिह्न और है को पंक्ति में पहले रखना — तीनों शिल्प इस कविता की लय बनाते हैं।
Full explanation
कविता दूसरी ओर मुड़ती है
पहले भाग में कविता पूछती रही कि तुमने क्या किया। दूसरे भाग में वह बताने लगती है कि देश ने तुम्हें क्या दिया। स्वर वही रहता है, पर दिशा बदल जाती है। यह बदलाव अचानक नहीं लगता, क्योंकि टेक दोनों भागों को एक साथ बाँधे रहती है।
मिट्टी, दाना और पानी
पहली बात सबसे सीधी है — जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, पाया जिसमें दाना-पानी। कवि बड़ी बातों से शुरू नहीं करते। वे उस मिट्टी से शुरू करते हैं जिसमें शरीर बढ़ा और उस अन्न-जल से जिसने उसे चलाया। देश यहाँ कोई विचार नहीं है; वह रोज़ की थाली है।
माता-पिता और बंधु
दूसरी बात रिश्तों की है — हैं माता-पिता बंधु जिसमें। जो लोग सबसे अपने हैं, वे भी इसी भूमि पर मिले। कवि कहना चाहते हैं कि देश से अलग होकर अपनापन बचता ही नहीं, क्योंकि जिनसे अपनापन है वे सब वहीं हैं।
हम हैं जिसके राजा-रानी
तीसरी बात सबसे चौंकाने वाली है — हम हैं जिसके राजा-रानी। यहाँ हम कोई एक परिवार नहीं है। हम यानी इस देश के सारे नागरिक। कवि किसी राजा का नाम नहीं लेते; वे शासन देश के लोगों के हाथ में बताते हैं। एक पंक्ति में यह बहुत बड़ी बात कह दी गई है।
खजाने और नव रत्न
आगे कवि देश की संपदा गिनाते हैं — जिसने कि खजाने खोले हैं, नव रत्न दिये हैं लासानी। लासानी का अर्थ है बेमिसाल, जिसके जैसा दूसरा न हो। खजाने केवल सोने-चाँदी के नहीं हैं। अगली ही पंक्ति बताती है कि संपदा किस तरह की है।
जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं
जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी — यह पंक्ति संपदा का अर्थ खोल देती है। जिस भूमि पर विद्वान मुग्ध हों और सारा संसार मोहित हो, उसका खजाना ज्ञान का है। कवि धन से शुरू करके ज्ञान तक पहुँचते हैं, और वहीं रुक जाते हैं।
भू का भार
इसके तुरंत बाद एक कड़ी पंक्ति आती है — उस पर है नहीं पसीजा जो, क्या है वह भू का भार नहीं। भू यानी पृथ्वी। जिसे इतना कुछ मिला और जो फिर भी नहीं पिघला, कवि उसे धरती पर पड़ा बोझ कहते हैं। पहले भाग का पत्थर यहाँ बोझ बनकर लौट आता है।
मृत्यु की याद
आगे कविता एक और मोड़ लेती है — निश्चित है निस्संशय निश्चित, है जान एक दिन जाने को। निस्संशय यानी बिना किसी संदेह के। कवि मृत्यु की याद दिलाते हैं, पर डराने के लिए नहीं। उनका तर्क आगे आता है।
काल-दीप और परवाने
है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को। काल यानी समय, और काल-दीप वह दीपक है जो हर समय जलता रहता है। परवाना वह पतंगा है जो दीपक पर मंडराता है और जल जाता है। जब जाना निश्चित ही है, तो कवि पूछते हैं कि जीवन किस काम में लगे।
सब कुछ अपने हाथों में
उत्तर अगली पंक्ति में है — सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। यह प्रश्न जैसा दिखता है, पर है उत्तर। कवि कहते हैं कि साधन बाहर नहीं खोजने; जो चाहिए वह अपने ही हाथों में है। साहस और इच्छाशक्ति युद्ध के हथियारों जितने ही काम के हैं।
कवि कौन हैं
इस कविता के रचयिता गयाप्रसाद शुक्ल सनेही हैं। वे उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद के रहने वाले थे, और उनका जीवन-काल सन् अठारह सौ तिरासी से उन्नीस सौ बहत्तर तक रहा। उन्होंने कविता ब्रजभाषा में लिखनी आरंभ की और आगे चलकर खड़ी बोली के बड़े कवियों में गिने जाने लगे।
दो उपनाम, एक कारण
सनेही ने स्वयं बताया है कि सरकारी नौकरी के कारण उन्हें सनेही के अतिरिक्त एक और उपनाम त्रिशूल रखना पड़ा। यह छोटी-सी बात उस समय के बारे में बहुत कुछ कहती है, जब देश-प्रेम की कविता लिखना नौकरी के लिए जोखिम था।
उनकी और रचनाएँ
उन्होंने केवल राष्ट्र-प्रेम पर नहीं लिखा। किसान, मज़दूर और सामाजिक कुरीतियों पर भी उनकी प्रभावशाली कविताएँ हैं। त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र और कृषक क्रंदन उनकी उल्लेखनीय रचनाओं में गिनी जाती हैं। कृषक क्रंदन नाम से ही पता चलता है कि किसान उनके विषयों में था।
तुक, जो कविता को बाँधती है
अब शिल्प की ओर देखिए। दाना-पानी और राजा-रानी — दोनों के अंत की ध्वनि एक जैसी पड़ती है। इसे तुक मिलाना कहते हैं। तुक से पंक्ति कान में बैठ जाती है और अगली पंक्ति की प्रतीक्षा बनी रहती है। आह्वान गीत के लिए यह बहुत काम का गुण है।
योजक चिह्न
कविता में बहुत जगह दो शब्द एक छोटी रेखा से जुड़े हैं — संसार-संग, जाति-उद्धार, रस-धार, दाना-पानी, काल-दीप। इस रेखा को योजक चिह्न कहते हैं। वह दो शब्दों का संबंध दिखाकर उन्हें एक इकाई बना देती है, और छंद में जगह भी बचाती है।
है का पहले आना
एक और प्रयोग ध्यान देने योग्य है। है जान एक दिन जाने को, है काल-दीप जलता हरदम — दोनों पंक्तियों में है पहले आया है। यदि इसे अंत में रखें तो पंक्ति गद्य जैसी लगने लगेगी। क्रम बदलने से ही कविता में लय आ जाती है, और यही शिल्प है।
Concepts and terms
जब दो पंक्तियों के अंतिम शब्दों की ध्वनि एक-सी हो, तो उसे तुक मिलाना कहते हैं। दाना-पानी और राजा-रानी इसका उदाहरण हैं। तुक से पंक्ति कान में बैठ जाती है और पढ़ने वाला अगली पंक्ति की प्रतीक्षा करने लगता है।
दो शब्दों के बीच लगी छोटी रेखा योजक चिह्न कहलाती है। वह दोनों शब्दों का संबंध स्पष्ट करती है और उन्हें एक इकाई बना देती है, जैसे संसार-संग, जाति-उद्धार, दाना-पानी और काल-दीप।
काल का अर्थ समय है और काल-दीप वह दीपक जो निरंतर जलता रहता है। परवाना उस पर मंडराकर जल जाता है। कवि इस चित्र से कहते हैं कि जाना निश्चित है, इसलिए प्रश्न यही बचता है कि जीवन किस काम में लगे।
एक ही अर्थ देने वाले अलग-अलग शब्द समानार्थी कहलाते हैं। भू के लिए धरा और पृथ्वी, दीप के लिए प्रदीप और दीपक, पत्थर के लिए पाहन और पाषाण, तलवार के लिए कृपाण और असि।
खड़ी बोली आधुनिक हिंदी का वह रूप है जिसमें आज अधिकांश लेखन होता है। सनेही ने कविता ब्रजभाषा में लिखनी आरंभ की और आगे चलकर खड़ी बोली के बड़े कवियों में गिने जाने लगे।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
आठवीं कक्षा के बच्चे अपने विद्यालय में भाषा-दिवस मना रहे हैं। उन्हें दो कविताएँ मंच पर पढ़नी हैं — स्वदेश और खादी गीत। पढ़ने से पहले वे दोनों को साथ रखकर देखते हैं। स्वदेश में देश-प्रेम कसौटियों के रूप में आता है। खादी गीत में वह कपड़े के धागों में उतर आता है। वहाँ अपनेपन का अभिमान, माता का मान और बच्चों का दुलार भरा है। एक विद्यार्थी कहता है कि दोनों कविताएँ एक ही बात कहती हैं, इसलिए एक ही पढ़ लेनी चाहिए। दूसरी कहती है कि कहने का ढंग अलग है, इसलिए दोनों ज़रूरी हैं। शिक्षिका कहती हैं कि दोनों स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई थीं।
Analysis:
दोनों कविताओं का भाव एक है, पर रास्ता अलग। स्वदेश सीधे पाठक से प्रश्न करती है और उसके सामने कसौटियाँ रखती है। खादी गीत कोई प्रश्न नहीं करता। वह एक वस्तु उठाकर उसमें रिश्ते भर देता है। एक पुकार है, दूसरा चित्र। साथ पढ़ने से दो ढंग दिखते हैं।
Activity:
अपने घर की कोई एक साधारण वस्तु चुनिए और उस पर छह पंक्तियाँ लिखिए, जिनमें उस वस्तु के सहारे कोई रिश्ता या भाव दिखाई दे — जैसे खादी गीत में कपड़े के सहारे दिखता है।
करके देखो
Title:
समानार्थी शब्दों की थैली
Safety:
कैंची की आवश्यकता हो तो बड़ों की सहायता लीजिए।
What You Notice:
एक ही अर्थ के कई शब्द होते हैं, पर हर शब्द अपने साथ थोड़ा अलग रंग लाता है। कविता में कवि उन्हीं में से चुनता है जो लय और तुक में बैठ जाए।
Did you know
कवि ने स्वयं बताया कि सरकारी नौकरी के कारण उन्हें सनेही के अतिरिक्त त्रिशूल उपनाम रखना पड़ा।
कृषक क्रंदन नाम की उनकी रचना के शीर्षक से ही पता चल जाता है कि किसान उनके विषयों में था।
इसी पुस्तक में आगे सोहनलाल द्विवेदी के खादी गीत का एक अंश भी दिया गया है, जिसमें देश-प्रेम कपड़े के धागों में दिखाया गया है।
Memory tricks
देश ने क्या दिया — चार की गिनती — मिट्टी → अन्न-जल → अपने लोग → ज्ञान। चारों के बाद एक प्रश्न — फिर भी नहीं पसीजे?
Practice MCQs with answers (25)
- A कि कवि को उन राजाओं के नाम अब ठीक से याद ही नहीं थे
- B कि उस समय देश में कोई राजा नहीं था
- C कि शासन किसी एक के नहीं, सब नागरिकों के हाथ में है
- D कि कवि राजाओं से नाराज़ थे
Show answer
Why:
नाम न लेना ही यहाँ अर्थ है। कवि शासन को किसी व्यक्ति से हटाकर सब नागरिकों के हाथ में रख देते हैं।
- A बहुमूल्य
- B बेमिसाल
- C पुराना
- D चमकीला
Show answer
Why:
लासानी यानी जिसके जैसा दूसरा न हो।
- A खनिजों की
- B व्यापार की
- C सेना की
- D ज्ञान की
Show answer
Why:
जिस भूमि पर विद्वान मुग्ध हों और संसार मोहित हो, उसकी संपदा ज्ञान की है।
- A जो इतना पाकर भी नहीं पसीजा
- B जो देश से बाहर कहीं चला गया हो
- C जो खेती नहीं करता
- D जो युद्ध में नहीं गया
Show answer
Why:
जिसे मिट्टी, अन्न, रिश्ते और ज्ञान सब मिला और जो फिर भी नहीं पिघला, कवि उसे धरती पर पड़ा बोझ कहते हैं।
- A बिना किसी शोर के
- B बिना किसी सहायता के
- C बिना किसी संदेह के
- D बिना किसी विलंब के
Show answer
Why:
सं-शय यानी संदेह; नि-स्संशय यानी संदेह से रहित।
- A संध्या को जलाया जाने वाला दीपक
- B वह दीपक जो हर समय जलता रहता है
- C उत्सव में जलाया जाने वाला दीपक
- D मंदिर में रखा हुआ दीपक
Show answer
Why:
काल यानी समय। काल-दीप वह दीपक है जो निरंतर जलता रहता है, और परवाने उसी पर जल जाते हैं।
- A हथियार ख़रीदने चाहिए
- B तोप और तलवार ही सबसे बड़ा बल होता है
- C युद्ध सबसे बड़ा धर्म है
- D साधन बाहर नहीं, अपने ही हाथों में हैं
Show answer
Why:
यह प्रश्न जैसा दिखता है, पर उत्तर है। साहस और इच्छाशक्ति हथियारों जितने ही काम के हैं।
- A गयाप्रसाद शुक्ल सनेही
- B सोहनलाल द्विवेदी
- C मैथिलीशरण गुप्त
- D सुभद्राकुमारी चौहान
Show answer
Why:
यह कविता गयाप्रसाद शुक्ल सनेही की है।
- A पाठकों की माँग पर
- B संपादक के कहने पर
- C सरकारी नौकरी के कारण
- D छंद की आवश्यकता के कारण
Show answer
Why:
कवि ने स्वयं बताया कि सरकारी नौकरी के कारण उन्हें सनेही के अतिरिक्त त्रिशूल उपनाम रखना पड़ा।
- A खादी गीत
- B कृषक क्रंदन
- C यशोधरा
- D झाँसी की रानी
Show answer
Why:
त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र और कृषक क्रंदन उनकी उल्लेखनीय रचनाओं में गिनी जाती हैं।
- A अवधी में
- B मैथिली में
- C भोजपुरी में
- D ब्रजभाषा में
Show answer
Why:
उन्होंने ब्रजभाषा में लिखना आरंभ किया और आगे खड़ी बोली के श्रेष्ठ कवियों में स्थान बनाया।
- A तुक मिलाना
- B अनुप्रास
- C उपमा
- D पुनरावृत्ति
Show answer
Why:
शब्दों की अंतिम ध्वनि मिलने को तुक मिलाना कहते हैं।
- A कविता लंबी हो जाती है
- B कठिन शब्द कम हो जाते हैं
- C पंक्ति कान में बैठ जाती है
- D अर्थ बदल जाता है
Show answer
Why:
तुक से पंक्ति याद रह जाती है और अगली पंक्ति की प्रतीक्षा बनी रहती है — आह्वान गीत के लिए यह बहुत काम का गुण है।
- A क्योंकि छंद में शब्द कम पड़ जाते थे
- B क्योंकि इससे दोनों शब्दों का संबंध स्पष्ट होता है और जगह भी बचती है
- C क्योंकि ऐसा लिखना उस समय की कविता का एक पुराना नियम ही रहा था
- D क्योंकि इससे कविता कठिन लगने लगती है
Show answer
Why:
योजक चिह्न दो शब्दों को एक इकाई बना देता है। संबंध भी स्पष्ट होता है और छंद में जगह भी बचती है।
- A अर्थ बदल जाएगा
- B तुक बिगड़ जाएगी
- C पंक्ति छोटी हो जाएगी
- D पंक्ति गद्य जैसी लगने लगेगी
Show answer
Why:
क्रम बदलने से ही कविता की लय बनती है। है को अंत में रखते ही पंक्ति साधारण वाक्य जैसी लगने लगती है।
- A भू
- B धन
- C जन
- D मन
Show answer
Why:
भू यानी पृथ्वी। ऐसा व्यक्ति धरती पर पड़ा बोझ है।
- A राजा-रानी
- B माता-पिता
- C दाना-पानी
- D नव रत्न
Show answer
Why:
पंक्ति है — पाया जिसमें दाना-पानी, यानी अन्न और जल।
- A सही, क्योंकि कविता खजानों की बात करती है
- B ग़लत, क्योंकि अगली पंक्ति संपदा को ज्ञान से जोड़ देती है
- C सही, क्योंकि नव रत्न का अर्थ नौ रत्न होता है
- D ग़लत, क्योंकि कविता संपदा की कोई बात ही कहीं नहीं करती
Show answer
Why:
खजानों के तुरंत बाद आने वाली पंक्ति बताती है कि जिस पर ज्ञानी मरते हैं — यानी संपदा ज्ञान की है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों कथन सही हैं और कारण अभिकथन को समझाता है। मृत्यु निश्चित है, इसलिए कवि पूछते हैं कि जीवन किस काम में लगे — और उत्तर अपने हाथों में बताते हैं।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
अभिकथन ग़लत है और कारण सही। योजक चिह्न सजावट नहीं है; वह संबंध स्पष्ट करता है और छंद में जगह भी बचाता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II ग़लत है — उन्होंने किसान, मज़दूर और सामाजिक कुरीतियों पर भी कविताएँ लिखीं।
- A कविता इस पर कुछ नहीं कहती
- B मिट्टी, अन्न-जल, अपने लोग और ज्ञान — सब उसी भूमि से मिले
- C देश केवल सैनिकों को कुछ देता है
- D कविता में देने और लेने का यह प्रश्न असल में कहीं उठता ही नहीं है
Show answer
Why:
कविता का दूसरा भाग एक-एक करके यही गिनाता है कि देश ने क्या-क्या दिया है।
- A अर्थ बदल जाएगा
- B कुछ भी नहीं बदलेगा
- C तुक पहले से कहीं अधिक मीठी और सुरीली लगेगी
- D लय चली जाएगी और पंक्ति गद्य जैसी लगेगी
Show answer
Why:
है को आगे रखने से ही लय बनती है। क्रम बदलते ही पंक्ति साधारण वाक्य जैसी लगने लगती है।
- A धरा
- B प्रदीप
- C कृपाण
- D पाहन
Show answer
Why:
भू, धरा और पृथ्वी एक ही अर्थ के शब्द हैं। प्रदीप दीपक है, कृपाण तलवार और पाहन पत्थर।
- A हृदय का
- B दुनिया का
- C तलवार का
- D दीप का
Show answer
Why:
कृपाण और असि दोनों तलवार के पर्याय हैं।
Important short questions (7)
वह मिट्टी जिसमें शरीर बढ़ा, अन्न-जल, माता-पिता और बंधु जैसे अपने लोग, तथा वह ज्ञान-संपदा जिस पर संसार मोहित है।
हम का अर्थ है देश के सारे नागरिक। कवि किसी राजा का नाम नहीं लेते, बल्कि शासन देश के लोगों के हाथ में बताते हैं।
उसे, जिसे मिट्टी, अन्न, अपने लोग और ज्ञान सब मिला और जो फिर भी नहीं पसीजा। ऐसा व्यक्ति धरती पर पड़ा बोझ भर है।
कि समय का दीपक हर पल जल रहा है और जाना निश्चित है। इसलिए प्रश्न यही बचता है कि यह जीवन किस काम में लगे।
वे उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद के रहने वाले थे। उन्होंने ब्रजभाषा से आरंभ किया और आगे खड़ी बोली के बड़े कवियों में गिने जाने लगे। त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र और कृषक क्रंदन उनकी रचनाएँ हैं।
दो शब्दों के बीच लगी वह छोटी रेखा जो उनका संबंध दिखाकर उन्हें एक इकाई बना देती है। उदाहरण — संसार-संग और जाति-उद्धार।
पंक्ति में लय आ जाती है। यदि है को अंत में रख दें तो वही पंक्ति साधारण गद्य वाक्य जैसी लगने लगती है।
Long answer questions (3)
पहले कवि मिट्टी की बात करते हैं। उसी में शरीर उगा और बढ़ा। फिर वे उस अन्न-जल की बात करते हैं जिसने उसे चलाया। इसके बाद रिश्तों की बारी आती है। माता-पिता और बंधु भी इसी भूमि पर मिले। देश से अलग होकर अपनापन बचता ही नहीं। आगे वे कहते हैं कि हम ही इस देश के राजा-रानी हैं। शासन यहाँ के सब नागरिकों के हाथ में है। फिर खजानों और नव रत्नों की बात आती है। अगली पंक्ति बता देती है कि यह संपदा ज्ञान की है। इतना गिनाकर कवि एक प्रश्न रखते हैं। जो इस पर भी न पसीजा, क्या वह धरती पर बोझ नहीं है।
पहला प्रयोग तुक का है। दाना-पानी और राजा-रानी की अंतिम ध्वनि एक-सी है, इसलिए पंक्ति कान में बैठ जाती है और पढ़ने वाला अगली पंक्ति की प्रतीक्षा करता है। दूसरा प्रयोग योजक चिह्न का है। संसार-संग, जाति-उद्धार, रस-धार, दाना-पानी और काल-दीप जैसे शब्द-युग्म दो शब्दों को एक इकाई बना देते हैं और छंद में जगह भी बचाते हैं। तीसरा प्रयोग शब्द-क्रम का है। है जान एक दिन जाने को और है काल-दीप जलता हरदम — दोनों में है पहले आया है। उसे अंत में रख दें तो पंक्ति गद्य जैसी लगने लगती है। चौथा प्रयोग टेक का है, जो पूरी कविता को बाँधे रखती है।
कवि कहते हैं कि यह निश्चित है, निस्संशय निश्चित, कि जान एक दिन जानी ही है। इसके साथ वे काल-दीप का चित्र रखते हैं — समय का वह दीपक जो हर पल जलता रहता है और जिस पर परवाने जल जाते हैं। पर उनका उद्देश्य डराना नहीं है। इसका प्रमाण अगली ही पंक्ति है, जिसमें वे कहते हैं कि सब कुछ अपने हाथों में है। यानी जब जाना निश्चित ही है तो प्रश्न केवल यह बचता है कि यह थोड़ा-सा जीवन किस काम में लगाया जाए। मृत्यु की याद यहाँ निराशा नहीं लाती, बल्कि काम करने की जल्दी पैदा करती है।
Flashcards (17)
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- देन क्रम में लगाइए
- समानार्थी मिलाइए
- सही या भ्रम
- किसका पर्याय
- झटपट उत्तर
Class 8 Hindi Chapter 1 — frequently asked questions
टेक है — वह हृदय नहीं है पत्थर है। आगे उसी में स्वदेश के प्यार की बात आती है। यह आरंभ, मध्य और अंत — तीनों जगह लौटती है।
क्योंकि पत्थर ऊपर से हृदय जितना ही ठोस दिखता है, पर उसमें न धड़कन है, न संवेदना। वह किसी के दुख पर पसीजता नहीं।
वह दूसरों में जगाए गए जोश को गिनती है। अपने भीतर का उत्साह यहाँ पर्याप्त नहीं माना जाता।
वह मिट्टी जिसमें शरीर बढ़ा, अन्न-जल, माता-पिता और बंधु जैसे अपने लोग, तथा वह ज्ञान-संपदा जिस पर संसार मोहित है।
हम का अर्थ है देश के सारे नागरिक। कवि किसी राजा का नाम नहीं लेते, बल्कि शासन देश के लोगों के हाथ में बताते हैं।
उसे, जिसे मिट्टी, अन्न, अपने लोग और ज्ञान सब मिला और जो फिर भी नहीं पसीजा। ऐसा व्यक्ति धरती पर पड़ा बोझ भर है।
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