Class 8 Hindi Chapter 1: स्वदेश

स्वदेश is Chapter 1 of NCERT / CBSE Class 8 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 2 topics , 50 practice MCQs with answers and explanations , 20 important short and long questions and 34 flashcards — all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.

पत्थर हृदय और पाँच कसौटियाँ

कविता एक ही पंक्ति को बार-बार लौटाती है और उसके सहारे पाँच कसौटियाँ रखती है — जोश, साथ, साहस, उद्धार और भाव। पाँचों व्यक्ति को अपने से बाहर की ओर मोड़ती हैं।

What you will be able to do

  • मैं बता सकता/सकती हूँ कि कविता में कौन-सी पंक्ति बार-बार लौटती है और क्यों।
  • मैं समझा सकता/सकती हूँ कि कवि हृदय की तुलना पत्थर से क्यों करते हैं।
  • मैं कविता की पाँचों कसौटियों को अपने शब्दों में गिना सकता/सकती हूँ।
  • मैं बता सकता/सकती हूँ कि निषेध की भाषा कविता को कैसा स्वर देती है।
  • मैं यह पहचान सकता/सकती हूँ कि आह्वान गीत किसे कहते हैं।

Key points

  • जो पंक्ति कविता में आरंभ, मध्य और अंत — तीनों जगह लौटती है, वही इसकी टेक है। वह पत्थर वाले हृदय की पंक्ति है।

  • कवि देश-प्रेम से रहित हृदय को बुरा नहीं, खाली कहते हैं। पत्थर में न धड़कन है, न संवेदना।

  • पहली कसौटी जोश की है, और वह अपने भीतर के नहीं, दूसरों में जगाए गए उत्साह को गिनती है।

  • दूसरी कसौटी संसार-संग चलने की है — समाज के सुख-दुख में भागीदार होना।

  • तीसरी कसौटी साहस की है। साहस छूटते ही पार, यानी लक्ष्य, दूर रह जाता है।

  • चौथी कसौटी औरों के उद्धार की है; कवि अपनी भलाई को समाज की भलाई से बाँध देते हैं।

  • पाँचवीं कसौटी भीतर के भाव की है — रस-धार यानी हृदय में बहती हुई कोमलता।

  • निषेध की भाषा के कारण कविता बताती है कि किसके बिना कुछ नहीं होता, और वही उसे चेतावनी का स्वर देती है।

Full explanation

एक वाक्य, जो आठ बार लौटता है

इस कविता को पढ़ते ही एक पंक्ति कान में बैठ जाती है — वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। यही पंक्ति आरंभ में है, बीच में है और अंत में भी। कवि इसे बार-बार लौटाते हैं, और हर बार उसके पहले एक नई बात रख देते हैं। इससे कविता एक ही दावे को अलग-अलग दिशाओं से कसती चलती है।

दावा क्या है

दावा सीधा है। जिस हृदय में अपने देश का प्रेम नहीं, वह हृदय है ही नहीं। कवि उसे पत्थर कहते हैं। पत्थर में धड़कन नहीं होती, संवेदना नहीं होती, वह किसी के दुख पर पसीजता नहीं। कवि यह नहीं कहते कि ऐसा व्यक्ति बुरा है। वे इससे आगे की बात कहते हैं — वह व्यक्ति भीतर से खाली है।

पत्थर क्यों, और कुछ क्यों नहीं

पत्थर चुनना अपने आप में एक निर्णय है। कवि लोहा कह सकते थे, बर्फ़ कह सकते थे। पत्थर इसलिए सटीक बैठता है कि वह देखने में हृदय जितना ही ठोस लगता है, पर उसमें न गरमी है न गति। ऊपर से दोनों एक-से, भीतर से बिलकुल उलटे। यही तुलना की ताक़त है।

पहली कसौटी — जोश

पहली कसौटी उत्साह की है। जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं। ध्यान दीजिए, कवि यह नहीं पूछते कि तुममें जोश है या नहीं। वे पूछते हैं कि तुमने दूसरों में जोश जगाया या नहीं। अपने भीतर का उत्साह अपनी जगह है; उसे औरों तक पहुँचाना अलग बात है, और कविता उसी दूसरी बात को गिनती है।

दूसरी कसौटी — संसार के संग

दूसरी कसौटी साथ चलने की है। जो चल न सका संसार-संग, उसका होता संसार नहीं। संसार-संग चलने का अर्थ है समाज के साथ क़दम मिलाना, उसके सुख-दुख में शामिल होना। जो अलग-थलग रहता है, वह संसार से कुछ पाता भी नहीं। कवि इसे अधिकार और भागीदारी के रिश्ते की तरह रखते हैं।

तीसरी कसौटी — साहस

तीसरी कसौटी साहस की है। जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं। यहाँ पार शब्द महत्वपूर्ण है। पार यानी लक्ष्य का दूसरा किनारा। साहस छोड़ देने का अर्थ है बीच धारा में हाथ-पाँव रोक देना, और तब किनारा कितना भी पास क्यों न हो, मिलता नहीं।

चौथी कसौटी — औरों का उद्धार

चौथी कसौटी सबसे कठोर है। जिससे न जाति-उद्धार हुआ, होगा उसका उद्धार नहीं। कवि अपनी भलाई को दूसरों की भलाई से बाँध देते हैं। अकेले अपने लिए किया गया काम यहाँ गिना ही नहीं जाता। जो अपने समाज के काम न आया, उसका अपना जीवन भी अधूरा रह गया।

पाँचवीं कसौटी — भाव

पाँचवीं कसौटी भीतर की है। जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं। रस-धार यानी भीतर बहती हुई कोमलता। पिछली चार कसौटियाँ काम और व्यवहार की थीं; यह अनुभव की है। कवि कहना चाहते हैं कि काम तो बाद की बात है, पहले भीतर कुछ पिघलना चाहिए।

पाँचों एक ही दिशा में

पाँचों कसौटियों को एक साथ रखिए तो एक बात साफ़ दिखती है। हर कसौटी अपने से बाहर की ओर इशारा करती है — दूसरों में जोश, संसार का साथ, पार तक पहुँचना, समाज का उद्धार, भीतर का भाव जो किसी और के लिए हो। देश-प्रेम यहाँ भीतर बंद रहने वाली भावना नहीं है।

निषेध की भाषा

कवि की भाषा पर ध्यान दीजिए। लगभग हर पंक्ति नहीं पर समाप्त होती है — सार नहीं, संसार नहीं, पार नहीं, उद्धार नहीं, प्यार नहीं। कवि यह नहीं बताते कि क्या करना है; वे बताते हैं कि किसके बिना कुछ नहीं होता। यह निषेध की भाषा है और वह चेतावनी की तरह सुनाई देती है।

आह्वान गीत

ऐसी रचना को आह्वान गीत कहते हैं। आह्वान यानी पुकार। यह कविता पाठक से कुछ माँगती है, केवल कोई दृश्य नहीं दिखाती। इसीलिए इसकी पंक्तियाँ छोटी हैं, लय तेज़ है, और एक ही पंक्ति बार-बार लौटती है — जैसे कोई मंच से भीड़ को पुकार रहा हो।

पुकार किससे है

कविता किसी राजा या सेनापति से नहीं बोलती। वह सीधे पढ़ने वाले से बोलती है। इसीलिए इसमें कोई नाम नहीं आता, कोई घटना नहीं आती, कोई तिथि नहीं आती। जो भी पढ़े, पंक्ति उसी पर लागू हो जाती है। यही इस कविता को हर समय के लिए खुला रखता है।

एक अनुमान, जो कविता से ही निकलता है

कविता कहीं नहीं कहती कि देश-प्रेम का अर्थ केवल युद्ध है। कसौटियाँ जोश, साथ, साहस, उद्धार और भाव की हैं — पाँचों रोज़ के जीवन की बातें हैं। इससे अनुमान होता है कि कवि की दृष्टि में देश-प्रेम हर दिन के छोटे कामों में उतरता है।

कविता जो प्रश्न छोड़ जाती है

अंत में वही पंक्ति फिर लौटती है, पर अब वह पहले जैसी नहीं लगती। पहली बार वह एक दावा थी; पाँच कसौटियों के बाद वह एक प्रश्न बन जाती है, जो पाठक से पूछा गया है। कविता उत्तर नहीं देती। उत्तर पढ़ने वाले के पास छोड़ देती है।

Concepts and terms

टेक या लौटती पंक्ति

जो पंक्ति कविता में बार-बार लौटकर आती है, उसे टेक कहते हैं। यहाँ टेक है — वह हृदय नहीं है पत्थर है। आगे उसी में स्वदेश के प्यार की बात आती है। हर बार उसके पहले एक नई बात रखी जाती है, इसलिए वही पंक्ति हर बार कुछ और कहती हुई लगती है।

आह्वान गीत

आह्वान का अर्थ है पुकार। जो रचना पढ़ने वाले से कुछ करने को कहे, उसे आह्वान गीत कहते हैं। ऐसी रचना में पंक्तियाँ छोटी, लय तेज़ और स्वर ऊँचा रखा जाता है, ताकि वह भीड़ तक पहुँच सके।

निषेध की भाषा

जब कवि यह न बताकर कि क्या करना है, यह बताएँ कि किसके बिना कुछ नहीं होता, तो उसे निषेध की भाषा कहते हैं। इस कविता की लगभग हर पंक्ति नहीं पर रुकती है, और इसी से उसमें चेतावनी का स्वर आता है।

कसौटी

कसौटी वह पत्थर है जिस पर सोना घिसकर परखा जाता था। यहाँ कसौटी का अर्थ है परख। कविता पाँच परखें रखती है, और हर परख के बाद वही टेक लौटाकर पूछती है कि तुम इस पर खरे उतरे या नहीं।

रस-धार

रस का अर्थ यहाँ स्वाद नहीं, भीतर का भाव है। रस-धार यानी हृदय में बहती हुई कोमलता। जिसमें यह धारा नहीं बहती, वह काम तो कर सकता है, पर किसी के लिए पसीज नहीं सकता।

सावधान

भ्रम और सच

मिलाकर देखो

Scenario:

सातवीं कक्षा की सुमन अपने मुहल्ले में देखती है कि बरसात के बाद गली में पानी भर जाता है और छोटे बच्चे वहीं से स्कूल जाते हैं। वह अकेले कुछ नहीं कर पाती, इसलिए अपनी कक्षा के आठ साथियों से बात करती है। सब मिलकर नगर पालिका के कार्यालय जाते हैं और नाली की सफ़ाई के लिए आवेदन देते हैं। कुछ साथियों का कहना है कि यह काम उनका नहीं, सरकार का है। सुमन कहती है कि जिस गली में वे रहते हैं, उसकी चिंता भी उन्हीं की है। दो सप्ताह बाद नाली साफ़ होती है और पानी भरना रुक जाता है। अब मुहल्ले के और लोग भी सुमन के समूह से जुड़ना चाहते हैं।

Analysis:

सुमन का काम कविता की दूसरी, तीसरी और चौथी कसौटी पर एक साथ खरा उतरता है। वह अकेले नहीं चली, साथ लेकर चली; उसने बात रखने का साहस किया; और जो किया वह अपने लिए नहीं, पूरी गली के लिए किया। कविता की भाषा में कहें तो उसने जोश भी जगाया, क्योंकि अब और लोग जुड़ना चाहते हैं।

Activity:

अपने मुहल्ले या विद्यालय की ऐसी एक समस्या चुनिए जिसे पाँच साथी मिलकर सुलझा सकते हैं। उस पर एक पन्ने की योजना लिखिए और बताइए कि उसमें कविता की कौन-सी कसौटी काम आएगी।

करके देखो

Title:

टेक अपनी बनाइए

Safety:

कैंची या किसी नुकीली वस्तु की आवश्यकता नहीं है।

What You Notice:

वही पंक्ति हर बार अलग सुनाई देती है, क्योंकि उसके पहले रखी गई बात बदल जाती है। टेक का पूरा काम यही है।

Did you know

इस कविता की टेक पूरी रचना में एक बार नहीं, कई बार लौटती है — और अंतिम बार लौटने पर वह सबसे भारी पड़ती है।

कविता में कोई व्यक्ति-नाम, कोई तिथि और कोई युद्ध-दृश्य नहीं आता, फिर भी इसे देश-प्रेम की कविता कहा जाता है।

कसौटी असल में एक काला पत्थर होता था, जिस पर सोना घिसकर उसकी शुद्धता परखी जाती थी। इसी से परख के अर्थ में यह शब्द चल पड़ा।

Memory tricks

पाँच कसौटियाँ याद रखने का सूत्र — जोश → साथ → साहस → उद्धार → भाव। पहली चार बाहर के काम की, पाँचवीं भीतर के भाव की।

टेक पहचानने का सूत्र — जो पंक्ति तीसरी बार भी वैसी ही लौटे, वही टेक है।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 कविता में जो पंक्ति आरंभ, मध्य और अंत — तीनों जगह लौटकर आती है, और जिसे कवि हर बार एक नई बात के बाद रखते हैं, वह है — beginner
  • A वह हृदय नहीं है पत्थर है
  • B जिसने साहस को छोड़ दिया
  • C जो चल न सका संसार-संग
  • D है काल-दीप जलता हरदम
Show answer
Answer: वह हृदय नहीं है पत्थर है
Why:

यही पंक्ति पूरी कविता को थामे रहती है और हर बार नए संदर्भ में लौटती है।

Q2 कवि जिस हृदय में स्वदेश का प्रेम नहीं है, उसे क्या कहते हैं? beginner
  • A लोहा
  • B पत्थर
  • C बर्फ़
  • D धूल
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Answer: पत्थर
Why:

कवि उसे पत्थर कहते हैं, क्योंकि पत्थर में न धड़कन है न संवेदना।

Q3 पत्थर की तुलना इस कविता में सबसे तीखी इसलिए बैठती है, क्योंकि — intermediate
  • A वह नदी के किनारे बहुत सरलता से और सस्ते में मिल जाता है
  • B वह सबसे भारी वस्तु है जो कवि को दिखी
  • C वह हृदय जितना ही ठोस दिखता है, पर भीतर से उलटा है
  • D वह हर घर की दीवार में लगाया जाता है
Show answer
Answer: वह हृदय जितना ही ठोस दिखता है, पर भीतर से उलटा है
Why:

ऊपर से दोनों एक-से लगते हैं और भीतर से बिलकुल अलग हैं। जो चीज़ पास से मिलती-जुलती हो, उसी की तुलना सबसे अधिक चुभती है।

Q4 जो जीवित जोश जगा न सका — इस पंक्ति में कवि किस बात को गिनते हैं? intermediate
  • A अपने भीतर का उत्साह
  • B पढ़ाई में की गई मेहनत
  • C युद्ध में दिखाया गया बल
  • D दूसरों में जगाया गया उत्साह
Show answer
Answer: दूसरों में जगाया गया उत्साह
Why:

कवि यह नहीं पूछते कि तुममें जोश है या नहीं, बल्कि यह कि तुमने औरों में जोश जगाया या नहीं।

Q5 संसार-संग चलने का अर्थ कविता में सबसे निकट किससे है? beginner
  • A समाज के सुख-दुख में शामिल होने से
  • B अकेले यात्रा करते रहने से
  • C दूर देशों में बस जाने से
  • D संसार की वस्तुएँ इकट्ठी करने से
Show answer
Answer: समाज के सुख-दुख में शामिल होने से
Why:

संसार-संग चलना यानी समाज के साथ क़दम मिलाना और उसके सुख-दुख में भागीदार होना।

Q6 जिसने साहस को छोड़ दिया — इस पंक्ति के आगे आने वाला पार शब्द किस ओर संकेत करता है? intermediate
  • A नदी के उस पार बसे गाँव की ओर
  • B लक्ष्य के दूसरे किनारे की ओर
  • C समुद्र पार के देशों की ओर
  • D पर्वत के पीछे की घाटी की ओर
Show answer
Answer: लक्ष्य के दूसरे किनारे की ओर
Why:

पार यानी वह किनारा जहाँ पहुँचना लक्ष्य है। साहस छूटते ही बीच धारा में गति रुक जाती है।

Q7 जिससे न जाति-उद्धार हुआ — इस पंक्ति में कवि अपनी भलाई को किससे बाँध देते हैं? intermediate
  • A अपनी मेहनत से
  • B अपने धन से
  • C दूसरों की भलाई से
  • D अपनी पढ़ाई से
Show answer
Answer: दूसरों की भलाई से
Why:

कवि कहते हैं कि जो अपने समाज के काम न आया, उसका अपना जीवन भी अधूरा रह गया।

Q8 रस-धार से कवि का संकेत किस ओर है? beginner
  • A नदी की धारा की ओर
  • B मीठे स्वाद की ओर
  • C वर्षा की ठंडी बूँदों की ओर ही
  • D भीतर बहती कोमलता की ओर
Show answer
Answer: भीतर बहती कोमलता की ओर
Why:

रस-धार यानी हृदय के भीतर बहता हुआ भाव, जो व्यक्ति को पिघलने देता है।

Q9 कविता की लगभग हर पंक्ति किस शब्द पर समाप्त होती है? beginner
  • A नहीं
  • B हाँ
  • C सदा
  • D कभी
Show answer
Answer: नहीं
Why:

सार नहीं, संसार नहीं, पार नहीं, उद्धार नहीं, प्यार नहीं — निषेध की यही भाषा कविता को चेतावनी का स्वर देती है।

Q10 ऐसी रचना को आह्वान गीत कहा जाता है, क्योंकि वह — intermediate
  • A केवल कोई दृश्य चित्र की तरह दिखाती है
  • B पढ़ने वाले से कुछ माँगती और उसे पुकारती है
  • C किसी राजा की प्रशंसा में लिखी जाती है
  • D किसी घटना का क्रम से वर्णन करती है
Show answer
Answer: पढ़ने वाले से कुछ माँगती और उसे पुकारती है
Why:

आह्वान यानी पुकार। ऐसी कविता पाठक से कुछ करने को कहती है, इसीलिए उसकी लय तेज़ और पंक्तियाँ छोटी होती हैं।

Q11 कविता में कोई नाम, कोई तिथि और कोई घटना न आने का क्या प्रभाव पड़ता है? advanced
  • A कविता अधूरी लगने लगती है
  • B कविता केवल सैनिकों के लिए रह जाती है
  • C पंक्ति हर पढ़ने वाले पर लागू हो जाती है
  • D कविता का अर्थ समझना असंभव हो जाता है
Show answer
Answer: पंक्ति हर पढ़ने वाले पर लागू हो जाती है
Why:

नाम और तिथि न होने से कविता किसी एक समय में बँधती नहीं; जो भी पढ़े, पंक्ति उसी से बात करने लगती है।

Q12 पाँचों कसौटियों में जो बात साझी है, वह यह है कि वे सब — advanced
  • A व्यक्ति को अपने भीतर लौटने को कहती हैं
  • B केवल बड़ों पर लागू होती हैं
  • C केवल युद्ध के समय काम आती हैं
  • D व्यक्ति को अपने से बाहर की ओर मोड़ती हैं
Show answer
Answer: व्यक्ति को अपने से बाहर की ओर मोड़ती हैं
Why:

दूसरों में जोश, संसार का साथ, पार तक पहुँचना, समाज का उद्धार और भाव — पाँचों अपने से बाहर की ओर इशारा करती हैं।

Q13 कवि किस हृदय को पत्थर जैसा मानते हैं? beginner
  • A जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
  • B जिसमें धन का लोभ नहीं है
  • C जिसमें यात्रा की इच्छा नहीं है
  • D जिसमें संगीत की रुचि नहीं है
Show answer
Answer: जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
Why:

पूरी कविता का दावा यही है — देश-प्रेम के बिना हृदय हृदय नहीं रहता।

Q14 रिक्त स्थान भरिए — उस जीवन में कुछ ______ नहीं। (पहली कसौटी वाली पंक्ति) beginner
  • A पार
  • B सार
  • C प्यार
  • D उद्धार
Show answer
Answer: सार
Why:

पंक्ति है — उस जीवन में कुछ सार नहीं। सार यानी तत्व, जो बचता है।

Q15 रिक्त स्थान भरिए — उसका होता ______ नहीं। (दूसरी कसौटी वाली पंक्ति) beginner
  • A प्यार
  • B विचार
  • C संसार
  • D आधार
Show answer
Answer: संसार
Why:

जो समाज के साथ नहीं चलता, उसका अपना संसार भी नहीं बनता।

Q16 सही या ग़लत — कविता कहती है कि देश-प्रेम दिखाने के लिए तोप और तलवार ही एकमात्र साधन हैं। intermediate
  • A सही, क्योंकि कविता हथियारों का नाम लेती है
  • B ग़लत, क्योंकि कविता हथियारों का नाम ही नहीं लेती
  • C सही, क्योंकि कविता युद्ध के समय लिखी गई
  • D ग़लत, क्योंकि कविता की कसौटियाँ रोज़ के जीवन की हैं
Show answer
Answer: ग़लत, क्योंकि कविता की कसौटियाँ रोज़ के जीवन की हैं
Why:

कविता हथियारों का नाम तो लेती है, पर उसकी पाँचों कसौटियाँ जोश, साथ, साहस, उद्धार और भाव की हैं — सब रोज़ के जीवन की बातें।

Q17 कविता पढ़ते हुए ध्यान दीजिए कि कवि कहीं यह नहीं बताते कि क्या करना चाहिए। उनके कहने का ढंग किस प्रकार का है? intermediate
  • A वे बताते हैं कि किसके बिना कुछ नहीं होता
  • B वे बताते हैं कि क्या-क्या करना चाहिए
  • C वे केवल प्रकृति का वर्णन करते हैं
  • D वे अपनी ही कथा सुनाते हैं
Show answer
Answer: वे बताते हैं कि किसके बिना कुछ नहीं होता
Why:

निषेध की भाषा के कारण कविता यह बताती है कि किन चीज़ों के अभाव में जीवन व्यर्थ हो जाता है।

Q18 अभिकथन: अंत में लौटने वाली पंक्ति पहली बार से अलग सुनाई देती है। कारण: उसके पहले पाँच कसौटियाँ पढ़ी जा चुकी होती हैं। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

दोनों कथन सही हैं और कारण अभिकथन को समझाता है। पाँच कसौटियों से गुज़रने के बाद वही पंक्ति दावे से बदलकर प्रश्न जैसी लगने लगती है।

Q19 अभिकथन: कवि पत्थर के स्थान पर बर्फ़ कह देते तो तुलना और तीखी होती। कारण: बर्फ़ पिघल जाती है, पत्थर नहीं पिघलता। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
Why:

कारण ग़लत है। बर्फ़ का पिघलना तुलना को कमज़ोर कर देता, क्योंकि कवि ऐसी वस्तु चाहते हैं जो कभी न पसीजे — वही पत्थर है।

Q20 कविता की कसौटियों के बारे में तीन कथन नीचे दिए गए हैं। I. पहली कसौटी दूसरों में जोश जगाने की है। II. तीसरी कसौटी साहस की है। III. पाँचवीं कसौटी धन कमाने की है। इनमें से कौन-से कथन सही हैं? advanced
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C केवल I और III
  • D I, II और III
Show answer
Answer: केवल I और II
Why:

I और II सही हैं। III ग़लत है — पाँचवीं कसौटी भाव और रस-धार की है, धन की नहीं।

Q21 कविता पढ़कर रोहन कहता है कि देश-प्रेम केवल सीमा पर दिखाया जा सकता है। कविता के आधार पर उसे सबसे सही उत्तर क्या मिलेगा? advanced
  • A वह ठीक कहता है, क्योंकि कविता तोप और तलवार का नाम लेती है
  • B कविता की कसौटियाँ जोश, साथ और भाव की हैं, जो हर दिन की बातें हैं
  • C कविता इस प्रश्न पर कुछ नहीं कहती, इसलिए उत्तर नहीं दिया जा सकता
  • D वह ठीक कहता है, क्योंकि कविता स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई
Show answer
Answer: कविता की कसौटियाँ जोश, साथ और भाव की हैं, जो हर दिन की बातें हैं
Why:

कविता की पाँचों कसौटियाँ रोज़ के जीवन से जुड़ी हैं, इसलिए देश-प्रेम सीमा तक सीमित नहीं रहता।

Q22 कल्पना कीजिए कि कक्षा में एक विद्यार्थी अकेले हर काम करता है और किसी समूह में शामिल नहीं होता। कविता की कौन-सी कसौटी उस पर सबसे सीधे लागू होगी? intermediate
  • A पहली — जोश जगाने की
  • B पाँचवीं — भाव की
  • C तीसरी — साहस की
  • D दूसरी — संसार-संग चलने की
Show answer
Answer: दूसरी — संसार-संग चलने की
Why:

संसार-संग चलने की कसौटी साथ चलने की है, और अकेले रह जाना ठीक उसी के विपरीत है।

Q23 मिलान कीजिए — पार शब्द का कविता में सबसे निकट अर्थ है — beginner
  • A नदी का किनारा
  • B लक्ष्य की प्राप्ति
  • C यात्रा का आरंभ
  • D सेना का शिविर
Show answer
Answer: लक्ष्य की प्राप्ति
Why:

साहस छोड़ने वाला पार नहीं पहुँचता, यानी लक्ष्य तक नहीं पहुँचता।

Q24 सही या ग़लत — कविता में कवि किसी एक नायक का नाम लेकर उसकी प्रशंसा करते हैं। beginner
  • A सही, वे एक सेनापति का नाम लेते हैं
  • B सही, वे एक राजा का नाम लेते हैं
  • C ग़लत, कविता में कोई नाम आता ही नहीं
  • D ग़लत, कविता में केवल नदियों के नाम आते हैं
Show answer
Answer: ग़लत, कविता में कोई नाम आता ही नहीं
Why:

कविता में कोई व्यक्ति-नाम नहीं आता, और यही उसे हर पाठक के लिए खुला रखता है।

Q25 कविता की पंक्तियाँ छोटी और लय तेज़ होने का सबसे उपयुक्त कारण क्या है? advanced
  • A कवि के पास समय कम था
  • B पुस्तक में स्थान कम था
  • C लंबी पंक्तियाँ ब्रजभाषा की कविता में कभी लिखी नहीं जातीं
  • D यह आह्वान गीत है, जो पुकार की तरह सुनाई देना चाहिए
Show answer
Answer: यह आह्वान गीत है, जो पुकार की तरह सुनाई देना चाहिए
Why:

पुकार तेज़ और छोटी होती है। आह्वान गीत की लय उसी के अनुकूल रखी जाती है।

Important short questions (7)

कविता की टेक कौन-सी है और वह कितनी बार लौटती है?

टेक है — वह हृदय नहीं है पत्थर है। आगे उसी में स्वदेश के प्यार की बात आती है। यह आरंभ, मध्य और अंत — तीनों जगह लौटती है।

कवि हृदय की तुलना पत्थर से क्यों करते हैं?

क्योंकि पत्थर ऊपर से हृदय जितना ही ठोस दिखता है, पर उसमें न धड़कन है, न संवेदना। वह किसी के दुख पर पसीजता नहीं।

पहली कसौटी किस बात को गिनती है और किसको नहीं?

वह दूसरों में जगाए गए जोश को गिनती है। अपने भीतर का उत्साह यहाँ पर्याप्त नहीं माना जाता।

संसार-संग चलने से कवि का क्या आशय है?

समाज के साथ क़दम मिलाकर चलना और उसके सुख-दुख में शामिल होना। जो ऐसा नहीं करता, उसे संसार से कुछ मिलता भी नहीं।

निषेध की भाषा कविता को कैसा स्वर देती है?

चेतावनी का। कवि यह नहीं बताते कि क्या करना है, बल्कि यह कि किसके बिना जीवन में कुछ नहीं बचता।

अंत में लौटने वाली टेक पहली बार से भिन्न क्यों लगती है?

क्योंकि तब तक पाँच कसौटियाँ पढ़ी जा चुकी होती हैं। जो आरंभ में दावा था, वह अंत में पाठक से पूछा गया प्रश्न बन जाता है।

कविता में कोई व्यक्ति-नाम न होने का क्या लाभ है?

पंक्ति किसी एक व्यक्ति या समय में बँधती नहीं। जो भी पढ़े, वह उसी पर लागू हो जाती है, इसलिए कविता हर समय के लिए खुली रहती है।

Long answer questions (3)

कविता की पाँचों कसौटियों को क्रम से लिखिए और बताइए कि उनमें कौन-सी बात साझी है।

पहली कसौटी जोश की है — जो दूसरों में जीवित उत्साह न जगा सका, उसके जीवन में सार नहीं। दूसरी संसार-संग चलने की है — जो समाज के साथ नहीं चला, उसका अपना संसार नहीं बनता। तीसरी साहस की है — साहस छोड़ देने वाला पार, यानी लक्ष्य तक, नहीं पहुँचता। चौथी औरों के उद्धार की है — जिससे समाज का भला न हुआ, उसका अपना भला भी अधूरा रह गया। पाँचवीं भीतर के भाव की है — जिसमें रस-धार नहीं बहती, वह पसीजता ही नहीं। साझी बात यह है कि पाँचों कसौटियाँ व्यक्ति को अपने से बाहर की ओर मोड़ती हैं। कोई भी कसौटी केवल अपने लिए किए गए काम को नहीं गिनती।

कवि ने हृदय के लिए पत्थर शब्द चुना। यह चुनाव कितना उपयुक्त है, अपने शब्दों में समझाइए।

यह चुनाव बहुत सोच-समझकर किया गया लगता है। कवि चाहते तो लोहा कह सकते थे या बर्फ़। पर पत्थर की दो विशेषताएँ तुलना को सटीक बनाती हैं। पहली यह कि वह देखने में हृदय जितना ही ठोस और भारी लगता है, इसलिए ऊपर से दोनों एक-से जान पड़ते हैं। दूसरी यह कि उसमें न गरमी है, न गति, न पिघलने का गुण। बर्फ़ पिघल जाती है और लोहा गरम होकर ढल जाता है, पर पत्थर वैसा ही बना रहता है। कवि को ऐसी ही वस्तु चाहिए थी जो कभी न पसीजे। जो चीज़ पास से मिलती-जुलती हो, उसी से की गई तुलना सबसे अधिक चुभती है, और यही इस पंक्ति की ताक़त है।

यह कविता आह्वान गीत क्यों कही जाती है? कविता से उदाहरण देकर समझाइए।

आह्वान का अर्थ है पुकार, और जो रचना पढ़ने वाले से कुछ करने को कहे उसे आह्वान गीत कहते हैं। यह कविता कोई दृश्य नहीं दिखाती और न किसी घटना का वर्णन करती है। वह सीधे पाठक से बात करती है और उसके सामने एक के बाद एक कसौटी रखती जाती है। इसकी पंक्तियाँ छोटी हैं और लय तेज़ है, जैसे कोई मंच से भीड़ को पुकार रहा हो। एक ही पंक्ति बार-बार लौटती है, जिससे वह नारे की तरह याद रह जाती है। कविता में कोई नाम, तिथि या स्थान नहीं आता, इसलिए पुकार किसी एक व्यक्ति तक सीमित न रहकर हर पढ़ने वाले तक पहुँच जाती है।

Flashcards (17)

कविता की टेक कौन-सी पंक्ति है?
वह हृदय नहीं है पत्थर है — और आगे स्वदेश के प्यार की बात।
कवि देश-प्रेम से रहित हृदय को क्या कहते हैं?
पत्थर, क्योंकि उसमें न धड़कन है न संवेदना।
पहली कसौटी किस बात की है?
जोश की — और वह दूसरों में जगाए गए उत्साह को गिनती है।
दूसरी कसौटी क्या है?
संसार-संग चलना, यानी समाज के सुख-दुख में भागीदार होना।
तीसरी कसौटी क्या है?
साहस। साहस छोड़ने वाला पार नहीं पहुँचता।
चौथी कसौटी क्या कहती है?
जिससे औरों का उद्धार न हुआ, उसका अपना उद्धार भी नहीं होता।
पाँचवीं कसौटी किस ओर देखती है?
भीतर के भाव की ओर — रस-धार, यानी हृदय में बहती कोमलता।
पार शब्द का कविता में क्या अर्थ है?
लक्ष्य का दूसरा किनारा, यानी लक्ष्य तक पहुँचना।
रस-धार का अर्थ क्या है?
हृदय के भीतर बहता हुआ भाव, जो व्यक्ति को पिघलने देता है।
निषेध की भाषा से क्या आशय है?
यह बताना कि किसके बिना कुछ नहीं होता, न कि यह कि क्या करना है।
आह्वान गीत किसे कहते हैं?
जो रचना पढ़ने वाले को पुकारे और उससे कुछ करने को कहे।
कविता में कोई नाम या तिथि क्यों नहीं आती?
ताकि पंक्ति हर पढ़ने वाले पर लागू हो सके और किसी एक समय में न बँधे।
कसौटी शब्द कहाँ से आया है?
उस काले पत्थर से, जिस पर सोना घिसकर उसकी शुद्धता परखी जाती थी।
पाँचों कसौटियों में साझी बात क्या है?
पाँचों व्यक्ति को अपने से बाहर की ओर मोड़ती हैं।
कवि ने पत्थर ही क्यों चुना?
क्योंकि वह हृदय जितना ठोस दिखता है पर भीतर से उलटा है।
अंत में लौटने वाली टेक पहली बार से अलग क्यों लगती है?
क्योंकि तब तक पाँच कसौटियाँ पढ़ी जा चुकी होती हैं, और दावा प्रश्न बन जाता है।
जो जीवित जोश जगा न सका — आगे की पंक्ति क्या है?
उस जीवन में कुछ सार नहीं।

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  • कसौटियाँ क्रम में लगाइए
  • शब्द और अर्थ
  • सही या भ्रम
  • भीतर की या बाहर की
  • झटपट उत्तर

देश का दिया, कवि और शिल्प

कविता का दूसरा भाग गिनाता है कि देश ने क्या दिया — मिट्टी, अन्न-जल, अपने लोग और ज्ञान। साथ में कवि सनेही का परिचय और तुक, योजक चिह्न तथा शब्द-क्रम का शिल्प।

What you will be able to do

  • मैं गिना सकता/सकती हूँ कि कविता के अनुसार देश ने क्या-क्या दिया है।
  • मैं बता सकता/सकती हूँ कि हम हैं जिसके राजा-रानी में हम कौन हैं।
  • मैं काल-दीप और परवाने के संकेत को अपने शब्दों में समझा सकता/सकती हूँ।
  • मैं कवि गयाप्रसाद शुक्ल सनेही का संक्षिप्त परिचय दे सकता/सकती हूँ।
  • मैं तुक, योजक चिह्न और शब्द-क्रम के प्रभाव को पहचान सकता/सकती हूँ।

Key points

  • दूसरे भाग में कविता की दिशा बदल जाती है — अब वह बताती है कि देश ने क्या दिया, यह नहीं पूछती कि तुमने क्या किया।

  • देश ने दिया — वह मिट्टी जिसमें शरीर बढ़ा और वह अन्न-जल जिसने उसे चलाया।

  • माता-पिता और बंधु भी इसी भूमि पर मिले, इसलिए देश से अलग होकर अपनापन बचता नहीं।

  • हम हैं जिसके राजा-रानी — यहाँ हम का अर्थ है देश के सारे नागरिक, और शासन उन्हीं के हाथ में है।

  • लासानी यानी बेमिसाल। खजाने केवल धन के नहीं; अगली पंक्ति बताती है कि संपदा ज्ञान की है।

  • जिसे इतना सब मिला और जो फिर भी नहीं पसीजा, उसे कवि भू का भार, यानी धरती पर पड़ा बोझ कहते हैं।

  • कवि गयाप्रसाद शुक्ल सनेही का जन्म उन्नाव में हुआ; सरकारी नौकरी के कारण उन्हें त्रिशूल उपनाम भी रखना पड़ा।

  • तुक, योजक चिह्न और है को पंक्ति में पहले रखना — तीनों शिल्प इस कविता की लय बनाते हैं।

Full explanation

कविता दूसरी ओर मुड़ती है

पहले भाग में कविता पूछती रही कि तुमने क्या किया। दूसरे भाग में वह बताने लगती है कि देश ने तुम्हें क्या दिया। स्वर वही रहता है, पर दिशा बदल जाती है। यह बदलाव अचानक नहीं लगता, क्योंकि टेक दोनों भागों को एक साथ बाँधे रहती है।

मिट्टी, दाना और पानी

पहली बात सबसे सीधी है — जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, पाया जिसमें दाना-पानी। कवि बड़ी बातों से शुरू नहीं करते। वे उस मिट्टी से शुरू करते हैं जिसमें शरीर बढ़ा और उस अन्न-जल से जिसने उसे चलाया। देश यहाँ कोई विचार नहीं है; वह रोज़ की थाली है।

माता-पिता और बंधु

दूसरी बात रिश्तों की है — हैं माता-पिता बंधु जिसमें। जो लोग सबसे अपने हैं, वे भी इसी भूमि पर मिले। कवि कहना चाहते हैं कि देश से अलग होकर अपनापन बचता ही नहीं, क्योंकि जिनसे अपनापन है वे सब वहीं हैं।

हम हैं जिसके राजा-रानी

तीसरी बात सबसे चौंकाने वाली है — हम हैं जिसके राजा-रानी। यहाँ हम कोई एक परिवार नहीं है। हम यानी इस देश के सारे नागरिक। कवि किसी राजा का नाम नहीं लेते; वे शासन देश के लोगों के हाथ में बताते हैं। एक पंक्ति में यह बहुत बड़ी बात कह दी गई है।

खजाने और नव रत्न

आगे कवि देश की संपदा गिनाते हैं — जिसने कि खजाने खोले हैं, नव रत्न दिये हैं लासानी। लासानी का अर्थ है बेमिसाल, जिसके जैसा दूसरा न हो। खजाने केवल सोने-चाँदी के नहीं हैं। अगली ही पंक्ति बताती है कि संपदा किस तरह की है।

जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं

जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी — यह पंक्ति संपदा का अर्थ खोल देती है। जिस भूमि पर विद्वान मुग्ध हों और सारा संसार मोहित हो, उसका खजाना ज्ञान का है। कवि धन से शुरू करके ज्ञान तक पहुँचते हैं, और वहीं रुक जाते हैं।

भू का भार

इसके तुरंत बाद एक कड़ी पंक्ति आती है — उस पर है नहीं पसीजा जो, क्या है वह भू का भार नहीं। भू यानी पृथ्वी। जिसे इतना कुछ मिला और जो फिर भी नहीं पिघला, कवि उसे धरती पर पड़ा बोझ कहते हैं। पहले भाग का पत्थर यहाँ बोझ बनकर लौट आता है।

मृत्यु की याद

आगे कविता एक और मोड़ लेती है — निश्चित है निस्संशय निश्चित, है जान एक दिन जाने को। निस्संशय यानी बिना किसी संदेह के। कवि मृत्यु की याद दिलाते हैं, पर डराने के लिए नहीं। उनका तर्क आगे आता है।

काल-दीप और परवाने

है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को। काल यानी समय, और काल-दीप वह दीपक है जो हर समय जलता रहता है। परवाना वह पतंगा है जो दीपक पर मंडराता है और जल जाता है। जब जाना निश्चित ही है, तो कवि पूछते हैं कि जीवन किस काम में लगे।

सब कुछ अपने हाथों में

उत्तर अगली पंक्ति में है — सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। यह प्रश्न जैसा दिखता है, पर है उत्तर। कवि कहते हैं कि साधन बाहर नहीं खोजने; जो चाहिए वह अपने ही हाथों में है। साहस और इच्छाशक्ति युद्ध के हथियारों जितने ही काम के हैं।

कवि कौन हैं

इस कविता के रचयिता गयाप्रसाद शुक्ल सनेही हैं। वे उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद के रहने वाले थे, और उनका जीवन-काल सन् अठारह सौ तिरासी से उन्नीस सौ बहत्तर तक रहा। उन्होंने कविता ब्रजभाषा में लिखनी आरंभ की और आगे चलकर खड़ी बोली के बड़े कवियों में गिने जाने लगे।

दो उपनाम, एक कारण

सनेही ने स्वयं बताया है कि सरकारी नौकरी के कारण उन्हें सनेही के अतिरिक्त एक और उपनाम त्रिशूल रखना पड़ा। यह छोटी-सी बात उस समय के बारे में बहुत कुछ कहती है, जब देश-प्रेम की कविता लिखना नौकरी के लिए जोखिम था।

उनकी और रचनाएँ

उन्होंने केवल राष्ट्र-प्रेम पर नहीं लिखा। किसान, मज़दूर और सामाजिक कुरीतियों पर भी उनकी प्रभावशाली कविताएँ हैं। त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र और कृषक क्रंदन उनकी उल्लेखनीय रचनाओं में गिनी जाती हैं। कृषक क्रंदन नाम से ही पता चलता है कि किसान उनके विषयों में था।

तुक, जो कविता को बाँधती है

अब शिल्प की ओर देखिए। दाना-पानी और राजा-रानी — दोनों के अंत की ध्वनि एक जैसी पड़ती है। इसे तुक मिलाना कहते हैं। तुक से पंक्ति कान में बैठ जाती है और अगली पंक्ति की प्रतीक्षा बनी रहती है। आह्वान गीत के लिए यह बहुत काम का गुण है।

योजक चिह्न

कविता में बहुत जगह दो शब्द एक छोटी रेखा से जुड़े हैं — संसार-संग, जाति-उद्धार, रस-धार, दाना-पानी, काल-दीप। इस रेखा को योजक चिह्न कहते हैं। वह दो शब्दों का संबंध दिखाकर उन्हें एक इकाई बना देती है, और छंद में जगह भी बचाती है।

है का पहले आना

एक और प्रयोग ध्यान देने योग्य है। है जान एक दिन जाने को, है काल-दीप जलता हरदम — दोनों पंक्तियों में है पहले आया है। यदि इसे अंत में रखें तो पंक्ति गद्य जैसी लगने लगेगी। क्रम बदलने से ही कविता में लय आ जाती है, और यही शिल्प है।

Concepts and terms

तुक मिलाना

जब दो पंक्तियों के अंतिम शब्दों की ध्वनि एक-सी हो, तो उसे तुक मिलाना कहते हैं। दाना-पानी और राजा-रानी इसका उदाहरण हैं। तुक से पंक्ति कान में बैठ जाती है और पढ़ने वाला अगली पंक्ति की प्रतीक्षा करने लगता है।

योजक चिह्न

दो शब्दों के बीच लगी छोटी रेखा योजक चिह्न कहलाती है। वह दोनों शब्दों का संबंध स्पष्ट करती है और उन्हें एक इकाई बना देती है, जैसे संसार-संग, जाति-उद्धार, दाना-पानी और काल-दीप।

काल-दीप

काल का अर्थ समय है और काल-दीप वह दीपक जो निरंतर जलता रहता है। परवाना उस पर मंडराकर जल जाता है। कवि इस चित्र से कहते हैं कि जाना निश्चित है, इसलिए प्रश्न यही बचता है कि जीवन किस काम में लगे।

समानार्थी शब्द

एक ही अर्थ देने वाले अलग-अलग शब्द समानार्थी कहलाते हैं। भू के लिए धरा और पृथ्वी, दीप के लिए प्रदीप और दीपक, पत्थर के लिए पाहन और पाषाण, तलवार के लिए कृपाण और असि।

खड़ी बोली

खड़ी बोली आधुनिक हिंदी का वह रूप है जिसमें आज अधिकांश लेखन होता है। सनेही ने कविता ब्रजभाषा में लिखनी आरंभ की और आगे चलकर खड़ी बोली के बड़े कवियों में गिने जाने लगे।

सावधान

भ्रम और सच

मिलाकर देखो

Scenario:

आठवीं कक्षा के बच्चे अपने विद्यालय में भाषा-दिवस मना रहे हैं। उन्हें दो कविताएँ मंच पर पढ़नी हैं — स्वदेश और खादी गीत। पढ़ने से पहले वे दोनों को साथ रखकर देखते हैं। स्वदेश में देश-प्रेम कसौटियों के रूप में आता है। खादी गीत में वह कपड़े के धागों में उतर आता है। वहाँ अपनेपन का अभिमान, माता का मान और बच्चों का दुलार भरा है। एक विद्यार्थी कहता है कि दोनों कविताएँ एक ही बात कहती हैं, इसलिए एक ही पढ़ लेनी चाहिए। दूसरी कहती है कि कहने का ढंग अलग है, इसलिए दोनों ज़रूरी हैं। शिक्षिका कहती हैं कि दोनों स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई थीं।

Analysis:

दोनों कविताओं का भाव एक है, पर रास्ता अलग। स्वदेश सीधे पाठक से प्रश्न करती है और उसके सामने कसौटियाँ रखती है। खादी गीत कोई प्रश्न नहीं करता। वह एक वस्तु उठाकर उसमें रिश्ते भर देता है। एक पुकार है, दूसरा चित्र। साथ पढ़ने से दो ढंग दिखते हैं।

Activity:

अपने घर की कोई एक साधारण वस्तु चुनिए और उस पर छह पंक्तियाँ लिखिए, जिनमें उस वस्तु के सहारे कोई रिश्ता या भाव दिखाई दे — जैसे खादी गीत में कपड़े के सहारे दिखता है।

करके देखो

Title:

समानार्थी शब्दों की थैली

Safety:

कैंची की आवश्यकता हो तो बड़ों की सहायता लीजिए।

What You Notice:

एक ही अर्थ के कई शब्द होते हैं, पर हर शब्द अपने साथ थोड़ा अलग रंग लाता है। कविता में कवि उन्हीं में से चुनता है जो लय और तुक में बैठ जाए।

Did you know

कवि ने स्वयं बताया कि सरकारी नौकरी के कारण उन्हें सनेही के अतिरिक्त त्रिशूल उपनाम रखना पड़ा।

कृषक क्रंदन नाम की उनकी रचना के शीर्षक से ही पता चल जाता है कि किसान उनके विषयों में था।

इसी पुस्तक में आगे सोहनलाल द्विवेदी के खादी गीत का एक अंश भी दिया गया है, जिसमें देश-प्रेम कपड़े के धागों में दिखाया गया है।

Memory tricks

देश ने क्या दिया — चार की गिनती — मिट्टी → अन्न-जल → अपने लोग → ज्ञान। चारों के बाद एक प्रश्न — फिर भी नहीं पसीजे?

Practice MCQs with answers (25)

Q1 कवि किसी राजा का नाम न लेकर लिखते हैं कि हम ही इस देश के राजा-रानी हैं। इस चुनाव से कौन-सी बात निकलती है? advanced
  • A कि कवि को उन राजाओं के नाम अब ठीक से याद ही नहीं थे
  • B कि उस समय देश में कोई राजा नहीं था
  • C कि शासन किसी एक के नहीं, सब नागरिकों के हाथ में है
  • D कि कवि राजाओं से नाराज़ थे
Show answer
Answer: कि शासन किसी एक के नहीं, सब नागरिकों के हाथ में है
Why:

नाम न लेना ही यहाँ अर्थ है। कवि शासन को किसी व्यक्ति से हटाकर सब नागरिकों के हाथ में रख देते हैं।

Q2 लासानी शब्द का अर्थ है — beginner
  • A बहुमूल्य
  • B बेमिसाल
  • C पुराना
  • D चमकीला
Show answer
Answer: बेमिसाल
Why:

लासानी यानी जिसके जैसा दूसरा न हो।

Q3 जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं — यह पंक्ति देश की किस संपदा की ओर संकेत करती है? intermediate
  • A खनिजों की
  • B व्यापार की
  • C सेना की
  • D ज्ञान की
Show answer
Answer: ज्ञान की
Why:

जिस भूमि पर विद्वान मुग्ध हों और संसार मोहित हो, उसकी संपदा ज्ञान की है।

Q4 कवि मिट्टी, अन्न-जल, अपने लोग और ज्ञान — सब गिनाने के बाद एक कड़ा प्रश्न रखते हैं। उसमें भू का भार किसे कहा गया है? intermediate
  • A जो इतना पाकर भी नहीं पसीजा
  • B जो देश से बाहर कहीं चला गया हो
  • C जो खेती नहीं करता
  • D जो युद्ध में नहीं गया
Show answer
Answer: जो इतना पाकर भी नहीं पसीजा
Why:

जिसे मिट्टी, अन्न, रिश्ते और ज्ञान सब मिला और जो फिर भी नहीं पिघला, कवि उसे धरती पर पड़ा बोझ कहते हैं।

Q5 निस्संशय शब्द का अर्थ है — beginner
  • A बिना किसी शोर के
  • B बिना किसी सहायता के
  • C बिना किसी संदेह के
  • D बिना किसी विलंब के
Show answer
Answer: बिना किसी संदेह के
Why:

सं-शय यानी संदेह; नि-स्संशय यानी संदेह से रहित।

Q6 मृत्यु की याद दिलाते समय कवि एक दीपक का चित्र सामने रखते हैं, जिस पर परवाने जल जाते हैं। उस काल-दीप का अर्थ किससे है? intermediate
  • A संध्या को जलाया जाने वाला दीपक
  • B वह दीपक जो हर समय जलता रहता है
  • C उत्सव में जलाया जाने वाला दीपक
  • D मंदिर में रखा हुआ दीपक
Show answer
Answer: वह दीपक जो हर समय जलता रहता है
Why:

काल यानी समय। काल-दीप वह दीपक है जो निरंतर जलता रहता है, और परवाने उसी पर जल जाते हैं।

Q7 मृत्यु को निश्चित बताने के तुरंत बाद कवि कहते हैं कि सब कुछ है अपने हाथों में। इस पंक्ति से वे क्या कहना चाहते हैं? advanced
  • A हथियार ख़रीदने चाहिए
  • B तोप और तलवार ही सबसे बड़ा बल होता है
  • C युद्ध सबसे बड़ा धर्म है
  • D साधन बाहर नहीं, अपने ही हाथों में हैं
Show answer
Answer: साधन बाहर नहीं, अपने ही हाथों में हैं
Why:

यह प्रश्न जैसा दिखता है, पर उत्तर है। साहस और इच्छाशक्ति हथियारों जितने ही काम के हैं।

Q8 स्वदेश कविता के रचयिता कौन हैं? beginner
  • A गयाप्रसाद शुक्ल सनेही
  • B सोहनलाल द्विवेदी
  • C मैथिलीशरण गुप्त
  • D सुभद्राकुमारी चौहान
Show answer
Answer: गयाप्रसाद शुक्ल सनेही
Why:

यह कविता गयाप्रसाद शुक्ल सनेही की है।

Q9 कवि को दूसरा उपनाम त्रिशूल क्यों रखना पड़ा? beginner
  • A पाठकों की माँग पर
  • B संपादक के कहने पर
  • C सरकारी नौकरी के कारण
  • D छंद की आवश्यकता के कारण
Show answer
Answer: सरकारी नौकरी के कारण
Why:

कवि ने स्वयं बताया कि सरकारी नौकरी के कारण उन्हें सनेही के अतिरिक्त त्रिशूल उपनाम रखना पड़ा।

Q10 इनमें से कौन-सी रचना गयाप्रसाद शुक्ल सनेही की है? beginner
  • A खादी गीत
  • B कृषक क्रंदन
  • C यशोधरा
  • D झाँसी की रानी
Show answer
Answer: कृषक क्रंदन
Why:

त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र और कृषक क्रंदन उनकी उल्लेखनीय रचनाओं में गिनी जाती हैं।

Q11 कवि ने अपनी कविता किस भाषा में लिखनी आरंभ की थी? beginner
  • A अवधी में
  • B मैथिली में
  • C भोजपुरी में
  • D ब्रजभाषा में
Show answer
Answer: ब्रजभाषा में
Why:

उन्होंने ब्रजभाषा में लिखना आरंभ किया और आगे खड़ी बोली के श्रेष्ठ कवियों में स्थान बनाया।

Q12 दाना-पानी और राजा-रानी की अंतिम ध्वनि एक-सी होने को क्या कहते हैं? beginner
  • A तुक मिलाना
  • B अनुप्रास
  • C उपमा
  • D पुनरावृत्ति
Show answer
Answer: तुक मिलाना
Why:

शब्दों की अंतिम ध्वनि मिलने को तुक मिलाना कहते हैं।

Q13 दाना-पानी और राजा-रानी जैसे शब्द पंक्ति के अंत में आते हैं और उनकी ध्वनि एक जैसी पड़ती है। इसका कविता पर क्या असर होता है? intermediate
  • A कविता लंबी हो जाती है
  • B कठिन शब्द कम हो जाते हैं
  • C पंक्ति कान में बैठ जाती है
  • D अर्थ बदल जाता है
Show answer
Answer: पंक्ति कान में बैठ जाती है
Why:

तुक से पंक्ति याद रह जाती है और अगली पंक्ति की प्रतीक्षा बनी रहती है — आह्वान गीत के लिए यह बहुत काम का गुण है।

Q14 कवि संसार-संग और जाति-उद्धार जैसे जुड़े हुए शब्द-युग्म क्यों बनाते हैं? intermediate
  • A क्योंकि छंद में शब्द कम पड़ जाते थे
  • B क्योंकि इससे दोनों शब्दों का संबंध स्पष्ट होता है और जगह भी बचती है
  • C क्योंकि ऐसा लिखना उस समय की कविता का एक पुराना नियम ही रहा था
  • D क्योंकि इससे कविता कठिन लगने लगती है
Show answer
Answer: क्योंकि इससे दोनों शब्दों का संबंध स्पष्ट होता है और जगह भी बचती है
Why:

योजक चिह्न दो शब्दों को एक इकाई बना देता है। संबंध भी स्पष्ट होता है और छंद में जगह भी बचती है।

Q15 है जान एक दिन जाने को — इस पंक्ति में है को अंत में रख दिया जाए तो क्या होगा? advanced
  • A अर्थ बदल जाएगा
  • B तुक बिगड़ जाएगी
  • C पंक्ति छोटी हो जाएगी
  • D पंक्ति गद्य जैसी लगने लगेगी
Show answer
Answer: पंक्ति गद्य जैसी लगने लगेगी
Why:

क्रम बदलने से ही कविता की लय बनती है। है को अंत में रखते ही पंक्ति साधारण वाक्य जैसी लगने लगती है।

Q16 रिक्त स्थान भरिए — क्या है वह ______ का भार नहीं। (जो पसीजा नहीं, उसके बारे में) beginner
  • A भू
  • B धन
  • C जन
  • D मन
Show answer
Answer: भू
Why:

भू यानी पृथ्वी। ऐसा व्यक्ति धरती पर पड़ा बोझ है।

Q17 रिक्त स्थान भरिए — जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, पाया जिसमें ______। beginner
  • A राजा-रानी
  • B माता-पिता
  • C दाना-पानी
  • D नव रत्न
Show answer
Answer: दाना-पानी
Why:

पंक्ति है — पाया जिसमें दाना-पानी, यानी अन्न और जल।

Q18 सही या ग़लत — कवि के अनुसार देश की सबसे बड़ी संपदा सोना-चाँदी है। intermediate
  • A सही, क्योंकि कविता खजानों की बात करती है
  • B ग़लत, क्योंकि अगली पंक्ति संपदा को ज्ञान से जोड़ देती है
  • C सही, क्योंकि नव रत्न का अर्थ नौ रत्न होता है
  • D ग़लत, क्योंकि कविता संपदा की कोई बात ही कहीं नहीं करती
Show answer
Answer: ग़लत, क्योंकि अगली पंक्ति संपदा को ज्ञान से जोड़ देती है
Why:

खजानों के तुरंत बाद आने वाली पंक्ति बताती है कि जिस पर ज्ञानी मरते हैं — यानी संपदा ज्ञान की है।

Q19 अभिकथन: कवि मृत्यु की याद दिलाते हैं, पर उनका उद्देश्य डराना नहीं है। कारण: उसके तुरंत बाद वे कहते हैं कि सब कुछ अपने हाथों में है। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

दोनों कथन सही हैं और कारण अभिकथन को समझाता है। मृत्यु निश्चित है, इसलिए कवि पूछते हैं कि जीवन किस काम में लगे — और उत्तर अपने हाथों में बताते हैं।

Q20 अभिकथन: कविता में योजक चिह्न केवल सजावट के लिए लगाया गया है। कारण: योजक चिह्न दो शब्दों का संबंध दिखाकर उन्हें एक इकाई बना देता है। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Why:

अभिकथन ग़लत है और कारण सही। योजक चिह्न सजावट नहीं है; वह संबंध स्पष्ट करता है और छंद में जगह भी बचाता है।

Q21 कवि गयाप्रसाद शुक्ल सनेही के बारे में तीन कथन नीचे दिए गए हैं। I. वे उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद के रहने वाले थे। II. उन्होंने केवल राष्ट्र-प्रेम पर ही कविताएँ लिखीं। III. कृषक क्रंदन उनकी रचनाओं में गिनी जाती है। इनमें से कौन-से कथन सही हैं? advanced
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C केवल I और III
  • D I, II और III
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

I और III सही हैं। II ग़लत है — उन्होंने किसान, मज़दूर और सामाजिक कुरीतियों पर भी कविताएँ लिखीं।

Q22 कक्षा में एक विद्यार्थी कहता है कि देश ने उसे कुछ नहीं दिया। कविता के दूसरे भाग के आधार पर उसे क्या उत्तर मिलेगा? intermediate
  • A कविता इस पर कुछ नहीं कहती
  • B मिट्टी, अन्न-जल, अपने लोग और ज्ञान — सब उसी भूमि से मिले
  • C देश केवल सैनिकों को कुछ देता है
  • D कविता में देने और लेने का यह प्रश्न असल में कहीं उठता ही नहीं है
Show answer
Answer: मिट्टी, अन्न-जल, अपने लोग और ज्ञान — सब उसी भूमि से मिले
Why:

कविता का दूसरा भाग एक-एक करके यही गिनाता है कि देश ने क्या-क्या दिया है।

Q23 कल्पना कीजिए कि कोई कविता की पंक्ति है काल-दीप जलता हरदम को बदलकर काल-दीप हरदम जलता है लिख देता है। इससे क्या बदलेगा? advanced
  • A अर्थ बदल जाएगा
  • B कुछ भी नहीं बदलेगा
  • C तुक पहले से कहीं अधिक मीठी और सुरीली लगेगी
  • D लय चली जाएगी और पंक्ति गद्य जैसी लगेगी
Show answer
Answer: लय चली जाएगी और पंक्ति गद्य जैसी लगेगी
Why:

है को आगे रखने से ही लय बनती है। क्रम बदलते ही पंक्ति साधारण वाक्य जैसी लगने लगती है।

Q24 मिलान कीजिए — भू का समानार्थी शब्द है — beginner
  • A धरा
  • B प्रदीप
  • C कृपाण
  • D पाहन
Show answer
Answer: धरा
Why:

भू, धरा और पृथ्वी एक ही अर्थ के शब्द हैं। प्रदीप दीपक है, कृपाण तलवार और पाहन पत्थर।

Q25 मिलान कीजिए — कृपाण किसका समानार्थी है? beginner
  • A हृदय का
  • B दुनिया का
  • C तलवार का
  • D दीप का
Show answer
Answer: तलवार का
Why:

कृपाण और असि दोनों तलवार के पर्याय हैं।

Important short questions (7)

कविता के अनुसार देश ने हमें क्या-क्या दिया है?

वह मिट्टी जिसमें शरीर बढ़ा, अन्न-जल, माता-पिता और बंधु जैसे अपने लोग, तथा वह ज्ञान-संपदा जिस पर संसार मोहित है।

हम हैं जिसके राजा-रानी — इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

हम का अर्थ है देश के सारे नागरिक। कवि किसी राजा का नाम नहीं लेते, बल्कि शासन देश के लोगों के हाथ में बताते हैं।

भू का भार किसे कहा गया है और क्यों?

उसे, जिसे मिट्टी, अन्न, अपने लोग और ज्ञान सब मिला और जो फिर भी नहीं पसीजा। ऐसा व्यक्ति धरती पर पड़ा बोझ भर है।

काल-दीप और परवाने के चित्र से कवि क्या कहना चाहते हैं?

कि समय का दीपक हर पल जल रहा है और जाना निश्चित है। इसलिए प्रश्न यही बचता है कि यह जीवन किस काम में लगे।

कवि गयाप्रसाद शुक्ल सनेही का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

वे उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद के रहने वाले थे। उन्होंने ब्रजभाषा से आरंभ किया और आगे खड़ी बोली के बड़े कवियों में गिने जाने लगे। त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र और कृषक क्रंदन उनकी रचनाएँ हैं।

योजक चिह्न क्या है? कविता से दो उदाहरण दीजिए।

दो शब्दों के बीच लगी वह छोटी रेखा जो उनका संबंध दिखाकर उन्हें एक इकाई बना देती है। उदाहरण — संसार-संग और जाति-उद्धार।

है शब्द को पंक्ति के आरंभ में रखने से क्या अंतर आता है?

पंक्ति में लय आ जाती है। यदि है को अंत में रख दें तो वही पंक्ति साधारण गद्य वाक्य जैसी लगने लगती है।

Long answer questions (3)

कविता का दूसरा भाग देश की किन-किन देनों को गिनाता है? क्रम से लिखिए।

पहले कवि मिट्टी की बात करते हैं। उसी में शरीर उगा और बढ़ा। फिर वे उस अन्न-जल की बात करते हैं जिसने उसे चलाया। इसके बाद रिश्तों की बारी आती है। माता-पिता और बंधु भी इसी भूमि पर मिले। देश से अलग होकर अपनापन बचता ही नहीं। आगे वे कहते हैं कि हम ही इस देश के राजा-रानी हैं। शासन यहाँ के सब नागरिकों के हाथ में है। फिर खजानों और नव रत्नों की बात आती है। अगली पंक्ति बता देती है कि यह संपदा ज्ञान की है। इतना गिनाकर कवि एक प्रश्न रखते हैं। जो इस पर भी न पसीजा, क्या वह धरती पर बोझ नहीं है।

इस कविता में कवि ने किन-किन शिल्प-प्रयोगों से लय बनाई है? उदाहरण देकर लिखिए।

पहला प्रयोग तुक का है। दाना-पानी और राजा-रानी की अंतिम ध्वनि एक-सी है, इसलिए पंक्ति कान में बैठ जाती है और पढ़ने वाला अगली पंक्ति की प्रतीक्षा करता है। दूसरा प्रयोग योजक चिह्न का है। संसार-संग, जाति-उद्धार, रस-धार, दाना-पानी और काल-दीप जैसे शब्द-युग्म दो शब्दों को एक इकाई बना देते हैं और छंद में जगह भी बचाते हैं। तीसरा प्रयोग शब्द-क्रम का है। है जान एक दिन जाने को और है काल-दीप जलता हरदम — दोनों में है पहले आया है। उसे अंत में रख दें तो पंक्ति गद्य जैसी लगने लगती है। चौथा प्रयोग टेक का है, जो पूरी कविता को बाँधे रखती है।

कवि मृत्यु की याद क्यों दिलाते हैं? अपने शब्दों में समझाइए।

कवि कहते हैं कि यह निश्चित है, निस्संशय निश्चित, कि जान एक दिन जानी ही है। इसके साथ वे काल-दीप का चित्र रखते हैं — समय का वह दीपक जो हर पल जलता रहता है और जिस पर परवाने जल जाते हैं। पर उनका उद्देश्य डराना नहीं है। इसका प्रमाण अगली ही पंक्ति है, जिसमें वे कहते हैं कि सब कुछ अपने हाथों में है। यानी जब जाना निश्चित ही है तो प्रश्न केवल यह बचता है कि यह थोड़ा-सा जीवन किस काम में लगाया जाए। मृत्यु की याद यहाँ निराशा नहीं लाती, बल्कि काम करने की जल्दी पैदा करती है।

Flashcards (17)

कवि इस देश का शासक किसे मानते हैं?
देश के सारे नागरिक।
लासानी का अर्थ क्या है?
बेमिसाल, जिसके जैसा दूसरा न हो।
जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं — यह किस संपदा की ओर इशारा है?
ज्ञान की संपदा की ओर।
भू का भार किसे कहा गया है?
जो इतना सब पाकर भी नहीं पसीजा।
निस्संशय का अर्थ क्या है?
बिना किसी संदेह के।
काल-दीप किसे कहते हैं?
वह दीपक जो हर समय जलता रहता है; काल यानी समय।
परवाना क्या है?
वह पतंगा जो दीपक पर मंडराकर जल जाता है।
सब कुछ है अपने हाथों में से कवि क्या कहना चाहते हैं?
कि साधन बाहर नहीं, साहस और इच्छाशक्ति अपने ही पास हैं।
स्वदेश कविता के रचयिता कौन हैं?
गयाप्रसाद शुक्ल सनेही।
कवि का जन्म किस जनपद में हुआ?
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में।
सनेही को दूसरा नाम अपनाना क्यों पड़ा?
सरकारी नौकरी के कारण।
कवि की तीन उल्लेखनीय रचनाएँ कौन-सी हैं?
त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र और कृषक क्रंदन।
तुक मिलाना किसे कहते हैं?
जब दो पंक्तियों के अंतिम शब्दों की ध्वनि एक-सी हो।
योजक चिह्न क्या करता है?
दो शब्दों का संबंध दिखाकर उन्हें एक इकाई बना देता है।
है को पंक्ति में पहले रखने से क्या होता है?
पंक्ति में लय आ जाती है; अंत में रखने पर वह गद्य जैसी लगने लगती है।
भू, दीप और पत्थर के एक-एक समानार्थी शब्द बताइए।
भू — धरा, दीप — प्रदीप, पत्थर — पाहन।
कवि ने कविता किस भाषा में लिखनी आरंभ की थी?
ब्रजभाषा में; बाद में खड़ी बोली में।

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  • देन क्रम में लगाइए
  • समानार्थी मिलाइए
  • सही या भ्रम
  • किसका पर्याय
  • झटपट उत्तर

Class 8 Hindi Chapter 1 — frequently asked questions

कविता की टेक कौन-सी है और वह कितनी बार लौटती है?

टेक है — वह हृदय नहीं है पत्थर है। आगे उसी में स्वदेश के प्यार की बात आती है। यह आरंभ, मध्य और अंत — तीनों जगह लौटती है।

कवि हृदय की तुलना पत्थर से क्यों करते हैं?

क्योंकि पत्थर ऊपर से हृदय जितना ही ठोस दिखता है, पर उसमें न धड़कन है, न संवेदना। वह किसी के दुख पर पसीजता नहीं।

पहली कसौटी किस बात को गिनती है और किसको नहीं?

वह दूसरों में जगाए गए जोश को गिनती है। अपने भीतर का उत्साह यहाँ पर्याप्त नहीं माना जाता।

कविता के अनुसार देश ने हमें क्या-क्या दिया है?

वह मिट्टी जिसमें शरीर बढ़ा, अन्न-जल, माता-पिता और बंधु जैसे अपने लोग, तथा वह ज्ञान-संपदा जिस पर संसार मोहित है।

हम हैं जिसके राजा-रानी — इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

हम का अर्थ है देश के सारे नागरिक। कवि किसी राजा का नाम नहीं लेते, बल्कि शासन देश के लोगों के हाथ में बताते हैं।

भू का भार किसे कहा गया है और क्यों?

उसे, जिसे मिट्टी, अन्न, अपने लोग और ज्ञान सब मिला और जो फिर भी नहीं पसीजा। ऐसा व्यक्ति धरती पर पड़ा बोझ भर है।

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