Class 8 Hindi Chapter 6: एक टोकरी भर मिट्टी
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झोंपड़ी और कब्ज़ा
कहानी एक महल और उसके पास बनी एक झोंपड़ी से शुरू होती है। ज़मींदार अपना अहाता बढ़ाना चाहते हैं, पर झोंपड़ी में रहने वाली बूढ़ी स्त्री के लिए वह जगह तीन लोगों की आख़िरी जगह है। समझाने से काम न बनने पर पैसे और अदालत के रास्ते से उस पर कब्ज़ा ले लिया जाता है।
What you will be able to do
- कहानी का पहला दृश्य और उसमें रखा गया अंतर बता सकूँगा।
- बूढ़ी स्त्री के इनकार का असली कारण अपने शब्दों में लिख सकूँगा।
- कब्ज़े का पूरा क्रम — प्रयत्न, पैसा, अदालत — गिना सकूँगा।
- बाल की खाल निकालना मुहावरे का अर्थ और उसका प्रयोग बता सकूँगा।
- कानूनी होने और न्यायपूर्ण होने का अंतर उदाहरण सहित समझा सकूँगा।
Key points
कहानी एक महल और एक झोंपड़ी को आमने-सामने रखकर अंतर अपने आप दिखा देती है।
ज़मींदार की इच्छा महल का अहाता झोंपड़ी तक बढ़ाने की थी।
कहानी इच्छा को बुरा नहीं कहती; तनाव उसके रास्ते में पड़े घर से बनता है।
बूढ़ी स्त्री जगह नहीं बचा रही थी, वह अपनी स्मृति बचा रही थी।
पति, बेटा और बहू — तीनों उसी झोंपड़ी से जुड़े थे, और पोती ही सहारा बची।
पड़ोसी की इच्छा सुनते ही वह जीते-जी निर्जीव जैसी हो गई।
समझाने से काम न बना, तो पैसे और अदालत का रास्ता अपनाया गया।
बाल की खाल निकालना का अर्थ है हर छोटी बात में बहुत बारीकी निकालना।
लेखक किसी को बुरा नहीं कहता, फिर भी पाठक को अन्याय दिख जाता है।
Full explanation
कहानी का पहला दृश्य
कहानी बहुत कम शब्दों में अपना दृश्य खड़ा कर देती है। एक बड़ा महल है, और उसके ठीक पास एक छोटी झोंपड़ी। महल किसी ज़मींदार का है और झोंपड़ी में एक बूढ़ी स्त्री रहती है, जिसका कोई सहारा नहीं बचा। ध्यान दीजिए, लेखक दोनों को आमने-सामने रखकर कुछ कहता नहीं। वह केवल दो घर दिखा देता है, और पाठक को दोनों का अंतर अपने आप दिख जाता है।
एक इच्छा जहाँ से सब शुरू होता है
ज़मींदार के मन में एक इच्छा उठती है। उनके महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ा दिया जाए। इच्छा में कुछ बुरा नहीं दिखता, और कहानी उसे बुरा कहती भी नहीं। पर उस इच्छा के रास्ते में एक घर है, और उस घर में एक व्यक्ति रहता है। कहानी का सारा तनाव इसी एक बात से बनता है कि किसी की इच्छा पूरी होने के लिए किसी और को अपनी जगह छोड़नी पड़े।
बूढ़ी स्त्री का इनकार
ज़मींदार की ओर से उस स्त्री को बार-बार कहा जाता है कि झोंपड़ी हटा ले। वह मानती नहीं। कारण यह नहीं है कि उसे कोई दूसरी जगह न मिलेगी। कारण यह है कि वह वहाँ बहुत समय से रह रही है, और उस जगह से उसका नाता केवल रहने का नहीं है। यह अंतर समझना इस कहानी के लिए ज़रूरी है — वह जगह नहीं बचा रही, कुछ और बचा रही है।
तीन विदा, और एक सहारा
अब लेखक चार वाक्यों में उसका पूरा जीवन रख देता है। उसके पति का देहांत उसी झोंपड़ी में हुआ। उसका एक ही बेटा था, और वह भी वहीं चला गया। बहू भी नहीं रही, और जाते समय अपनी पाँच बरस की बच्ची छोड़ गई। अब उस बच्ची के सिवा कोई नहीं है। इतने बड़े दुख को लेखक चार छोटे वाक्यों में निपटा देता है, और इससे वह भारी नहीं, और भारी लगता है।
झोंपड़ी क्यों नहीं छूटती
इन चार वाक्यों के बाद इनकार समझ में आने लगता है। वह झोंपड़ी तीन लोगों की आख़िरी जगह है। जब कोई पुरानी बात याद आ जाती तो वह फूट-फूटकर रोने लगती थी। यानी उस घर में उसकी स्मृति रहती है, और स्मृति को किसी दूसरे पते पर नहीं ले जाया जा सकता। कहानी यह कहीं लिखती नहीं; वह केवल उसका जीवन बता देती है और बात अपने आप बन जाती है।
जब पड़ोसी की इच्छा का पता चला
जिस दिन उसे पता चला कि पड़ोसी क्या चाहते हैं, उस दिन से वह जीते-जी निर्जीव जैसी हो गई। ध्यान दीजिए, अभी कुछ हुआ भी नहीं था। घर अभी उसका ही था। फिर भी केवल सुनने से उसकी हालत बदल गई। इससे पता चलता है कि डर कई बार घटना से पहले ही आ जाता है, और वह घटना से कम भारी नहीं होता।
समझाने से काम न बना
ज़मींदार की ओर से जो भी प्रयत्न हुए, वे सब बेकार गए। यहाँ कहानी एक छोटा मोड़ लेती है। अब तक बात कहने-सुनने की थी; अब वह ताक़त की हो जाती है। लेखक इसे बहुत सीधे ढंग से बताता है — प्रयत्न असफल हुए, तो दूसरा रास्ता अपनाया गया। इस एक वाक्य में कहानी का रुख बदल जाता है।
अदालत का रास्ता
दूसरा रास्ता अदालत का था। कुछ वकीलों को पैसा दिया गया, और अदालत से उस झोंपड़ी पर कब्ज़ा ले लिया गया। बूढ़ी स्त्री को वहाँ से निकाल दिया गया, और वह पास-पड़ोस में कहीं रहने लगी। लेखक यहाँ एक मुहावरा लगाता है, जो उन वकीलों के बारे में है — बाल की खाल निकालने वाले। इसका अर्थ है हर छोटी बात में बहुत बारीकी निकालने वाला।
कानून और न्याय का अंतर
यह कहानी का सबसे ज़रूरी वाक्य है, और वह लिखा भी नहीं गया। जो हुआ, वह कानून के रास्ते से हुआ। अदालत ने कब्ज़ा दिया, यानी काग़ज़ पर सब ठीक था। फिर भी पढ़ते समय कुछ ग़लत लगता है। इसी से पता चलता है कि कानूनी होना और न्यायपूर्ण होना, दोनों एक बात नहीं हैं। कहानी यह कहीं नहीं कहती, पर पाठक यह समझ ही जाता है।
पैसे की भूमिका
ध्यान दीजिए कि ज़मींदार ने कहीं कोई झगड़ा नहीं किया। उन्होंने किसी को मारा नहीं, धमकाया नहीं। उन्होंने पैसा लगाया, और पैसे ने बाक़ी काम कर दिया। यह कहानी का एक बारीक चित्र है। ताक़त हमेशा शोर नहीं करती; कई बार वह बहुत शांत दिखती है और फिर भी किसी का घर ले लेती है।
लेखक किसी को गाली नहीं देता
पूरे इस भाग में लेखक एक बार भी ज़मींदार को बुरा नहीं कहता। वे श्रीमान कहे जाते हैं, महाराज कहे जाते हैं। कोई शिकायत नहीं, कोई आरोप नहीं। फिर भी पढ़ने वाले को अन्याय दिख जाता है। यह लिखने का बहुत सधा हुआ ढंग है — घटनाएँ क्रम से रख देना और निर्णय पाठक पर छोड़ देना।
शक्ति का असली अंतर
इस भाग को पीछे मुड़कर देखिए तो दो तरह की शक्तियाँ दिखती हैं। एक के पास धन है, नौकर हैं, और अदालत तक पहुँच है। दूसरी के पास केवल एक झोंपड़ी है और उसकी स्मृति। मुक़ाबला बराबर का नहीं है, और कहानी इसे छिपाती भी नहीं। पर आगे चलकर यही असमानता पलट जाएगी, और पलटने का औज़ार भी बहुत छोटा होगा।
कहानी सवा सौ साल पुरानी है
इस कहानी के लिखे जाने के अब लगभग सवा सौ साल हो चुके हैं, और आरंभिक कहानियों में इसकी गिनती होती है। उस समय कहानी लिखने का ढंग नया-नया बन रहा था। इसी कारण इसकी भाषा में कुछ रूप आज से अलग दिखते हैं, जैसे पतोहू और बहुतेरा। पढ़ते समय ये शब्द अटकाते हैं, पर अर्थ अटकता नहीं।
आज के जीवन में
इस भाग की जाँच आज भी हो सकती है। किसी के पास कोई छोटी जगह हो और किसी बड़े को वही जगह चाहिए हो — यह स्थिति आज भी बनती है। कहानी हमें एक प्रश्न देती है जो उस समय काम आता है: जो हो रहा है, वह कानून के भीतर है या नहीं, और उसके भीतर होकर भी वह ठीक है या नहीं।
Concepts and terms
किसी घर या इमारत के चारों ओर घेरकर रखी गई जगह। कहानी की पूरी कठिनाई इसी एक शब्द से शुरू होती है, क्योंकि उसे बढ़ाने के रास्ते में किसी का घर पड़ता है।
बहू, यानी बेटे की पत्नी। यह कहानी की भाषा का पुराना रूप है और आज की बातचीत में नहीं मिलता, पर अर्थ संदर्भ से साफ़ हो जाता है।
किसी चीज़ पर अपना अधिकार जमा लेना। कहानी में यह अदालत के रास्ते से होता है, इसलिए काग़ज़ पर ठीक दिखता है और पढ़ने पर ग़लत लगता है।
हर छोटी बात में बहुत बारीकी निकालना। लेखक यह मुहावरा वकीलों के लिए लगाता है, और प्रशंसा के लिए नहीं लगाता।
ऐसा बँधा हुआ वाक्यांश जिसका अर्थ उसके शब्दों से सीधे नहीं निकलता। बाल की खाल निकालने में न कोई बाल है और न कोई खाल।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
एक मुहल्ले में बीस साल से एक छोटी दुकान चल रही है, और उसके मालिक का परिवार उसी के पीछे रहता है। पास की एक बड़ी इमारत के मालिक को अपनी पार्किंग बढ़ाने के लिए वही जगह चाहिए। वे पहले दुकानदार से बात करते हैं और फिर कुछ पैसे देने का प्रस्ताव रखते हैं। दुकानदार मना कर देता है, क्योंकि उसके पिता ने वही दुकान खड़ी की थी। कुछ महीनों बाद दुकान के काग़ज़ों में एक कमी निकाल दी जाती है, और उसे जगह छोड़नी पड़ती है। किसी ने कोई झगड़ा नहीं किया।
Analysis:
ध्यान दीजिए कि इस प्रसंग में भी कोई खलनायक नहीं है। बात करना ग़लत नहीं था, पैसे का प्रस्ताव भी ग़लत नहीं था, और काग़ज़ देखना भी ग़लत नहीं। फिर भी अंत में एक परिवार को अपनी जगह छोड़नी पड़ी। कहानी इसी तरह के चित्र के लिए लिखी गई थी।
Activity:
अपने आसपास की कोई एक ऐसी जगह चुनिए जो किसी के लिए घर से अधिक है, और तीन पंक्तियों में लिखिए कि वह जगह उस व्यक्ति के लिए क्यों ज़रूरी है।
करके देखो
Title:
मेरे घर की कहानी
Safety:
किसी सामग्री की आवश्यकता नहीं है; केवल पूछना और लिखना है।
What You Notice:
लगभग हर घर के पीछे कोई कहानी निकल आती है, और उसमें कोई एक चीज़ सबसे ऊपर रहती है। कहानी की वृद्धा के लिए वही चीज़ उसकी झोंपड़ी थी।
Did you know
हिंदी की आरंभिक कहानियों में इस कहानी का नाम आता है। उस समय कहानी नाम की यह विधा हिंदी में नई थी, और उसका ढाँचा बनना शुरू ही हुआ था।
भारत सरकार की एक वेबसाइट पर आज कोई भी नागरिक किसी सरकारी विभाग से जुड़ी शिकायत दर्ज करा सकता है, और वह बीस से अधिक भाषाओं में हो सकती है।
Memory tricks
कब्ज़े का क्रम याद रखने का सूत्र — इ–क–प–अ — इच्छा, कहना, पैसा, अदालत। पहले इच्छा उठती है, फिर कहकर समझाया जाता है, फिर पैसा लगाया जाता है, और अंत में अदालत से कब्ज़ा मिल जाता है।
Practice MCQs with answers (25)
- A एक महल, और उसके पास एक झोंपड़ी
- B एक मंदिर, और उसके पास एक धर्मशाला
- C एक अदालत, और उसके पास एक झोंपड़ी
- D एक महल, और उसके पास एक दूसरा महल
Show answer
Why:
लेखक दोनों को रखकर कुछ कहता नहीं; अंतर अपने आप दिख जाता है।
- A झोंपड़ी में एक नया चूल्हा बनवाने की
- B महल का अहाता झोंपड़ी तक बढ़ा देने की
- C अपने महल में एक नया कमरा जोड़ने की
- D बूढ़ी स्त्री को कोई नौकरी देने की
Show answer
Why:
कहानी का सारा तनाव इसी एक इच्छा से बनता है।
- A इच्छा ज़मींदार के मन से उठ ही नहीं पाती
- B इच्छा बहुत बड़ी और महँगी निकल आती है
- C इच्छा के रास्ते में किसी का घर पड़ जाता है
- D इच्छा के बारे में किसी को पता नहीं चलता
Show answer
Why:
किसी की इच्छा पूरी होने के लिए किसी और को जगह छोड़नी पड़ती है।
- A उसे उस झोंपड़ी के बदले पैसे चाहिए थे
- B उसे कहीं और कोई जगह मिल ही नहीं रही थी
- C वह ज़मींदार से किसी बात पर नाराज़ थी
- D उस जगह से उसका नाता केवल रहने का नहीं है
Show answer
Why:
वह जगह नहीं बचा रही; वह कुछ और बचा रही है।
- A चार छोटे वाक्यों में
- B दस लंबे वाक्यों में
- C एक ही लंबे वाक्य में
- D पूरे एक पृष्ठ में
Show answer
Why:
इतने बड़े दुख को छोटे वाक्यों में निपटाने से वह और भारी लगता है।
- A पति, बेटी और बहू
- B पति, बेटा और बहू
- C पति, बेटा और पोती
- D बेटा, बहू और पोती
Show answer
Why:
बहू जाते समय पाँच बरस की बच्ची छोड़ गई थी।
- A उसकी बहू
- B उसका बेटा
- C उसकी पोती
- D उसका पड़ोसी
Show answer
Why:
उस बच्ची के सिवा कोई नहीं था।
- A वह कहानी को बहुत लंबा कर देता है
- B वह पहले से हल्का हो जाता है
- C वह पाठक की समझ से निकल जाता है
- D वह और भी भारी लगने लगता है
Show answer
Why:
लेखक रोकर नहीं सुनाता, और इसी से बात बैठ जाती है।
- A वह जगह तीन लोगों की आख़िरी जगह थी
- B वह जगह महल के बहुत पास पड़ती थी
- C वह जगह उसे बहुत सस्ती मिल गई थी
- D वह जगह गाँव के बीच में बनी हुई थी
Show answer
Why:
उस घर में उसकी स्मृति रहती है, और स्मृति दूसरे पते पर नहीं जाती।
- A वह पहले से अधिक मज़बूत हो गई
- B वह जीते-जी निर्जीव जैसी हो गई
- C वह अदालत जाने की तैयारी करने लगी
- D वह अपनी पोती के साथ चली गई
Show answer
Why:
अभी कुछ हुआ भी नहीं था, और केवल सुनने से हालत बदल गई।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
अभिकथन सही है, पर कारण ग़लत — उस समय घर अभी उसका ही था।
- A बात पूरी तरह रुक जाती है और कहानी ठहर जाती
- B बात ताक़त की नहीं, कहने-सुनने की हो जाती है
- C बात कहने-सुनने की नहीं, ताक़त की हो जाती है
- D बात बूढ़ी स्त्री के हाथ में चली जाती है
Show answer
Why:
एक ही वाक्य में कहानी एक छोटा मोड़ ले लेती है।
- A वकीलों को पैसा देकर, अदालत के रास्ते से
- B अपने नौकरों से रातों-रात झोंपड़ी गिरवाकर
- C बूढ़ी स्त्री को पैसे देकर ख़रीदकर
- D गाँव के लोगों से सहायता लेकर
Show answer
Why:
काग़ज़ पर सब ठीक दिखता है, और यही कहानी की बारीक बात है।
- A किसी से बहुत बड़ी रकम वसूल कर लेना
- B हर छोटी बात में बहुत बारीकी निकालना
- C किसी को बहुत देर तक समझाते रहना
- D किसी काम को बहुत जल्दी कर देना
Show answer
Why:
मुहावरा यहाँ प्रशंसा के लिए नहीं, उस चतुराई के लिए आया है।
- A अदालत का कोई निर्णय कभी ग़लत नहीं होता
- B कानूनी होना ही न्यायपूर्ण होने का प्रमाण है
- C कानूनी होना और न्यायपूर्ण होना एक बात नहीं है
- D किसी का घर लेना सदा कानून के बाहर होता है
Show answer
Why:
अदालत ने कब्ज़ा दिया, फिर भी पढ़ते समय कुछ ग़लत लगता है।
- A किसी धर्मगुरु का
- B बल का
- C गाँव की सभा का
- D पैसे का
Show answer
Why:
ताक़त हमेशा शोर नहीं करती; कई बार वह बहुत शांत दिखती है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और II सही हैं। III ग़लत है — कहानी में कोई धमकी नहीं आती।
- A कुछ कड़वे और आरोप लगाने वाले शब्द
- B श्रीमान और महाराज जैसे आदर वाले शब्द
- C किसी भी तरह का कोई संबोधन नहीं
- D केवल उनके गाँव और घर का नाम
Show answer
Why:
कोई शिकायत नहीं, कोई आरोप नहीं, फिर भी अन्याय दिख जाता है।
- A लेखक हर पंक्ति में एक आरोप छिपा देता है
- B लेखक अंत में अपना निर्णय साफ़ लिख देता है
- C घटनाएँ क्रम से रखकर निर्णय पाठक पर छोड़ा जाता है
- D पाठक को कहानी के आरंभ में ही सब बता दिया जाता है
Show answer
Why:
यह लिखने का बहुत सधा हुआ ढंग है।
- A दोनों के पास केवल अपनी-अपनी जगह बची है
- B एक के पास जगह और स्मृति, दूसरी के पास धन और पहुँच
- C दोनों के पास धन और अदालत तक की पहुँच है
- D एक के पास धन और पहुँच, दूसरी के पास जगह और स्मृति
Show answer
Why:
मुक़ाबला बराबर का नहीं है, और कहानी इसे छिपाती भी नहीं।
- A लगभग सवा सौ साल
- B लगभग पचास साल
- C लगभग तीन सौ साल
- D लगभग पाँच सौ साल
Show answer
Why:
हिंदी की आरंभिक कहानियों में इसकी गिनती होती है।
- A लेखक ने जान-बूझकर कठिन शब्द चुने थे
- B उस समय कहानी लिखने का ढंग नया-नया बन रहा था
- C ये शब्द आज भी हर घर की रोज़ बातचीत में चलते रहते हैं
- D ये शब्द किसी दूसरी भाषा से लिए गए हैं
Show answer
Why:
पढ़ते समय ये शब्द अटकाते हैं, पर अर्थ अटकता नहीं।
- A उस कंपनी का नाम और काम क्या-क्या है
- B उस परिवार को उस जगह के बदले कितना पैसा मिलना ही चाहिए
- C जो हो रहा है, वह कानून के भीतर होकर भी ठीक है या नहीं
- D उस मकान को कब और किसने बनवाया था
Show answer
Why:
कहानी हमें कानून और न्याय का अंतर पूछने वाला प्रश्न देती है।
- A किसी जगह के बदले पैसा मिल जाना काफ़ी है
- B किसी जगह का मूल्य उसके आकार से तय होता है
- C किसी जगह को छोड़ना कभी कठिन नहीं होता
- D किसी जगह से नाता केवल रहने का नहीं होता
Show answer
Why:
स्मृति किसी दूसरे पते पर नहीं ले जाई जा सकती।
- A आगे कुछ पलटेगा, क्योंकि असमानता बहुत खुली है
- B आगे कुछ नहीं पलटेगा, क्योंकि कब्ज़ा हो गया है
- C कहानी अब किसी नए पात्र पर चली जाएगी
- D कहानी यहीं समाप्त हो जाने वाली है
Show answer
Why:
और पलटने का औज़ार बहुत छोटा निकलेगा।
Important short questions (7)
वह बहुत कम शब्दों में एक महल और उसके पास बनी एक झोंपड़ी दिखा देता है। लेखक दोनों को आमने-सामने रखकर कुछ कहता नहीं। अंतर पाठक को अपने आप दिख जाता है।
कारण यह नहीं था कि उसे कोई दूसरी जगह न मिलती। कारण यह था कि वह झोंपड़ी तीन लोगों की आख़िरी जगह थी। उस घर में उसकी स्मृति रहती थी, और स्मृति किसी दूसरे पते पर नहीं ले जाई जा सकती।
क्योंकि इससे दुख हल्का नहीं पड़ता, और भारी लगता है। लेखक रोकर नहीं सुनाता। वह केवल तथ्य रख देता है, और पाठक के मन में बात अपने आप बैठ जाती है।
पहले इच्छा उठती है, फिर बार-बार कहकर समझाया जाता है। समझाने से काम न बनने पर कुछ वकीलों को पैसा दिया जाता है, और अंत में अदालत से झोंपड़ी पर कब्ज़ा ले लिया जाता है।
जो हुआ, वह कानून के रास्ते से हुआ और काग़ज़ पर सब ठीक था। फिर भी पढ़ते समय कुछ ग़लत लगता है। इसी से पता चलता है कि कानूनी होना और न्यायपूर्ण होना, दोनों एक बात नहीं हैं।
वह घटनाएँ क्रम से रख देता है और कोई निर्णय नहीं लिखता। कोई शिकायत नहीं, कोई आरोप नहीं। इससे निर्णय पाठक पर छूट जाता है, और अपने आप निकाला हुआ निर्णय अधिक देर टिकता है।
एक के पास धन है, नौकर हैं और अदालत तक पहुँच है। दूसरी के पास केवल एक झोंपड़ी है और उसकी स्मृति। मुक़ाबला बराबर का नहीं है, और कहानी इसे छिपाती भी नहीं।
Long answer questions (3)
लेखक का ढंग बहुत सधा हुआ है। वह ज़मींदार के लिए आदर वाले शब्द लगाता है और उन्हें श्रीमान तथा महाराज कहता है। कहीं कोई शिकायत नहीं है और कोई आरोप नहीं। फिर वह केवल घटनाएँ क्रम से रख देता है। एक इच्छा उठती है, एक इनकार आता है, प्रयत्न बेकार जाते हैं, पैसा लगता है, और अदालत से कब्ज़ा मिल जाता है। इन घटनाओं के बीच लेखक कुछ और भी रख देता है — उस स्त्री का जीवन, जिसमें तीन लोग उसी झोंपड़ी से जुड़े थे। अब पाठक के सामने दोनों चीज़ें हैं, और निर्णय उसे ही करना है। अपने आप निकाला हुआ निर्णय किसी बताए हुए निर्णय से अधिक देर टिकता है, और यही इस ढंग का लाभ है।
ध्यान देने की बात यह है कि ज़मींदार कहीं किसी से झगड़ा नहीं करते। वे किसी को मारते नहीं और धमकाते भी नहीं। उनका पहला रास्ता कहने-सुनने का है, और वह बेकार जाता है। दूसरा रास्ता पैसे का है। कुछ वकीलों को पैसा दिया जाता है, और उसके बाद का काम अदालत कर देती है। इससे कहानी एक बारीक चित्र खड़ा करती है। ताक़त हमेशा शोर नहीं करती; कई बार वह बहुत शांत दिखती है और फिर भी किसी का घर ले लेती है। इसी कारण यह कहानी पढ़ते समय कोई खलनायक नहीं मिलता, और फिर भी एक अन्याय पूरा हो जाता है। यह चित्र आज भी पहचाना जा सकता है।
कहानी उसका जीवन चार छोटे वाक्यों में बता देती है, और उसी से यह बात निकलती है। उसके पति का देहांत उसी झोंपड़ी में हुआ था। उसका एक ही बेटा था, और वह भी वहीं चला गया। बहू भी नहीं रही, और जाते समय अपनी पाँच बरस की बच्ची छोड़ गई। यानी तीन लोगों की आख़िरी जगह वही एक घर है। जब कोई पुरानी बात याद आ जाती तो वह फूट-फूटकर रोने लगती थी। इसका अर्थ यह है कि उस घर में उसकी स्मृति रहती है, और स्मृति किसी दूसरे पते पर नहीं ले जाई जा सकती। यही कारण है कि वह दूसरी जगह मिलने पर भी नहीं हटती। एक उदाहरण आज का भी लिया जा सकता है — कोई विद्यार्थी अपना पुराना विद्यालय छोड़ते समय रो देता है, जबकि नया विद्यालय उससे बड़ा होता है।
Flashcards (17)
Play this topic
- कब्ज़े का क्रम लगाइए
- शब्द और अर्थ
- किसके पास क्या
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
टोकरी और आँखें खुलना
वृद्धा एक टोकरी लेकर लौटती है, झोंपड़ी पर दावा छोड़ देती है और केवल एक टोकरी मिट्टी माँगती है। उसकी दूसरी विनती — टोकरी को ज़रा हाथ लगा देने की — कहानी का मोड़ बन जाती है, क्योंकि एक टोकरी ज़मींदार से नहीं उठती और हज़ारों टोकरियों का हिसाब अपने आप सामने आ जाता है।
What you will be able to do
- वृद्धा की दोनों विनतियाँ क्रम से बता सकूँगा।
- सिर हिलाने जैसी चुप क्रिया का अर्थ समझा सकूँगा।
- ज़मींदार के व्यवहार के चार क़दम गिनाकर उनका क्रम बता सकूँगा।
- मिट्टी के प्रतीक बनने की बात उदाहरण सहित लिख सकूँगा।
- वृद्धा ने क्या-क्या नहीं किया, यह गिनाकर उसका लाभ बता सकूँगा।
Key points
वृद्धा एक टोकरी लेकर लौटती है, और कहानी उसका कारण रोककर रखती है।
ज़मींदार की पहली प्रतिक्रिया उसे हटा देने की है, बिना कारण पूछे।
वह झोंपड़ी पर अपना दावा छोड़ देती है और झगड़ा शुरू ही नहीं करती।
सिर हिलाना यहाँ अनुमति है — सुनने का द्वार खुल जाता है।
पोती ने खाना छोड़ दिया है और अपने ही घर में रोटी खाना चाहती है।
पहली विनती एक टोकरी मिट्टी की है, जिससे चूल्हा बनेगा।
दूसरी विनती टोकरी को हाथ लगा देने की है, और वही कहानी का मोड़ है।
ज़मींदार नाराज़गी से दया तक आते हैं और स्वयं उठाने आगे बढ़ते हैं।
एक टोकरी न उठने से हज़ारों टोकरियों का हिसाब अपने आप सिद्ध हो जाता है।
Full explanation
वह फिर लौटती है
कुछ दिन बाद ज़मींदार उसी झोंपड़ी के आसपास टहल रहे हैं और लोगों को काम बता रहे हैं। उसी समय वह बूढ़ी स्त्री वहाँ आ जाती है, और उसके हाथ में एक टोकरी है। ध्यान दीजिए कि कहानी यहाँ कोई तैयारी नहीं दिखाती। टोकरी हाथ में है, पर उसका कारण अभी पाठक को नहीं बताया जाता। यही रोककर रखना आगे के पूरे दृश्य को सँभालता है।
पहली प्रतिक्रिया — हटा दो
उसे देखते ही ज़मींदार अपने नौकरों से कहते हैं कि उसे यहाँ से हटा दो। यह पहली प्रतिक्रिया है, और उसमें कोई बातचीत नहीं है। वे यह पूछते भी नहीं कि वह क्यों आई है। इस एक वाक्य से उनका अभी तक का स्वभाव साफ़ हो जाता है — जो रास्ते में आए, उसे हटा देना।
वह झोंपड़ी माँगने नहीं आई
अब वृद्धा गिड़गिड़ाकर बोलती है, और उसकी पहली बात चौंकाने वाली है। वह कहती है कि झोंपड़ी अब उनकी ही हो गई है और वह उसे लेने नहीं आई है। यानी वह झगड़ा शुरू ही नहीं करती। जो छिन गया, उसे वह मान लेती है, और उसके बाद एक छोटी विनती रखती है। इस एक चुनाव से उसकी पूरी बात का रास्ता बदल जाता है।
सिर हिलाने का अर्थ
वह क्षमा माँगकर कहती है कि एक विनती है, और ज़मींदार सिर हिला देते हैं। पुस्तक इसी क्रिया पर एक प्रश्न पूछती है, और वह ध्यान देने योग्य है। सिर हिलाना यहाँ अनुमति है — वे सुनने के लिए तैयार हो जाते हैं। उन्होंने कुछ कहा नहीं, पर दृश्य बदल गया, क्योंकि अब उनकी ओर से सुनने का द्वार खुल गया है।
पोती ने खाना छोड़ दिया
अब वह अपनी बात कहती है। जिस दिन से झोंपड़ी छूटी है, उसकी पोती ने खाना ही छोड़ दिया है। बहुत समझाने पर भी वह एक ही बात कहती है कि अपने घर चलो, वहीं रोटी खाऊँगी। ध्यान दीजिए कि पाँच बरस की बच्ची के लिए घर कोई काग़ज़ का मामला नहीं है। उसके लिए घर वही है जहाँ वह रहती आई है, और वह अदालत का निर्णय नहीं मानती।
एक टोकरी मिट्टी की विनती
इसके बाद वह अपनी विनती रखती है, और वह बहुत छोटी है। उसे उस झोंपड़ी से एक टोकरी भर मिट्टी चाहिए। उसी मिट्टी से वह चूल्हा बनाएगी और उस पर रोटी पकाएगी, और उसे भरोसा है कि तब बच्ची खाने लगेगी। यह माँग इतनी छोटी है कि मना करने का कोई कारण नहीं बनता। ज़मींदार आज्ञा दे देते हैं।
झोंपड़ी के भीतर
वह झोंपड़ी के भीतर जाती है, और भीतर जाते ही उसे पुरानी बातें याद आ जाती हैं। उसकी आँखों से आँसू बहने लगते हैं। कहानी यहाँ एक पंक्ति से काम चला देती है, और उसी एक पंक्ति से पता चल जाता है कि उस घर में उसके लिए क्या रखा था। वह अपने दुख को किसी तरह सँभालती है, टोकरी मिट्टी से भर लेती है और उसे बाहर ले आती है।
दूसरी विनती — ज़रा हाथ लगाइए
अब वह दूसरी विनती करती है। वह हाथ जोड़कर कहती है कि इस टोकरी को ज़रा हाथ लगा दीजिए, जिससे वह उसे अपने सिर पर रख ले। सुनने में यह एक बहुत मामूली माँग है — केवल हाथ लगाने की। पर पूरी कहानी का मोड़ इसी वाक्य पर टिका है, और पहली बार पढ़ते समय यह पता ही नहीं चलता।
नाराज़गी से दया तक
ज़मींदार पहले बहुत नाराज़ होते हैं। यह स्वाभाविक है, क्योंकि यह काम नौकरों का है। पर वह बार-बार हाथ जोड़ती है और उनके पैरों पर गिरने लगती है, और तब उनके मन में कुछ दया आ जाती है। ध्यान दीजिए कि यह पूरा बदलाव नहीं है। यह केवल पहली दरार है, और कहानी उसे दया कहकर ही छोड़ देती है।
वे स्वयं आगे बढ़ते हैं
अब कहानी का सबसे बारीक वाक्य आता है। वे किसी नौकर से नहीं कहते; वे स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़ते हैं। यहीं से उनके व्यवहार में बदलाव का आरंभ दिखाई देता है। पहले वे कहते थे कि उसे हटा दो; अब वे स्वयं झुकने को तैयार हैं। दया के बिना यह क़दम नहीं उठता, और इसी कारण पिछली पंक्ति का महत्व है।
टोकरी उठती नहीं
वे टोकरी को हाथ लगाकर उठाने लगते हैं और उसी पल पता चलता है कि यह काम उनकी इतना भार उठाना उनके बस में नहीं है। वे पूरा ज़ोर लगाते हैं, फिर भी टोकरी एक हाथ भी ऊँची नहीं होती। अंत में वे लज्जित होकर मान लेते हैं कि उनसे यह टोकरी नहीं उठेगी। यह मान लेना भी एक बड़ा क़दम है, क्योंकि वे अपनी असमर्थता लोगों के सामने कह देते हैं।
एक गिनती, और आँखें खुल जाना
अब वृद्धा अपनी बात रखती है, और वह एक गिनती है। उनसे एक टोकरी मिट्टी नहीं उठ रही, और उस झोंपड़ी में हज़ारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। तो उस सारे भार को वे जीवन भर कैसे उठा सकेंगे? वह यह भी जोड़ देती है कि इस बात पर वे स्वयं विचार करें। कोई आरोप नहीं, कोई गाली नहीं — केवल एक हिसाब और एक अनुरोध।
बात मिट्टी की नहीं थी
अब पीछे मुड़कर देखिए तो मिट्टी केवल मिट्टी नहीं थी। वह उस अन्याय का प्रतीक थी जो उस झोंपड़ी को लेकर हुआ। एक टोकरी का भार उठा न सकने से यह बात अपने आप सिद्ध हो गई कि हज़ारों टोकरियों का भार किसी के बस का नहीं। वृद्धा ने यह बात कहकर नहीं समझाई; उसने करवा कर दिखा दी, और करके दिखाई गई बात मुड़ती नहीं।
पश्चाताप और झोंपड़ी की वापसी
कहानी कहती है कि ज़मींदार धन के घमंड में अपना कर्तव्य भूल गए थे, पर उस स्त्री की ये बातें सुनकर उनकी आँखें खुल गईं। उन्होंने अपने किए पर पश्चाताप किया, उससे क्षमा माँगी, और वह झोंपड़ी उसे लौटा दी। ध्यान दीजिए कि यहाँ कोई दंड नहीं है और कोई अदालत नहीं। बदलाव भीतर से आता है, और इसी कारण वह टिकने लायक़ लगता है।
वृद्धा ने क्या नहीं किया
अंत में यह गिनना भी ज़रूरी है कि उसने क्या नहीं किया। उसने झगड़ा नहीं किया, किसी से शिकायत नहीं की, किसी को बुरा नहीं कहा, और अदालत का नाम भी नहीं लिया। उसने दो छोटी विनतियाँ कीं और एक गिनती सामने रख दी। इसी से कहानी की सबसे बड़ी बात निकलती है — सच्ची शक्ति दया और न्याय में होती है, शोर में नहीं।
Concepts and terms
बहुत विनम्र ढंग से रखी गई माँग। वृद्धा दो विनतियाँ करती है, और दोनों इतनी छोटी हैं कि मना करने का कोई कारण नहीं बनता।
ऐसी चीज़ जो अपने आप से बड़ी किसी बात का संकेत देती है। कहानी में मिट्टी उस अन्याय के भार का प्रतीक बन जाती है जो झोंपड़ी लेकर हुआ।
धन का घमंड। कहानी कहती है कि ज़मींदार इसी में अपना कर्तव्य भूल गए थे, और वृद्धा के वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल जाती हैं।
अपने किए पर भीतर से होने वाला दुख। ध्यान देने की बात यह है कि इसके लिए किसी दंड या अदालत का नाम नहीं आता।
शरमिंदा। ज़मींदार इसी स्थिति में मान लेते हैं कि टोकरी उनसे नहीं उठेगी, और अपनी कमी लोगों के सामने कह देना भी एक बड़ा क़दम है।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
एक कक्षा में एक विद्यार्थी हर दिन अपने साथी की पुस्तक बिना पूछे ले लेता है और शाम तक लौटाता है। साथी कई बार कह चुका है, पर बात नहीं बनी। एक दिन वह साथी कुछ नहीं कहता। वह अपनी पुस्तक घर पर छोड़ आता है और उस विद्यार्थी से कहता है कि आज वह उसकी पुस्तक ले जाना चाहता है, केवल एक दिन के लिए। विद्यार्थी मना कर देता है और कहता है कि उसे शाम को पढ़ना है। साथी कुछ और नहीं कहता, केवल मुस्कुरा देता है। अगले दिन से वह विद्यार्थी पूछकर पुस्तक लेने लगता है।
Analysis:
ध्यान दीजिए कि इस प्रसंग में भी किसी ने किसी को बुरा नहीं कहा। एक माँग रखी गई, और वही माँग उत्तर बन गई। कहानी का औज़ार यही है, और उसे किसी बड़े अवसर की ज़रूरत नहीं पड़ती।
Activity:
ऐसी दो बातें लिखिए जिन्हें आप किसी को आरोप लगाकर नहीं, एक सवाल या एक काम से समझा सकते हैं।
करके देखो
Title:
एक टोकरी का भार
Safety:
भारी भार न उठाइए और थैली को कमर से ऊपर न ले जाइए; रेत आँख या मुँह के पास न आए।
What You Notice:
आधी भरी थैली भी एक हाथ से ठीक से नहीं उठती। इसी से कहानी का हिसाब समझ में आ जाता है, क्योंकि वहाँ टोकरी पूरी भरी हुई थी।
Did you know
पहले के घरों में चूल्हा घर की मिट्टी से बनाया जाता था, इसलिए नई जगह जाने पर भी पुराने घर की मिट्टी साथ ले जाने का चलन था।
कहानी में वृद्धा जो करती है, उसे आज अहिंसक विरोध कहा जाता है — किसी से लड़े बिना उसे अपनी ही बात से उसकी भूल दिखा देना।
Memory tricks
ज़मींदार के चार क़दम याद रखने का सूत्र — ना–द–ल–प — नाराज़गी, दया, लज्जा, पश्चाताप। पहले हटाने को कहते हैं, फिर मन पसीजता है, फिर अपनी कमी मानते हैं, और अंत में क्षमा माँगकर झोंपड़ी लौटा देते हैं।
Practice MCQs with answers (25)
- A एक चूल्हा
- B एक टोकरी
- C एक काग़ज़
- D एक पोटली
Show answer
Why:
कहानी उसका कारण अभी रोककर रखती है।
- A आगे का पूरा दृश्य सँभल जाता है
- B कहानी पहले से लंबी हो जाती है
- C पाठक को कुछ भी समझ नहीं आता
- D वृद्धा का चरित्र कमज़ोर दिखता है
Show answer
Why:
पहली बार पढ़ते समय मोड़ का पता ही नहीं चलता।
- A उसे बैठने के लिए कहते हैं
- B उससे पूछते हैं कि वह क्यों आई है
- C नौकरों से कहते हैं कि उसे हटा दो
- D उसे उसकी झोंपड़ी लौटा देते हैं
Show answer
Why:
इसमें कोई बातचीत नहीं है, और वे कारण पूछते भी नहीं।
- A वह अपने साथ गाँव के कई लोगों को ले आती है
- B वह झोंपड़ी वापस माँगने के लिए अदालत जाती है
- C वह ज़मींदार को बहुत कड़वी बातें कह देती है
- D वह झोंपड़ी माँगने नहीं आई, यह वह स्वयं कह देती है
Show answer
Why:
जो छिन गया उसे वह मान लेती है, और झगड़ा शुरू ही नहीं करती।
- A उसकी झोंपड़ी उसी समय वापस मिल जाती है
- B उसकी बात सुनी जाने का रास्ता खुल जाता है
- C ज़मींदार उसे कुछ पैसे देने लगते हैं
- D नौकर उसे वहाँ से हटा नहीं पाते हैं
Show answer
Why:
इस एक चुनाव से उसकी पूरी बात का रास्ता बदल जाता है।
- A सुनने की अनुमति देना
- B उसे वहाँ से हटाना
- C उसकी बात मान लेना
- D अपनी नाराज़गी दिखाना
Show answer
Why:
वे कुछ कहते नहीं, पर सुनने का द्वार खुल जाता है।
- A उसे ज़मींदार के नौकरों से डर लगता था
- B वह बीमार पड़ गई थी और खा नहीं पाती थी
- C वह अपने ही घर में रोटी खाना चाहती थी
- D उसे रोटी का स्वाद अच्छा नहीं लगता था
Show answer
Why:
वह एक ही बात कहती थी कि अपने घर चलो।
- A उसके लिए घर केवल खाने की जगह होता है
- B उसके लिए घर अदालत के निर्णय से तय होता है
- C उसके लिए घर का कोई अर्थ ही नहीं होता
- D उसके लिए घर काग़ज़ का मामला नहीं होता
Show answer
Why:
उसके लिए घर वही है जहाँ वह रहती आई है।
- A झोंपड़ी में एक रात और रुकने की
- B झोंपड़ी से एक टोकरी भर मिट्टी ले जाने की
- C झोंपड़ी का कुछ किराया हर महीने ही मिलने की
- D झोंपड़ी पूरी तरह वापस मिलने की
Show answer
Why:
उसी मिट्टी से वह चूल्हा बनाकर रोटी पकाना चाहती थी।
- A माँग इतनी छोटी है कि मना करने का कारण नहीं बनता
- B माँग इतनी बड़ी है कि वे डर जाते हैं
- C उन्हें उसी समय अदालत की ओर से कोई आदेश मिल जाता है
- D गाँव के लोग उन्हें मना करने से रोकते हैं
Show answer
Why:
एक टोकरी मिट्टी के लिए कोई कारण खड़ा नहीं होता।
- A वह ज़मींदार को भीतर बुला लेती है
- B वह बिलकुल भूल जाती है कि वह किस काम से आई थी
- C पुरानी बातें याद आ जाती हैं और आँसू बहने लगते हैं
- D वह अपनी पोती को वहीं बैठा देती है
Show answer
Why:
कहानी एक पंक्ति से काम चला देती है, और बात साफ़ हो जाती है।
- A टोकरी में और मिट्टी भर देने की
- B टोकरी को नौकरों से उठवा देने की
- C टोकरी को झोंपड़ी में रख देने की
- D टोकरी को ज़रा हाथ लगा देने की
Show answer
Why:
सुनने में यह बहुत मामूली माँग है, और पूरा मोड़ इसी पर टिका है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों बातें सही हैं, पर कारण यह नहीं बताता कि वह मामूली क्यों लगती है।
- A क्योंकि टोकरी उठाना नौकरों का काम था
- B क्योंकि टोकरी बहुत भारी दिखाई देती थी
- C क्योंकि वृद्धा ने मिट्टी बहुत भर ली थी
- D क्योंकि उन्हें कहीं और जाना पड़ रहा था
Show answer
Why:
यह नाराज़गी स्वाभाविक है, और वहीं से बदलाव शुरू होता है।
- A वह उन्हें अदालत का डर दिखा देती है
- B वह उन्हें कुछ पैसे देने का वचन देती है
- C वह बार-बार हाथ जोड़ती और पैरों पर गिरती है
- D वह गाँव के सब लोगों को उसी समय बुला ही लेती है
Show answer
Why:
कहानी इसे पूरा बदलाव नहीं, पहली दरार कहकर छोड़ देती है।
- A वे अंत में उसकी झोंपड़ी वापस कर देते हैं
- B वे नौकरों से कहते हैं कि उसे हटा दो
- C वे उसे एक टोकरी मिट्टी की आज्ञा देते हैं
- D वे किसी नौकर से न कहकर स्वयं आगे बढ़ते हैं
Show answer
Why:
पहले वे हटाने को कहते थे; अब वे स्वयं झुकने को तैयार हैं।
- A वह उठ जाती है, पर बहुत कठिनाई से
- B वह अपनी जगह से एक हाथ भी ऊँची नहीं होती
- C वह उठते ही हाथ से गिर जाती है
- D वह नौकरों की सहायता से आसानी से उठ जाती है
Show answer
Why:
वे पूरी शक्ति लगाते हैं, फिर भी काम उनकी शक्ति के बाहर निकलता है।
- A क्योंकि वे अपनी कमी लोगों के सामने कह देते हैं
- B क्योंकि इससे टोकरी अपने आप उठ जाती है
- C क्योंकि इससे वृद्धा को पैसे मिल जाते हैं
- D क्योंकि इससे नौकर उनसे नाराज़ हो जाते हैं
Show answer
Why:
उस समय तक वे अपने धन और पद के घमंड में थे।
- A एक लंबी शिकायत और अदालत जाने की खुली धमकी
- B एक आरोप और उसके लिए दंड की माँग
- C एक गिनती और उस पर विचार करने का अनुरोध
- D एक वचन और उसके बदले कुछ पैसे
Show answer
Why:
कोई आरोप नहीं, कोई गाली नहीं — केवल एक हिसाब।
- A एक नौकर का काम, और उसके बाद सब नौकरों का काम
- B एक टोकरी मिट्टी, और महल की हज़ारों ईंटें
- C एक दिन का दुख, और जीवन भर का सुख
- D एक टोकरी मिट्टी, और झोंपड़ी की हज़ारों टोकरियाँ
Show answer
Why:
एक का भार उठा न सकने से हज़ारों का भार अपने आप सिद्ध हो जाता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और II सही हैं। III ग़लत है — वह अदालत का नाम भी नहीं लेती।
- A उस धन का, जो ज़मींदार के पास था
- B उस अन्याय के भार का, जो झोंपड़ी लेकर हुआ
- C उस चूल्हे का, जो बच्ची के लिए बनेगा
- D उस अदालत का, जिसने कब्ज़ा दिला दिया था
Show answer
Why:
एक टोकरी का भार उठा न सकने से पूरी बात सिद्ध हो जाती है।
- A उसे गाँव की सभा में सबके सामने रख दी
- B उसे काग़ज़ पर लिखकर दे दी, जिससे वह प्रमाण बन ही गई
- C करवा कर दिखा दी, और करके दिखाई बात मुड़ती नहीं
- D उसे अपनी पोती से कहलवा दिया
Show answer
Why:
यही इस कहानी का सबसे असरदार चुनाव है।
- A किसी नौकर या महल का
- B किसी दया या पश्चाताप का
- C किसी टोकरी या मिट्टी का
- D किसी दंड या अदालत का
Show answer
Why:
बदलाव भीतर से आता है, और इसी कारण वह टिकने लायक़ लगता है।
- A झगड़े में तीसरे व्यक्ति को कुछ कहना ही नहीं चाहिए
- B आरोप के बजाय एक हिसाब रखना अधिक असर करता है
- C आरोप लगाना ही किसी को बदलने का रास्ता है
- D इस स्थिति पर इस भाग की कोई बात लागू नहीं है
Show answer
Why:
वृद्धा ने भी कोई आरोप नहीं लगाया, केवल एक गिनती रख दी।
Important short questions (7)
पहली विनती एक टोकरी भर मिट्टी ले जाने की थी। उसी से वह चूल्हा बनाकर रोटी पकाना चाहती थी। दूसरी विनती उस टोकरी को ज़रा हाथ लगा देने की थी। इससे वह उसे अपने सिर पर रख लेती।
वह अपनी बात सुनी जाने का रास्ता पा लेती है। जो छिन गया, उसे मान लेती है। फिर एक छोटी विनती रखती है। इसी एक चुनाव से रास्ता बदल जाता है।
वह अनुमति है। वे कुछ कहते नहीं, पर उनकी ओर से सुनने का द्वार खुल जाता है। इसी एक चुप क्रिया से दृश्य बदल जाता है, क्योंकि अब वृद्धा अपनी बात रख सकती है।
पाँच बरस की बच्ची के लिए घर कोई काग़ज़ का मामला नहीं है। उसके लिए घर वही है जहाँ वह रहती आई है, और वह अदालत का निर्णय नहीं मानती। इसी से झोंपड़ी का मूल्य और साफ़ हो जाता है।
क्योंकि यहीं से उनके व्यवहार में बदलाव का आरंभ दिखता है। पहले वे कहते थे कि उसे हटा दो; अब वे स्वयं झुकने को तैयार हैं। दया के बिना यह क़दम नहीं उठता।
वह उस अन्याय के भार का प्रतीक बन जाती है जो झोंपड़ी लेकर हुआ। एक टोकरी का भार उठा न सकने से यह अपने आप सिद्ध हो जाता है कि हज़ारों टोकरियों का भार किसी के बस का नहीं है।
उसने झगड़ा नहीं किया, किसी से शिकायत नहीं की, किसी को बुरा नहीं कहा, और अदालत का नाम भी नहीं लिया। उसने दो छोटी विनतियाँ कीं और एक गिनती सामने रख दी।
Long answer questions (3)
पहला क़दम नाराज़गी है। वृद्धा को देखते ही वे नौकरों से कहते हैं कि उसे हटा दो, और कारण पूछते भी नहीं। दूसरा क़दम दया है। वह बार-बार हाथ जोड़ती है और पैरों पर गिरने लगती है, और तब उनका मन कुछ पसीजता है। तीसरा क़दम लज्जा है। वे पूरी शक्ति लगाकर भी टोकरी नहीं उठा पाते, और लोगों के सामने मान लेते हैं कि उनसे यह नहीं उठेगी। चौथा क़दम पश्चाताप है। वृद्धा का हिसाब सुनकर उनकी आँखें खुल जाती हैं, वे क्षमा माँगते हैं और झोंपड़ी लौटा देते हैं। ध्यान देने की बात यह है कि बदलाव एक झटके में नहीं आता।
वह चाहती तो कह सकती थी कि उनके साथ अन्याय हुआ है, या कि ज़मींदार ने अपने धन का ग़लत उपयोग किया है। ऐसी बात कहने पर दो बातें हो सकती थीं। पहली, वे नाराज़ हो जाते और सुनना बंद कर देते। दूसरी, वे उसका उत्तर दे देते, क्योंकि काग़ज़ पर सब ठीक था। इसके बजाय उसने एक काम करने को कहा, और वह काम हो नहीं पाया। अब जो बात निकली, वह उनके अपने अनुभव से निकली। उसमें कोई आरोप नहीं था, इसलिए उसका उत्तर भी नहीं था। करके दिखाई गई बात मुड़ती नहीं, और इसी कारण उनकी आँखें उसी क्षण खुल जाती हैं।
कहानी के आरंभ में शक्ति साफ़ दिखती है। ज़मींदार के पास धन है, नौकर हैं और अदालत तक पहुँच है, और वृद्धा के पास कुछ नहीं। अंत तक यह पलट जाता है, पर पलटने का औज़ार कोई बड़ा औज़ार नहीं है। वह एक टोकरी मिट्टी है और दो छोटी विनतियाँ। इससे यह बात निकलती है कि सच्ची शक्ति शोर में नहीं, दया और न्याय में होती है। एक उदाहरण कहानी के भीतर से लिया जा सकता है। जिस क्षण ज़मींदार स्वयं झुकने को तैयार होते हैं, उसी क्षण से वे बदलना शुरू करते हैं, और वह झुकना किसी दंड से नहीं आया। दूसरा उदाहरण आज का है — कक्षा में किसी की भूल आरोप लगाकर नहीं, एक सवाल पूछकर दिखाई जाए तो वह अधिक असर करती है।
Flashcards (17)
Play this topic
- दृश्य का क्रम लगाइए
- शब्द और अर्थ
- किस क़दम की बात
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
शिल्प, प्रतीक और लेखक
कहानी का ढाँचा पाँच पड़ावों का है, और उसका चरम क्षण किसी झगड़े का नहीं बल्कि एक छोटे काम का है। इसी भाग में मिट्टी के प्रतीक बनने की बात, लेखक का ढंग, कि और की का अंतर, तथा माधवराव सप्रे का परिचय आता है।
What you will be able to do
- कहानी के पाँच पड़ाव क्रम से बता सकूँगा।
- प्रतीक का अर्थ और मिट्टी के तीनों अर्थ लिख सकूँगा।
- लेखक के ढंग की तीन बातें उदाहरण सहित समझा सकूँगा।
- कि और की का अंतर बताकर रिक्त स्थान ठीक भर सकूँगा।
- लेखक माधवराव सप्रे का संक्षिप्त परिचय लिख सकूँगा।
Key points
कहानी के पाँच पड़ाव हैं — आरंभ, कठिनाई, विनती, चरम क्षण और अंत।
चरम क्षण किसी टकराव का नहीं, एक टोकरी उठाने के छोटे काम का है।
प्रतीक वह चीज़ है जो अपने आप से बड़ी किसी बात का संकेत देती है।
मिट्टी के तीन अर्थ बनते हैं — सीधी मिट्टी, घर और स्मृति, और अन्याय का भार।
प्रतीक की ताक़त यह है कि उसे समझाना नहीं पड़ता।
लेखक कहीं निर्णय नहीं लिखता; वह घटनाएँ क्रम से रखकर हट जाता है।
जहाँ दुख सबसे बड़ा है, वहाँ कहानी के वाक्य सबसे छोटे हैं।
कि दो वाक्यों को जोड़ता है, और की किसी चीज़ का संबंध बताता है।
लेखक माधवराव सप्रे की मातृभाषा मराठी थी और जन्म दमोह में हुआ था।
Full explanation
कहानी का ढाँचा
इस कहानी को पढ़ चुकने के बाद उसका ढाँचा देखना आसान है। आरंभ में दो घर और एक इच्छा है। उसके बाद कठिनाई आती है, और वह अदालत के कब्ज़े तक पहुँचती है। फिर एक छोटी विनती आती है, और उसी से कहानी ऊपर चढ़ने लगती है। चरम क्षण वह है जब टोकरी नहीं उठती। अंत में क्षमा है और झोंपड़ी की वापसी। पाँच पड़ाव, और हर पड़ाव का अपना काम।
चरम क्षण में कोई झगड़ा नहीं है
अच्छी कहानियों में चरम क्षण अक्सर किसी टकराव का होता है। इस कहानी में वह एक छोटे काम का है — एक टोकरी उठाने का। कोई ऊँची आवाज़ नहीं, कोई आरोप नहीं, कोई गवाह नहीं। यही चुनाव इस कहानी को अलग बनाता है। जहाँ लड़ाई हो सकती थी, वहाँ केवल एक भार रख दिया गया, और भार ने अपना काम कर दिया।
प्रतीक क्या होता है
प्रतीक वह चीज़ है जो अपने आप से बड़ी किसी बात का संकेत देती है। इस कहानी में मिट्टी एक प्रतीक बन जाती है। पहले वह सीधी मिट्टी है, जिससे चूल्हा बनेगा। फिर वह उस घर और उस स्मृति का नाम बन जाती है। और अंत में वह उस अन्याय के भार का नाम बन जाती है जो उस झोंपड़ी को लेकर हुआ। तीनों अर्थ एक ही टोकरी में हैं।
प्रतीक काम क्यों करता है
प्रतीक की ताक़त इसमें है कि उसे समझाना नहीं पड़ता। यदि वृद्धा कहती कि आपके अन्याय का बोझ बहुत भारी है, तो वह केवल एक राय रहती। उसने उसके बदले एक चीज़ सामने रख दी, और वह चीज़ सचमुच भारी थी। अब बात किसी के मानने या न मानने की नहीं रही। यही कारण है कि कहानियाँ प्रतीक का सहारा लेती हैं।
लेखक कहीं निर्णय नहीं लिखता
पूरी कहानी में लेखक एक बार भी यह नहीं कहता कि किसने ठीक किया और किसने ग़लत। वह ज़मींदार को आदर वाले शब्दों से बुलाता है। कोई शिकायत नहीं, कोई गाली नहीं। वह केवल घटनाएँ क्रम से रखता है और उनके बीच वृद्धा का जीवन भी रख देता है। निर्णय पाठक को करना है, और अपने आप निकाला हुआ निर्णय अधिक देर टिकता है।
छोटे वाक्य, बड़ा दुख
इस कहानी की भाषा की सबसे ध्यान देने योग्य बात वाक्यों की लंबाई है। जहाँ दुख सबसे बड़ा है, वहाँ वाक्य सबसे छोटे हैं। तीन लोगों के चले जाने की बात चार छोटे वाक्यों में निपटा दी जाती है। लेखक रोकर नहीं सुनाता। वह तथ्य रखकर हट जाता है, और यही उसे भारी बना देता है।
संवाद से चरित्र बनता है
कहानी में संवाद बहुत कम हैं, और जो हैं वे काम के हैं। ज़मींदार का पहला वाक्य आदेश का है — उसे हटा दो। वृद्धा का पहला वाक्य दावा छोड़ने का है। इन दो वाक्यों से दोनों का स्वभाव खुल जाता है, और लेखक को उनका वर्णन करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। यह लिखने की बचत है, और बचत से कहानी तेज़ चलती है।
पुरानी भाषा के कुछ रूप
यह कहानी लगभग सवा सौ साल पुरानी है, इसलिए उसकी भाषा में कुछ रूप आज से अलग दिखते हैं। पतोहू का अर्थ बहू है। बहुतेरा का अर्थ बहुत है। मृतप्राय का अर्थ है निर्जीव जैसा हो जाना। पूर्वस्थिति का अर्थ है पहले की हालत। पढ़ते समय ये शब्द अटकाते हैं, पर आगे-पीछे की बात से उनका अर्थ निकल आता है, और यही पढ़ने का अच्छा अभ्यास है।
कि और की — एक मात्रा का फ़र्क़
पुस्तक इस पाठ के साथ एक छोटा व्याकरण भी देती है। कि और की, दोनों सुनने में मिलते-जुलते हैं, पर उनका काम अलग है। कि एक जोड़ने वाला शब्द है; वह दो वाक्यों को आपस में बाँध देता है। की संबंध बताता है; वह बताता है कि कोई चीज़ किसकी है। इसी कारण एक मात्रा का फ़र्क़ पूरे वाक्य का अर्थ बदल देता है।
पहचानने का सरल तरीक़ा
एक सरल जाँच याद रखने लायक़ है। यदि उस शब्द के बाद पूरा वाक्य आ रहा है, तो वहाँ कि लगेगा। और यदि उसके बाद कोई वस्तु या व्यक्ति आ रहा है, तो वहाँ की लगेगा। जैसे, भरोसा होने के बाद एक पूरी बात आती है, इसलिए वहाँ कि आता है; और झोंपड़ी किसी की है, इसलिए वहाँ की आता है। यह जाँच लगभग हर वाक्य पर काम कर जाती है।
लेखक कौन थे
इस कहानी के लेखक माधवराव सप्रे हैं। उनका जन्म मध्य प्रदेश के दमोह में हुआ था, और उनका जीवन-काल उन्नीस सौ इकहत्तर के आसपास से उन्नीस सौ छब्बीस तक रहा। ध्यान देने योग्य बात यह है कि उनकी मातृभाषा हिंदी नहीं, मराठी थी। माना जाता है कि वे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को देखकर हिंदी की ओर मुड़े।
उनका काम
उन्होंने तिलक के एक प्रसिद्ध ग्रंथ का अनुवाद मराठी से हिंदी में किया, जिसका नाम गीता-रहस्य है। उनकी अपनी कृतियों में बायकॉट का नाम आता है, और उसके साथ स्वदेशी आंदोलन भी। इन नामों से पता चलता है कि वे केवल कहानी लिखने वाले व्यक्ति नहीं थे। वे अपने समय की लड़ाइयों से जुड़े हुए थे, और उनका लिखना उसी से निकला था।
पहली कहानियों में गिनती
हिंदी की आरंभिक कहानियों में इस कहानी का नाम आता है। उस समय कहानी नाम की यह विधा हिंदी में नई थी और उसका ढाँचा बन ही रहा था। इसी से एक बात समझ में आती है — इतनी छोटी और सधी हुई कहानी उस समय लिख देना बड़ी बात थी। उसमें कोई उपदेश नहीं है, कोई लंबा वर्णन नहीं, और अंत में कोई निर्णय भी नहीं लिखा गया।
सच्ची शक्ति कहाँ है
कहानी के अंत में एक बात बिना लिखे निकल आती है। आरंभ में शक्ति एक ओर दिखती थी — धन, नौकर, वकील। अंत तक वह दूसरी ओर पहुँच जाती है, और दूसरी ओर केवल एक टोकरी मिट्टी थी। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि सच्ची शक्ति शोर में नहीं, दया और न्याय में होती है। कहानी यह वाक्य कहीं नहीं लिखती, और पाठक उसे फिर भी साथ ले जाता है।
आज की राह
कहानी में अन्याय अदालत के रास्ते से हुआ था, और उसका उत्तर भी अदालत से नहीं आया। आज ऐसी स्थिति में कुछ रास्ते बने हुए हैं। सरकार की एक वेबसाइट पर कोई भी नागरिक अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, और वह बीस से अधिक भाषाओं में हो सकती है। कई राज्यों में जनसुनवाई जैसी व्यवस्था भी है। कहानी पढ़कर यह जान लेना उस पढ़ाई को पूरा कर देता है।
बाल से बने चार मुहावरे
इस पाठ के साथ पुस्तक एक ही शब्द से बने चार मुहावरे सिखाती है, और चारों रोज़ की भाषा में चलते हैं। बाल बाँका न होना कहते हैं वहाँ, जहाँ किसी को रत्ती भर चोट न आए और वह पूरा बचा रह जाए। बाल बराबर उस चीज़ के लिए आता है जो एक बाल जितनी पतली हो। बाल बराबर फ़र्क़ होना का अर्थ है कि सबसे छोटा भेद भी मौजूद है। और बाल-बाल बचना वहाँ कहा जाता है, जहाँ चोट लगते-लगते रह जाए। ध्यान दीजिए कि चारों में बाल अपने सीधे अर्थ में नहीं आया है; वह हर बार किसी बहुत छोटी मात्रा का नाप बन गया है।
Concepts and terms
ऐसी चीज़ जो अपने आप से बड़ी किसी बात का संकेत देती है। कहानी में मिट्टी पहले सीधी मिट्टी है और अंत में उस अन्याय के भार का नाम बन जाती है।
कहानी का वह क्षण जहाँ सारी तैयारी अपना फल देती है। यहाँ वह किसी झगड़े का नहीं, एक टोकरी उठाने के छोटे काम का है।
जोड़ने वाला शब्द। कहानी के व्याकरण वाले हिस्से में कि इसी रूप में आता है, क्योंकि वह दो वाक्यों को आपस में बाँध देता है।
निर्जीव जैसा हो जाना। कहानी में वृद्धा इसी स्थिति में पहुँच जाती है, और वह भी तब, जब झोंपड़ी अभी उसकी ही थी।
किसी रचना को एक भाषा से दूसरी भाषा में ले आना। लेखक ने तिलक के एक प्रसिद्ध ग्रंथ का मराठी से हिंदी में यही काम किया था।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
एक मुहल्ले में नगरपालिका ने कचरा उठाना बंद कर दिया है और बीस दिन से ढेर बढ़ता जा रहा है। गली के दोनों सिरों पर बदबू फैल चुकी है और बच्चे वहाँ खेलना बंद कर चुके हैं। लोग आपस में बात करते हैं, पर कोई कहीं लिखकर नहीं देता। एक विद्यार्थी अपने पिता के साथ बैठकर सरकार की शिकायत वाली वेबसाइट खोलता है और वहाँ पूरा विवरण दर्ज कर देता है। कुछ दिन बाद गाड़ी आने लगती है। पड़ोस के एक व्यक्ति फिर भी कहते हैं कि शिकायत करने का क्या लाभ, कुछ होता ही नहीं।
Analysis:
ध्यान दीजिए कि यहाँ भी किसी से झगड़ा नहीं हुआ। एक रास्ता मौजूद था, और उसे काम में लाया गया। कहानी के समय ऐसा कोई रास्ता नहीं था, और वृद्धा को अपना रास्ता स्वयं बनाना पड़ा।
Activity:
अपने आसपास की कोई एक ऐसी कठिनाई चुनिए जिसकी शिकायत की जा सकती है, और तीन पंक्तियों में लिखिए कि वह शिकायत किससे और कैसे की जाएगी।
करके देखो
Title:
दस वाक्य, दो खाने
Safety:
किसी सामग्री की आवश्यकता नहीं है; केवल लिखना है।
What You Notice:
कारण लिखने पर गलती लगभग रुक जाती है, क्योंकि अब चुनाव आवाज़ से नहीं, जाँच से हो रहा है।
Did you know
अनुवाद का काम दिखने में सीधा लगता है, पर उसमें मूल रचना का भाव भी साथ लाना पड़ता है। इसी कारण अनुवादक को दोनों भाषाओं का गहरा अभ्यास चाहिए।
हितोपदेश सैकड़ों साल पुरानी कहानियों की एक पुस्तक है और आज भी पढ़ी जाती है। भारत में कहानी सुनाने की परंपरा बहुत पुरानी है।
Memory tricks
कहानी के पाँच पड़ाव याद रखने का सूत्र — आ–क–वि–च–अं — आरंभ, कठिनाई, विनती, चरम क्षण, अंत। ध्यान रखिए कि चरम क्षण में कोई झगड़ा नहीं है, केवल एक टोकरी है।
Practice MCQs with answers (25)
- A सात
- B तीन
- C पाँच
- D दस
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Why:
आरंभ, कठिनाई, विनती, चरम क्षण और अंत।
- A जब अदालत से कब्ज़ा मिल जाता है
- B जब टोकरी ज़मींदार से नहीं उठती
- C जब वृद्धा को झोंपड़ी से निकाला जाता है
- D जब पोती खाना-पीना छोड़ देती है
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Why:
वहीं कहानी की सारी तैयारी अपना फल देती है।
- A उसमें कहानी का अंत भी साथ आ जाता है
- B उसमें बहुत बड़ा टकराव और खुला झगड़ा ही होता है
- C उसमें कोई पात्र मौजूद ही नहीं रहता है
- D उसमें कोई टकराव नहीं, केवल एक छोटा काम है
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Why:
जहाँ लड़ाई हो सकती थी, वहाँ केवल एक भार रख दिया गया।
- A जो अपने आप से बड़ी किसी बात का संकेत दे
- B जो किसी शब्द का बिलकुल उलटा अर्थ बता दे
- C जो किसी वाक्य को दूसरे से जोड़ दे
- D जो किसी कहानी का अंत तय कर दे
Show answer
Why:
इस कहानी में मिट्टी ऐसा ही प्रतीक बन जाती है।
- A चार
- B दो
- C तीन
- D एक
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Why:
सीधी मिट्टी, घर और स्मृति, और अन्याय का भार।
- A उसे बहुत देर तक समझाना पड़ता है
- B उसे समझाना नहीं पड़ता, वह दिख जाता है
- C वह हर पाठक को अलग अर्थ देता है
- D वह कहानी को बहुत लंबा और भारी कर देता है
Show answer
Why:
एक चीज़ सामने रख दी जाती है, और वह चीज़ सचमुच भारी होती है।
- A वह और भी असरदार हो जाती
- B वह एक प्रमाण बन जाती
- C वह अदालत में काम आ जाती
- D वह केवल एक राय रह जाती
Show answer
Why:
इसीलिए उसने कहने के बदले एक चीज़ सामने रख दी।
- A क्योंकि अपने आप निकाला निर्णय अधिक देर टिकता है
- B क्योंकि लिखते समय उसे कहानी का अंत पता ही नहीं था
- C क्योंकि वह ज़मींदार से डरता रहा होगा
- D क्योंकि उस समय निर्णय लिखना मना था
Show answer
Why:
वह घटनाएँ क्रम से रखता है और उनके बीच वृद्धा का जीवन भी रख देता है।
- A पूरी कहानी में एक ही तरह के वाक्य आते हैं
- B जहाँ दुख सबसे बड़ा है, वहाँ वाक्य सबसे लंबे हैं
- C जहाँ दुख सबसे बड़ा है, वहाँ वाक्य सबसे छोटे हैं
- D कहानी में कहीं कोई संवाद ही नहीं आता है
Show answer
Why:
लेखक रोकर नहीं सुनाता; वह तथ्य रखकर हट जाता है।
- A लेखक के दिए लंबे वर्णन से
- B उनके पहले-पहले संवाद से
- C कहानी के अंतिम वाक्य से
- D पोती की कही बातों से
Show answer
Why:
एक का पहला वाक्य आदेश का है और दूसरी का दावा छोड़ने का।
- A कहानी पहले से लंबी हो जाती है
- B कहानी समझने में कठिन हो जाती है
- C पात्रों का सही स्वभाव पाठक से छिपा रह जाता है
- D लिखने की बचत होती है और कहानी तेज़ चलती है
Show answer
Why:
जो संवाद हैं, वे काम के हैं।
- A बहू, बहुत, और निर्जीव जैसा
- B बहू, बहुत, और बहुत दुखी
- C पोती, बहुत, और निर्जीव जैसा
- D बहू, थोड़ा, और निर्जीव जैसा
Show answer
Why:
ये सब कहानी की भाषा के पुराने रूप हैं।
- A पूरब की दिशा
- B पूरी हालत
- C पहले की हालत
- D पहली विनती
Show answer
Why:
जब उसे अपनी पहले की हालत याद आती, तो वह रोने लगती थी।
- A एक संबंध बताता है, दूसरा दो वाक्य जोड़ता है
- B एक दो वाक्य जोड़ता है, दूसरा संबंध बताता है
- C दोनों एक ही काम करते हैं, केवल रूप अलग है
- D दोनों किसी वस्तु का नाम बताने के लिए आते हैं
Show answer
Why:
इसी कारण एक मात्रा का फ़र्क़ पूरे वाक्य का अर्थ बदल देता है।
- A इनमें कोई तरीक़ा काम नहीं करता है
- B आगे कोई वस्तु है तो कि, पूरा वाक्य है तो की
- C वाक्य के आरंभ में कि, अंत में की लगता है
- D आगे पूरा वाक्य है तो कि, कोई वस्तु है तो की
Show answer
Why:
यह जाँच लगभग हर वाक्य पर काम कर जाती है।
- A कि
- B की
- C को
- D के
Show answer
Why:
आगे पूरा वाक्य आ रहा है, इसलिए वहाँ कि लगेगा।
- A को
- B कि
- C की
- D के
Show answer
Why:
यहाँ बताया जा रहा है कि झोंपड़ी किसकी थी, इसलिए की लगेगा।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण सचमुच अभिकथन को समझा देता है।
- A महादेवी वर्मा
- B माधवराव सप्रे
- C प्रेमचंद
- D जयशंकर प्रसाद
Show answer
Why:
उनका जीवन-काल उन्नीस सौ इकहत्तर के आसपास से उन्नीस सौ छब्बीस तक रहा।
- A धार
- B दतिया
- C देवास
- D दमोह
Show answer
Why:
वह नगर मध्य प्रदेश में है।
- A गुजराती
- B हिंदी
- C मराठी
- D बांग्ला
Show answer
Why:
वे लोकमान्य तिलक को देखकर हिंदी की ओर मुड़े माने जाते हैं।
- A स्वदेशी आंदोलन
- B गीता-रहस्य
- C बायकॉट
- D हितोपदेश
Show answer
Why:
वह ग्रंथ लोकमान्य तिलक का प्रसिद्ध ग्रंथ है।
- A वे कहानी के अतिरिक्त कुछ नहीं लिखते थे
- B वे केवल बच्चों के लिए लिखते रहे थे
- C वे किसी एक नगर में ही रहते रहे थे
- D वे अपने समय की लड़ाइयों से जुड़े हुए थे
Show answer
Why:
बायकॉट और स्वदेशी आंदोलन, दोनों नाम इसी ओर इशारा करते हैं।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और II सही हैं। III ग़लत है — अनुवाद मराठी से हिंदी में किया गया था।
- A अपनी जगह चुपचाप छोड़ देना ही पड़ता है
- B किसी से कोई शिकायत न करना ही ठीक है
- C सरकार की वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराना
- D आज भी कोई रास्ता मौजूद नहीं है
Show answer
Why:
वह शिकायत बीस से अधिक भाषाओं में दर्ज हो सकती है, और कई राज्यों में जनसुनवाई भी है।
Important short questions (7)
आरंभ में दो घर और एक इच्छा है। उसके बाद कठिनाई आती है और अदालत के कब्ज़े तक पहुँचती है। फिर एक छोटी विनती आती है। चरम क्षण वह है जब टोकरी नहीं उठती। अंत में क्षमा है और झोंपड़ी की वापसी।
क्योंकि उसमें कोई टकराव नहीं है। वह एक छोटे काम का क्षण है — एक टोकरी उठाने का। जहाँ लड़ाई हो सकती थी, वहाँ केवल एक भार रख दिया गया, और भार ने अपना काम कर दिया।
प्रतीक वह चीज़ है जो अपने आप से बड़ी किसी बात का संकेत देती है। कहानी में मिट्टी ऐसा ही प्रतीक है। वह पहले चूल्हे की मिट्टी है, फिर घर और स्मृति का नाम बनती है, और अंत में अन्याय के भार का नाम बन जाती है।
क्योंकि उसे समझाना नहीं पड़ता। कहने पर बात एक राय रह जाती है, जिसे माना भी जा सकता है और नहीं भी। प्रतीक एक चीज़ सामने रख देता है, और वह चीज़ सचमुच भारी होती है।
पहली, वह कहीं कोई निर्णय नहीं लिखता और ज़मींदार को आदर वाले शब्दों से बुलाता है। दूसरी, जहाँ दुख सबसे बड़ा है वहाँ वह सबसे छोटे वाक्य रखता है, जिससे वह दुख और भारी लगता है।
कि दो वाक्यों को जोड़ता है, जैसे — मुझे लगा कि वह आज नहीं आएगी। की किसी चीज़ का संबंध बताता है, जैसे — वृद्धा की झोंपड़ी महल के पास थी। आगे पूरा वाक्य हो तो कि, और कोई वस्तु हो तो की।
इस कहानी के लेखक माधवराव सप्रे हैं। उनका जन्म मध्य प्रदेश के दमोह में हुआ था और उनकी मातृभाषा मराठी थी। माना जाता है कि वे लोकमान्य तिलक को देखकर हिंदी की ओर मुड़े, और उन्होंने तिलक के ग्रंथ गीता-रहस्य का अनुवाद भी किया।
Long answer questions (3)
पहला अर्थ सीधा है। वृद्धा को चूल्हा बनाने के लिए एक टोकरी मिट्टी चाहिए, जिससे उसकी पोती रोटी खाने लगे। यह कारण सच है और कहानी उसे झूठा नहीं बताती। दूसरा अर्थ उस घर का है। उस झोंपड़ी में तीन लोगों की स्मृति बसी है, और मिट्टी उस घर का एक टुकड़ा है जिसे वह साथ ले जा सकती है। तीसरा अर्थ अंत में बनता है। जब ज़मींदार एक टोकरी भी नहीं उठा पाते, तब वही मिट्टी उस अन्याय के भार का नाम बन जाती है जो झोंपड़ी लेकर हुआ था। ध्यान देने की बात यह है कि तीनों अर्थ एक ही टोकरी में हैं। पहला अर्थ दिखता है, दूसरा महसूस होता है, और तीसरा उठाने पर ही पता चलता है।
पहली बात यह है कि वह कहीं कोई निर्णय नहीं लिखता। ज़मींदार को आदर वाले शब्दों से बुलाया जाता है और कोई आरोप नहीं लगाया जाता। दूसरी बात वाक्यों की लंबाई की है। जहाँ दुख सबसे बड़ा है, वहाँ वाक्य सबसे छोटे हैं, और इसी से वह दुख और भारी लगता है। तीसरी बात संवाद की है। कहानी में संवाद कम हैं और जो हैं वे काम के हैं; पहले-पहले संवाद से ही दोनों पात्रों का स्वभाव खुल जाता है। चौथी बात प्रतीक की है। बात कहकर नहीं समझाई जाती, एक चीज़ सामने रख दी जाती है। चारों बातें मिलकर एक ही काम करती हैं — वे पाठक को अपने आप निष्कर्ष तक पहुँचा देती हैं।
पहला कारण उसका विषय है। किसी बड़े को किसी छोटे की जगह चाहिए हो — यह स्थिति आज भी बनती है। कहानी उस पर एक प्रश्न भी देती है। वह प्रश्न यह है कि जो हो रहा है, वह कानून के भीतर होकर भी ठीक है या नहीं। दूसरा कारण उसका ढंग है। कहानी किसी को बुरा नहीं कहती, इसलिए वह उपदेश जैसी नहीं लगती और पढ़ने वाला उससे लड़ने के बजाय सोचने लगता है। तीसरा कारण उसका आकार है। वह बहुत छोटी है और उसमें कोई लंबा वर्णन नहीं, इसलिए एक बैठक में पढ़ी जा सकती है। चौथा कारण उसका प्रतीक है। एक टोकरी मिट्टी का चित्र भूलता नहीं, और जिस बात का चित्र बन जाता है वह बहुत देर तक साथ रहती है।
Flashcards (17)
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- कहानी के पड़ाव क्रम में लगाइए
- शब्द और अर्थ
- कि या की
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
Class 8 Hindi Chapter 6 — frequently asked questions
वह बहुत कम शब्दों में एक महल और उसके पास बनी एक झोंपड़ी दिखा देता है। लेखक दोनों को आमने-सामने रखकर कुछ कहता नहीं। अंतर पाठक को अपने आप दिख जाता है।
कारण यह नहीं था कि उसे कोई दूसरी जगह न मिलती। कारण यह था कि वह झोंपड़ी तीन लोगों की आख़िरी जगह थी। उस घर में उसकी स्मृति रहती थी, और स्मृति किसी दूसरे पते पर नहीं ले जाई जा सकती।
क्योंकि इससे दुख हल्का नहीं पड़ता, और भारी लगता है। लेखक रोकर नहीं सुनाता। वह केवल तथ्य रख देता है, और पाठक के मन में बात अपने आप बैठ जाती है।
पहली विनती एक टोकरी भर मिट्टी ले जाने की थी। उसी से वह चूल्हा बनाकर रोटी पकाना चाहती थी। दूसरी विनती उस टोकरी को ज़रा हाथ लगा देने की थी। इससे वह उसे अपने सिर पर रख लेती।
वह अपनी बात सुनी जाने का रास्ता पा लेती है। जो छिन गया, उसे मान लेती है। फिर एक छोटी विनती रखती है। इसी एक चुनाव से रास्ता बदल जाता है।
वह अनुमति है। वे कुछ कहते नहीं, पर उनकी ओर से सुनने का द्वार खुल जाता है। इसी एक चुप क्रिया से दृश्य बदल जाता है, क्योंकि अब वृद्धा अपनी बात रख सकती है।
आरंभ में दो घर और एक इच्छा है। उसके बाद कठिनाई आती है और अदालत के कब्ज़े तक पहुँचती है। फिर एक छोटी विनती आती है। चरम क्षण वह है जब टोकरी नहीं उठती। अंत में क्षमा है और झोंपड़ी की वापसी।
क्योंकि उसमें कोई टकराव नहीं है। वह एक छोटे काम का क्षण है — एक टोकरी उठाने का। जहाँ लड़ाई हो सकती थी, वहाँ केवल एक भार रख दिया गया, और भार ने अपना काम कर दिया।
प्रतीक वह चीज़ है जो अपने आप से बड़ी किसी बात का संकेत देती है। कहानी में मिट्टी ऐसा ही प्रतीक है। वह पहले चूल्हे की मिट्टी है, फिर घर और स्मृति का नाम बनती है, और अंत में अन्याय के भार का नाम बन जाती है।
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