कुंडलिया क्या है
जिस शब्द से शुरू, उसी पर अंत।
छह पंक्तियों का छंद, जिसमें पहले दोहा और फिर रोला आती है। इसकी पहचान यह है कि आरंभ का शब्द अंत में लौट आता है।
Shared by a Veda teacher · Generated with Veda AI · Oct 2026
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जिस शब्द से शुरू, उसी पर अंत।
छह पंक्तियों का छंद, जिसमें पहले दोहा और फिर रोला आती है। इसकी पहचान यह है कि आरंभ का शब्द अंत में लौट आता है।
कवि किसी का नाम नहीं लेते, नियम रख देते हैं।
जो बिना सोचे-समझे काम कर देता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। यह बात सबके लिए कही गई है।
नुक़सान पहले दूसरों का नहीं होता।
ऐसा व्यक्ति सबसे पहले अपना ही काम बिगाड़ लेता है। कवि इसी को पहले नंबर पर रखते हैं।
कवि कहते हैं, उसी में उलझे मत रहो।
कुंडलिया की पहली सलाह है कि जो बीत गया, उसे भुला दो। कवि यह नहीं कहते कि उससे कुछ सीखो मत।
भूलने की बात, करने की बात बन जाती है।
सुधि लेना यानी ध्यान या ख़बर रखना। कवि बीती बात के बदले आने वाला समय रख देते हैं।
सहज का अर्थ है बिना खींचतान।
जो काम सहज में बन जाए, उसी में मन लगाओ। इसका मतलब कठिन काम छोड़ना नहीं, बनता काम अधूरा न छोड़ना है।
पहली कुंडलिया कहती है कि बिना सोचे किया काम बाद में पछतावा देता है। अपना काम बिगड़ता है, दुनिया हँसती है और मन का चैन चला जाता है। फिर अच्छा खान-पान और सम्मान भी मन को नहीं भाता।
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दूसरी कुंडलिया कहती है कि बीती बात को भुलाकर आगे की सुध लो। जो काम सहज में बन जाए, उसी में मन लगाओ। ऐसा करने से किसी बुरे व्यक्ति को हँसने का मौक़ा नहीं मिलता और मन में कोई अपराधबोध नहीं रहता।
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70 questions laddered from warm-up to topper-level, each with an explanation. A taste:
कुंडलिया कोई लंबी रचना नहीं है, उसकी पंक्तियाँ गिनी हुई होती हैं और उसी में पूरी बात कह दी जाती है। उसमें पंक्तियाँ होती हैं —
Beginnerछह
पहले दोहे की दो पंक्तियाँ, फिर रोला की चार।
कुंडलिया की सबसे बड़ी पहचान उसके आरंभ और अंत के बीच का रिश्ता है, जिससे वह गोल घूमकर लौटती लगती है। उसकी पहचान है —
Intermediateआरंभ का शब्द अंत में लौट आता है
इसी से कुंडली जैसा गोल घेरा बन जाता है।
इन दोनों कुंडलियों के रचनाकार ब्रज भाषा में लिखते थे और अपना नाम रचना के भीतर ही रख देते थे। वे रचनाकार हैं —
Beginnerगिरिधर कविराय
वे अठारहवीं सदी में जन्मे थे और अपनी कुंडलियों के लिए याद किए जाते हैं।
कुंडलिया कहती है कि पहले विचार न करने वाले को आगे चलकर एक ही काम करना पड़ता है। उसे आगे करना पड़ता है —
Beginnerआगे चलकर पछताना पड़ता है
यही बात कुंडलिया की पहली ही पंक्ति में आ जाती है।
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